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भारतीय नौसेना कमांडर्स सम्मेलन 2026 शुरू, भविष्य की रणनीति और सुरक्षा पर मंथन

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नई दिल्ली- Indian Navy का बहुप्रतीक्षित कमांडर्स सम्मेलन 01/2026 नौ सेना भवन में शुरू हो गया। सम्मेलन का उद्घाटन एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी (नौसेना प्रमुख) द्वारा किया गया, जिसमें देशभर से वरिष्ठ नौसेना अधिकारी, ऑपरेशनल एवं क्षेत्रीय कमांडर तथा मुख्यालय के अधिकारी शामिल हुए।

नौसेना प्रमुख का संबोधन

अपने उद्घाटन भाषण में नौसेना प्रमुख ने भारत के समुद्री हितों की रक्षा में नौसेना की महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की। उन्होंने विशेष रूप से पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने, ऑपरेशनों की बढ़ती गति और तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल को बड़ी उपलब्धि बताया।

उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए नौसेना को हर समय युद्ध के लिए तैयार (Combat Ready) रहना चाहिए। साथ ही, आधुनिक तकनीकों को अपनाकर एक “Future Ready Force” तैयार करना समय की आवश्यकता है।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग और रणनीतिक दृष्टिकोण

नौसेना प्रमुख ने हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की सक्रिय भूमिका को दोहराया। उन्होंने मित्र देशों के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यासों और सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया, ताकि एक मजबूत, समन्वित और विश्वसनीय रणनीति विकसित की जा सके।

 सम्मेलन में प्रमुख चर्चाएं

सम्मेलन के दौरान कई अहम विषयों पर गहन विचार-विमर्श किया गया—

  • संयुक्त सैन्य संचालन (Joint Operations)

  • समुद्री और तटीय क्षमता में वृद्धि

  • जहाजों की मरम्मत और रखरखाव

  • बहु-क्षेत्रीय सुरक्षा उपाय

  • प्रशिक्षण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग

  • मानव संसाधन विकास

  • नवाचार और आत्मनिर्भरता (Indigenisation)

 सीडीएस का महत्वपूर्ण संदेश

जनरल अनिल चौहान (Chief of Defence Staff) ने भी सम्मेलन को संबोधित किया।
उन्होंने बदलते वैश्विक परिदृश्य और युद्ध के बदलते स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए नौसेना को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहने की सलाह दी।

उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध केवल सैन्य शक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें आर्थिक और तकनीकी पहलुओं का भी महत्वपूर्ण योगदान होता है।

निष्कर्ष

भारतीय नौसेना कमांडर्स सम्मेलन 2026 देश की समुद्री सुरक्षा, रणनीतिक योजना और भविष्य की तैयारियों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित हो रहा है।
इस सम्मेलन से प्राप्त निष्कर्ष आने वाले समय में भारत की रक्षा रणनीति को और मजबूत बनाएंगे।


नई दिल्ली में आयोजित द्विवार्षिक नौसेना कमांडरों के सम्मेलन 2025 के दूसरे संस्करण में संचालनात्मक तैयारी, समुद्री सुरक्षा और आत्मनिर्भर नौसेना पर हुई व्यापक चर्चा

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द्विवार्षिक नौसेना कमांडरों के सम्मेलन 2025 का दूसरा संस्करण 22 से 24 अक्तूबर 2025 तक नई दिल्ली स्थित नौसेना भवन (Nausena Bhawan) में आयोजित किया गया। तीन दिवसीय यह उच्च-स्तरीय सम्मेलन नौसेना कमांडरों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ, जिसमें संचालनात्मक तैयारी, समुद्री सुरक्षा, क्षमता विकास तथा त्रि-सेवा (Tri-Service) एकीकरण से संबंधित प्रमुख मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई।

सम्मेलन की शुरुआत नौसेना प्रमुख (Chief of the Naval Staff) के उद्घाटन संबोधन से हुई। विकसित होते भू-राजनीतिक परिदृश्य पर प्रकाश डालते हुए नौसेना प्रमुख ने राष्ट्रीय समुद्री हितों की रक्षा में भारतीय नौसेना की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि नौसेना अपनी तैयारी, अनुकूलता और क्षेत्रीय सहभागिता के माध्यम से समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है।
उन्होंने नौसेना को एक “Combat Ready, Credible, Cohesive and Future-Ready Force” के रूप में पुनः स्थापित करते हुए हालिया अभियानों, क्षमता वृद्धि तथा संयुक्त अभियानों की सराहना की। नौसेना प्रमुख ने 2047 तक ‘पूर्ण आत्मनिर्भर नौसेना’ (Aatmanirbhar Navy) के लक्ष्य की दिशा में हो रही प्रगति पर भी बल दिया, जो नवाचार, तकनीकी समावेशन और iDEX पहलों से प्रेरित है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 23 अक्तूबर 2025 को नौसेना कमांडरों को संबोधित किया और उनसे संवाद किया। उन्होंने भारतीय नौसेना की राष्ट्रीय हितों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना करते हुए इसकी उच्च स्तरीय संचालनात्मक तत्परता और सशक्त प्रतिरोध क्षमता की प्रशंसा की।
उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना की उपस्थिति हिंद महासागर क्षेत्र के लिए मित्र राष्ट्रों के लिए सुरक्षा का प्रतीक है, जबकि अस्थिरता फैलाने वालों के लिए चिंता का कारण है।
रक्षा मंत्री ने यह भी दोहराया कि आत्मनिर्भर नौसेना ही एक आत्मविश्वासी और शक्तिशाली राष्ट्र की नींव है। उन्होंने कहा कि स्वदेशी उपकरणों के माध्यम से अपनी क्षमताओं में वृद्धि के प्रयासों ने भारतीय नौसेना को ‘आत्मनिर्भरता का ध्वजवाहक’ बना दिया है।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि प्रतिद्वंद्वियों से आगे निकलने के लिए तकनीक और रणनीति का शीघ्र उपयोग आवश्यक है। आधुनिक युद्ध में मानवरहित और स्वचालित प्रणालियों (uncrewed & autonomous systems) के महत्व पर भी उन्होंने विशेष बल दिया।

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS), चीफ ऑफ एयर स्टाफ (CAS) तथा कैबिनेट सचिव ने भी नौसेना कमांडरों के साथ विचार-विमर्श किया।
CDS ने अपने संबोधन में इंटीग्रेशन (Integration), संयुक्तता (Jointness) और संसाधनों के अनुकूलन (Resource Optimisation) की महत्ता पर बल दिया।

सम्मेलन के दौरान ‘Regulations for Naval Armament Service’, ‘GeM Handbook’, ‘Foreign Cooperation Roadmap’ सहित पाँच नौसैनिक प्रकाशनों का विमोचन किया गया।
इसके अलावा, ‘NIPUN’ (Naval Intellectual Portal for Unified Knowledge) नामक एक ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च किया गया, जो नौसेना समुदाय के विभिन्न क्षेत्रों में किए गए बौद्धिक कार्यों का एकीकृत भंडार (aggregator) होगा।

सम्मेलन के समानांतर आयोजित ‘सागर मंथन’ (Sagar Manthan) कार्यक्रम 22 अक्तूबर को संपन्न हुआ, जिसमें नौसेना कमांडरों, विषय विशेषज्ञों और विचार नेताओं ने समसामयिक समुद्री और रणनीतिक मुद्दों पर विचार-विमर्श किया।



भारतीय नौसेना के कमांडरों के सम्मेलन का दूसरा संस्करण 22 अक्टूबर 2025 से शुरू होगा

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भारतीय नौसेना का द्विवार्षिक कमांडरों सम्मेलन 2025 नई दिल्ली में 22 से 24 अक्टूबर 2025 तक तीन दिन की अवधि में आयोजित किया जाएगा। यह सम्मेलन ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और नौसेना की उच्च स्तर की संचालन और युद्ध तैयारियों की पृष्ठभूमि में विशेष महत्व रखता है।

नौसेना का ध्यान युद्ध क्षमता, अंतरसंचालन (Interoperability), और भारतीय सेना, भारतीय वायु सेना (IAF), तथा तटरक्षक बल (ICG) के साथ संयुक्त संचालन को बढ़ाने पर है, जो उभरते खतरों को निरोध करने और आईओआर (Indian Ocean Region) और इंडो-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री प्रभुत्व प्रदर्शित करने की इसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

 सम्मेलन में प्रमुख गतिविधियाँ और संबोधन

  • सम्मानित रक्षा मंत्री (RM) और कैबिनेट सचिव नौसेना कमांडरों को संबोधित करेंगे और विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण तथा व्यापक राष्ट्रीय हितों पर मार्गदर्शन प्रदान करेंगे।

  • सम्मेलन राष्ट्रीय नेतृत्व और नौकरशाही के साथ निकट संपर्क का मंच प्रदान करता है और वर्तमान भू-रणनीतिक परिवेश में नौसेना की बहुआयामी चुनौतियों से निपटने की दृष्टि को परिष्कृत करता है।

  • सैन्य प्रमुख (Chief of Defence Staff) और वायु सेना प्रमुख (Chief of Air Staff) अपने संबोधन देंगे और वरिष्ठ नौसैनिक नेतृत्व के साथ विशेष चर्चाएँ होंगी।

  • सम्मेलन के दौरान संयुक्त योजना, संचालन और संसाधनों के अनुकूलन पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

 सुरक्षा, संचालन और भविष्य की योजनाएँ

  • नौसेना प्रमुख और कमांडर-इन-चीफ भारतीय महासागर क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति की समीक्षा करेंगे।

  • सम्मेलन में नौसैनिक संचालन, प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्धता से संबंधित मुद्दों पर चर्चा होगी।

  • भविष्य की योजनाओं में मुख्य सक्षम उपकरण, संचालन लॉजिस्टिक्स सुधार और डिजिटलीकरण पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

  • डिसरप्टिव टेक्नोलॉजीज जैसे AI, Big Data और Machine Learning का युद्ध समाधान और सतत संचालन में उपयोग पर भी विचार किया जाएगा।

 व्यापक रणनीतिक दृष्टिकोण

  • पश्चिमी और पूर्वी तटों पर संचालन तैयारियों की समीक्षा

  • मेक इन इंडिया योजना के तहत स्वदेशीकरण और नवाचार को बढ़ावा

  • MAHASAGAR (Mutual and Holistic Advancement for Security Across all Regions) के माध्यम से भारत सरकार की दृष्टि का समर्थन

  • भारतीय नौसेना को आईओआर और इंडो-प्रशांत क्षेत्र में प्राथमिक सुरक्षा भागीदार के रूप में स्थापित करना

यह सम्मेलन नौसेना के सामरिक और रणनीतिक दृष्टिकोण को सुदृढ़ करने और उभरते वैश्विक और क्षेत्रीय खतरों से निपटने में अहम भूमिका निभाएगा।


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