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राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर सीएसआईआर-सीआरआरआई और एएमएनएस इंडिया के बीच अनुसंधान समझौता

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राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर सीएसआईआर–केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (CSIR-CRRI) और इस्पात क्षेत्र की प्रमुख कंपनी आर्सेलर मित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया (AMNS India) के बीच एक अनुसंधान एवं विकास (R&D) समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते का उद्देश्य सड़क निर्माण में आयरन ओअर टेलिंग्स (Iron Ore Tailings) के उपयोग की संभावनाओं का अध्ययन करना है।

इस अवसर पर सीएसआईआर की महानिदेशक और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के डीएसआईआर की सचिव डॉ. एन. कलैसेल्वी ने कहा कि सड़क निर्माण में आयरन ओअर टेलिंग्स का उपयोग “खनन अपशिष्ट से हरित सड़कें (Mine Waste to Green Roads)” बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। उन्होंने बताया कि देश में ओडिशा, छत्तीसगढ़ और कर्नाटक में स्थित विभिन्न आयरन ओअर बेनिफिशिएशन संयंत्रों से हर वर्ष लगभग 18–20 मिलियन टन आयरन ओअर टेलिंग्स उत्पन्न होते हैं। इन टेलिंग्स को आमतौर पर बड़े बांधों में संग्रहित किया जाता है और इन्हें स्लाइम्स भी कहा जाता है, जो पर्यावरण और आर्थिक दृष्टि से चुनौतियां पैदा करते हैं।

इस R&D समझौते का उद्देश्य आयरन ओअर टेलिंग्स के प्रबंधन की समस्या का समाधान करना और सड़क निर्माण में प्राकृतिक एग्रीगेट्स की मांग को कम करना है। इस पहल के अंतर्गत CSIR-CRRI के वैज्ञानिक प्रयोगशाला परीक्षण, सामग्री का विश्लेषण और पेवमेंट डिज़ाइन अध्ययन करेंगे, ताकि सड़क की विभिन्न परतों में आयरन ओअर टेलिंग्स की उपयोगिता का आकलन किया जा सके।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. अरविंद बोधंकर, मुख्य सततता अधिकारी (Chief Sustainability Officer), AMNS इंडिया थे। उन्होंने कहा कि उद्योग और अनुसंधान संस्थानों के बीच सहयोग परिपत्र अर्थव्यवस्था (Circular Economy) और टिकाऊ अवसंरचना के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह साझेदारी औद्योगिक उप-उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा देकर देश के विकास में योगदान देगी।

सीएसआईआर-सीआरआरआई के निदेशक डॉ. च. रवि शेखर ने कहा कि संस्थान अगली पीढ़ी की टिकाऊ सड़क प्रौद्योगिकियों के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि AMNS इंडिया के साथ यह सहयोग सड़क निर्माण में आयरन ओअर टेलिंग्स के वैज्ञानिक परीक्षण और फील्ड प्रदर्शन को संभव बनाएगा, जिससे भारत सतत पेवमेंट प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अपनी अग्रणी भूमिका और मजबूत करेगा।

इस पहल का नेतृत्व सीएसआईआर-सीआरआरआई के फ्लेक्सिबल पेवमेंट डिवीजन के प्रमुख श्री सतीश पांडे कर रहे हैं, जो स्टील स्लैग रोड टेक्नोलॉजी के आविष्कारक भी हैं। उन्होंने कहा कि अनुसंधान और प्रयोगशाला विश्लेषण के माध्यम से आयरन ओअर टेलिंग्स को सड़क निर्माण में अच्छी मिट्टी और प्राकृतिक एग्रीगेट्स के विकल्प के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा।

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस समारोह के दौरान सतत परिवहन अवसंरचना से संबंधित कई नवीन तकनीकों का भी प्रदर्शन किया गया। इनमें कृषि अपशिष्ट आधारित बायो-बिटुमेन, स्टील स्लैग आधारित ECOFIX त्वरित गड्ढा मरम्मत तकनीक, स्लैग और फ्लाई ऐश आधारित TERASURFACING तकनीक, तथा वेस्ट प्लास्टिक आधारित मॉड्यूलर जियोसेल जैसी तकनीकें शामिल हैं। इन तकनीकों का उद्देश्य सड़क निर्माण में परिपत्र अर्थव्यवस्था (Circular Economy) के सिद्धांतों को बढ़ावा देना है।

कार्यक्रम में AMNS इंडिया के वरिष्ठ अधिकारियों, CSIR-CRRI के वैज्ञानिकों, उद्योग प्रतिनिधियों, नीति-निर्माताओं और सड़क एवं इस्पात क्षेत्र से जुड़े कई हितधारकों ने भाग लिया। इस आयोजन ने भारत में सतत अवसंरचना विकास के लिए विज्ञान आधारित समाधानों के बढ़ते महत्व को रेखांकित किया।

चरौदा में विज्ञान मॉडल एवं रंगोली प्रदर्शनी का आयोजन

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ऐसे आयोजनों से बच्चों में जागृत होती है वैज्ञानिक सोच — डॉ. दिलीप साहू

आरंग- शनिवार को शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला चरौदा में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर विज्ञान मॉडल प्रदर्शनी एवं रंगोली के माध्यम से विज्ञान विषयक चित्रकारी प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर भाग लेते हुए अपनी प्रतिभा और वैज्ञानिक सोच का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।

इस अवसर पर जनपद पंचायत फिंगेश्वर (जिला गरियाबंद) के सभापति डॉ. दिलीप साहू तथा पीपला वेलफेयर फाउंडेशन के संरक्षक एवं समाजसेवी पारसनाथ साहू विद्यालय पहुंचकर बच्चों का उत्साहवर्धन किया।

डॉ. दिलीप साहू ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से बच्चों में वैज्ञानिक सोच विकसित होती है तथा उन्हें अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का मंच मिलता है। उन्होंने कहा कि विज्ञान हमारे दैनिक जीवन का अभिन्न अंग है और ऐसे कार्यक्रमों से बच्चों में विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ती है। उन्होंने राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर आयोजित मॉडल प्रदर्शनी, रंगोली के माध्यम से विज्ञान आधारित चित्रकारी, अनुशासन व्यवस्था एवं स्वच्छता के लिए विद्यालय प्रबंधन की सराहना की।

समाजसेवी पारसनाथ साहू एवं बागबाहरा कसेकेरा प्रकल्प से विज्ञान परिषद के अध्यक्ष विमल साहू ने विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए मॉडलों का अवलोकन कर उनके उद्देश्यों की जानकारी ली तथा बच्चों को प्रोत्साहित किया।

मॉडल प्रदर्शनी कार्यक्रम का मंच संचालन नवाचारी शिक्षक महेन्द्र कुमार पटेल ने किया। आयोजन एवं संयोजन में संस्था प्रमुख के.के. परमाल, शिक्षक महेन्द्र कुमार पटेल, सूर्यकांत चन्द्राकार, दीनदयाल धीवर, डिलेश्वर साहू तथा शिक्षिका संगीता पाटले की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्कूली बच्चों की उपस्थिति एवं सक्रिय सहभागिता रही।


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