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एनपीएस इकोसिस्टम को सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम: पीएफआरडीए ने बैंकों को पेंशन फंड स्थापित करने की सैद्धांतिक मंजूरी दी

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पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) के बोर्ड ने राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) के प्रबंधन हेतु अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (SCBs) को स्वतंत्र रूप से पेंशन फंड स्थापित करने की अनुमति देने के लिए एक रूपरेखा को सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की है। इसका उद्देश्य पेंशन इकोसिस्टम को सुदृढ़ करना, प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना तथा सब्सक्राइबरों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। प्रस्तावित ढांचा उन मौजूदा नियामकीय सीमाओं को संबोधित करता है, जिनके कारण अब तक बैंकों की भागीदारी सीमित रही है।

इस रूपरेखा के अंतर्गत नेट वर्थ, मार्केट कैपिटलाइज़ेशन और आरबीआई मानदंडों के अनुरूप प्रूडेंशियल साउंडनेस पर आधारित स्पष्ट पात्रता मानदंड निर्धारित किए जाएंगे, ताकि केवल मजबूत पूंजी आधार और प्रणालीगत रूप से सुदृढ़ बैंक ही पेंशन फंड प्रायोजित कर सकें। विस्तृत पात्रता मानदंड अलग से अधिसूचित किए जाएंगे और यह नए एवं मौजूदा दोनों पेंशन फंडों पर लागू होंगे।

पीएफआरडीए ने अपनी चयन प्रक्रिया के तहत एनपीएस ट्रस्ट के बोर्ड में तीन नए ट्रस्टी नियुक्त किए हैं।

पीएफआरडीए के बोर्ड में नियुक्त नए ट्रस्टी इस प्रकार हैं—

  • दिनेश कुमार खारा, पूर्व चेयरमैन, भारतीय स्टेट बैंक

  • स्वाति अनिल कुलकर्णी, पूर्व एक्ज़ीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट, यूटीआई एएमसी – ट्रस्टी

  • डॉ. अरविंद गुप्ता, सह-संस्थापक एवं प्रमुख, डिजिटल इंडिया फाउंडेशन तथा सिडबी द्वारा प्रबंधित फंड ऑफ फंड्स स्कीम के अंतर्गत राष्ट्रीय वेंचर कैपिटल निवेश समिति के सदस्य

इसके अतिरिक्त, दिनेश कुमार खारा को एनपीएस ट्रस्ट बोर्ड का अध्यक्ष भी नामित किया गया है।

विकसित होती वास्तविकताओं, जन-आकांक्षाओं, अंतरराष्ट्रीय मानकों तथा कॉरपोरेट, रिटेल और गिग-इकोनॉमी खंडों में कवरेज विस्तार के उद्देश्य के अनुरूप, पीएफआरडीए ने पेंशन फंडों के लिए निवेश प्रबंधन शुल्क (IMF) की संरचना में संशोधन किया है, ताकि सब्सक्राइबरों के हित सुरक्षित रह सकें। यह संशोधित शुल्क संरचना 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगी।

संशोधित स्लैब-आधारित IMF में सरकारी एवं गैर-सरकारी क्षेत्र के सब्सक्राइबरों के लिए अलग-अलग दरें निर्धारित की गई हैं, जो मल्टीपल स्कीम फ्रेमवर्क (MSF) के अंतर्गत योजनाओं पर भी लागू होंगी; MSF के अंतर्गत कोष (कॉर्पस) को अलग से गणना में लिया जाएगा। सरकारी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए कंपोज़िट स्कीम, ऑटो चॉइस या एक्टिव चॉइस G 100 चुनने पर IMF दरें यथावत रहेंगी।

गैर-सरकारी क्षेत्र (NGS) के लिए IMF संरचना इस प्रकार है—

  • एयूएम ₹25,000 करोड़ तक: 0.12%

  • ₹25,000 करोड़ से अधिक और ₹50,000 करोड़ तक: 0.08%

  • ₹50,000 करोड़ से अधिक और ₹1,50,000 करोड़ तक: 0.06%

  • ₹1,50,000 करोड़ से अधिक: 0.04%

वार्षिक नियामकीय शुल्क (ARF) 0.015% यथावत रहेगा। इसमें से एयूएम का 0.0025% एनपीएस इंटरमीडियरीज़ एसोसिएशन (ANI) को दिया जाएगा, ताकि पीएफआरडीए के समग्र मार्गदर्शन में जागरूकता, आउटरीच और वित्तीय साक्षरता पहलों को समर्थन मिल सके।

देश के वित्तीय एवं पेंशन क्षेत्रों में बढ़ती औपचारिकता और प्रत्येक भारतीय नागरिक की वित्तीय आकांक्षाओं पर इसके प्रभाव को देखते हुए, पीएफआरडीए को विश्वास है कि ये नीतिगत सुधार सब्सक्राइबरों और हितधारकों को एक अधिक प्रतिस्पर्धी, सुशासित और सुदृढ़ एनपीएस इकोसिस्टम तक पहुंच प्रदान करेंगे, जिससे दीर्घकालिक सेवानिवृत्ति परिणामों में सुधार होगा और वृद्धावस्था आय सुरक्षा सुदृढ़ होगी।

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