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वस्त्र मंत्रालय की सचिव नीलम शामी राव ने मुंबई में प्रमुख वस्त्र कार्यक्रमों और उद्योग पहलों की समीक्षा की

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वस्त्र मंत्रालय की सचिव और वस्त्र समिति की अध्यक्ष, नीलम शामी राव ने मुंबई में दो दिवसीय विस्तृत दौरे की शुरुआत की, जिसमें मंत्रालय के विभिन्न संगठनों के चल रहे कार्यक्रमों, संस्थागत प्रदर्शन और नीतिगत कार्यान्वयन की प्रगति की समीक्षा की गई। पहले दिन का फोकस हथकरघा और संबंधित क्षेत्रों पर रहा, जिसमें उनके साथ डॉ. एम. बीना, विकास आयुक्त (हथकरघा) थीं।

इस दौरान सचिव ने महाराष्ट्र सरकार की प्रधान सचिव (वस्त्र),अंशु सिन्हा, IAS, और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की, जिसमें राज्य और केंद्र योजनाओं के समन्वय और महाराष्ट्र में इस क्षेत्र की वृद्धि को प्रभावित करने वाली चुनौतियों पर चर्चा की गई।

वस्त्र समिति में राव ने संगठन की गतिविधियों की समीक्षा की, जो वस्त्र समिति अधिनियम, 1963 के अंतर्गत संचालित होती हैं। उन्होंने गतिविधियों को पुनर्गठित करने और प्राथमिकताओं को पुनःनिर्धारित करने की आवश्यकता पर जोर दिया ताकि उद्योग और सरकार के उद्देश्यों को समर्थन मिल सके। उन्होंने समिति की भूमिका को उद्योग और सरकार के बीच एक सेतु के रूप में बताते हुए नीति हस्तक्षेप को प्रभावी बनाने के लिए इनपुट देने पर बल दिया।

इसके बाद सचिव ने सिंथेटिक और आर्ट सिल्क मिल्स रिसर्च एसोसिएशन (SASMIRA) का दौरा किया, जहां तकनीकी वस्त्र, मानव निर्मित रेशे और हरित नवाचारों में चल रहे अनुसंधान और विकास की समीक्षा की गई। उन्होंने SASMIRA के प्रशिक्षण, औद्योगिक परीक्षण और क्षमता निर्माण में योगदान की सराहना की और अनुसंधान को वैश्विक स्थिरता और रीसाइक्लिंग लक्ष्यों के साथ संरेखित करने पर जोर दिया।

विकास आयुक्त (हथकरघा) के कार्यालय के वीवर सर्विस सेंटर (WSC) में राव और डॉ. बीना ने राष्ट्रीय हथकरघा विकास कार्यक्रम, क्लस्टर विकास कार्यक्रम और विपणन पहल जैसे प्रमुख योजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने तकनीक के एकीकरण, ई-कॉमर्स के प्रचार और भारत के हथकरघा उत्पादों की घरेलू और अंतरराष्ट्रीय पहुंच बढ़ाने के महत्व को उजागर किया।

सचिव ने कॉटन टेक्सटाइल्स एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (TEXPROCIL) और मैन-मेड टेक्सटाइल्स एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (MATEXIL) का भी दौरा किया, जहां उन्होंने निर्यात प्रतिस्पर्धा, बाजार विविधीकरण, स्थिरता-आधारित निर्यात मॉडल और वैश्विक दृश्यता बढ़ाने की रणनीतियों पर चर्चा की।

संध्या में, राव ने टेक्सटाइल कमिश्नर कार्यालय में प्रमुख योजनाओं जैसे पीएम MITRA पार्क्स, उत्पादन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना और SAMARTH कौशल विकास योजना की समीक्षा की। दिन का समापन उन्होंने प्रमुख उद्योग संगठनों के साथ बैठक कर नीतिगत फीडबैक, स्थिरता पहल और निवेश प्रोत्साहन पर चर्चा करते हुए किया।


भारत–यूके टेक्निकल टेक्सटाइल्स साझेदारी : नवाचार, स्थिरता और नए अवसर

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भारत के वस्त्र मंत्रालय की सचिव नीलम शमी राव के नेतृत्व में एक उच्च-स्तरीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने यूनाइटेड किंगडम के मैनचेस्टर में आयोजित टेक्निकल टेक्सटाइल्स रोडशो में भारत की तकनीकी वस्त्र क्षेत्र में बढ़ती ताक़त का प्रदर्शन किया। इस प्रतिनिधिमंडल में मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और मानव-निर्मित फाइबर, तकनीकी वस्त्र तथा अन्य प्रमुख क्षेत्रों के प्रतिनिधि, जिनमें TEXPROCIL भी शामिल था, मौजूद रहे। इसने भारत की मजबूत क्षमता और नवाचार-आधारित, टिकाऊ विकास के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।

सचिव का संबोधन — नवाचार, स्थिरता और CETA

मुख्य संबोधन में नीलम शमी राव ने कहा कि तकनीकी वस्त्र भारत के सबसे तेज़ी से बढ़ते क्षेत्रों में से एक हैं, जिन्हें अनुसंधान एवं विकास, उन्नत विनिर्माण और परिपत्र अर्थव्यवस्था (Circular Economy) की प्रथाओं से गति मिल रही है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन (NTTM) के अंतर्गत भारत सतत विकास, ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग और अपशिष्ट कम करने पर केंद्रित है, जिससे वैश्विक प्रतिस्पर्धा में दीर्घकालिक मजबूती मिलेगी।

उन्होंने कहा कि भारत–यूके Comprehensive Economic and Trade Agreement (CETA) एक “विन–विन फ्रेमवर्क” है — यूके को सुरक्षित और सतत स्रोत तथा तकनीकी साझेदारी का अवसर मिलेगा, जबकि भारत को बेहतर बाज़ार पहुंच, शुल्क में कटौती, मानकों की आपसी मान्यता और निवेशकों का विश्वास प्राप्त होगा। उन्होंने यूके के रिटेलर्स और औद्योगिक उपयोगकर्ताओं से भारत की किफायती और नवाचार-आधारित इकोसिस्टम के साथ मिलकर लचीली और सतत आपूर्ति श्रृंखलाएँ (supply chains) बनाने का आग्रह किया।

रणनीतिक सहभागिता

प्रतिनिधिमंडल ने मैनचेस्टर मेट्रोपॉलिटन यूनिवर्सिटी के मैनचेस्टर फ़ैशन इंस्टीट्यूट और ग्राफीन इंजीनियरिंग इनोवेशन सेंटर का दौरा किया, ताकि उन्नत सामग्री, सतत तकनीकी वस्त्र और परिपत्र फैशन मॉडल्स में सहयोग की संभावनाओं की खोज की जा सके।

भारत का तकनीकी वस्त्र निर्यात झलक (वित्त वर्ष 2024–25)

  • वैश्विक निर्यात: 2.92 बिलियन अमेरिकी डॉलर

  • प्रमुख श्रेणियाँ: पैकटेक (37.5%), इंडुटेक (28%)

  • यूके को निर्यात: 136 मिलियन अमेरिकी डॉलर (4.7% हिस्सा)

आगे की राह

यह दौरा भारत और यूके के बीच व्यापार के अधिक अवसर, संयुक्त उपक्रम, निवेश और तकनीकी साझेदारी को प्रोत्साहित करने की उम्मीद जगाता है। पीएम मित्रा मेगा टेक्सटाइल पार्क्स, उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना और NTTM जैसी प्रमुख योजनाएँ विश्वस्तरीय अवसंरचना और अनुकूल कारोबारी माहौल तैयार कर रही हैं। CETA के अंतर्गत मिलने वाले बाज़ार पहुंच लाभों के साथ भारत 2030 तक अपने वस्त्र निर्यात को दोगुना करने की दिशा में अग्रसर है, और एक पारस्परिक रूप से लाभकारी, सतत और भविष्य-उन्मुख भारत–यूके वस्त्र व्यापार साझेदारी को मज़बूत कर रहा है।


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