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पौध-आधारित प्रोटीन निर्माण में आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा, टीडीबी ने सोनिक बायोकेम को दी वित्तीय सहायता

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मूल्य संवर्धित खाद्य प्रसंस्करण और पौध-आधारित पोषण में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा: टीडीबी ने सोनिक बायोकेम एक्सट्रैक्शन्स को वित्तीय सहायता प्रदान की

भारत में मूल्य संवर्धित खाद्य प्रसंस्करण तथा पौध-आधारित पोषण के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में अपनी प्रतिबद्धता को मजबूत करते हुए, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के अंतर्गत प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (TDB) ने मेसर्स सोनिक बायोकेम एक्सट्रैक्शन्स प्राइवेट लिमिटेड, इंदौर (मध्य प्रदेश) को "फंक्शनल एवं टेक्सचर्ड सोया प्रोटीन कंसन्ट्रेट का विकास और व्यावसायीकरण" परियोजना के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की है।

इस परियोजना का उद्देश्य कंपनी द्वारा विकसित स्वदेशी प्रौद्योगिकी के आधार पर फंक्शनल सोया प्रोटीन कंसन्ट्रेट (FSPC) और टेक्सचर्ड सोया प्रोटीन कंसन्ट्रेट (TSPC) के व्यावसायिक उत्पादन हेतु अत्याधुनिक विनिर्माण सुविधा स्थापित करना है।

यह पहल उच्च गुणवत्ता वाले, नॉन-जीएमओ (Non-GMO) पौध-आधारित प्रोटीन उत्पादों की बढ़ती वैश्विक मांग को ध्यान में रखकर शुरू की गई है। स्वास्थ्यवर्धक, टिकाऊ और क्लीन-लेबल खाद्य उत्पादों की ओर बढ़ती उपभोक्ता रुचि के कारण ऐसे उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है। यह परियोजना भारत सरकार के आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के अनुरूप खाद्य प्रसंस्करण क्षमता को मजबूत करने, कृषि उत्पादों में मूल्य संवर्धन करने तथा आयात के स्थान पर स्वदेशी उत्पादन और निर्यात को बढ़ावा देने में सहायक होगी।

दो दशकों से अधिक समय से नॉन-जीएमओ सोया खाद्य अवयवों के निर्माण और निर्यात में कार्यरत सोनिक बायोकेम ने सोया प्रोटीन कंसन्ट्रेट (SPC) के आधार पर FSPC और TSPC के उत्पादन की स्वदेशी तकनीक विकसित की है।

पारंपरिक उत्पादन प्रक्रियाओं में अपेक्षाकृत महंगे सोया प्रोटीन आइसोलेट (SPI) का उपयोग किया जाता है, जिसे मुख्यतः चीन और अमेरिका जैसे देशों से आयात किया जाता है। इसके विपरीत, कंपनी की तकनीक में स्वयं विकसित और देश में निर्मित SPC का उपयोग किया जाता है, जो समान कार्यात्मक गुण प्रदान करता है। इससे उत्पादन लागत में उल्लेखनीय कमी आएगी, प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी और पौध-आधारित प्रोटीन क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता मजबूत होगी।

इस परियोजना के माध्यम से इन उन्नत प्रोटीन उत्पादों का व्यावसायिक स्तर पर उत्पादन किया जाएगा, जिनका उपयोग प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों, पौध-आधारित मांस विकल्पों, पोषण संबंधी सप्लीमेंट्स तथा कार्यात्मक खाद्य उत्पादों में व्यापक रूप से किया जाता है। यह तकनीक आयात पर निर्भरता कम करेगी, नए निर्यात अवसर उत्पन्न करेगी तथा मूल्य संवर्धित पौध-आधारित प्रोटीन के तेजी से बढ़ते वैश्विक बाजार में भारत की स्थिति को और मजबूत बनाएगी।

स्वदेशी तकनीक और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध नॉन-जीएमओ सोयाबीन का उपयोग करते हुए यह परियोजना उच्च मूल्य वाले प्रोटीन अवयवों की मजबूत घरेलू आपूर्ति श्रृंखला विकसित करेगी। साथ ही भारतीय खाद्य उद्योग को वैश्विक स्तर के प्रतिस्पर्धी कच्चे माल की किफायती उपलब्धता सुनिश्चित करेगी। इससे कृषि क्षेत्र को बेहतर मूल्य प्राप्त होगा और देश को टिकाऊ खाद्य प्रणाली की ओर बढ़ने में सहायता मिलेगी।

इस अवसर पर टीडीबी के सचिव राजेश कुमार पाठक ने कहा:

"उन्नत पौध-आधारित प्रोटीन अवयवों के लिए स्वदेशी विनिर्माण क्षमता का विकास भारत के खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को मजबूत करने और वैश्विक बाजार में हमारी उपस्थिति बढ़ाने के लिए रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। टीडीबी ऐसी तकनीकों को समर्थन देने के लिए प्रतिबद्ध है जो मूल्य संवर्धन को बढ़ावा दें, आयात पर निर्भरता कम करें और आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी उत्पाद विकसित करें। यह पहल विदेशी मुद्रा की उल्लेखनीय बचत करने के साथ-साथ भारत के लिए नए निर्यात अवसर भी सृजित करेगी।"

सोनिक बायोकेम एक्सट्रैक्शन्स प्राइवेट लिमिटेड के नेतृत्व ने टीडीबी के सहयोग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस वित्तीय सहायता से कंपनी अपनी स्वदेशी विकसित तकनीक का बड़े पैमाने पर व्यावसायीकरण कर सकेगी, नॉन-जीएमओ सोया प्रोटीन उत्पादों के क्षेत्र में भारत की अग्रणी भूमिका को और मजबूत करेगी तथा घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में टिकाऊ एवं उच्च गुणवत्ता वाले पौध-आधारित पोषण उत्पादों की बढ़ती मांग को पूरा करने में सक्षम होगी।

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