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विकसित भारत 2047 की आधारशिला है एमएसएमई क्षेत्र : उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन

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नई दिल्ली- भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने डॉ. अंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र, नई दिल्ली में आयोजित अंतरराष्ट्रीय एमएसएमई दिवस 2026 समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) केवल एक आर्थिक क्षेत्र नहीं, बल्कि पहली पीढ़ी के उद्यमियों के साहस, युवाओं की आकांक्षाओं, महिला उद्यमियों के संकल्प और लाखों छोटे व्यवसायों के संघर्ष व सफलता का प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि 'विकसित भारत @2047' का सपना एक मजबूत और गतिशील एमएसएमई क्षेत्र के बिना संभव नहीं है।

उद्यमिता का अपना अनुभव साझा किया

उपराष्ट्रपति ने अपने उद्यमिता के शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने अपने पिता की आर्थिक सहायता से एक छोटा गारमेंट व्यवसाय शुरू किया था। शुरुआती कठिनाइयों के बावजूद लगातार सीखने, मेहनत और धैर्य के बल पर उन्होंने इसे एक सफल निटवियर निर्यात व्यवसाय में बदल दिया। उन्होंने युवाओं से कहा कि शुरुआती चुनौतियों से घबराने के बजाय अपने काम को सीखने और बेहतर बनाने पर ध्यान दें।

गुणवत्ता से कभी समझौता नहीं

उन्होंने कहा कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा के दौर में गुणवत्ता (Quality) ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है। लागत कम करने के प्रयास में गुणवत्ता से समझौता नहीं होना चाहिए। उनका कहना था कि असली सफलता वही है, जब कम लागत में बेहतर गुणवत्ता और उत्कृष्ट सेवाएं प्रदान की जाएं।

हर छोटा उद्यम आगे बढ़ने का लक्ष्य रखे

उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रत्येक सूक्ष्म उद्यम को लघु उद्यम बनने और प्रत्येक लघु उद्यम को मध्यम उद्यम बनने का लक्ष्य रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि कुटीर उद्योगों को एक ही स्तर पर सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें निवेश, नवाचार और तकनीक के माध्यम से आगे बढ़ना चाहिए। इसके लिए आसान वित्तीय सहायता और अनुकूल नीतियों की आवश्यकता है।

एमएसएमई का सार्वभौमिक पंजीकरण जरूरी

उन्होंने एमएसएमई मंत्रालय से सभी उद्यमों का व्यापक पंजीकरण सुनिश्चित करने का आग्रह किया। उनका कहना था कि इससे सरकार को वास्तविक आंकड़े मिलेंगे और उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप बेहतर नीतियां बनाई जा सकेंगी।

एआई को अवसर के रूप में अपनाएं

संयुक्त राष्ट्र की इस वर्ष की थीम "AI-Driven Future में Human-Centered Entrepreneurship" का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को खतरे के बजाय अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जैसे कंप्यूटर आने पर रोजगार खत्म होने की आशंका जताई गई थी, लेकिन बाद में उसी तकनीक ने नए अवसर पैदा किए। एआई भी भविष्य में नए रोजगार और व्यवसायिक संभावनाएं लेकर आएगा।

खादी और ग्रामोद्योग की सराहना

उन्होंने खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) की सराहना करते हुए कहा कि संस्था ने शहद उत्पादन और खादी वस्त्रों के क्षेत्र में उल्लेखनीय परिवर्तन किया है। उन्होंने कहा कि गांधीवादी विचारों से प्रेरित खादी को आधुनिक तकनीक और बदलती उपभोक्ता आवश्यकताओं के अनुरूप निरंतर विकसित होना चाहिए।

कई नई डिजिटल पहल की शुरुआत

इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने नेशनल स्मॉल इंडस्ट्रीज कॉर्पोरेशन (NSIC) को शेड्यूल 'A' कंपनी का दर्जा मिलने पर सम्मानित किया। साथ ही उन्होंने कई नई डिजिटल पहलों की शुरुआत की, जिनमें शामिल हैं—

  • PMEGP 2.0 पोर्टल

  • समाधान 2.0 पोर्टल

  • प्रोक्योरमेंट एंड मार्केटिंग सपोर्ट (PMS) 2.0 पोर्टल

  • MSME ग्लोबल मार्ट 2.0 पोर्टल

  • टेस्टिंग सेंटर पोर्टल

  • एमएसएमई मंत्रालय की बहुभाषी डिजिटल पहल

  • MSME आइडिया हैकाथॉन 6.0

इसके अलावा सेल्फ रिलायंट इंडिया (SRI) फंड और पीएम विश्वकर्मा योजना पर आधारित ई-बुक्स का विमोचन तथा KVIC के नए उत्पादों का भी शुभारंभ किया गया।

इस कार्यक्रम में केंद्रीय एमएसएमई मंत्री जीतन राम मांझी, राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे, KVIC के अध्यक्ष मनोज कुमार, एमएसएमई मंत्रालय के सचिव भारत खेड़ा, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में उद्यमी उपस्थित रहे।

पीएम विश्वकर्मा हाट 2026: कारीगरों और पारंपरिक शिल्प को समर्पित राष्ट्रीय प्रदर्शनी

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सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई), भारत सरकार, पीएम विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत कारीगरों एवं शिल्पकारों के लिए समर्पित एक विशेष प्रदर्शनी “पीएम विश्वकर्मा हाट 2026” का आयोजन करने जा रहा है। यह प्रदर्शनी 18 से 31 जनवरी 2026 तक दिल्ली हाट, आईएनए, नई दिल्ली में आयोजित की जाएगी और आम जनता के लिए प्रातः 10:30 बजे से रात्रि 10:00 बजे तक खुली रहेगी। प्रदर्शनी का उद्घाटन केंद्रीय एमएसएमई मंत्री जीतन राम मांझी द्वारा, केंद्रीय एमएसएमई राज्य मंत्री सुश्री शोभा करंदलाजे की गरिमामयी उपस्थिति में किया जाएगा।

पीएम विश्वकर्मा हाट 2026 का उद्देश्य भारत की समृद्ध पारंपरिक शिल्प विरासत का उत्सव मनाना तथा कारीगरों को अपने हस्तनिर्मित उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय खरीदारों, हितधारकों और आम जनता के समक्ष प्रदर्शित एवं विपणन करने के लिए एक सशक्त मंच प्रदान करना है।

इस आयोजन में देश के सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों से 117 से अधिक कारीगर भाग लेंगे, जिससे यह प्रदर्शनी विविध पारंपरिक कौशलों और शिल्पों का एक अखिल भारतीय प्रतिनिधित्व प्रस्तुत करेगी। यह हाट पीएम विश्वकर्मा योजना के लाभार्थियों के लिए बाज़ार तक पहुँच बढ़ाने, दृश्यता में सुधार करने तथा सतत आजीविका के अवसर सृजित करने का प्रयास है। इसके अतिरिक्त, विदेशी मिशनों के प्रतिनिधियों को भी पीएम विश्वकर्मा हाट 2026 में आमंत्रित किया गया है।

प्रदर्शनी में पारंपरिक शिल्पों की एक विस्तृत श्रृंखला, लाइव शिल्प प्रदर्शन और सांस्कृतिक अनुभवों का समावेश होगा, जो “विश्वकर्मा का अभियान, विकसित भारत का निर्माण” की भावना को साकार करेगा। पीएम विश्वकर्मा हाट 2026 कारीगरों को सशक्त बनाने, पारंपरिक कौशलों के संरक्षण और एमएसएमई पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने के प्रति भारत सरकार की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करता है।

पीएम विश्वकर्मा योजना के कारीगरों को ऑनलाइन बाजार तक पहुँच के लिए अमेज़न के साथ समझौते के माध्यम से सशक्त बनाया गया

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सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) मंत्रालय ने Amazon Seller Services Private Ltd. के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिससे PM विश्वकर्मा योजना में पंजीकृत कारीगरों को ऑनलाइन बाजार तक पहुँच प्राप्त होगी, उनके उत्पादों की दृश्यता बढ़ेगी और पूरे भारत में ग्राहक आधार का विस्तार होगा। यह MoU निर्माण भवन, नई दिल्ली में MSME विकास आयुक्त कार्यालय और Amazon टीम द्वारा किया गया।

PM विश्वकर्मा योजना, जिसे 17 सितंबर 2023 को लॉन्च किया गया था, कारीगरों को समग्र सहायता प्रदान करती है। यह योजना कौशल प्रशिक्षण और आधुनिक उपकरणों के माध्यम से उत्पाद की गुणवत्ता सुधारने, बाज़ार पहुंच बढ़ाने, ऋण तक पहुँच सुनिश्चित करने और गुरु-शिष्य परंपरा के तहत पारंपरिक कौशल को सशक्त बनाने पर केंद्रित है।

इस साझेदारी के तहत:

  • Amazon योग्य विश्वकर्मा कारीगरों को अपने ऑनलाइन मार्केटप्लेस पर ऑनबोर्ड करेगा।

  • MoMSME आवश्यक अनुमतियों, पंजीकरण और स्पष्टताओं में सहायता प्रदान करेगा।

  • Amazon के करिगर पहल के माध्यम से हस्तशिल्प उत्पादों की दृश्यता और डिजिटलीकरण को मजबूत किया जाएगा।

यह सहयोग पारंपरिक कारीगरों की उपस्थिति को डिजिटल ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर बढ़ाने, उनके उत्पादों को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करने, और Viksit Bharat और Atmanirbhar Bharat की दृष्टि को साकार करने में महत्वपूर्ण कदम है।

PM विश्वकर्मा योजना के लाभार्थी 10 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली में आयोजित Amazon Smbhav Summit 2025 में भी शामिल हुए, जहां उन्होंने पहल के बारे में जानकारी प्राप्त की और कारीगरों से जुड़ने के अवसरों का पता लगाया।

पीएम विश्वकर्मा योजना 2025: कौशल प्रशिक्षण, ऋण सुविधा और विपणन समर्थन से लाभार्थियों को सशक्त बनाने की पहल

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राष्ट्रीय संचालन समिति (NSC) पीएम विश्वकर्मा योजना के कार्यान्वयन की सर्वोच्च संस्था है। इस समिति की बैठकें कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (MSDE), सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) और वित्तीय सेवा विभाग (DFS) के सचिव द्वारा सह-अध्यक्षता में आयोजित की जाती हैं।

10 अक्टूबर 2025 को हुई पिछली NSC बैठक में कई प्रस्ताव और नीतिगत उपाय स्वीकृत किए गए। इनमें शामिल हैं:

  • उन्नत कौशल प्रशिक्षण के लिए पात्रता मानदंड का निर्धारण

  • ऋण स्वीकृति और वितरण में सुधार जैसे लंबित आवेदन पुनः देखना, छोटे ऋण (₹50,000–₹1,00,000) उपलब्ध कराना ताकि EMI बोझ कम हो, 716 जिलों में जागरूकता शिविरों में बैंक अधिकारियों की भागीदारी सुनिश्चित करना, और कौशल प्रशिक्षण केंद्रों में वित्तीय सलाह हेतु एक दिन बैंक अधिकारियों की उपस्थिति

ऋण आवेदनों की समीक्षा और पुनर्विचार

  • शाखा स्तर पर अस्वीकृत आवेदनों के लिए अपील और पुनः समीक्षा की व्यवस्था है

  • DFS ने बैंकों को निर्देश दिया है कि वे उन लाभार्थियों से लिखित पुष्टि लें जो ऋण लेने से इंकार करते हैं

  • बैंकों को जिला/राज्य स्तर पर समितियाँ बनाने का निर्देश भी दिया गया है, ताकि असंपर्क या अस्वीकृति वाले मामलों को पुनः सम्पर्क किया जा सके

  • लाभार्थियों तक संदेश 12 क्षेत्रीय भाषाओं में भेजे जा रहे हैं और कॉल सेंटर के माध्यम से संपर्क किया जा रहा है

  • जो लाभार्थी प्रारंभ में ऋण विकल्प नहीं चुनते, वे PM Vishwakarma पोर्टल या नजदीकी CSC के माध्यम से ऋण ले सकते हैं

तीन-स्तरीय सत्यापन प्रक्रिया

  1. ग्राम पंचायत/शहरी स्थानीय निकाय स्तर पर सत्यापन

  2. जिला कार्यान्वयन समिति (DIC) द्वारा सत्यापन और सिफारिश, जिसका अध्यक्ष जिला कलेक्टर

  3. MSME DFO, SLBC सदस्य और MSDE सदस्य की अध्यक्षता में स्क्रीनिंग समिति द्वारा अनुमोदन

योजना के तहत 30 लाख लाभार्थियों को 5 वर्षों (FY 2023-24 से FY 2027-28) के लिए कवर करने का लक्ष्य रखा गया था, जिसे सफलतापूर्वक पूरा किया गया है। इसके माध्यम से लाभार्थियों को कौशल प्रशिक्षण, ऋण, टूलकिट, प्रोत्साहन और विपणन सहायता प्रदान की जा रही है।

बाजार एवं विपणन समर्थन

  • राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के लाभार्थियों के लिए ट्रेड फेयर्स और राज्य स्तर के प्रदर्शनियों में भागीदारी

  • ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स (ONDC, Fabindia, Meesho, GeM) के माध्यम से ऑनलाइन विपणन सहायता

  • दिल्ली हाट में राष्ट्रीय स्तर की ट्रेड फेयर/प्रदर्शनी आयोजित

  • उत्पादों के डिज़ाइन, विविधीकरण, ब्रांडिंग और पैकेजिंग के लिए NID, IIP, IRMA जैसी संस्थाओं के माध्यम से मूल्य संवर्धन

  • प्रमुख शहरों में PM Vishwakarma एम्पोरियम/हाट स्थापित करने की योजना

यह जानकारी सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री राज्य मंत्री (सुश्री शोभा करंदलाजे) ने लोकसभा में लिखित उत्तर में दी।

MSME मंत्रीमंडल ने उपराष्ट्रपति को प्रस्तुत की क्षेत्र की प्रगति और योजनाओं की विस्तृत जानकारी

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केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) मंत्री जीतन राम मांझी और राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आज संसद भवन में भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन से मुलाकात की।

बैठक के दौरान उपराष्ट्रपति को सूचित किया गया कि MSME क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था का एक अत्यंत सशक्त, जीवंत और गतिशील स्तंभ बनकर उभरा है।

उन्हें बताया गया कि यह क्षेत्र आर्थिक वृद्धि, रोजगार सृजन, उद्यमिता विकास, जनसशक्तिकरण और पर्यावरणीय स्थिरता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

उपराष्ट्रपति को उद्यम पंजीकरण पोर्टल के माध्यम से उद्यमों के औपचारिकरण पर मंत्रालय के विशेष जोर के बारे में भी अवगत कराया गया, जिससे पहचान मजबूत होती है और कारोबार करने में सुगमता बढ़ती है।

मंत्रालय ने MSME क्षेत्र, विशेषकर खादी, ग्राम एवं कोयर उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए अपने प्रमुख कदमों का विवरण दिया, जिनमें ऋण सहायता, तकनीकी सहायता, अवसंरचना विकास, कौशल विकास एवं प्रशिक्षण, प्रतिस्पर्धा में वृद्धि और बाज़ार सहायता जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान है।

उन्हें प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना, क्रेडिट गारंटी योजना, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP), माइक्रो और स्मॉल एंटरप्राइज क्लस्टर डेवलपमेंट प्रोग्राम (MSE-CDP), MSME के लिए सार्वजनिक खरीद नीति तथा महिला एवं एससी/एसटी उद्यमियों को बढ़ावा देने वाली पहलों के बारे में जानकारी दी गई। मंत्रालय की ‘विकसित भारत’ की दृष्टि के अनुरूप योजनाओं पर भी चर्चा की गई।

उपराष्ट्रपति ने MSME मंत्रालय के प्रयासों की सराहना की, बजटीय सहायता में वृद्धि और उद्यमियों को बढ़ते ऋण प्रवाह पर संतोष व्यक्त किया, और प्रधानमंत्री विश्वकर्मा सहित अन्य योजनाओं की देशभर में सफल क्रियान्वयन की प्रशंसा की।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि MSME क्षेत्र देश में दूसरा सबसे बड़ा रोजगार प्रदाता है, और इसकी समृद्ध विरासत तथा विशाल अप्रयुक्त क्षमता को ध्यान में रखते हुए अवसंरचना विकास, कौशल वृद्धि और आर्थिक रूप से पिछड़े क्षेत्रों में प्रशिक्षण संस्थानों की स्थापना जैसे लक्षित उपायों से इसे लगातार सशक्त बनाया जाना चाहिए।

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