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श्री सत्य साईं संजीवनी अस्पताल, में “साक्ष्य आधारित स्तनपान प्रबंधन” प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित

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आरंग- 19 सितंबर को श्री सत्य साईं संजीवनी अस्पताल, नवा रायपुर में नेशनल नियोनेटोलॉजी फोरम द्वारा साक्ष्य आधारित स्तनपान प्रबंधन विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण  में छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों से आए स्वास्थ्य कर्मियों एवं चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े प्रतिभागियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम का उद्देश्य स्वास्थ्यकर्मियों को स्तनपान से संबंधित नवीनतम वैज्ञानिक एवं साक्ष्य आधारित जानकारी प्रदान करना तथा माताओं एवं नवजात शिशुओं को बेहतर स्तनपान सहायता एवं परामर्श उपलब्ध कराने के लिए उनकी क्षमता को और मजबूत करना था।प्रशिक्षण में देश के प्रतिष्ठित एवं अनुभवी राष्ट्रीय प्रशिक्षकों डॉ. ओमेश खुराना, डॉ. जयन्ती जे. एवं डॉ. सपना ठाकुर द्वारा प्रतिभागियों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षण के दौरान स्तनपान प्रबंधन, नवजात शिशुओं के लिए स्तनपान के महत्व तथा माताओं को प्रभावी स्तनपान सहायता प्रदान करने से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं पर व्यावहारिक एवं साक्ष्य आधारित जानकारी साझा की गई।

श्री सत्य साईं संजीवनी अस्पताल को इस महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए चुना जाना विशेष महत्व रखता है। अस्पताल को  (BPNI) द्वारा “Breastfeeding Friendly Hospital” के रूप में मान्यता प्राप्त है। अस्पताल में माताओं एवं नवजात शिशुओं के हित में स्तनपान को बढ़ावा देने, उसकी सुरक्षा एवं समर्थन के लिए निर्धारित WHO के “10 Steps to Successful Breastfeeding”का पालन किया जाता है।

अस्पताल का उद्देश्य प्रत्येक नवजात को जीवन की सर्वोत्तम शुरुआत प्रदान करना तथा माताओं को स्तनपान के लिए आवश्यक वैज्ञानिक जानकारी, सहयोग एवं मार्गदर्शन उपलब्ध कराना है। इसी दिशा में स्वास्थ्यकर्मियों के ज्ञान एवं कौशल को निरंतर सुदृढ़ करने के लिए इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के विभिन्न स्थानों से स्वास्थ्य क्षेत्र के प्रतिभागियों की सहभागिता रही। NNF द्वारा आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रदेश में *साक्ष्य आधारित स्तनपान प्रथाओं को मजबूत करने और मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रहा।

विशेष लेख-नवजात का पहला सुरक्षा कवच- स्तनपान और इसका सामाजिक महत्व

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माँ का दूध नवजात शिशु की प्रतिरक्षा की पहली खुराक है 

अमृत तुल्य है माँ का पहला गाढ़ा पीला दूध                                             रायपुर- विश्व स्तनपान सप्ताह हर साल 1 से 7 अगस्त तक मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य शिशु के स्वास्थ्य के लिए माँ के दूध के महत्व के बारे में लोगों को जागरूक करना है। जन्म के पहले घंटे के भीतर स्तनपान शुरू करना और शुरुआती छह महीने तक केवल माँ का दूध ही देना बच्चे के लिए सबसे जरूरी है। स्तनपान के दौरान त्वचा से त्वचा का संपर्क मां और बच्चे के बीच भावनात्मक बंधन को मजबूत करता है, जिससे आराम, गर्माहट और सुरक्षा की भावना मिलती है जो स्वस्थ भावनात्मक विकास में सहायक होती है।

स्तनपान शिशुओं को जानलेवा संक्रमणों से बचाती है

हर साल 1 अगस्त से 7 अगस्त तक दुनिया भर में विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया जाता है। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य माताओं और समाज को शिशुओं के स्वास्थ्य के लिए स्तनपान के महत्व के प्रति जागरूक करना है। विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूनिसेफ के अनुसार, शिशु के जन्म के बाद पहला घंटा और शुरुआती छह महीने उसका पूरा जीवन संवारने में सबसे निर्णायक भूमिका निभाते हैं।   स्तनपान करने वाले शिशुओं में दस्त, निमोनिया, कान के संक्रमण और कुछ श्वसन संबंधी संक्रमण जैसी आम बचपन की बीमारियों का खतरा कम होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, इष्टतम स्तनपान शिशुओं को जानलेवा संक्रमणों से बचाकर विश्व स्तर पर प्रतिवर्ष लाखों शिशु मृत्यु को रोकने की क्षमता रखता है। 

अमृत तुल्य है पहला गाढ़ा पीला दूध (कोलस्ट्रम)

जन्म के पहले कुछ घंटों में, माँ का दूध सिर्फ़ भोजन नहीं होता, बल्कि यह नवजात शिशु की प्रतिरक्षा की पहली खुराक होती है, जो सीधे माँ के शरीर से बच्चे तक पहुँचती है। जन्म के बाद का पहला घंटा, जिसे अक्सर गोल्डन आवर कहा जाता है, स्तनपान शुरू करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान बच्चे स्वाभाविक रूप से सतर्क रहते हैं और सहज रूप से स्तन की तलाश करते हैं। त्वचा से त्वचा का शुरुआती संपर्क न केवल सफल स्तनपान की दर को बढ़ाता है, बल्कि बच्चे के तापमान, हृदय गति और रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में भी मदद करता है।

शिशु के जन्म के तुरंत बाद (एक घंटे के भीतर) मां का पहला गाढ़ा पीला दूध, जिसे कोलस्ट्रम कहा जाता है, बच्चे का पहला प्राकृतिक टीका होता है। इसमें भरपूर मात्रा में एंटीबॉडीज, प्रोटीन और विटामिन होते हैं, जो नवजात शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूती प्रदान करते हैं और उसे विभिन्न प्रकार के संक्रमणों से बचाते हैं।

शुरुआती 6 महीने केवल और केवल मां का दूध

चिकित्सकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की स्पष्ट सलाह है कि जन्म से लेकर 6 महीने की उम्र तक बच्चे को केवल मां का दूध ही देना चाहिए। इस अवधि के दौरान बच्चे को पानी, ऊपर का दूध या शहद जैसी चीजें देने की बिल्कुल भी आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि मां के दूध में बच्चे की प्यास और भूख बुझाने के लिए सही अनुपात में पानी और सभी आवश्यक पोषक तत्व मौजूद होते हैं। 6 महीने पूरे होने के बाद, स्तनपान जारी रखते हुए बच्चे को धीरे-धीरे ऊपरी पौष्टिक आहार देना शुरू किया जा सकता है, जिसे 2 साल या उससे अधिक समय तक जारी रखा जा सकता है।

स्तनपान के बहुआयामी लाभ

शिशु के लिए स्वास्थ्य वरदान है, स्तनपान कराने से बच्चों में दस्त, निमोनिया, कान के संक्रमण और कुपोषण का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है। अध्ययनों से सिद्ध हुआ है कि स्तनपान करने वाले बच्चों का बौद्धिक विकास और मानसिक स्वास्थ्य अन्य बच्चों की तुलना में बेहतर होता है। यह आगे चलकर बच्चों में मोटापा, डायबिटीज और अस्थामा जैसी क्रोनिक बीमारियों की संभावना को घटाता है।

मां के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद

स्तनपान कराने से माताओं में स्तन कैंसर और अंडाशय के कैंसर का जोखिम कम होता है। यह प्रसव के बाद वजन घटाने और गर्भाशय को पुनः सामान्य आकार में लाने में मदद करता है। मां और बच्चे के बीच एक भावनात्मक और अटूट संबंध  स्थापित होता है।

समाज और परिवार की जिम्मेदारीस्तनपान केवल एक मां की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह परिवार और समाज की साझी जिम्मेदारी है। अक्सर देखा जाता है कि जानकारी के अभाव, सामाजिक रूढ़ियों, या कामकाजी माहौल में सुविधाओं की कमी के कारण महिलाएं समय पर स्तनपान नहीं करा पातीं। प्रसव के बाद मां को सही पोषण, मानसिक शांति और आराम मिलना आवश्यक है ताकि वह बिना किसी तनाव के बच्चे को स्तनपान करा सके। कामकाजी माताओं के लिए कार्यस्थलों में क्रैच सुविधा, मैटरनिटी लीव (प्रसूति अवकाश) और ब्रेस्टफीडिंग ब्रेक जैसी सुविधाएं होना बेहद जरूरी है। बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और मॉल जैसे सार्वजनिक स्थानों पर माताओं के लिए सुरक्षित और स्वच्छ फीडिंग रूम की व्यवस्था होनी चाहिए।

स्तनपान एक स्वस्थ और सशक्त पीढ़ी की नींव

विश्व स्तनपान सप्ताह हमें यह याद दिलाता है कि बच्चों को उनका मौलिक अधिकार मां का दूध दिलाने के लिए हम सभी को मिलकर एक अनुकूल वातावरण तैयार करना होगा। जब एक मां बिना किसी संकोच और बाधा के अपने बच्चे को स्तनपान करा सकेगी, तभी हम एक कुपोषण-मुक्त और स्वस्थ समाज की कल्पना साकार कर सकते हैं।

JANANI प्लेटफॉर्म लॉन्च: मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगा डिजिटल मजबूती

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देश में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने ‘JANANI’ डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है। यह प्लेटफॉर्म महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से सुरक्षित रखने और स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतर निगरानी सुनिश्चित करेगा।


JANANI प्लेटफॉर्म गर्भावस्था, प्रसव, नवजात शिशु देखभाल और परिवार नियोजन जैसी सेवाओं की ट्रैकिंग करेगा। इसमें QR आधारित डिजिटल मदर एंड चाइल्ड हेल्थ कार्ड, हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी अलर्ट, रियल-टाइम मॉनिटरिंग और समय पर स्वास्थ्य सेवाओं की सुविधा दी गई है।

यह प्लेटफॉर्म U-WIN और POSHAN जैसी राष्ट्रीय योजनाओं से भी जुड़ा होगा, जिससे लाभार्थियों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी। अब तक JANANI पर 1.34 करोड़ से अधिक लाभार्थियों का पंजीकरण किया जा चुका है।

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