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PM-KUSUM योजना के तहत किसानों और FPOs को मिली बड़ी सफलता

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पीएम-कुसुम योजना एक मांग आधारित योजना है। इसकी क्षमता आवंटन उन राज्यों को प्राप्त मांग और प्रगति के आधार पर किया जाता है। योजना में किसान, किसानों के समूह, किसान उत्पादक संगठन (FPO), जल उपयोगकर्ता संघ (WUA), प्राथमिक कृषि क्रेडिट सोसायटी (PACS) आदि भाग ले सकते हैं।

यह योजना सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू की जा रही है। 30 नवंबर 2025 तक राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में योजना की स्थापना प्रगति (Annexure-I) के अनुसार है।

योजना के तहत लाभार्थियों की संख्या, जिसमें FPO शामिल हैं, Annexure-II में दी गई है।

30 नवंबर 2025 तक PM-KUSUM योजना के सभी घटकों के तहत कुल 10,203 मेगावाट सौर ऊर्जा स्थापित की जा चुकी है।

योजना के तहत वित्तीय सहायता राज्यों की मांग, SIAs द्वारा रिपोर्ट की गई प्रगति और योजना की दिशानिर्देशों के अनुसार जारी की जाती है। अब तक राज्यों से प्राप्त मांग के अनुसार ₹7,106 करोड़ जारी किए जा चुके हैं।

योजना के क्रियान्वयन को सरल बनाने के लिए मंत्रालय ने 17 जनवरी 2024 को व्यापक संशोधित दिशानिर्देश जारी किए।

दिशानिर्देशों के अनुसार लघु और सीमांत किसानों तथा सूक्ष्म सिंचाई तकनीक का उपयोग करने वाले किसानों को प्राथमिकता दी जाती है।

योजना की पहुंच बढ़ाने के लिए मंत्रालय समय-समय पर व्यापक जागरूकता और क्षमता निर्माण कार्यशालाएँ आयोजित करता है। इसमें राज्यों के साथ समीक्षा बैठक और मार्गदर्शन भी शामिल हैं।

यह जानकारी संयुक्त राज्य मंत्री, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा श्रिपाद यसो नाइक द्वारा लोकसभा में लिखित उत्तर में दी गई।

Annexure-II: PM-KUSUM योजना के तहत लाभार्थियों की संख्या (30.11.2025 तक)

  • S.No   राज्य/केंद्र शासित प्रदेश कुल लाभार्थी (FPO सहित)
    Arunachal Pradesh     616
    Assam 151
    Chhattisgarh 9
    Goa 859
    Gujarat 2,28,504
    Haryana 1,80,582
    Himachal Pradesh 1,193
    Jammu & Kashmir 3,601
    Jharkhand 43,693
    Karnataka 60,387
    Kerala 13,489
    Ladakh 102
    Madhya Pradesh 37,689
    Maharashtra 11,21,416
    Manipur 150
    Meghalaya 98
    Mizoram 40
    Nagaland 140
    Odisha 10,113
    Punjab 17,592
    Rajasthan 2,35,924
    Tamil Nadu 4,950
    Tripura 7,061
    Uttar Pradesh 72,417
    Uttarakhand 1,663
    West Bengal 20
  • कुल लाभार्थी: 20,42,459


भारत में सौर ऊर्जा का सशक्त विकास: 2025 में 129 GW क्षमता और वैश्विक नेतृत्व

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मुख्य बिंदु:

  • भारत की सौर क्षमता 2014 के 3 GW से बढ़कर 2025 में 129 GW हो गई।

  • गैर-जीवाश्म ऊर्जा 500 GW कुल क्षमता का 50% पार कर चुकी है।

  • PM Surya Ghar योजना के तहत 22.65 लाख घरों को रूफटॉप सोलर पैनल के माध्यम से मुफ्त बिजली प्राप्त हुई।

  • PM-KUSUM योजना के तहत 9.2 लाख सोलर पंप किसानों को दिए गए, जिससे कृषि में स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग बढ़ा।

भारत का सौर ऊर्जा सफर:

भारत ने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) का मुख्यालय गुरुग्राम में स्थापित कर वैश्विक सौर ऊर्जा में नेतृत्व सुनिश्चित किया है। 2025 में आयोजित 8वीं ISA असेंबली में 125 से अधिक देशों के मंत्री और प्रतिनिधि शामिल हुए।

पंचामृत ढांचा और लक्ष्य:

  1. 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता।

  2. 2030 तक कुल बिजली क्षमता का 50% गैर-जीवाश्म स्रोतों से।

  3. 2030 तक कुल कार्बन उत्सर्जन में 1 बिलियन टन की कटौती।

  4. 2030 तक अर्थव्यवस्था की कार्बन तीव्रता में 45% कमी (2005 के स्तर के मुकाबले)।

  5. 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन।

नीतिगत पहल और योजनाएं:

  • PM Surya Ghar: 1 करोड़ घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम, हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली।

  • राष्ट्रीय सौर मिशन (NSM): 2025 तक 129.92 GW सौर ऊर्जा स्थापित।

  • PLI योजना: घरेलू उच्च दक्षता सोलर मॉड्यूल के उत्पादन के लिए ₹24,000 करोड़ का प्रोत्साहन।

  • PM-KUSUM: किसानों के लिए सोलर पंप, भूमि पर सौर ऊर्जा संयंत्र।

  • सोलर पार्क और अल्ट्रा-मेगा सोलर परियोजनाएं: 55 सोलर पार्क, 39,973 MW क्षमता।

वैश्विक सहयोग और नेतृत्व:

  • भारत ने OSOWOG (One Sun, One World, One Grid) पहल के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय ग्रिड कनेक्शन का प्रस्ताव रखा।

  • ISA 8वीं असेंबली में “एक सूरज, एक विश्व, एक ग्रिड” दृष्टिकोण को बल मिला।

  • G20 और IEA ने भारत की क्लीन एनर्जी लीडरशिप की सराहना की।

निष्कर्ष:

भारत की सौर ऊर्जा यात्रा दिखाती है कि नीति, तकनीकी नवाचार और वैश्विक सहयोग से ऊर्जा संक्रमण को तेजी से आगे बढ़ाया जा सकता है। सौर ऊर्जा न केवल भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का आधार है, बल्कि यह आर्थिक विकास, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक जलवायु नेतृत्व का भी प्रेरक है।

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