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दशकों तक नक्सल हिंसा ने विकास, शिक्षा और जनजीवन को किया प्रभावित, अब बस्तर शांति और विश्वास के नए दौर की ओर अग्रसर-मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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सुरक्षा बलों के साहस, स्थानीय जनसहयोग और पुनर्वास नीति से मिली निर्णायक सफलता - मुख्यमंत्री

दूरस्थ अंचलों तक पहुंचीं सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास और जनकल्याण की योजनाएं, शासन पर बढ़ा लोगों का विश्वास - मुख्यमंत्री साय

बस्तर को देश का अग्रणी जनजातीय संभाग बनाने की दिशा में तेजी से बढ़ रहे कदम : मुख्यमंत्री

बस्तर रोडमैप 2.0 के माध्यम से पर्यटन, आजीविका, शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत संरचना के समग्र विकास पर विशेष फोकस - मुख्यमंत्री साय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज छत्तीसगढ़ विधानसभा में नक्सलवाद से मुक्ति के लिए केंद्र सरकार के ऐतिहासिक सहयोग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ ने दशकों तक नक्सल हिंसा के रूप में एक गंभीर चुनौती का सामना किया है। अब केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों, सुरक्षा बलों के अदम्य साहस तथा बस्तर की जनता के विश्वास और सहयोग से प्रदेश इस चुनौती से निर्णायक रूप से मुक्त होकर शांति, सुरक्षा और विकास के नए युग में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने कहा कि यह सफलता अनेक वर्षों के सतत प्रयासों, सुनियोजित रणनीति, सुरक्षा बलों के पराक्रम तथा आम नागरिकों के सहयोग का परिणाम है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद के विरुद्ध संघर्ष में सर्वोच्च बलिदान देने वाले शहीद जवानों को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका त्याग और समर्पण सदैव राष्ट्र को प्रेरित करता रहेगा। उन्होंने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों, छत्तीसगढ़ पुलिस, जिला पुलिस बल, विशेष सुरक्षा इकाइयों तथा अभियान में सहभागी सभी सुरक्षा एजेंसियों के साहस, समर्पण और व्यावसायिक दक्षता की सराहना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लिए समन्वित सुरक्षा एवं विकास आधारित रणनीति अपनाई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में सुरक्षा अभियानों की सतत समीक्षा, संसाधनों की उपलब्धता तथा केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया गया, जिससे अभियान को अपेक्षित गति मिली।

उन्होंने कहा कि 24 अगस्त 2024 को रायपुर में आयोजित नक्सल प्रभावित राज्यों के पुलिस महानिदेशकों की उच्च स्तरीय बैठक के बाद नक्सलवाद के समूल उन्मूलन के लिए समयबद्ध कार्ययोजना तैयार की गई। इसके अनुरूप सुरक्षा अभियानों को गति देने के साथ-साथ विकास कार्यों का भी समानांतर विस्तार किया गया।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने भी अभियान की नियमित समीक्षा की। स्वयं उन्होंने बस्तर क्षेत्र का लगातार दौरा कर सुरक्षा बलों का उत्साहवर्धन किया तथा विभिन्न गांवों में पहुंचकर स्थानीय नागरिकों से संवाद स्थापित किया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार ने सुरक्षा अभियानों के साथ-साथ समाज के उन लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने पर भी विशेष बल दिया, जिन्होंने हिंसा का मार्ग छोड़कर सामान्य जीवन अपनाने की इच्छा व्यक्त की। इसी उद्देश्य से आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास के लिए व्यापक और मानवीय नीति लागू की गई।

उन्होंने कहा कि पुनर्वास नीति के अंतर्गत आत्मसमर्पित व्यक्तियों को आर्थिक सहायता, भूमि, कौशल विकास प्रशिक्षण, स्वरोजगार तथा सम्मानजनक जीवन के अवसर उपलब्ध कराए गए। इससे बड़ी संख्या में लोगों ने हिंसा का मार्ग छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह नीति केवल पुनर्वास तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में स्थायी शांति स्थापित करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विधानसभा में कहा कि नक्सलवाद से मुक्ति का अभियान केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके साथ-साथ विकास को भी समान प्राथमिकता दी गई। राज्य सरकार ने यह सुनिश्चित किया कि जिन क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत हो रही है, वहां शासन की योजनाएं और बुनियादी सुविधाएं भी तेजी से पहुंचें, ताकि लोगों के जीवन में स्थायी और सकारात्मक परिवर्तन आए।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने  कहा कि नक्सलवाद से मुक्ति के बाद अब राज्य सरकार का पूरा ध्यान बस्तर के समग्र, समावेशी और दीर्घकालिक विकास पर केंद्रित है। इसके लिए 'बस्तर रोडमैप 2.0' तैयार किया गया है, जिसके माध्यम से बस्तर को देश के अग्रणी जनजातीय संभाग के रूप में विकसित करने की दिशा में योजनाबद्ध कार्य किए जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि 'नियद नेल्ला नार 2.0' तथा 'बस्तर मुन्ने अभियान' के अंतर्गत 31 योजनाओं एवं 14 सामुदायिक सुविधाओं का संतृप्तिकरण (सेचुरेशन) मोड में क्रियान्वयन किया जा रहा है। इससे 5 हजार 542 गांवों के 39 लाख से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा और शासन की सेवाएं अंतिम छोर तक पहुंचेंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सुरक्षा शिविरों को अब बहुआयामी सेवा केंद्रों के रूप में विकसित किया जा रहा है। इन्हें 'शहीद गुंडाधुर सेवा डेरा' के रूप में विकसित करते हुए नागरिक सुविधाओं, जनसेवाओं और आजीविका गतिविधियों का केंद्र बनाया जा रहा है, ताकि स्थानीय लोगों को अपने ही क्षेत्र में आवश्यक सेवाएं सहज रूप से उपलब्ध हो सकें।

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के तहत बस्तर के 34 लाख से अधिक लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उनका डिजिटल हेल्थ प्रोफाइल तैयार किया गया है। इससे नागरिकों को समयबद्ध एवं बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि 'नियद नेल्ला नार' योजना इस परिवर्तन का महत्वपूर्ण माध्यम बनी है। इस योजना के अंतर्गत सुरक्षा कैंपों के 10 किलोमीटर के दायरे में आने वाले 525 गांवों में 17 विभागों की 43 व्यक्तिगत एवं सामुदायिक योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किया गया। इससे ग्रामीणों को शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ एकीकृत रूप से उपलब्ध कराया जा रहा है तथा प्रशासन के प्रति उनका विश्वास और मजबूत हुआ है।

उन्होंने बताया कि बस्तर संभाग में केंद्र एवं राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का संतृप्तिकरण (सेचुरेशन) सुनिश्चित करने के लिए विशेष अभियान चलाया गया है। इसके परिणामस्वरूप 6 लाख 79 हजार परिवारों के राशन कार्ड बनाए जा चुके हैं। बस्तर संभाग में 17 लाख लोगों के जनधन खाते खोले जा चुके हैं।  24 लाख 66 हजार लोगों के आधार कार्ड बनाए जा चुके हैं।  22 लाख लोगों के आयुष्मान कार्ड बनाए गए हैं। 1 लाख 18 हजार लोगों को व्यक्तिगत वनाधिकार पत्र प्रदान किए गए हैं। साथ ही 3 लाख 89 हजार किसानों के किसान क्रेडिट कार्ड बनाए जा चुके हैं। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आवास, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी व्यापक कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि बस्तर संभाग में 1 लाख 76 हजार प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किए गए हैं। इसके अतिरिक्त नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों एवं आत्मसमर्पित नक्सलियों के लिए भी 15 हजार आवास स्वीकृत किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि  बस्तर संभाग के 240 नक्सल प्रभावित गांवों में पूर्व में बंद पड़े 458 विद्यालयों में से 421 विद्यालयों का पुनः संचालन प्रारंभ किया गया है तथा 36 नए विद्यालय स्वीकृत किए गए हैं।  मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार बस्तर में आधारभूत अधोसंरचना के विस्तार को भी तेज गति से आगे बढ़ा रही है। 3,513 करोड़ रुपये की लागत से जगदलपुर-रावघाट रेल परियोजना पर कार्य जारी है, जिससे बस्तर की रेल संपर्क व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। उन्होंने बताया कि जगदलपुर में हवाई सेवाओं का भी विस्तार किया गया है, जिससे क्षेत्र की कनेक्टिविटी और बेहतर हुई है।

उन्होंने कहा कि रायपुर-विशाखापट्टनम एक्सप्रेस-वे का निर्माण अंतिम चरण में है। यह परियोजना बस्तर को देश के प्रमुख आर्थिक एवं औद्योगिक क्षेत्रों से जोड़ने के साथ-साथ पर्यटन, व्यापार और निवेश को भी नई गति प्रदान करेगी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि युवाओं को रोजगारोन्मुख बनाने के लिए बस्तर संभाग के सभी विकासखंडों में कौशल प्रशिक्षण केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। 

उन्होंने कहा कि खेल एवं संस्कृति के माध्यम से युवाओं को सकारात्मक दिशा देने के उद्देश्य से बस्तर ओलंपिक तथा बस्तर पंडुम जैसे अभिनव आयोजन किए गए। इन आयोजनों में 4 लाख से अधिक लोगों की सहभागिता हुई, जिससे सामाजिक एकजुटता, सांस्कृतिक गौरव और जनभागीदारी को नई मजबूती मिली।

उन्होंने गृहमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप और जगदलपुर विधायक किरण सिंह देव के नक्सल उन्मूलन की लड़ाई में योगदान की सराहना की।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल आधारभूत सुविधाओं का विस्तार करना नहीं है, बल्कि बस्तर के लोगों के जीवन स्तर में स्थायी सुधार लाना है। सुरक्षा, विकास और जनकल्याण की एकीकृत रणनीति के माध्यम से बस्तर आज विश्वास, अवसर और समृद्धि की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है।

पूना मार्गम: पुनर्वास से पुनर्जीवन — 15 सशस्त्र माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण

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कार्यालय पुलिस अधीक्षक, महासमुंद

दिनांक: 01.03.2026

15 सशस्त्र माओवादी समाज की मुख्यधारा में लौटे

राज्य शासन की पुनर्वास नीति एवं सतत संवाद प्रयासों के परिणामस्वरूप प्रतिबंधित संगठन Communist Party of India (Maoist) की ओडिशा राज्य कमेटी के पश्चिमी सब-जोन अंतर्गत बरगढ़-बलांगीर-महासमुंद (BBM) डिविजनल कमेटी (DVC) के सभी 15 माओवादियों ने अपने धारित हथियारों के साथ जिला पुलिस महासमुंद के समक्ष आत्मसमर्पण किया।

आत्मसमर्पण करने वालों में 9 महिलाएं एवं 6 पुरुष शामिल हैं। सभी ने संविधान एवं तिरंगा ध्वज के प्रति आस्था व्यक्त करते हुए विश्वास, सुरक्षा और विकास का मार्ग चुना।

73 लाख रुपये का कुल इनाम

इन 15 नक्सलियों पर कुल 73 लाख रुपये का इनाम घोषित था, जिसमें—

  • 01 स्टेट कमेटी मेंबर (SCM) – ₹25 लाख

  • 02 डिविजनल कमेटी मेंबर (DCM) – ₹8-8 लाख

  • 05 एरिया कमेटी मेंबर (ACM) – ₹5-5 लाख

  • 07 पार्टी मेंबर (PM) – ₹1-1 लाख


14 अत्याधुनिक हथियार बरामद

आत्मसमर्पण के दौरान कुल 14 हथियार जमा किए गए, जिनमें—

  • 03 एके-47 रायफल

  • 02 एसएलआर रायफल

  • 02 इंसास रायफल

  • 04 .303 रायफल

  • 03 बारह बोर बंदूक

वरिष्ठ नक्सली का आत्मसमर्पण

आत्मसमर्पण करने वालों में सबसे वरिष्ठ विकास उर्फ सुदर्शन उर्फ जंगू उर्फ बाबन्ना उर्फ राजन्ना उर्फ मुप्पीड़ी साम्बैया (उम्र 57 वर्ष), ग्राम तारलापल्ली, थाना हनुमाकोण्डा, जिला वारंगल (तेलंगाना) का निवासी है। वह वर्ष 1985 से संगठन में सक्रिय था और स्टेट कमेटी मेंबर (SCM) के पद पर कार्यरत था। वह BBM डिविजन का प्रभारी था और एके-47 के साथ आत्मसमर्पण किया।

डिविजनल कमेटी सदस्य मंगेश उर्फ रमेश (ग्राम हिदूर, जिला कांकेर) एवं बाबू उर्फ सैतु उर्फ बबलू (जिला नारायणपुर) पर ₹8-8 लाख का इनाम घोषित था। दोनों पूर्व में दण्डकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) के विभिन्न डिविजनों में सक्रिय रहे हैं।

आत्मसमर्पण करने वाले 6 सदस्य (नीला, सोनू, रीना, दनेश, दीपना, रनीला) पूर्व में सेंट्रल कमेटी सदस्य चलपति के सुरक्षा दस्ते में कार्यरत रहे थे। गरियाबंद के कुल्हाड़ीघाट ऑपरेशन के बाद इन्हें BBM डिविजन में स्थानांतरित किया गया था।

आत्मसमर्पण के कारण

महासमुंद जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों में सक्रिय BBM डिविजनल कमेटी के सदस्यों से आत्मसमर्पण कराने हेतु आकाशवाणी, बैनर, पोस्टर, पाम्फलेट एवं अन्य संवाद माध्यमों से लगातार अपील की जा रही थी। शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत—

  • पदानुसार प्रोत्साहन राशि

  • हथियार सहित आत्मसमर्पण पर अतिरिक्त लाभ

  • स्वास्थ्य सुविधा

  • आवास एवं रोजगार की व्यवस्था

का व्यापक प्रचार-प्रसार किया गया।

जंगलों में कठिन जीवन, परिवार से दूरी, वैचारिक भ्रम तथा पूर्व में आत्मसमर्पण कर चुके साथियों को योजनाओं का लाभ उठाकर परिवार सहित सामान्य जीवन जीते देख इन माओवादियों ने हिंसा का मार्ग त्यागकर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया।

सम्मान एवं पुनर्वास

आत्मसमर्पण उपरांत परसदा स्थित सुरक्षित केंद्र परिसर में सभी को तिरंगा ध्वज, संविधान की प्रति तथा शांति, प्रेम और नए जीवन के प्रतीक स्वरूप लाल गुलाब भेंट कर सम्मानित किया गया।

महत्वपूर्ण उपलब्धि

इन 15 नक्सलियों के आत्मसमर्पण के बाद ओडिशा स्टेट कमेटी का पश्चिमी सब-जोन, जिसमें एक वर्ष पूर्व तक 2 डिविजन एवं 7 एरिया कमेटियां सक्रिय थीं, पूर्णतः समाप्त हो गया है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ का रायपुर पुलिस रेंज एवं ओडिशा का संबलपुर रेंज नक्सल प्रभाव से मुक्त हो गए हैं।

मार्च 2026 तक नक्सलवाद के समूल उन्मूलन के लक्ष्य की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

पुलिस की अपील

बस्तर क्षेत्र एवं ओडिशा के पूर्वी सब-जोन में सक्रिय शेष नक्सलियों से अपील की जाती है कि वे हथियार त्यागकर संविधान एवं तिरंगा ध्वज के प्रति निष्ठा जताएं और विश्वास, सुरक्षा एवं विकास की मुख्यधारा से जुड़ें।

राज्य शासन की व्यापक नक्सल उन्मूलन नीति तथा “पूना मार्गम: पुनर्वास से पुनर्जीवन” कार्यक्रम के अंतर्गत यह आत्मसमर्पण शांति, संवाद एवं विकास आधारित रणनीति की एक बड़ी सफलता है।

आत्मसमर्पित नक्सलियों का विवरण इस प्रकार है —






प्रधानमंत्री ने असम में 11 वर्षों में विकास और शांति पर लेख साझा किया

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज असम में पिछले 11 वर्षों में शांति, संस्कृति और बुनियादी ढांचे में हुए महत्वपूर्ण सुधारों पर एक लेख साझा किया।

संघ लोक सेवा मंत्रालय (Union MoS) पबित्रा मरगेरिता द्वारा X पर किए गए पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए, PMO India हैंडल ने कहा:

“केंद्रीय राज्य मंत्री @PmargheritaBJP ने असम में पिछले 11 वर्षों में शांति, संस्कृति और बुनियादी ढांचे में हुए महत्वपूर्ण सुधारों के बारे में लिखा है।

उन्होंने एक ऐसे विकास मॉडल को रेखांकित किया है जो आर्थिक विकास को पारिस्थितिकीय जिम्मेदारी के साथ संतुलित करता है, क्योंकि राज्य ‘विकसित असम’ की दिशा में steady रूप से आगे बढ़ रहा है, जो ‘विकसित भारत @ 2047’ के दृष्टिकोण के अनुरूप है।”

बस्तर अब बदल रहा है — शांति, विश्वास और विकास की ओर तेज़ी से बढ़ता नया बस्तर : मुख्यमंत्री साय

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बस्तर में अब डर नहीं, बल्कि भरोसे की आवाज़ गूंज रही है : मुख्यमंत्री

सुकमा में ₹64 लाख के इनामी 26 हार्डकोर माओवादियों ने मुख्यधारा में लौटते हुए किया आत्मसमर्पण

रायपुर- बस्तर संभाग में नक्सल उन्मूलन की दिशा में एक बड़ी सफलता मिली है। सुकमा जिले में ₹64 लाख के इनामी 26 हार्डकोर माओवादियों ने मुख्यधारा में लौटते हुए आत्मसमर्पण किया है, जिनमें 7 महिलाएँ भी शामिल हैं। 

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि यह केवल सुरक्षा मोर्चे पर उपलब्धि नहीं, बल्कि मानवीय विश्वास और संवाद की जीत है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व तथा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जी के स्पष्ट संकल्प के अनुरूप छत्तीसगढ़ में लागू संतुलित सुरक्षा रणनीति और संवेदनशील पुनर्वास नीति का प्रत्यक्ष परिणाम अब दिखाई दे रहा है। “पूना मार्गेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” अभियान ने उन युवाओं के जीवन में नई आशा जगाई है, जो कभी नक्सलवाद के भ्रम जाल में भटक गए थे।

लगातार स्थापित हो रहे सुरक्षा शिविर, सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं का विस्तार और सुदूर अंचलों तक शासन की सीधी पहुँच ने बस्तर की तस्वीर बदलनी शुरू कर दी है। आज बस्तर में डर नहीं, बल्कि विश्वास की आवाज़ गूंज रही है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आत्मसमर्पण करने वाले सभी माओवादियों का स्वागत करते हुए कहा कि हिंसा का मार्ग त्यागने वालों के लिए सरकार के दरवाज़े हमेशा खुले हैं। सम्मानजनक जीवन, सुरक्षा और बेहतर भविष्य के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। 

मुख्यमंत्री साय ने यह भी कहा कि नक्सल समस्या का स्थायी समाधान सुरक्षा, विकास और विश्वास की त्रयी में निहित है। मुख्यमंत्री ने शेष माओवादी साथियों से भी मुख्यधारा में लौटने की अपील करते हुए कहा कि वे शांति, परिवार और प्रगति का रास्ता चुनें। राज्य सरकार उनकी पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन में पूरा सहयोग करेगी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर आज शांति की दिशा में निर्णायक क़दम बढ़ा चुका है और हर आत्मसमर्पण के साथ नक्सल मुक्त छत्तीसगढ़ का संकल्प और अधिक मज़बूत हो रहा है।

छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी अभियान को बड़ी सफलता: मुख्यमंत्री ने कहा - बस्तर में शांति, विश्वास और विकास का स्थायी सूर्योदय सुनिश्चित

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि विश्वास, विकास और सुरक्षा ही बस्तर की नई दिशा है, जहाँ अब हिंसा नहीं, शांति ही एकमात्र विकल्प बन चुकी है। 

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि बस्तर रेंज के बीजापुर और सुकमा जिलों में सुरक्षा बलों द्वारा चलाए गए नक्सल विरोधी अभियान में निर्णायक सफलता प्राप्त हुई है, जिसमें 14 माओवादियों को न्यूट्रलाइज़ किया गया है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सुरक्षा बलों की सटीक रणनीति, सतत दबाव और मजबूत जमीनी पकड़ के कारण माओवादी नेटवर्क तेजी से कमजोर हो रहा है। उन्होंने कहा कि बस्तर अब विकास, निवेश, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के नए अवसरों के साथ आगे बढ़ रहा है। यह परिवर्तन प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन, केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व, सुरक्षा बलों की अदम्य वीरता एवं प्रतिबद्धता, संवेदनशील पुनर्वास नीति तथा बस्तर की जनता के अटूट विश्वास का परिणाम है। 

मुख्यमंत्री ने सुरक्षा बलों के शौर्य को नमन करते हुए अभियान में शामिल सभी जवानों को बधाई दी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जो लोग अब भी हिंसा का रास्ता चुन रहे हैं, वे आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा से जुड़ें, सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ उठाएँ और सम्मानपूर्वक जीवनयापन करें अन्यथा राज्य शासन और सुरक्षा बल कानून एवं संविधान के अनुरूप अपने दायित्वों के निर्वहन के लिए पूरी तरह सक्षम और प्रतिबद्ध हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद की अंधेरी रात अब अपने अंतिम चरण में है और बस्तर में शांति, विश्वास और विकास का स्थायी सूर्योदय सुनिश्चित है।

https://x.com/vishnudsai/status/2007391997062168672?s=46

छत्तीसगढ़ की पुनर्वास नीति से लौटी उम्मीदें,सुकमा में आत्मसमर्पित माओवादियों को मिला सम्मानजनक नया जीवन

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75 को 5G स्मार्टफोन, 25 को मेसन किट का वितरण

रायपुर- छत्तीसगढ़ शासन की संवेदनशील और दूरदर्शी नक्सल पुनर्वास नीति ज़मीनी स्तर पर सकारात्मक बदलाव का सशक्त उदाहरण बन रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के स्पष्ट निर्देशों एवं उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन में सुकमा जिले के नक्सल पुनर्वास केंद्र में आत्मसमर्पित माओवादियों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई।

आत्मसमर्पण करने वाल 25 युवाओं को रोजगारोन्मुख मेसन (राजमिस्त्री) किट

इस क्रम में 75 आत्मसमर्पित नक्सलियों को अत्याधुनिक 5G स्मार्टफोन तथा 25 युवाओं को रोजगारोन्मुख मेसन (राजमिस्त्री) किट वितरित की गई। यह कार्यक्रम कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव एवं पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण के मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ।

75 आत्मसमर्पित नक्सलियों को अत्याधुनिक 5G स्मार्टफोन

कार्यक्रम के दौरान 75 पुनर्वासित युवाओं को सैमसंग गैलेक्सी M06 5G स्मार्टफोन प्रदान किए गए, जिनमें 50 मेगापिक्सल डुअल कैमरा तथा 5000 mAh फास्ट-चार्जिंग बैटरी जैसी आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध हैं। इन स्मार्टफोनों के माध्यम से युवा अब डिजिटल शिक्षा, कौशल विकास कार्यक्रमों, सरकारी योजनाओं तथा देश-दुनिया की जानकारी से सहजता से जुड़ सकेंगे।

इसके साथ ही 25 पुनर्वासित युवाओं को मेसन किट प्रदान कर निर्माण क्षेत्र में रोजगार एवं स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित किया गया। यह पहल प्रधानमंत्री आवास योजना–ग्रामीण सहित अन्य विकास कार्यों के लिए कुशल श्रमशक्ति तैयार करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

मुचाकी रनवती

आत्मसमर्पण करने वाले लोगों स्वरोजगार के नए अवसरों उपलब्ध कराने संकल्पित

जिला प्रशासन ने बताया कि नक्सल पुनर्वास को केवल आर्थिक सहायता तक सीमित न रखते हुए इसे आत्मनिर्भरता, सम्मान और सामाजिक समावेशन से जोड़ा जा रहा है। 5G स्मार्टफोन के माध्यम से पुनर्वासित युवा अब ऑनलाइन प्रशिक्षण, आधुनिक कृषि तकनीकों, छोटे व्यवसायों और स्वरोजगार के नए अवसरों को समझने और अपनाने में सक्षम होंगे।आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी लोगों स्वरोजगार के नए अवसरों उपलब्ध कराने सरकार संकल्पित है l 

पुनर्वासित युवाओं ने साझा किए अनुभव

पोलमपल्ली निवासी पुनर्वासित पोड़ियम भीमा ने बताया कि वे लगभग 30 वर्षों तक डीवीसी सदस्य के रूप में संगठन से जुड़े रहे। पुनर्वास के बाद उन्हें बेहतर आवास, भोजन और प्रशिक्षण की सुविधा मिल रही है। उन्होंने बताया कि वे राजमिस्त्री के साथ-साथ इलेक्ट्रीशियन और मैकेनिक का प्रशिक्षण भी प्राप्त कर चुके हैं।

पोड़ियम भीमा

पुवर्ती निवासी मुचाकी रनवती ने बताया कि वे 24 वर्षों तक एसीएम सदस्य के रूप में नक्सल संगठन से जुड़ी रहीं। पुनर्वास के बाद उन्होंने सिलाई प्रशिक्षण प्राप्त किया और वर्तमान में राजमिस्त्री प्रशिक्षण ले रही हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें अपने परिजनों से मिलने का अवसर मिला तथा बस्तर ओलंपिक की संभागस्तरीय प्रतियोगिता में भाग लेकर प्रथम पुरस्कार भी प्राप्त किया।

डब्बमरका, सुकमा निवासी गंगा वेट्टी ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि जिला प्रशासन द्वारा मोबाइल और मेसन किट मिलने से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। उन्होंने कहा कि जंगल के जीवन की तुलना में वर्तमान जीवन सुरक्षित और सम्मानजनक है। शिविर लगाकर उनका आधार कार्ड, आयुष्मान कार्ड, राशन कार्ड एवं जॉब कार्ड बनाया गया तथा शासन की सभी योजनाओं का लाभ उन्हें मिल रहा है।

सुकमा में की गई यह पहल इस बात का प्रमाण है कि छत्तीसगढ़ शासन की नीति केवल नक्सलवाद से मुकाबले तक सीमित नहीं है, बल्कि भटके हुए युवाओं को विश्वास, अवसर और सम्मान के साथ नया जीवन देने की ठोस कोशिश भी है। यह मॉडल नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति, विकास और सामाजिक समरसता की मजबूत नींव रख रहा है। इस अवसर पर जिले के प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे।

‘पूना मारगेम’ से शांति की ओर मजबूती से बढ़ते कदम: बीजापुर में 34 माओवादी कैडरों ने किया आत्मसमर्पण

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छत्तीसगढ़ को शांति, विश्वास और उज्ज्वल भविष्य का प्रदेश बनाना राज्य सरकार का अटल संकल्प - मुख्यमंत्री साय

रायपुर- बस्तर अंचल में शांति, विश्वास और विकास की दिशा में एक और महत्वपूर्ण सफलता मिली है। बीजापुर जिले में ₹84 लाख के इनामी 34 माओवादी कैडरों ने हिंसा का मार्ग त्यागते हुए भारतीय संविधान में आस्था जताई है और समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व एवं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जी की दृढ़ इच्छाशक्ति के अनुरूप छत्तीसगढ़ को नक्सलमुक्त बनाने की दिशा में चल रहे सतत और ठोस प्रयासों का परिणाम है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार की ‘पूना मारगेम’ नीति ने यह सिद्ध कर दिया है कि संवाद, संवेदनशीलता और विकास, हिंसा से कहीं अधिक प्रभावी समाधान हैं। यह आत्मसमर्पण केवल हथियार छोड़ने की घटना नहीं है, बल्कि भय और भ्रम से मुक्त होकर सम्मानजनक जीवन की ओर लौटने का निर्णय है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार आत्मसमर्पण करने वाले सभी व्यक्तियों के पुनर्वास, सुरक्षा, आजीविका, कौशल विकास और सामाजिक पुनर्समावेशन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, ताकि वे समाज में आत्मनिर्भर बन सकें।

मुख्यमंत्री ने आज भी भटके हुए युवाओं से अपील करते हुए कहा कि वे हिंसा का मार्ग त्यागें, लोकतंत्र और विकास के साथ कदम से कदम मिलाकर चलें तथा प्रदेश और देश के निर्माण में सहभागी बनें।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ को शांति, विश्वास और उज्ज्वल भविष्य का प्रदेश बनाना राज्य सरकार का अटल संकल्प है और इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सभी स्तरों पर समन्वित प्रयास जारी रहेंगे।

बस्तर में शांति और विकास की नई दिशा : 65 लाख के इनामी 10 माओवादी आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटे

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बस्तर में विश्वास, सुरक्षा और स्थायी शांति का वातावरण हो रहा है स्थापित - मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि  “आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति 2025” तथा “पूना मारगेम : पुनर्वास से पुनर्जीवन” जैसी मानवीय, संवेदनशील और दूरदर्शी पहल ने बस्तर में विश्वास, सुरक्षा और स्थायी शांति का वातावरण स्थापित किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि माओवादी भ्रमजाल में फँसे अनेक लोग अब हिंसा का मार्ग छोड़कर विकास और मुख्यधारा की ओर लौट रहे हैं। इसी क्रम में आज दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के वरिष्ठ सदस्य एवं 25 लाख के इनामी चैतू उर्फ श्याम दादा सहित कुल 65 लाख रुपए के इनाम वाले 10 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है। मुख्यमंत्री ने इसे बदलते बस्तर और सरकार की नीतियों की सफलता का स्पष्ट प्रमाण बताया।

मुख्यमंत्री साय ने यह भी कहा कि सरकार की प्रतिबद्धता के अनुरूप सभी आत्मसमर्पित साथियों को सुरक्षित, सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन हेतु आवश्यक पुनर्वास सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँगी। उन्होंने उल्लेख किया कि आत्मसमर्पण की बढ़ती संख्या यह दर्शाती है कि जनता सरकार की नीतियों पर भरोसा कर रही है और बस्तर तेजी से शांति, विश्वास और विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री ने इसे राज्य की प्रभावी रणनीति, पुलिस प्रशासन की सतत मेहनत और जनविश्वास का सामूहिक परिणाम बताते हुए बस्तर में स्थायी शांति स्थापना की दिशा में इसे एक महत्वपूर्ण उपलब्धि कहा।

उत्तर बस्तर और अबूझमाड़ हुए नक्सलमुक्त — बस्तर में शांति और विकास का नया युग : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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हिंसा की राह देती है अंतहीन दर्द, आत्मसमर्पण देता है जीवन को नई दिशा- मुख्यमंत्री साय

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में नक्सल उन्मूलन अभियान ऐतिहासिक सफलता की ओर

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि उत्तर बस्तर और अबूझमाड़ का नक्सलमुक्त होना यह प्रमाण है कि अब बस्तर भय नहीं, बल्कि विश्वास और विकास की नई पहचान बन चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में भारत आज नक्सलवाद के अंत की दहलीज़ पर खड़ा है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बीते दो दिनों में 258 नक्सलियों का आत्मसमर्पण इस बात का प्रतीक है कि बंदूक नहीं, बल्कि विश्वास की शक्ति जीत रही है। उन्होंने कहा कि बीते 22 महीनों में छत्तीसगढ़ में 477 नक्सली मारे गए, 2110 ने आत्मसमर्पण किया और 1785 गिरफ्तार हुए — यह आँकड़े हमारे राज्य को नक्सलमुक्त बनाने के अडिग संकल्प के साक्षी हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि 31 मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ को पूरी तरह नक्सलमुक्त बनाने का लक्ष्य अब बहुत निकट है। यह परिवर्तन राज्य सरकार की “नक्सलवादी आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति 2025” तथा “नियद नेल्ला नार योजना” की सफलता का प्रत्यक्ष परिणाम है। डबल इंजन सरकार की संवेदनशील नीतियों, बस्तर में लगातार स्थापित हो रहे सुरक्षा शिविरों और वनांचलों में शासन के प्रति बढ़ते विश्वास ने इस सकारात्मक परिवर्तन को संभव बनाया है। उन्होंने कहा कि अब तक नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में 64 नए सुरक्षा कैंप स्थापित किए जा चुके हैं, जिससे न केवल सुरक्षा सुदृढ़ हुई है, बल्कि विकास और विश्वास की किरण भी हर गांव तक पहुँची है। 

मुख्यमंत्री साय ने हमारे वीर सुरक्षाबलों के अदम्य साहस और बलिदान को नमन करते हुए कहा कि उनके समर्पण से ही आज बस्तर भयमुक्त हुआ है और शांति की राह पर अग्रसर है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अबूझमाड़ और उत्तर बस्तर नक्सल आतंक से पूर्णतः मुक्त हो चुके हैं, जबकि दक्षिण बस्तर में यह लड़ाई अपने निर्णायक चरण में है। “नियद नेल्ला नार” जैसी योजनाओं ने बस्तर में संवाद, विकास और संवेदना की नई धरती तैयार की है।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि सरकार की नीति दो टूक है — हिंसा का कोई स्थान नहीं। जो नक्सली शांति और विकास का मार्ग चुनना चाहते हैं, उनका स्वागत है। लेकिन जो बंदूक उठाकर समाज में आतंक फैलाने की कोशिश करेंगे, उन्हें सुरक्षा बलों की सख़्त कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

मुख्यमंत्री ने सभी नक्सलियों से अपील की — “हिंसा की राह अंतहीन पीड़ा देती है, जबकि आत्मसमर्पण जीवन को एक नई दिशा देते हुए एक नई शुरुआत का रास्ता खोलता है। अपनी मातृभूमि के भविष्य और अपने परिवारों के उज्जवल कल के लिए हथियार त्यागें और विकास की रोशनी में कदम रखें।”

उल्लेखनीय है कि  देश में नक्सलवाद के खिलाफ चल रही निर्णायक लड़ाई ने एक ऐतिहासिक मुकाम हासिल किया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट कर जानकारी  कि छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ और उत्तर बस्तर जैसे क्षेत्र, जो कभी नक्सल आतंक के गढ़ हुआ करते थे, अब पूरी तरह नक्सलमुक्त घोषित किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि यह न केवल भारत की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी सफलता है, बल्कि विकास, विश्वास और संवेदना की नई कहानी भी है। बीते दो दिनों में देश में कुल 258 नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण किया है। 

केंद्रीय गृह मंत्री शाह ने कहा कि यह परिवर्तन इस बात का प्रमाण है कि बंदूक नहीं, बल्कि संविधान पर विश्वास की शक्ति जीत रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के निरंतर प्रयासों से नक्सलवाद अब अपने अंतिम चरण में है। 

केंद्रीय गृह मंत्री शाह ने आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सलियों की सराहना करते हुए कहा कि यह कदम उनके बेहतर भविष्य और देश की एकता के प्रति समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने सभी नक्सलियों से अपील की कि वे हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटें और देश की प्रगति में सहभागी बनें।

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