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सरकारी स्कूलों में पढ़ाई और उपस्थिति की गुणवत्ता बढ़ी, निजी स्कूलों में भी ऑनलाइन उपस्थिति अनिवार्य करने की मांग

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महासमुंद- पोला पर्व के दौरान क्षेत्र के कई निजी स्कूलों में समय से पहले छुट्टी दिए जाने का मामला सामने आने के बाद सरकारी और निजी स्कूलों की व्यवस्थाओं को लेकर बहस तेज हो गई है। सरकारी स्कूलों में पढ़ाई, शिक्षक उपस्थिति और विद्यालय संचालन की व्यवस्था को बेहतर बताते हुए चेतना विकास मूल्य शिक्षा संचालित अभिभावक विद्यालय, कोकड़ी के शिक्षक गेंदलाल कोकडिया ने निजी स्कूलों में भी ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था लागू करने की मांग की है।

कोकडिया का कहना है कि पोला पर्व के दौरान क्षेत्र के अनेक निजी स्कूलों में निर्धारित समय से पहले छुट्टी कर दी गई, जबकि सरकारी स्कूल पूरे निर्धारित समय तक संचालित होते रहे। उनके अनुसार, ऐसे उदाहरणों से सरकारी और निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली में अंतर स्पष्ट होता है।

‘ऑनलाइन उपस्थिति से सरकारी स्कूलों में बढ़ी जवाबदेही’

गेंदलाल कोकडिया के मुताबिक सरकारी स्कूलों में वीएसके ऐप के माध्यम से ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था लागू होने के बाद शिक्षकों की उपस्थिति और विद्यालय संचालन में जवाबदेही बढ़ी है। उनका दावा है कि ऑनलाइन उपस्थिति के कारण शिक्षक निर्धारित समय पर विद्यालय पहुंचने और पूरे समय उपस्थित रहने के प्रति अधिक गंभीर हुए हैं।

उन्होंने सरकार से मांग की है कि इसी तरह की ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था निजी स्कूलों में भी अनिवार्य की जाए, ताकि सभी स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति और विद्यालय के संचालन की नियमित निगरानी हो सके।

‘एक देश, एक शिक्षा व्यवस्था लागू हो’

कोकडिया ने ‘एक देश, एक शिक्षा’ की तर्ज पर देशभर में समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था लागू करने की बात कही। उनका कहना है कि सरकारी स्कूलों में प्रशिक्षित शिक्षक, शिक्षण सामग्री, निशुल्क गणवेश, मध्याह्न भोजन सहित विद्यार्थियों के लिए कई सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।

उन्होंने सरकारी स्कूलों को निजी स्कूलों की तुलना में बेहतर बताते हुए कहा कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था में विद्यार्थियों और अभिभावकों को कई सुविधाएं बिना शुल्क उपलब्ध होती हैं।

निजी स्कूलों में सुरक्षा मानकों पर भी उठाए सवाल

गेंदलाल कोकडिया ने निजी स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ निजी स्कूल सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर पर्याप्त गंभीरता नहीं दिखाते। उनके अनुसार, कई बार स्कूली बच्चों को वाहनों में क्षमता से अधिक संख्या में ले जाने की स्थिति देखने को मिलती है।

उन्होंने अभिभावकों से भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर जागरूक रहने की अपील की। उनका कहना है कि एक ही दोपहिया वाहन पर चार-पांच बच्चों को बैठाकर स्कूल लाना गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकता है।

फीस और परिवहन खर्च को लेकर भी उठाया मुद्दा

कोकडिया ने निजी स्कूलों में पढ़ाई और परिवहन पर होने वाले खर्च का मुद्दा भी उठाया। उनके अनुसार, निजी स्कूलों में पढ़ाई की फीस करीब 6 हजार रुपये से लेकर 3 लाख रुपये तक और वाहन शुल्क करीब 8 हजार से 50 हजार रुपये तक हो सकता है। इसके विपरीत सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ कई मूलभूत सुविधाएं निशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं।

उन्होंने सरकार से मांग की कि निजी स्कूलों में ऑनलाइन उपस्थिति, विद्यालय समय के पालन और सुरक्षा मानकों की नियमित निगरानी की जाए तथा नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाए।

हालांकि, निजी स्कूलों से जुड़े इन आरोपों और दावों पर संबंधित स्कूल प्रबंधन या शिक्षा विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।

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