Media24Media.com: #NoPaperLeak

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label #NoPaperLeak. Show all posts
Showing posts with label #NoPaperLeak. Show all posts

लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षाओं में नकल रोकने के लिए संशोधन विधेयक 2026 पेश, सजा और जुर्माने होंगे और कड़े

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि यह विधेयक परीक्षा संबंधी अनियमितताओं पर प्रभावी रोक लगाने और देश के विद्यार्थियों एवं युवाओं के हितों की रक्षा के लिए कानूनी व्यवस्था को और मजबूत करेगा।

उन्होंने कहा कि यह विधेयक छात्रों के भविष्य की सुरक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस संकल्प को दर्शाता है कि देश के युवाओं के सपनों से किसी भी तरह का समझौता नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने इसे भारत की सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली की निष्पक्षता और विश्वसनीयता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पिछले कई वर्षों में विभिन्न राज्यों में प्रश्नपत्र लीक और परीक्षा संबंधी गड़बड़ियों की घटनाओं ने एक व्यापक राष्ट्रीय कानून की आवश्यकता को उजागर किया। इसी उद्देश्य से वर्ष 2024 में सार्वजनिक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम लागू किया गया था, जो इस तरह की अनियमितताओं से निपटने वाला देश का पहला व्यापक कानून है। अब इसके क्रियान्वयन के अनुभव के आधार पर इसे और अधिक सख्त तथा प्रभावी बनाने के लिए संशोधन प्रस्तावित किया गया है।

उन्होंने बताया कि यह कानून यूपीएससी (UPSC), कर्मचारी चयन आयोग (SSC), रेलवे भर्ती बोर्ड (RRBs), बैंकिंग कार्मिक चयन संस्थान (IBPS) तथा उच्च शिक्षा प्रवेश परीक्षाओं का आयोजन करने वाली राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) जैसी प्रमुख संस्थाओं द्वारा आयोजित परीक्षाओं पर लागू होता है। वर्ष 2024 के कानून में ऐसे अपराधों को संज्ञेय, गैर-जमानती और गैर-समझौतायोग्य बनाया गया था।

संशोधन विधेयक के प्रमुख प्रावधान

  • परीक्षा में अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने वालों के लिए सजा 3–5 वर्ष से बढ़ाकर 5–10 वर्ष करने का प्रस्ताव।

  • अधिकतम जुर्माना 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये करने का प्रस्ताव।

  • दोषी सेवा प्रदाताओं (Service Providers) पर अधिकतम जुर्माना 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये तथा सार्वजनिक परीक्षाओं के संचालन से प्रतिबंध की अवधि 4 वर्ष से बढ़ाकर 8 वर्ष करने का प्रस्ताव।

  • सेवा प्रदाताओं के निदेशकों और वरिष्ठ प्रबंधन के लिए सजा 5–10 वर्ष तथा अधिकतम जुर्माना 5 करोड़ रुपये तक करने का प्रस्ताव।

  • संगठित परीक्षा अपराधों के मामलों में सजा 7–10 वर्ष तथा अधिकतम जुर्माना 10 करोड़ रुपये तक बढ़ाने का प्रावधान।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों की स्थापना का भी प्रावधान किया गया है। विधेयक के अनुसार जांच दो महीने के भीतर पूरी होगी और आरोपपत्र दाखिल होने के तीन महीने के भीतर मुकदमे का निपटारा किया जाएगा। साथ ही, केंद्र सरकार को ऐसे मामलों की जांच विशेष कार्यबल (Special Task Force) को सौंपने का अधिकार भी दिया गया है।

उन्होंने सदन को बताया कि सरकार कई स्थानों पर विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों की स्थापना की प्रक्रिया पहले ही शुरू कर चुकी है। उन्होंने प्रधानमंत्री द्वारा सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली को "लीक-प्रूफ" बनाने के लिए गठित उच्च स्तरीय टास्क फोर्स का भी उल्लेख किया और कहा कि परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने संबंधी समिति की सिफारिशों को लागू करने में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।

अपने संबोधन के अंत में डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रस्तावित संशोधन संगठित परीक्षा अपराधों पर प्रभावी रोक लगाएंगे, त्वरित न्याय सुनिश्चित करेंगे तथा देश की सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली की निष्पक्षता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता में जनता का विश्वास और मजबूत करेंगे।

Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.