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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपनी माँ के नाम पर लगाया पीपल का पौधा, वन महोत्सव-2026 का हुआ शुभारंभ

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'पीपल फॉर पीपुल' अभियान के तहत 15 एकड़ में लगाए गए 2500 से अधिक पीपल के पौधे

'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान से जुड़कर प्रकृति संरक्षण का संकल्प लें : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

प्रदेश में इस वर्ष ढाई करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य, पिछले दो वर्षों में 7 करोड़ से अधिक पौधों का हुआ रोपण

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज वन महोत्सव-2026 का शुभारंभ करते हुए नया रायपुर में आयोजित वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम में अपनी माँ के नाम पर पीपल का पौधा लगाकर प्रदेशव्यापी 'पीपल फॉर पीपुल' अभियान की शुरुआत की। इस अभियान के अंतर्गत लगभग 15 एकड़ क्षेत्र में 2500 से अधिक पीपल के पौधे रोपे गए। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर प्रदेशवासियों से 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान से जुड़ने और अधिक से अधिक वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रकृति का संरक्षण केवल पर्यावरणीय आवश्यकता नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत और आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी भी है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में वृक्षों को जीवनदाता माना गया है और पीपल का वृक्ष विशेष रूप से आस्था, आध्यात्मिक चेतना तथा पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक है। यह वृक्ष सर्वाधिक ऑक्सीजन देने वाले वृक्षों में माना जाता है और जैव विविधता के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून 2024 से प्रारंभ हुआ 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान आज जनआंदोलन का स्वरूप ले चुका है। इस अभियान के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को मातृ सम्मान की भावना से जोड़ा गया है, जिससे समाज में प्रकृति के प्रति आत्मीयता और जिम्मेदारी का भाव विकसित हुआ है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में भी इस अभियान को व्यापक जनसमर्थन मिला है। पिछले दो वर्षों में प्रदेशभर में 7 करोड़ से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं तथा इस वर्ष ढाई करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वृक्षारोपण तभी सार्थक होगा जब लगाए गए पौधों का संरक्षण भी सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि वे अपने घर, खेत-खलिहानों की मेड़, विद्यालय, कार्यस्थल अथवा आसपास उपलब्ध खाली भूमि पर अपनी माँ के नाम एक पौधा अवश्य लगाएँ और उसके पालन-पोषण की जिम्मेदारी भी निभाएँ। उन्होंने कहा कि प्रत्येक पौधा आने वाले समय में स्वच्छ वायु, शुद्ध वातावरण और सुरक्षित भविष्य का आधार बनेगा।

मुख्यमंत्री ने जलवायु परिवर्तन की वैश्विक चुनौती का उल्लेख करते हुए कहा कि बढ़ता तापमान, प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ता दबाव पूरी दुनिया के सामने गंभीर चिंता का विषय है। ऐसे समय में वृक्षारोपण सबसे प्रभावी और सरल उपायों में से एक है। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक नागरिक वर्ष में कम से कम एक पौधा लगाकर उसका संरक्षण करे तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा परिवर्तन संभव है।

मुख्यमंत्री साय ने केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान के संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने प्रतिदिन एक पौधा लगाने का आजीवन प्रण लिया है। यदि किसी दिन किसी कारणवश बाहर पौधा लगाना संभव नहीं होता, तो वे गमले में पौधा लगाकर भी अपने संकल्प का निर्वहन करते हैं। मुख्यमंत्री ने इसे प्रकृति के प्रति समर्पण और अनुशासन का प्रेरणादायी उदाहरण बताते हुए कहा कि ऐसे संकल्प समाज में सकारात्मक परिवर्तन का आधार बनते हैं।

वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में प्रदेश में 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान को व्यापक जनभागीदारी के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 'पीपल फॉर पीपुल' अभियान केवल वृक्षारोपण कार्यक्रम नहीं, बल्कि स्वच्छ, हरित और स्वस्थ भविष्य के निर्माण का संकल्प है।

कश्यप ने कहा कि भारतीय संस्कृति में पीपल का वृक्ष आस्था और विज्ञान का अद्भुत संगम है। धार्मिक दृष्टि से इसे अत्यंत पवित्र माना गया है, वहीं वैज्ञानिक रूप से यह अधिक मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण कर वायु गुणवत्ता सुधारने और शहरी प्रदूषण को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने बताया कि वन विभाग द्वारा 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान के अंतर्गत पिछले दो वर्षों में प्रदेशभर में लगभग 7 करोड़ 50 लाख पौधे लगाए जा चुके हैं। उन्होंने नागरिकों से स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अपने घरों में तिरंगा फहराने के साथ-साथ एक पौधा लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने का भी आह्वान किया।

कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी, खाद्य मंत्री दयाल दास बघेल, संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन, राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, विधायक इंद्र कुमार साहू, छत्तीसगढ़ वन विकास निगम के अध्यक्ष रामसेवक पैकरा, अपर मुख्य सचिव वन एवं जलवायु परिवर्तन मनोज कुमार पिंगुआ, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) अरुण कुमार पाण्डेय सहित मंत्रिमंडल के सदस्य, जनप्रतिनिधियों, वरिष्ठ अधिकारियों एवं बड़ी संख्या में नागरिकों ने पीपल के पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण का सामूहिक संकल्प लिया। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सभी लोगों ने वृक्षारोपण के साथ पौधों के संरक्षण का भी संकल्प दोहराया।

रक्षाबंधन पर बिखरेगा हरियाली का संदेश

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रायगढ़ में स्व-सहायता समूह की दीदियों ने तैयार कीं अनोखी बीज राखियां

भाई की कलाई पर प्यार, धरती मां को उपहार की थीम पर बिहान की अभिनव पहल

रायपुर- रक्षाबंधन पर केवल भाई-बहन का प्रेम ही नहीं, बल्कि प्रकृति और पर्यावरण के संरक्षण का संदेश भी दिया जा सकता है। पेड़ों को राखी बांधकर उन्हें अपनी रक्षा का वचन देना और मिट्टी से बने इको-फ्रेंडली पौधे वाली राखियों का इस्तेमाल पर्यावरण को हरा-भरा रखने में मदद करता है।

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में स्व-सहायता समूहों की दीदियां इस बार रक्षाबंधन के पर्व को प्रकृति संरक्षण से जोड़ने की एक अनूठी मिसाल पेश कर रही हैं। कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के मार्गदर्शन में जिला पंचायत रायगढ़ और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान के सहयोग से जिले भर में पर्यावरण-अनुकूल बीज राखियां तैयार की जा रही हैं।

फेंकने पर अंकुरित होंगे देसी बीज

इन राखियों की सबसे विशेष बात यह है कि इन्हें धान, मक्का, भुट्टा, सेमी, करेला और बरबटी जैसे विभिन्न देसी बीजों से बेहद आकर्षक ढंग से बनाया जा रहा है। यदि त्योहार के बाद यह राखी मिट्टी में मिल जाती है या बाहर फेंक दी जाती है, तो इसमें लगे बीज अंकुरित होकर पौधे का रूप ले लेंगे। इससे भाई-बहन के अटूट प्रेम के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।

गांव-गांव में दिख रहा उत्साह

जिले के सभी सातों विकासखंडों में इस अभियान को लेकर महिलाओं में भारी उत्साह है। धरमजयगढ़ के ग्राम दुलियामुड़ा-कोयलार में कृष्णा स्व-सहायता समूह की सक्रिय महिला कविता राठिया ने आकर्षक बीज राखियां तैयार कर मिसाल पेश की है। रायगढ़ के बैसपाली, जुनवानी, लोइंग, गोपालपुर, संबलपुरी, लैलूंगा, तमनार के लिबरा गांव (जननी समूह), घरघोड़ा के बड़ेगुमड़ा (गायत्री समूह) और पुसौर के पुटकापुरी क्लस्टर सहित जिले भर की कृषि सखियां और महिलाएं इस कार्य में जुटी हुई हैं।

सातों विकासखंडों से चुनी जाएगी सर्वश्रेष्ठ बीज राखी

रायगढ़ जिले के सभी सातों विकासखंडों में इस रचनात्मकता और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए कल यानी 20 जुलाई को जिले के सभी सात विकासखंडों से एक-एक सर्वश्रेष्ठ बीज राखी का चयन किया जाएगा। चयन का आधार राखी की आकर्षक डिज़ाइन, देसी बीजों का उपयोग और पर्यावरण संरक्षण का संदेश जैसी खूबियों को बनाया जाएगा।

जिले के शीर्ष अधिकारियों को राखी बांधेंगी विजेता दीदियां

प्रतियोगिता में चुनी जाने वाली सातों विकासखंडों की विजेता दीदियों को 27 जुलाई को एक विशेष गरिमामय समारोह में सम्मानित किया जाएगा। इस अवसर पर ये दीदियां स्वयं कलेक्टर सहित जिले के शीर्ष अधिकारियों को अपने हाथों से बनाई हुई बीज राखी बांधेंगी। बिहान की दीदियों द्वारा शुरू किया गया यह अभियान अब केवल एक प्रतियोगिता न रहकर प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने का एक बड़ा जनआंदोलन बनता जा रहा है।


स्वच्छता ही सेवा 2025 : कोयला मंत्रालय का ‘एक पेड़ माँ के नाम’ वृक्षारोपण संकल्प

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स्वच्छता ही सेवा 2025 अभियान के तहत कोयला मंत्रालय ने आज इंद्रप्रस्थ पार्क, सराय काले खां में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ थीम पर एक भव्य वृक्षारोपण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया। प्रधानमंत्री द्वारा मातृत्व और प्रकृति को समर्पित इस पहल से प्रेरित होकर, इस कार्यक्रम ने मंत्रालय की पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास और सामूहिक नागरिक जिम्मेदारी के प्रति गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाया। राष्ट्रीय राजधानी के बीच स्थित एक प्रमुख सार्वजनिक स्थल का चयन कर मंत्रालय का उद्देश्य नागरिकों और संस्थानों को हरित आवरण बढ़ाने और पारिस्थितिकीय कल्याण को प्रोत्साहित करने के लिए प्रेरित करना था।

इस वृक्षारोपण अभियान में कोयला मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव रूपिंदर बराड़ ने व्यक्तिगत रूप से भाग लिया। उनके साथ संयुक्त सचिव संजीव कुमार कासी, संयुक्त सचिव एवं वित्तीय सलाहकार असीम कुमार मोदी, उप महानिदेशक डॉ. चेतना शुक्ला तथा मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी भी उपस्थित रहे। सभी की सक्रिय भागीदारी ने यह दर्शाया कि सरकार केवल नीतिगत स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर भी पर्यावरण संरक्षण के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठा रही है। इस अवसर पर छायादार, फूलदार और फलदार पौधों सहित विविध प्रकार की प्रजातियों का रोपण किया गया, जिससे शहरी परिदृश्य में पारिस्थितिक संतुलन को नया आयाम मिलेगा।

‘एक पेड़ माँ के नाम’ थीम मातृत्व और प्रकृति को समर्पित एक भावपूर्ण संदेश है, जो हर व्यक्ति को अपनी माँ के नाम पर पेड़ लगाने और उसकी देखभाल करने के लिए प्रेरित करता है। यह पहल न केवल पर्यावरण के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता को प्रकट करती है, बल्कि स्वच्छता, हरियाली और संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र के मूल्यों को भी मजबूत बनाती है। यह व्यक्तिगत और भावनात्मक जुड़ाव प्रतिभागियों को पेड़ों की दीर्घकालिक देखभाल के लिए प्रोत्साहित करेगा, जिससे वृक्षों की आयु और प्रभाव बढ़ सकेगा।

स्वच्छता ही सेवा अभियान के तहत, कोयला मंत्रालय ने 25 सितंबर 2025 को ‘श्रमदान – एक दिन, एक घंटा, एक साथ’ का भी आयोजन किया। इस अवसर पर अतिरिक्त सचिव रूपिंदर बराड़, वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारियों ने शास्त्री भवन परिसर के भीतर और आसपास सफाई अभियान चलाया। यह मंत्रालय की स्वच्छता ही सेवा के लक्ष्यों को हासिल करने की गंभीर और समर्पित भावना को दर्शाता है।

इस कार्यक्रम के माध्यम से कोयला मंत्रालय ने यह सशक्त संदेश दिया है कि पर्यावरण संरक्षण केवल नीतिगत उद्देश्य नहीं, बल्कि एक नैतिक जिम्मेदारी भी है। वृक्षारोपण जैसी छोटी लेकिन प्रभावशाली पहलें भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ, हरित और सतत भारत बनाने के संकल्प को मजबूत करती हैं।


भूपेन्द्र यादव ने ‘एक पेड़ माँ के नाम’ पहल के तहत असोल भट्टी में पौधारोपण किया

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सेवा पर्व 2025 के तहत, केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेन्द्र यादव ने आज असोल भट्टी वन्यजीव अभयारण्य (ABWLS), नई दिल्ली में एक पौधा लगाया। यह वृक्षारोपण कार्यक्रम सरकार की पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता को मजबूत करता है और यह राष्ट्रीय अभियान ‘एक पेड़ माँ के नाम’ के तहत आयोजित किया गया।

इस कार्यक्रम में स्कूल के बच्चों, केंद्रीय मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, दिल्ली राज्य सरकार के वन विभाग (GNCTD) और 132 इको टास्क फोर्स (ETF), राजपूत रेजिमेंट के अधिकारियों ने भाग लिया, जो ABWLS में तैनात हैं।

भूपेन्द्र यादव ने छात्रों और ETF कर्मियों के साथ बातचीत करते हुए उन्हें प्रकृति की देखभाल करने और पर्यावरण संरक्षण को समाज में एक सामूहिक आंदोलन बनाने के लिए प्रेरित किया। केंद्रीय और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों की भागीदारी ने देश के लिए हरित और सतत भविष्य की दिशा में सहयोग को और मजबूत किया।

कार्यक्रम का समापन सेवा पर्व के तहत सामुदायिक गतिविधियों को जारी रखने के संकल्प के साथ हुआ, जिसमें नागरिकों को ‘एक पेड़ माँ के नाम’ पहल के माध्यम से अपनी माताओं के सम्मान में पेड़ लगाने और उनकी देखभाल करने के लिए प्रेरित किया गया।

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