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16वें वित्त आयोग की अनुशंसाओं पर राष्ट्रीय कार्यशाला में शामिल हुए उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा

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पंचायतों के वित्तीय सशक्तिकरण एवं ग्रामीण विकास के विभिन्न पहलुओं पर हुई चर्चा

रायपुर- नई दिल्ली में आयोजित 16वें वित्त आयोग की अनुशंसाओं पर राष्ट्रीय कार्यशाला में छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा शामिल हुए। कार्यशाला में विभिन्न राज्यों के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों तथा नीति-निर्माताओं ने भाग लिया। इस अवसर पर ग्रामीण स्थानीय निकायों को वित्तीय संसाधनों के आवंटन, पंचायतों की वित्तीय क्षमता को सुदृढ़ करने तथा 16वें वित्त आयोग की अनुशंसाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया।

कार्यशाला में स्थानीय निकायों की वित्तीय स्वायत्तता, बेहतर सेवा प्रदायगी, पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रदर्शन आधारित अनुदान व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने पर विशेष चर्चा हुई। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कार्यशाला के विभिन्न तकनीकी सत्रों में सहभागिता करते हुए पंचायतों एवं ग्रामीण विकास से जुड़े मुद्दों पर आयोजित प्रस्तुतियों और विचार-विमर्श का अवलोकन किया।

छत्तीसगढ़ को ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए 11,664 करोड़ रुपए का अनुदान

कार्यशाला के दौरान 16वें वित्त आयोग द्वारा ग्रामीण स्थानीय निकायों (Rural Local Bodies) के लिए प्रस्तावित अनुदान की जानकारी साझा की गई। आयोग की अनुशंसाओं के अनुसार वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 की अवधि में छत्तीसगढ़ को कुल 11,664 करोड़ रुपए का अनुदान प्राप्त होगा। इसमें 9,331 करोड़ रुपए बेसिक ग्रांट तथा 2,333 करोड़ रुपए परफॉर्मेंस ग्रांट शामिल हैं। वहीं, ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए अंतर-राज्यीय अनुदान वितरण में छत्तीसगढ़ की हिस्सेदारी 2.68 प्रतिशत निर्धारित की गई है।

वर्षवार आवंटन के अनुसार 2026-27 में राज्य को 1,498 करोड़ रुपए की बेसिक ग्रांट मिलेगी। 2027-28 में 1,663 करोड़ रुपए बेसिक ग्रांट एवं 248 करोड़ रुपए परफॉर्मेंस ग्रांट, 2028-29 में 1,846 करोड़ रुपए बेसिक ग्रांट एवं 624 करोड़ रुपए परफॉर्मेंस ग्रांट, 2029-30 में 2,049 करोड़ रुपए बेसिक ग्रांट एवं 693 करोड़ रुपए परफॉर्मेंस ग्रांट तथा 2030-31 में 2,275 करोड़ रुपए बेसिक ग्रांट एवं 768 करोड़ रुपए परफॉर्मेंस ग्रांट का प्रावधान किया गया है।

यह अनुदान ग्राम पंचायतों एवं अन्य ग्रामीण स्थानीय निकायों के माध्यम से आधारभूत अधोसंरचना के विकास, नागरिक सुविधाओं के विस्तार तथा ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को और अधिक गति प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

एनसीबी की राष्ट्रीय कार्यशाला में आईएस 456:2025 (ड्राफ्ट) पर मंथन, कंक्रीट स्थायित्व और गुणवत्ता आश्वासन पर विशेषज्ञों की चर्चा

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राष्ट्रीय सीमेंट एवं भवन सामग्री परिषद (एनसीबी) ने 9 मई 2026 को नई दिल्ली स्थित इंडिया हैबिटेट सेंटर में “आईएस 456:2025 (ड्राफ्ट) के अनुसार कंक्रीट के स्थायित्व डिज़ाइन और गुणवत्ता आश्वासन” विषय पर एक राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला में निर्माण उद्योग, शैक्षणिक जगत, अनुसंधान संस्थानों और भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के विशेषज्ञों ने भाग लिया और स्थायित्व-आधारित कंक्रीट डिज़ाइन तथा प्रस्तावित संशोधनों पर चर्चा की।

कार्यशाला का एक प्रमुख आकर्षण उन्नत कंक्रीट प्रौद्योगिकी (एडवांस्ड कंक्रीट टेक्नोलॉजी - एसीटी) पर छह माह के ऑनलाइन प्रमाणन कार्यक्रम का शुभारंभ रहा, जिसे भारत सरकार के कौशल विकास मिशन के अनुरूप तैयार किया गया है। एनसीबी के प्रमुख (सीसीई) डॉ. बृजेश सिंह ने बताया कि यह 25-सप्ताह का हाइब्रिड कार्यक्रम है, जिसमें सप्ताहांत ऑनलाइन कक्षाएँ और एनसीबी बल्लभगढ़ में चार दिवसीय ऑन-साइट मॉड्यूल शामिल है। इसमें मिक्स डिज़ाइन, स्थायित्व, गुणवत्ता आश्वासन/नियंत्रण प्रणाली, आरएमसी संचालन और उन्नत सतत कंक्रीट जैसे विषय शामिल होंगे।

समापन पैनल चर्चा “क्या हम आईएस 456:2025 को लागू करने के लिए तैयार हैं?” में उद्योग की तैयारी, कार्यान्वयन चुनौतियों और क्षमता निर्माण की आवश्यकता पर विचार-विमर्श किया गया। इस सत्र का संचालन एनसीबी के संयुक्त निदेशक ई. अमित त्रिवेदी ने किया, जबकि विशेषज्ञों ने प्रदर्शन-आधारित मानकों और मजबूत गुणवत्ता आश्वासन प्रथाओं पर जोर दिया। एनसीबी के प्रमुख (सीआईएस)जी. जे. नायडू ने कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद प्रस्ताव दिया।

कार्यक्रम का उद्घाटन सीएसआईआर-सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रो. प्रदीप कुमार रामानर्चला ने मुख्य अतिथि के रूप में किया। भारतीय मानक ब्यूरो के उप महानिदेशक (मानकीकरण) ई. संजय पंत विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि एनसीबी के महानिदेशक डॉ. एल. पी. सिंह भी कार्यक्रम में शामिल रहे।

तकनीकी सत्रों में एनसीबी के संयुक्त निदेशक ई. पी. एन. ओझा, आईआईटी मद्रास के प्रो. मनु संतानम, एनसीबी के पूर्व संयुक्त निदेशक ई. वी. वी. अरोड़ा तथा टंडन कंसल्टेंट्स प्राइवेट लिमिटेड के चेयरमैन प्रो. महेश टंडन ने कंक्रीट स्थायित्व डिज़ाइन, निर्माण सामग्री, गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली और ड्राफ्ट कोड के अनुरूप प्रीस्ट्रेस्ड कंक्रीट प्रावधानों पर अपने विचार साझा किए।

प्रशासनिक डेटा समन्वय पर राष्ट्रीय कार्यशाला 24 फरवरी को विज्ञान भवन में

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कार्यशाला का उद्देश्य

यह कार्यशाला आगामी राष्ट्रीय स्तर के विचार-विमर्श शिखर सम्मेलन “डेटा फॉर डेवलपमेंट” (अप्रैल 2026) की तैयारी का हिस्सा है।
यह सम्मेलन दिसंबर 2025 में आयोजित राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों के 5वें राष्ट्रीय सम्मेलन के बाद आयोजित किया जा रहा है।

इस शिखर सम्मेलन का उद्देश्य है:

  • राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में प्रशासनिक डेटा प्रणालियों को मजबूत करना

  • विभिन्न विभागों के डेटा का जिम्मेदार और संरचित तरीके से समन्वय (हर्मोनाइजेशन) करना

  • राष्ट्रीय स्तर पर सुधार के प्राथमिक क्षेत्रों की पहचान करना

परामर्श कार्यशाला के प्रमुख लक्ष्य

  • राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को डेटा समन्वय से जुड़े उद्देश्य, दायरा और प्रमुख मुद्दों की जानकारी देना

  • सरकारी, अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों, उद्योग, थिंक टैंक और शैक्षणिक संस्थानों के विशेषज्ञों द्वारा विचार-विमर्श

  • प्रशासनिक डेटा के सफल उपयोग के उदाहरण प्रस्तुत करना

  • राज्य स्तर की कार्यशालाओं से प्राप्त सुझावों को राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन में चर्चा हेतु तैयार करना

प्रतिभागी

  • राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के योजना एवं आईटी विभाग के अधिकारी

  • केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों के अधिकारी

  • अन्य संबंधित हितधारक (स्टेकहोल्डर्स)


आंध्र प्रदेश में MISHTI पर राष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला का सफल आयोजन

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आंध्र प्रदेश में 8 एवं 9 जनवरी 2026 को MISHTI (Mangrove Initiative for Shoreline Habitats and Tangible Incomes) पर एक राष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया।

कार्यशाला का उद्घाटन आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण द्वारा किया गया। अपने संबोधन में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व के लिए आभार व्यक्त किया। साथ ही, उन्होंने केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव को MISHTI योजना के माध्यम से मैंग्रोव संरक्षण में राज्यों को सहयोग देने के लिए धन्यवाद दिया। इस कार्यशाला में वन विभाग के अधिकारी, विशेषज्ञ और विभिन्न हितधारक शामिल हुए, जिन्होंने मैंग्रोव संरक्षण एवं पुनर्स्थापन के सतत उपायों पर विचार-विमर्श किया।

कार्यशाला के दौरान राष्ट्रीय कैम्पा (National CAMPA) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आनंद मोहन द्वारा एक महत्वपूर्ण प्रस्तुति दी गई, जिसमें MISHTI पहल के उद्देश्यों और कार्यान्वयन ढांचे पर प्रकाश डाला गया। MISHTI का उद्देश्य मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र का विकास एवं संरक्षण करना है, जिसमें मैंग्रोव पुनर्स्थापन, तटरेखा संरक्षण, जैव विविधता संरक्षण तथा तटीय समुदायों के लिए ठोस आजीविका अवसरों के सृजन पर विशेष बल दिया गया है। यह मिशन ‘मैंग्रोव एलायंस फॉर क्लाइमेट’ (MAC) के उद्देश्यों में भी योगदान देता है, जिसका भारत COP-27 के दौरान सक्रिय सदस्य बना था।

प्रस्तुति के दौरान राष्ट्रीय कैम्पा के सीईओ ने जलवायु सहनशीलता, तटीय संरक्षण और सतत आर्थिक लाभों में मैंग्रोव की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने प्रभावी कार्यान्वयन के लिए राज्यों और संस्थानों के बीच समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।

यह कार्यशाला ज्ञान साझा करने, सर्वोत्तम प्रथाओं और नीति संवाद के लिए एक महत्वपूर्ण मंच सिद्ध हुई, जिसने MISHTI ढांचे के अंतर्गत मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने और सतत तटीय आजीविका सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता को और मजबूत किया।

ASI ने प्रोजेक्ट मौसाम पर राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की

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भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने प्रोजेक्ट मौसाम के अंतर्गत “इंडियन ओशन क्षेत्र में समुद्री नेटवर्क के संगम पर द्वीप” शीर्षक से एक राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया। यह राष्ट्रीय कार्यशाला नवंबर 2025 में नई दिल्ली में आयोजित की गई थी, और इसका उद्देश्य प्रोजेक्ट मौसाम के थीमैटिक फ्रेमवर्क दस्तावेज़ को अंतिम रूप देने के लिए अंतरविषयक इनपुट और दृष्टिकोण एकत्रित करना था। यह दस्तावेज़ परियोजना के लक्ष्य, उद्देश्य, दायरा और गतिविधियों के साथ-साथ भविष्य के लिए रोडमैप का विवरण प्रस्तुत करता है।

कार्यशाला के आयोजन के लिए ASI के आवंटित बजट से ₹30 लाख की राशि स्वीकृत की गई थी, और इसका लगभग ₹25,70,182/- व्यय हुआ।

प्रोजेक्ट मौसाम में संयुक्त अंतरराष्ट्रीय नामांकन, अनुसंधान और प्रलेखन, तथा साझेदार देशों के बीच क्षमता निर्माण शामिल है।

यह जानकारी आज लोकसभा में संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने एक लिखित उत्तर में दी।

राष्ट्रीय कार्यशाला: “भौगोलिक सूचना मिशन – विकसित भारत का सशक्तकर्ता” आयोजित

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भारतीय सर्वेक्षण विभाग, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, 17 दिसंबर 2025 को राष्ट्रीय कार्यशाला: “भौगोलिक सूचना मिशन: विकासित भारत का सशक्तकर्ता” का आयोजन यशोभूमि, सेक्टर 25, द्वारका, नई दिल्ली में कर रहा है। यह राष्ट्रीय कार्यशाला नीति निर्माता, तकनीकी विशेषज्ञ, उद्योग नेता और क्षेत्र विशेषज्ञों को एक मंच पर लाएगी ताकि भारत के भौगोलिक सूचना भविष्य को आकार देने वाली नवाचारों पर विचार-विमर्श किया जा सके।

उद्घाटन और मुख्य अतिथि

इस कार्यशाला का उद्घाटन डॉ. जितेंद्र सिंह, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय और कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय द्वारा किया जाएगा। वे मुख्य अतिथि के रूप में इस कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाएंगे।
डॉ. जितेंद्र सिंह सरकार की भौगोलिक क्षमता को बढ़ाने और इस तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्र की पूरी संभावनाओं को साकार करने के लिए सहयोगात्मक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर देंगे।

राष्ट्रीय भौगोलिक सूचना मिशन

राष्ट्रीय भौगोलिक सूचना मिशन, जिसे संघीय बजट 2025-26 में घोषित किया गया था, सरकार की यह प्रतिबद्धता दर्शाता है कि उन्नत भौगोलिक तकनीकों को शहरी नियोजन, पर्यावरण निगरानी और अवसंरचना विकास जैसे प्रमुख क्षेत्रों में एकीकृत किया जाएगा।

यह कार्यशाला विकसित भारत 2047 की राष्ट्रीय दृष्टि को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसमें भौगोलिक अवसंरचना को सुदृढ़ करने और विभिन्न क्षेत्रों में आधुनिक तकनीकों के एकीकरण पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

कार्यशाला के मुख्य विषय

कार्यशाला में गहन सत्र होंगे जो भौगोलिक प्राथमिकताओं के व्यापक स्पेक्ट्रम को कवर करेंगे। प्रमुख फोकस क्षेत्र:

  • राष्ट्रीय ज्योडेटिक संदर्भ फ्रेम का आधुनिकीकरण और सुदृढ़ीकरण

  • भौगोलिक डेटा और मानचित्रण अवसंरचना का सुदृढ़ीकरण

  • भौगोलिक ढांचे को एकसमान बनाने में मानकों की भूमिका

  • भौगोलिक क्षेत्र में तकनीकी प्रगति के साथ कदम मिलाना

इन सत्रों के माध्यम से हितधारक उभरती हुई संभावनाओं को संबोधित कर पाएंगे, वैश्विक मानकों के अनुसार भौगोलिक प्रथाओं को संरेखित करेंगे और भविष्य-सक्षम तकनीकों को अपनाने की गति तेज करेंगे।

विशेषज्ञ डेटा अधिग्रहण, प्रोसेसिंग, विश्लेषण और उभरती डिजिटल तकनीकों के उपयोग जैसे क्षेत्रों में तेजी से हो रही तकनीकी प्रगति के साथ कदम मिलाने के तरीकों पर भी विचार करेंगे।

उद्देश्य और महत्व

यह पहल भारतीय सर्वेक्षण विभाग की प्रतिबद्धता को दर्शाती है कि एक मजबूत, मानकीकृत और भविष्य-सक्षम भौगोलिक सूचना इकोसिस्टम तैयार किया जाए, जो देश की विकास आवश्यकताओं का समर्थन कर सके।
सरकारी एजेंसियों, उद्योग हितधारकों और तकनीकी विशेषज्ञों को एक साथ लाकर, यह कार्यशाला भारत के भौगोलिक मिशन को गति देने और विभिन्न क्षेत्रों में सूचित निर्णय लेने को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखती है।

यह कार्यक्रम भौगोलिक सूचना समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होने का वादा करता है, और हम यशोभूमि, नई दिल्ली में सरकारी एजेंसियों, उद्योग हितधारकों और तकनीकी विशेषज्ञों का स्वागत करने के लिए उत्सुक हैं।


राष्ट्रीय कार्यशाला “आयुष क्षेत्र में आईटी समाधान” का शुभारंभ

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आज केरल सरकार की स्वास्थ्य और महिला एवं बाल विकास मंत्री, वीणा जॉर्ज द्वारा केरल के खूबसूरत केटीडीसी वाटरस्केप्स, कुमाराकॉम में दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला “आयुष क्षेत्र में आईटी समाधान” का शुभारंभ किया गया। यह कार्यशाला राष्ट्रीय आयुष मिशन, केरल द्वारा आयोजित की गई है, जिसमें 23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 91 प्रतिनिधि और 155 प्रतिभागी, जिनमें वरिष्ठ अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ और नीति निर्माता शामिल हैं, भाग ले रहे हैं। यह पहल नई दिल्ली में आयोजित आयुष विभागीय सम्मेलन 2025 की प्राथमिकताओं के अनुरूप है।

उद्घाटन भाषण में मंत्री वीणा जॉर्ज ने कही मुख्य बातें

मंत्री वीणा जॉर्ज ने प्रतिनिधियों का हार्दिक स्वागत किया और कुमाराकॉम के प्राकृतिक वातावरण के चयन का प्रतीकात्मक महत्व बताते हुए कहा कि यह आयुष द्वारा promoted सामंजस्य को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि तेज़ तकनीकी प्रगति को अपनाते हुए, परंपरागत मूल्यों को बनाए रखना आवश्यक है।

मंत्री ने डिजिटल उपकरणों के स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र में सहज समावेश पर जोर दिया—जैसे कि रीयल-टाइम निगरानी, मानव संसाधन प्रबंधन, डेटा फ्रेमवर्क, और पारदर्शी वित्तीय ट्रैकिंग, ताकि स्वास्थ्य सेवाएँ अधिक सुलभ और किफायती बनें। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से केंद्रीकृत, इंटरऑपरेबल डिजिटल ढांचे के लिए रोडमैप तैयार करने का आग्रह किया, जिससे राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन मजबूत हो और कोई भी पिछड़ न जाए।

मंत्री ने केरल की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया कि राज्य प्राचीन ज्ञान और आधुनिक तकनीक के बीच संतुलन बनाए रखेगा और डिजिटल स्वास्थ्य नवाचार में अग्रणी भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि पूरे देश में आयुष डिजिटल सेवाओं में एकरूपता और विस्तार आवश्यक है, जो नागरिक-केंद्रित शासन पर आधारित हो।

मुख्य वक्ताओं के विचार

वैद्य राजेश कोटेचा, सचिव, आयुष मंत्रालय, भारत सरकार ने कार्यशाला में कहा कि आयुष क्षेत्र में आईटी समाधानों का एकीकरण अब विकल्प नहीं बल्कि अनिवार्य है। उन्होंने मंत्रालय की चल रही पहलों जैसे आयुष ग्रिड और नए डिजिटल पोर्टल का उल्लेख किया, जो राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देंगे, सॉफ़्टवेयर को मानकीकृत करेंगे और आधुनिक आयुष सेवाओं की समान पहुँच सुनिश्चित करेंगे।

उन्होंने प्रतिभागियों से डिजिटल नवाचारों को अपनाने और राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन के साथ तालमेल बनाए रखने का आग्रह किया। interoperable सिस्टम्स के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि इनसे रीयल-टाइम निगरानी, डेटा और मानव संसाधन प्रबंधन, और वित्तीय ट्रैकिंग आसान होगी।

राजन एन. खोबरागड़े, अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्वास्थ्य और आयुष), केरल सरकार ने केरल की स्वास्थ्य और आयुष अवसंरचना तथा डिजिटल समावेशन में प्रगति की सराहना की। उन्होंने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से केरल के मॉडल का लाभ उठाने और यूज़र-फ्रेंडली, केंद्रीकृत और स्थानीय रूप से अनुकूल डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म बनाने का आह्वान किया।

डॉ. रघु, सलाहकार, आयुष मंत्रालय ने कहा कि कार्यशाला समय पर एक मंच है जो आईटी-आधारित समाधानों को बढ़ावा देता है, जिससे पारदर्शिता, रोगी देखभाल और पहुंच में सुधार होता है।

रंजन कुमार, प्रमुख सचिव, आयुष, उत्तर प्रदेश ने कहा कि ऐसे मंच राज्यों के बीच नवाचार, सहयोग और ज्ञान साझा करने में मदद करते हैं, जिससे स्केलेबल और समावेशी स्वास्थ्य समाधान पूरे देश में लागू हो सकें।

डॉ. डी. साजित बाबू, राज्य मिशन निदेशक, राष्ट्रीय आयुष मिशन, केरल ने कहा कि कार्यशाला केरल के आयुष सेवाओं को आईटी नवाचारों के माध्यम से आधुनिक बनाने के मिशन को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण है। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन सॉफ़्टवेयर के लाइव डेमो में भाग लेने के अवसर पर जोर दिया और कहा कि डिजिटल परिवर्तन सभी समुदायों को शामिल करते हुए होना चाहिए।

डॉ. सुभोद कुमार, निदेशक, आयुष मंत्रालय ने राष्ट्रीय आयुष मिशन, केरल की सराहना की कि उन्होंने इस पहल का नेतृत्व किया, जो आयुष विभागीय सम्मेलन की दृष्टि के अनुरूप है और राज्यों के बीच डिजिटल सहयोग को बढ़ावा देती है।

कार्यशाला में कविता जैन, संयुक्त सचिव, आयुष मंत्रालय भी उपस्थित रही। 91 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि शामिल हैं, जिनमें आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, असम, बिहार, दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव, दिल्ली, गोवा, गुजरात, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, लक्षद्वीप, महाराष्ट्र, मणिपुर, मिज़ोरम, नागालैंड, पुदुचेरी, राजस्थान, सिक्किम, तमिलनाडु, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल शामिल हैं।

कार्यशाला के मुख्य उद्देश्य

  • सर्वश्रेष्ठ प्रथाओं और नवाचारों का आदान-प्रदान

  • केंद्रीय सरकार के आईटी प्लेटफ़ॉर्म जैसे आयुष ग्रिड पर परिचय

  • प्रोग्राम प्रबंधन, रोगी देखभाल, निगरानी, मानव संसाधन और डेटा प्रबंधन, और वित्तीय ट्रैकिंग के क्षेत्रों पर चर्चा

क्षेत्र भ्रमण

20–21 सितंबर 2025 को प्रतिभागियों का केरल के कottayam, Alappuzha और Thrissur जिलों में आयुष सुविधाओं का दौरा होगा, जिसमें शामिल हैं:

  • NABH एंट्री लेवल सर्टिफाइड और कायाकल्प पुरस्कार प्राप्त आयुषमैन आरोग्य मंदिर

  • सरकारी आयुष अस्पताल

  • स्पोर्ट्स आयुर्वेदा प्रोजेक्ट

  • आरोग्यानौका, पल्लियेटिव केयर, दृष्टि और आयुर्कर्मा जैसी पहलों का अवलोकन

यह राष्ट्रीय कार्यशाला भारत की भविष्य-सक्षम, गतिशील और नागरिक-केंद्रित आयुष डिजिटल स्वास्थ्य प्रणाली की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।


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