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आईएनएस चिल्का में 12 जून को आयोजित होगी 01/26 बैच की पासिंग आउट परेड

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भुवनेश्वर/चिल्का- भारतीय नौसेना के अग्निवीरों और भारतीय तटरक्षक बल (कोस्ट गार्ड) के नाविकों के 01/26 बैच की पासिंग आउट परेड (POP) 12 जून 2026 को आईएनएस चिल्का में आयोजित की जाएगी। यह परेड 16 सप्ताह के कठोर प्रारंभिक प्रशिक्षण के सफल समापन का प्रतीक है, जिसे भारतीय नौसेना के आठवें अग्निवीर बैच और भारतीय तटरक्षक बल के नाविकों ने पूरा किया है।

यह आयोजन प्रशिक्षुओं के अनुशासित, सशक्त और पेशेवर रूप से सक्षम ‘समुद्री योद्धाओं’ में परिवर्तन की महत्वपूर्ण उपलब्धि को दर्शाता है, जो अब राष्ट्र सेवा के लिए अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ने के लिए तैयार हैं।

इस अवसर पर पश्चिमी नौसैनिक कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, वाइस एडमिरल Sanjay Vatsayan मुख्य अतिथि एवं परेड के निरीक्षण अधिकारी होंगे। समारोह में प्रशिक्षुओं के परिजन, पूर्व सैनिक, प्रतिष्ठित खिलाड़ी और अन्य गणमान्य अतिथि भी उपस्थित रहेंगे।

पासिंग आउट परेड भारतीय नौसेना की उस प्रतिबद्धता का प्रतीक है, जिसके तहत प्रशिक्षण को एक पेशेवर और सक्षम युद्धक बल की नींव माना जाता है। आईएनएस चिल्का अपने संरचित शैक्षणिक, शारीरिक और बाह्य प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को अनुशासित, आत्मविश्वासी और दक्ष समुद्री योद्धाओं के रूप में तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह प्रशिक्षण “कर्तव्य, सम्मान और साहस” के मूल्यों पर आधारित है।

कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि समापन समारोह (Valedictory Function) की अध्यक्षता करेंगे तथा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रशिक्षुओं, चैंपियन डिवीजन और सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षक को पुरस्कार एवं ट्रॉफियां प्रदान करेंगे। इस अवसर पर प्रशिक्षुओं की द्विभाषी पत्रिका ‘अंकुर’ का भी विमोचन किया जाएगा।

पासिंग आउट परेड के बाद प्रशिक्षुओं को विभिन्न नौसैनिक प्रतिष्ठानों और भारतीय नौसेना तथा भारतीय तटरक्षक बल के अग्रिम पंक्ति के युद्धपोतों पर विशेष व्यावसायिक प्रशिक्षण के लिए भेजा जाएगा।

भारतीय नौसेना ने बताया कि इस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण (Live Streaming) उसके आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर किया जाएगा।


आईएनएस सुदर्शिनी लोकायन-26 अभियान के तहत मिस्र के सफागा पहुँचा

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भारतीय नौसेना का नौकायन प्रशिक्षण पोत आईएनएस सुदर्शिनी अपने जारी लोकायन-26 अभियान के तहत 21 फरवरी 2026 को मिस्र के सफागा बंदरगाह पहुँचा। सलालाह से सफागा तक 1,832 समुद्री मील की दूरी 16 दिनों में तय करना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि रही, जो जहाज के चालक दल की दृढ़ता, आत्मविश्वास और सहनशक्ति को दर्शाती है।

आगमन पर जहाज का मिस्र की नौसेना के अधिकारियों और भारतीय दूतावास के प्रतिनिधियों द्वारा गर्मजोशी से स्वागत किया गया। आईएनएस सुदर्शिनी के कमांडिंग ऑफिसर ने रेड सी और सफागा नौसेना बेस के बेस कमांडर रियर एडमिरल रामी अहमद इस्माइल मोहम्मद से भेंट की। इन संवादों में दोनों नौसेनाओं के बीच बढ़ती समुद्री साझेदारी पर जोर दिया गया, जो नौसैनिक सहयोग और अंतर-संचालन क्षमता (इंटरऑपरेबिलिटी) बढ़ाने के साझा दृष्टिकोण को दर्शाता है।

बंदरगाह प्रवास के दौरान भारतीय नौसेना मिस्र के नौसैनिक कर्मियों के साथ पेशेवर संवाद करेगी, नौकायन प्रशिक्षण में सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करेगी और द्विपक्षीय सद्भाव को मजबूत करने के लिए सामुदायिक संपर्क गतिविधियाँ भी करेगी।

अदन की खाड़ी और लाल सागर से होकर गुजरना इस यात्रा का एक प्रमुख परिचालन चरण था, जहाँ जहाज ने चुनौतीपूर्ण मौसम परिस्थितियों और घने समुद्री यातायात के बीच उच्च स्तर की पेशेवर क्षमता और समुद्री कौशल का प्रदर्शन किया। सफागा में आईएनएस सुदर्शिनी की यात्रा “ब्रिजेस ऑफ फ्रेंडशिप” पहल के तहत समुद्री संपर्क बढ़ाने के लिए भारतीय नौसेना की निरंतर प्रतिबद्धता की पुष्टि करती है और भारत तथा मिस्र के बीच मजबूत और स्थायी संबंधों को रेखांकित करती है।


कैडेट ट्रेनिंग शिप ‘कृष्णा’ का 16 फरवरी को लॉन्च, भारतीय नौसेना के स्वदेशी जहाज निर्माण में बड़ी उपलब्धि

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चेन्नई-भारतीय नौसेना के लिए निर्माणाधीन तीन कैडेट ट्रेनिंग शिप (CTS) में से पहले जहाज यार्ड 18003 (कृष्णा) को 16 फरवरी 2026 को एलएंडटी शिपयार्ड, कट्टुपल्ली (चेन्नई) में लॉन्च किया गया। नौसेना की परंपरा के अनुसार, अनुपमा चौहान ने जहाज का शुभारंभ किया। इस अवसर पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान मौजूद रहे। कार्यक्रम में भारतीय सशस्त्र बलों और एलएंडटी शिपबिल्डिंग के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

पूरी तरह स्वदेशी डिजाइन और निर्माण

यह जहाज एलएंडटी द्वारा पूरी तरह स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित किया गया है। इस जहाज को वर्ष 2026 के अंत तक औपचारिक रूप से भारतीय नौसेना को सौंपे जाने की योजना है।

कैडेट्स के प्रशिक्षण में होगा उपयोग

इन कैडेट ट्रेनिंग शिप्स का उपयोग समुद्र में अधिकारी कैडेट्स (महिला कैडेट्स सहित) के प्रशिक्षण के लिए किया जाएगा, जो भूमि पर बुनियादी प्रशिक्षण पूरा कर चुके होंगे। इसके अलावा मित्र देशों के विदेशी कैडेट्स को भी इन जहाजों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा।

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में अहम कदम

यह उपलब्धि भारतीय नौसेना के स्वदेशी जहाज निर्माण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह सरकार के आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया पहल के अनुरूप है, जिससे भारत की रक्षा निर्माण क्षमता को मजबूती मिलेगी।



भारतीय नौसेना के प्रशिक्षण पोत आईएनएस सुदर्शिनी ने ओमान के सलालाह बंदरगाह पर किया आगमन

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भारतीय नौसेना का पाल नौसैनिक प्रशिक्षण पोत आईएनएस सुदर्शिनी 02 फरवरी 2026 को ओमान के सलालाह बंदरगाह पर पहुंचा, जो उसके प्रतिष्ठित लोकायन 26 अंतरमहासागरीय अभियान का पहला अंतरराष्ट्रीय पोर्ट कॉल है। ओमान में आगमन इस दस महीने लंबे अभियान में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जिसका उद्देश्य भारत की समृद्ध समुद्री विरासत को प्रदर्शित करना और अंतरराष्ट्रीय समुद्री सहयोग को बढ़ावा देना है।

आईएनएस सुदर्शिनी ने अपना अभियान कोच्चि से 20 जनवरी 2026 को शुरू किया, और अरब सागर की मौसमी हवाओं के बीच पहला चरण पूरा किया। यह पोर्ट कॉल भारत और ओमान के बीच गहरे समुद्री संबंधों और रणनीतिक साझेदारी को दर्शाता है। तीन दिवसीय दौरे के दौरान, रॉयल नेवी ऑफ ओमान के साथ पेशेवर सहयोग और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके अलावा, पोत को स्कूल के बच्चों और स्थानीय निवासियों के लिए खोला जाएगा, ताकि समुद्री जागरूकता और जनसंपर्क को बढ़ावा मिले।

लोकायन 26 अभियान भारतीय नौसेना की समुद्री कूटनीति, सद्भावना और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक बनकर जारी है।

आईएनएस चिल्का में 02/25 बैच की भव्य पासिंग आउट परेड संपन्न

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आईएनएस चिल्का में 08 जनवरी 2026 को 02/25 बैच की पासिंग आउट परेड (POP) का आयोजन किया गया, जो 16 सप्ताह के एब-इनिशियो प्रशिक्षण के सफल समापन का प्रतीक रहा। सूर्यास्त के बाद आयोजित इस भव्य सेरेमोनियल परेड में प्रशिक्षुओं ने अनुशासन, दृढ़ता और युद्ध तत्परता से परिपूर्ण नौसैनिक पेशेवरों में अपने रूपांतरण का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।

इस पासिंग-आउट बैच में कुल 2,172 प्रशिक्षु शामिल थे, जिनमें 2,103 अग्निवीर (113 महिला अग्निवीर सहित), 270 एसएसआर (मेडिकल असिस्टेंट), भारतीय नौसेना के 44 खेल कोटा के कार्मिक तथा भारतीय तटरक्षक बल के 295 नाविक शामिल थे।

वाइस एडमिरल समीर सक्सेना, फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, दक्षिणी नौसेना कमान, इस परेड के मुख्य अतिथि एवं समीक्षा अधिकारी थे। कमोडोर बी दीपक अनील, कमांडिंग ऑफिसर, आईएनएस चिल्का, परेड के संचालन अधिकारी रहे। इस अवसर पर विशिष्ट पूर्व सैनिक, प्रख्यात खेल हस्तियां, वरिष्ठ नौसेना अधिकारी, अन्य गणमान्य अतिथि तथा पासिंग-आउट प्रशिक्षुओं के परिजन उपस्थित रहे।

परेड में प्रशिक्षुओं द्वारा अर्जित उच्च स्तर के ड्रिल, अनुशासन और पेशेवर दक्षता का शानदार प्रदर्शन देखने को मिला। पुरुष प्रशिक्षुओं के साथ महिला अग्निवीरों की सहभागिता ने परिचालन भूमिकाओं में समावेशन और लैंगिक समानता के प्रति भारतीय नौसेना की प्रतिबद्धता को और सुदृढ़ किया।

परेड को संबोधित करते हुए एफओसी-इन-सी (दक्षिण) ने प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण की सफल पूर्णता पर बधाई दी। उन्होंने उन्हें अपने पेशेवर कौशल को निरंतर निखारने, तकनीकी रूप से सजग रहने तथा नौसेना के मूल मूल्यों—कर्तव्य, सम्मान और साहस—को आत्मसात करने का संदेश दिया। उन्होंने प्रशिक्षुओं से साहस और दृढ़ संकल्प के साथ अपने भविष्य का मार्ग निर्धारित करते हुए राष्ट्र के सम्मान को बनाए रखने का आह्वान किया। साथ ही, उन्होंने अग्निवीरों के माता-पिता के योगदान की सराहना करते हुए राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका को स्वीकार किया। मुख्य अतिथि ने टीम चिल्का की अथक मेहनत और नौसेना व राष्ट्र के रूपांतरण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका के लिए प्रशंसा व्यक्त की।

मुख्य अतिथि द्वारा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अग्निवीरों को पदक और ट्रॉफियां प्रदान की गईं। साशी बी केंचावगोल और जतिन मिश्रा को क्रमशः सर्वश्रेष्ठ अग्निवीर (एसएसआर) और सर्वश्रेष्ठ अग्निवीर (एमआर) के लिए नौसेना प्रमुख रोलिंग ट्रॉफी एवं स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। अनिता यादव को समग्र मेरिट में सर्वश्रेष्ठ महिला अग्निवीर के लिए जनरल बिपिन रावत रोलिंग ट्रॉफी प्रदान की गई। केशव सूर्यवंशी और सोनेन्द्र को क्रमशः सर्वश्रेष्ठ नाविक (जीडी) और सर्वश्रेष्ठ नाविक (डीबी) घोषित किया गया।

इससे पूर्व आयोजित दीक्षांत समारोह में समग्र चैम्पियनशिप ट्रॉफी खारवेला डिवीजन को प्रदान की गई, जबकि अशोक डिवीजन उपविजेता रहा। इस अवसर पर आईएनएस चिल्का की द्विभाषी प्रशिक्षु पत्रिका ‘अंकुर 2025’ के द्वितीय संस्करण का भी विमोचन किया गया, जिसमें अग्निवीरों के अनुभवों और उनके रूपांतरणकारी प्रशिक्षण यात्रा को दर्शाया गया है।


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