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कारगिल विजय दिवस: वीरता, बलिदान और राष्ट्रगौरव का अमर प्रतीक

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नई दिल्ली- आज पूरा देश 27वां कारगिल विजय दिवस गर्व और श्रद्धा के साथ मना रहा है। यह दिन उन वीर सैनिकों के अदम्य साहस, अद्वितीय शौर्य और सर्वोच्च बलिदान को नमन करने का अवसर है, जिन्होंने 1999 के कारगिल युद्ध में दुर्गम पहाड़ियों पर दुश्मन को परास्त कर भारत की विजय सुनिश्चित की। इस अवसर पर देशभर में शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई और उनकी वीरगाथाओं को याद किया गया।

कारगिल युद्ध भारतीय सैन्य इतिहास के सबसे गौरवशाली अध्यायों में से एक माना जाता है। ऑपरेशन विजय के तहत भारतीय सेना ने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और विपरीत मौसम के बावजूद अद्भुत साहस का परिचय देते हुए नियंत्रण रेखा (LoC) पर रणनीतिक चोटियों को दुश्मन के कब्जे से मुक्त कराया। इस ऐतिहासिक विजय ने दुनिया को भारतीय सैनिकों की वीरता और अटूट संकल्प का परिचय कराया।

कारगिल विजय दिवस केवल एक सैन्य जीत का उत्सव नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति, कर्तव्यनिष्ठा और बलिदान की भावना का प्रतीक है। इस युद्ध में कैप्टन विक्रम बत्रा, कैप्टन मनोज कुमार पांडेय सहित अनेक वीर जवानों ने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। उनका अद्वितीय साहस आज भी देश के युवाओं को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करता है।

इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने कहा कि कारगिल के वीर सैनिकों का साहस और राष्ट्र के प्रति उनका समर्पण सदैव देशवासियों को प्रेरित करता रहेगा। वहीं रक्षा मंत्री ने द्रास स्थित कारगिल युद्ध स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए भारतीय सशस्त्र बलों की क्षमता और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।

आज का दिन हर भारतीय को यह संदेश देता है कि राष्ट्र की सुरक्षा, एकता और अखंडता सर्वोपरि है। कारगिल के अमर शहीदों का बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा और भारत उनके ऋण को कभी नहीं भूल पाएगा।

कारगिल विजय दिवस 2026 के उपलक्ष्य में 'शौर्य विजय यात्रा' का शुभारंभ

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कारगिल विजय दिवस 2026 के राष्ट्रव्यापी आयोजन के अंतर्गत रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 14 जुलाई 2026 को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय समर स्मारक से 13 दिवसीय ‘शौर्य विजय यात्रा’ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह स्मारक मोटरसाइकिल अभियान द्रास (लद्दाख) स्थित कारगिल युद्ध स्मारक तक जाएगा।

इस अभियान में 28 मोटरसाइकिल सवार, जिनमें सेवारत एवं सेवानिवृत्त रक्षा कर्मी तथा उनके परिवार के सदस्य शामिल हैं, लगभग 1,900 किलोमीटर की कठिन हिमालयी यात्रा तय करेंगे। इस यात्रा का उद्देश्य 1999 के कारगिल युद्ध में देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करना है। इस अभियान का ध्येय वाक्य है—"One Ride, One Nation, One Salute" (एक यात्रा, एक राष्ट्र, एक सलाम)।

अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने कारगिल युद्ध के वीर सैनिकों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उन्होंने साहस, धैर्य, अनुशासन और अद्वितीय देशभक्ति का ऐसा स्वर्णिम अध्याय लिखा, जिसे आज भी विश्व की सेनाएँ सम्मान के साथ अध्ययन करती हैं। उन्होंने कहा कि लगभग 20,000 फीट की ऊँचाई और शून्य से 40 डिग्री सेल्सियस नीचे के अत्यंत कठिन मौसम में भारतीय सैनिकों ने अदम्य साहस और दृढ़ संकल्प का परिचय देते हुए दुश्मन के कब्जे से प्रत्येक चोटी, पहाड़ी और बंकर को पुनः प्राप्त किया तथा तिरंगे की आन-बान-शान को कायम रखा। यह विजय भारत के उस अटूट संकल्प का प्रतीक है कि देश की भूमि, अस्मिता और सम्मान पर उठने वाली हर शत्रुतापूर्ण नजर का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।

राजनाथ सिंह ने परमवीर चक्र से सम्मानित कैप्टन विक्रम बत्रा, लेफ्टिनेंट मनोज कुमार पांडेय, सूबेदार मेजर (मानद कैप्टन) योगेंद्र सिंह यादव (सेवानिवृत्त) तथा सूबेदार मेजर (मानद कैप्टन) संजय कुमार (सेवानिवृत्त) सहित सभी वीर सैनिकों के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इन वीरों का जीवन देश के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है और आने वाली पीढ़ियों को भी सदैव प्रेरित करता रहेगा।

यात्रा के दौरान प्रतिभागी चंडीमंदिर युद्ध स्मारक, रेजांग ला युद्ध स्मारक तथा लेह युद्ध स्मारक सहित विभिन्न सैन्य स्मारकों पर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। वे वीर नारियों से भी मिलेंगे और उनके साहस एवं धैर्य का सम्मान करेंगे। यह यात्रा 26 जुलाई 2026, अर्थात कारगिल विजय दिवस के अवसर पर कारगिल युद्ध स्मारक पहुँचकर सम्पन्न होगी।

इस अभियान की एक विशेषता यह है कि यात्री अपने साथ राष्ट्रीय समर स्मारक की पवित्र मिट्टी से भरा एक कलश लेकर चलेंगे, जिसे कारगिल युद्ध स्मारक पर शहीदों की स्मृति में अर्पित किया जाएगा। रक्षा मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय समर स्मारक की यह पवित्र मिट्टी जब कारगिल की पावन धरती से मिलेगी, तब यह वर्तमान पीढ़ी की श्रद्धा और देश के वीरों के अदम्य पराक्रम के पावन संगम का प्रतीक बनेगी।

रक्षा मंत्री ने बताया कि शौर्य विजय यात्रा की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसमें सेवारत सैनिक, पूर्व सैनिक और देश के विभिन्न भागों से आए नागरिक एक साथ भाग ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि भले ही सभी की भाषाएँ, परंपराएँ और पृष्ठभूमियाँ अलग-अलग हों, लेकिन एक तिरंगा, एक राष्ट्र और अपने वीरों के प्रति समान सम्मान ही भारत की वास्तविक पहचान है।

कार्यक्रम में राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) के कैडेट भी उपस्थित थे। रक्षा मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह यात्रा विशेष रूप से युवाओं में राष्ट्रभक्ति की नई चेतना जगाएगी तथा यह संदेश देगी कि देश की स्वतंत्रता और सम्मान की रक्षा केवल सीमाओं पर ही नहीं, बल्कि हमारी स्मृतियों, संस्कारों और मूल्यों में भी होती है।

इस अवसर पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एन. एस. राजा सुब्रमणि, थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

शौर्य विजय यात्रा भारतीय सेना की ऑपरेशन विजय के दौरान प्रदर्शित मूल्यों—कर्तव्य, सम्मान और निःस्वार्थ सेवा—को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। यह अभियान वीर सैनिकों की गौरवगाथा को जन-जन तक पहुँचाते हुए आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रसेवा और बलिदान के आदर्शों के प्रति प्रेरित करने का प्रयास है।

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