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गृह मंत्री अमित शाह ने जनगणना-2027 के लिए डिजिटल टूल्स और मैस्कॉट “प्रगति” व “विकास” का किया अनावरण

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नई दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह ने जनगणना-2027 के लिए चार डिजिटल टूल्स का सॉफ्ट लॉन्च किया और आधिकारिक रूप से दो मैस्कॉट — “प्रगति” (महिला) और “विकास” (पुरुष) — का अनावरण किया। इस अवसर पर कई वरिष्ठ अधिकारी, जिनमें केंद्रीय गृह सचिव तथा भारत के रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त भी उपस्थित थे।

जनगणना-2027 के लिए उन्नत डिजिटल प्लेटफॉर्म का विकास Centre for Development of Advanced Computing (C-DAC) द्वारा किया गया है, जिससे देशभर में गणना कार्य को सुगम और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।

केंद्र सरकार ने जनगणना 2027 आयोजित करने के अपने इरादे की औपचारिक घोषणा 16 जून 2025 को राजपत्र अधिसूचना जारी कर की थी। यह दुनिया की सबसे बड़ी जनगणना प्रक्रिया होगी और पहली बार इसे डिजिटल माध्यम से संचालित किया जाएगा। साथ ही पहली बार नागरिकों को सेल्फ-एन्यूमरेशन (Self-Enumeration) का विकल्प भी दिया जाएगा।

मैस्कॉट “प्रगति” और “विकास”

जनगणना-2027 के लिए लॉन्च किए गए मैस्कॉट “प्रगति” (महिला गणनाकर्मी) और “विकास” (पुरुष गणनाकर्मी) को जनगणना के मित्रवत और जनसुलभ प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। ये दोनों मैस्कॉट भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प में महिलाओं और पुरुषों की समान भागीदारी का भी प्रतीक हैं। इनके माध्यम से जनगणना से जुड़ी जानकारी, उद्देश्य और संदेश समाज के विभिन्न वर्गों तक प्रभावी और सरल तरीके से पहुँचाए जाएंगे।

चार डिजिटल टूल्स

जनगणना-2027 में पहली बार डिजिटल तकनीक का व्यापक उपयोग किया जाएगा। इस अवसर पर चार प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किए गए—

1. Houselisting Block Creator (HLBC) Web Application

यह वेब-मैप आधारित एप्लिकेशन चार्ज अधिकारियों को सैटेलाइट इमेजरी की सहायता से डिजिटल रूप में हाउस-लिस्टिंग ब्लॉक बनाने की सुविधा देगा, जिससे पूरे देश में भौगोलिक कवरेज मानकीकृत किया जा सकेगा।

2. HLO Mobile Application

यह एक सुरक्षित ऑफलाइन मोबाइल एप्लिकेशन है, जिसके माध्यम से गणनाकर्मी घर-घर जाकर हाउस-लिस्टिंग डेटा एकत्र कर सर्वर पर अपलोड करेंगे। यह ऐप केवल CMMS पोर्टल पर पंजीकृत गणनाकर्मियों द्वारा ही उपयोग किया जा सकेगा और यह Android तथा iOS दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगा। ऐप 16 क्षेत्रीय भाषाओं में संचालित किया जा सकेगा।

3. Self-Enumeration (SE) Portal

पहली बार नागरिकों को सेल्फ-एन्यूमरेशन की सुविधा दी जा रही है, जिसके तहत परिवार का कोई पात्र सदस्य घर से ही ऑनलाइन अपनी जानकारी दर्ज कर सकेगा। सफलतापूर्वक जानकारी दर्ज करने पर एक Self-Enumeration ID (SE ID) उत्पन्न होगी, जिसे बाद में गणनाकर्मी सत्यापित करेंगे।

4. Census Management and Monitoring System (CMMS) Portal

यह एक केंद्रीकृत वेब-आधारित प्लेटफॉर्म है, जिसके माध्यम से जनगणना से जुड़ी सभी गतिविधियों की योजना, प्रबंधन और निगरानी की जाएगी। जिला, उप-जिला और राज्य स्तर के अधिकारी इस डैशबोर्ड के माध्यम से रियल-टाइम में प्रगति और फील्ड प्रदर्शन की निगरानी कर सकेंगे।

दो चरणों में होगी जनगणना

जनगणना-2027 को दो चरणों में आयोजित किया जाएगा—

पहला चरण: हाउस-लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना (HLO)

इस चरण में घरों की स्थिति और घरेलू सुविधाओं से संबंधित जानकारी एकत्र की जाएगी। इसकी अधिसूचना 7 जनवरी 2026 को जारी की गई थी। यह सर्वेक्षण 1 अप्रैल 2026 से 30 सितंबर 2026 के बीच राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा निर्धारित 30-दिवसीय अवधि में किया जाएगा। इसके पहले 15 दिनों की वैकल्पिक सेल्फ-एन्यूमरेशन अवधि भी होगी।

दूसरा चरण: जनसंख्या गणना (Population Enumeration)

यह चरण पूरे भारत में फरवरी 2027 में आयोजित होगा। वहीं लद्दाख और जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश तथा उत्तराखंड के हिमाच्छादित क्षेत्रों में यह प्रक्रिया सितंबर 2026 में की जाएगी। इस चरण में जाति से संबंधित प्रश्न भी शामिल किए जाएंगे।

जनगणना-2027 के लिए देशभर में 30 लाख से अधिक गणनाकर्मी, पर्यवेक्षक और अन्य अधिकारी तैनात किए जाएंगे, जो मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से घर-घर जाकर डेटा संग्रह करेंगे।

सरकार का मानना है कि तकनीक और समावेशिता का यह संयोजन जनगणना-2027 को अधिक सटीक, सुरक्षित और व्यापक बनाएगा।

जनगणना-2027 की संदर्भ तिथि अधिकांश राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए 1 मार्च 2027 को 00:00 बजे होगी, जबकि लद्दाख और हिमाच्छादित क्षेत्रों के लिए यह 1 अक्टूबर 2026 को 00:00 बजे निर्धारित की गई है।

भिलाई स्टील प्लांट और लारा सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट को प्रगति प्लेटफॉर्म से नई गति: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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छत्तीसगढ़ में भिलाई इस्पात संयंत्र आधुनिकीकरण और लारा सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं को मिली नई गति : प्रगति प्लेटफार्म बना गेमचेंजर

दशकों से लंबित परियोजनाएँ अब समयबद्ध रूप से हो रही पूरी : प्रगति प्लेटफ़ॉर्म प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की निर्णायक कार्यशैली का सशक्त प्रमाण - मुख्यमंत्री साय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में विकास की गति नई ऊँचाइयों पर पहुँची है। दशकों से लंबित महत्वपूर्ण अधोसंरचना एवं ऊर्जा परियोजनाएँ अब “प्रगति” प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से समयबद्ध ढंग से पूरी हो रही हैं। यह केंद्र सरकार की परिणामोन्मुख, जवाबदेह तथा निर्णायक कार्यशैली का सशक्त प्रमाण है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में “प्रगति” प्लेटफ़ॉर्म का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। भिलाई इस्पात संयंत्र के आधुनिकीकरण से न केवल देश में रेल उत्पादन को नई गति मिली है, बल्कि इससे हजारों युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित हुए हैं। इससे आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को मजबूती मिली है और औद्योगिक विकास को नई दिशा प्राप्त हुई है।

इसी प्रकार एनटीपीसी की लारा सुपर थर्मल पावर परियोजना (1600 मेगावाट) से छत्तीसगढ़ सहित छह राज्यों को निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित हो रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना से ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हुई है तथा औद्योगिक और कृषि गतिविधियों को नई ऊर्जा प्राप्त हुई है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि “प्रगति” प्लेटफ़ॉर्म ने परियोजनाओं की निगरानी, निरंतर समीक्षा और बाधाओं के त्वरित समाधान की एक सशक्त प्रणाली विकसित की है। स्पष्ट लक्ष्य, तेज़ क्रियान्वयन और ठोस परिणाम—यही नए भारत की कार्यसंस्कृति है और यही “विकसित भारत @ 2047” के लक्ष्य को साकार करने का मार्ग है।

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित प्रगति (PRAGATI) की 50वीं बैठक ने न केवल राष्ट्रीय स्तर पर, बल्कि छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा को भी नई गति प्रदान की है। प्रगति सक्रिय शासन और समयबद्ध कार्यान्वयन के लिए विकसित एक आईसीटी आधारित प्लेटफॉर्म है, जिसने परियोजनाओं की निगरानी और समाधान की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया है। पिछले दशक में प्रगति प्लेटफॉर्म के माध्यम से 85 लाख करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की परियोजनाओं की रफ्तार तेज हुई है। इससे देशभर में अवसंरचना, ऊर्जा, रेल, सड़क, कोयला और अन्य क्षेत्रों से जुड़े अनेक कार्यों को समयबद्ध प्रगति मिली है। इन परियोजनाओं में छत्तीसगढ़ से संबंधित कई महत्वपूर्ण परियोजनाएँ भी शामिल हैं।

बैठक में भिलाई इस्पात संयंत्र के आधुनिकीकरण और विस्तार कार्य का विशेष रूप से उल्लेख किया गया। इस परियोजना को वर्ष 2007 में स्वीकृति मिली थी। प्रगति बैठकों में नियमित समीक्षा और अंतर-एजेंसी समन्वय के कारण इस परियोजना को नई गति मिली, जिसके परिणामस्वरूप इसका कार्य तेज़ी से आगे बढ़ा और लक्षित प्रगति सुनिश्चित हुई।

भिलाई इस्पात संयंत्र के आधुनिकीकरण से उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ के औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन, सहायक उद्योगों के विस्तार और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी नई ऊर्जा प्राप्त हुई है। इससे राज्य को देश के प्रमुख इस्पात उत्पादन केंद्र के रूप में और अधिक मजबूती मिली है।

इसी प्रकार रायगढ़ में वर्ष 2009 में स्वीकृत लारा सुपर थर्मल पावर परियोजना  की प्रगति प्लेटफॉर्म के अंतर्गत उच्च स्तरीय समीक्षाओं, समय-समय पर दिए गए आवश्यक दिशा-निर्देशों और निरंतर मॉनिटरिंग से तेज गति मिली और इसके क्रियान्वयन में ठोस प्रगति दर्ज की गई।

आज लारा सुपर थर्मल पावर परियोजना राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करने वाली प्रमुख परियोजनाओं में से एक बन चुकी है। इस परियोजना ने न केवल बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाई है, बल्कि छत्तीसगढ़ की पहचान को “पावर हब ऑफ इंडिया” के रूप में और अधिक मजबूत किया है। इससे राज्य और देश दोनों के ऊर्जा तंत्र को नई स्थिरता प्राप्त हुई है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यह रेखांकित किया कि प्रगति प्लेटफॉर्म ने सहयोगी संघवाद को नई शक्ति दी है और केंद्र तथा राज्यों के संयुक्त प्रयासों से विकास कार्यों में गति और विश्वास दोनों बढ़ा है। प्रगति से तेज़ होती छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा - मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रगति की 50वीं बैठक को देश और छत्तीसगढ़ के लिए दूरगामी महत्व का बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में विकास परियोजनाओं को समयबद्ध रूप से पूरा करने की जो व्यवस्था स्थापित की गई है, उसका सीधा लाभ छत्तीसगढ़ को भी मिला है। उन्होंने कहा कि भिलाई इस्पात संयंत्र के आधुनिकीकरण तथा लारा सुपर थर्मल पावर परियोजना जैसी बड़ी परियोजनाओं को नई गति मिलना इस बात का प्रमाण है कि प्रगति प्लेटफॉर्म ने वास्तविक अर्थों में समाधान-उन्मुख शासन का मॉडल प्रस्तुत किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से प्रदेश के औद्योगिक विकास, ऊर्जा क्षमता, निवेश, रोज़गार और सहायक अर्थव्यवस्था में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रगति के माध्यम से परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग और जवाबदेही सुनिश्चित होने से छत्तीसगढ़ विकसित भारत @ 2047 के राष्ट्रीय लक्ष्य में अपनी निर्णायक भूमिका और मजबूती के साथ निभाता रहेगा।

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