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सागर मैत्री–5 मिशन की शुरुआत: INS सागरध्वनि को वैज्ञानिक सहयोग के लिए किया गया रवाना

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भारतीय नौसेना और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की संयुक्त पहल के तहत समुद्री वैज्ञानिक सहयोग को नई ऊंचाई देने के उद्देश्य से INS सागरध्वनि को 17 जनवरी 2026 को कोच्चि स्थित साउदर्न नेवल कमांड से सागर मैत्री (SM-5) मिशन के लिए रवाना किया गया। यह INS सागरध्वनि का सागर मैत्री कार्यक्रम के अंतर्गत पाँचवां अभियान है।

INS सागरध्वनि को हरी झंडी माननीय सांसद एवं संसदीय स्थायी समिति (रक्षा) के अध्यक्ष राधा मोहन सिंह ने दिखाई। इस अवसर पर संसदीय स्थायी समिति के सदस्य, DRDO के सचिव एवं अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत, साउदर्न नेवल कमांड के चीफ ऑफ स्टाफ रियर एडमिरल उपल कुंडू, डीजी (नेवल सिस्टम्स एंड मैटीरियल्स) डॉ. आर. वी. हरा प्रसाद, एनपीओएल के निदेशक डॉ. दुव्वुरी शेषगिरि सहित भारतीय नौसेना और DRDO के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

सागर मैत्री भारतीय नौसेना और DRDO की एक प्रमुख सहयोगात्मक पहल है, जो भारत सरकार की ‘महासागर’ (MAHASAGAR – Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions) परिकल्पना के अनुरूप है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) के देशों के साथ सामाजिक-आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना तथा समुद्री अनुसंधान के क्षेत्र में वैज्ञानिक सहभागिता को सुदृढ़ करना है।

नेवल फिजिकल एंड ओशनोग्राफिक लेबोरेटरी (NPOL), कोच्चि द्वारा सागर मैत्री कार्यक्रम के तहत नियमित रूप से समुद्र विज्ञान मिशन संचालित किए जा रहे हैं, जिससे IOR देशों के बीच क्षमता निर्माण और दीर्घकालिक वैज्ञानिक सहयोग को मजबूती मिल सके। इसी के अंतर्गत DRDO ने ‘MAITRI’ (Marine & Allied Interdisciplinary Training and Research Initiative) नामक वैज्ञानिक घटक की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य समुद्री अनुसंधान एवं विकास में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ाना है।

इस मिशन के तहत INS सागरध्वनि ऐतिहासिक INS कृष्णा के मार्गों का पुनः अनुसरण करेगी, जिसने 1962-65 के दौरान इंटरनेशनल इंडियन ओशन एक्सपेडिशन में भाग लिया था। सागर मैत्री–5 अभियान के अंतर्गत ओमान, मालदीव, श्रीलंका, थाईलैंड, मलेशिया, सिंगापुर, इंडोनेशिया और म्यांमार सहित आठ IOR देशों के साथ वैज्ञानिक सहयोग को सुदृढ़ किया जाएगा। इस चरण में मालदीव के साथ संयुक्त समुद्री अनुसंधान की शुरुआत की जा रही है, जिससे वैज्ञानिकों के बीच व्यावसायिक आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा।

सागर मैत्री मिशन भारतीय नौसेना के लिए अंडरवॉटर डोमेन अवेयरनेस (UDA) को सुदृढ़ करने की दिशा में DRDO का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। अभियान के दौरान INS सागरध्वनि द्वारा समुद्री और ध्वनिक आंकड़े एकत्र किए जाएंगे, जो रणनीतिक और वैज्ञानिक दोनों दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

INS सागरध्वनि एक विशेष समुद्री ध्वनिक अनुसंधान पोत है, जिसे NPOL द्वारा डिजाइन किया गया और गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) द्वारा निर्मित किया गया है। जुलाई 1994 में कमीशन किया गया यह पोत पिछले तीन दशकों से भारत की समुद्री अनुसंधान क्षमताओं को सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभा रहा है।


राष्ट्रीय ध्रुवीय एवं महासागरीय अनुसंधान केंद्र (NCPOR) ने मनाया अंटार्कटिका दिवस, गोवा के राज्यपाल ने किया विशेष डाक टिकट का विमोचन

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अंटार्कटिका दिवस के अवसर पर आज (1 दिसंबर 2025) गोवा के वास्को-द-गामा स्थित राष्ट्रीय ध्रुवीय एवं महासागरीय अनुसंधान केंद्र (NCPOR) में विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर गोवा के माननीय राज्यपाल पुसापति अशोक गजपति राजू मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

राज्यपाल ने कहा कि NCPOR भारत की ध्रुवीय एवं महासागरीय खोजों का प्रमुख केंद्र बन चुका है, जिसने पिछले 25 वर्षों में दुनिया के सबसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भारत की वैज्ञानिक क्षमता को स्थापित किया है।

NCPOR की सिल्वर जुबली पर विशेष डाक टिकट जारी

कार्यक्रम में राज्यपाल ने NCPOR की स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण होने पर विशेष स्मारक डाक टिकट जारी किया। उन्होंने कहा कि यह टिकट भारत सरकार के डाक विभाग द्वारा NCPOR के उल्लेखनीय योगदान का सम्मान है।

अंटार्कटिका का वैश्विक महत्व

राज्यपाल ने कहा—

  • अंटार्कटिका में दुनिया के 70% ताजे पानी का भंडार है।

  • यदि यह पूरी तरह पिघल जाए, तो वैश्विक समुद्र-स्तर में व्यापक वृद्धि हो सकती है।

  • भारत जैसे 1.4 अरब की आबादी वाले देश के लिए इन परिवर्तनों को समझना और उनसे निपटने की तैयारी करना अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने यह भी कहा कि मोदी सरकार द्वारा स्वीकृत नई अनुसंधान स्टेशन ‘मैत्री-II’ और स्वदेशी बर्फ श्रेणी अनुसंधान पोत देश की वैज्ञानिक प्रगति के प्रतीक हैं।

NCPOR के प्रमुख उपलब्धियाँ

NCPOR ने ध्रुवीय क्षेत्रों में भारत के वैज्ञानिक अभियानों का नेतृत्व किया है। संस्थान ने निम्नस्थायी भारतीय अनुसंधान केंद्र स्थापित किए हैं—

  • अंटार्कटिका: दक्षिण गंगोत्री, मैत्री, भारती

  • आर्कटिक: हिमाद्रि

  • हिमालय: हिमांश

भारत सरकार के निरंतर समर्थन पर प्रशंसा

NCPOR के निदेशक डॉ. थम्बन मेलोथ ने अपने संबोधन में कहा कि भारत सरकार हमेशा वैज्ञानिक अभियानों के प्रति प्रतिबद्ध रही है और हालिया स्वीकृतियाँ इसका प्रमाण हैं।

डाक विभाग की भूमिका

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि अमिताभ सिंह, मुख्य डाक महानिदेशक (महाराष्ट्र सर्कल), ने कहा कि यह स्मारक टिकट NCPOR की 25 वर्ष की यात्रा को सम्मानित करने का माध्यम है।



INS Sutlej मॉरीशस में 18वीं संयुक्त हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण हेतु पोर्ट लुई पहुंचा

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भारतीय नौसेना और मॉरीशस के अधिकारियों के बीच समुद्री वैज्ञानिक सहयोग को सुदृढ़ करने हेतु 35,000 वर्ग समुद्री मील क्षेत्र में सर्वेक्षण शुरू

नई दिल्ली – भारतीय नौसेना का विशेष हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण पोत INS Sutlej मॉरीशस के पोर्ट लुई में पहुंचा, ताकि 18वां संयुक्त हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण शुरू किया जा सके।

यह मिशन दोनों देशों के बीच हाइड्रोग्राफी पर लंबे समय से जारी द्विपक्षीय एमओयू के तहत संचालित किया जा रहा है, जिसे इस साल के प्रारंभ में आयोजित 14वें संयुक्त समिति बैठक में हस्ताक्षरित किया गया था।

वर्तमान सर्वेक्षण मिशन लगभग 35,000 वर्ग समुद्री मील के विस्तृत क्षेत्र को कवर करेगा। क्षमता निर्माण प्रयासों के हिस्से के रूप में, मॉरीशस के विभिन्न मंत्रालयों के अधिकारी पोत पर सवार होंगे और हाइड्रोग्राफिक डेटा संग्रह और प्रसंस्करण में व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे।

INS Sutlej का मॉरीशस में परिनियोजन दोनों देशों की उन्नत वैज्ञानिक सहयोग और रणनीतिक समुद्री संबंधों के प्रति साझा प्रतिबद्धता का पुनःसत्यापन करता है। यह गहन समुद्री सहयोग को दर्शाता है, जिसका उद्देश्य नेविगेशनल सुरक्षा, समुद्री संसाधनों का सतत प्रबंधन और भारतीय महासागर क्षेत्र में क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देना है।



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