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छत्रपति शिवाजी महाराज की पुण्यतिथि पर अमित शाह ने दी श्रद्धांजलि, बताया राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक

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केंद्रीय गृह मंत्री एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने छत्रपति शिवाजी महाराज की पुण्यतिथि पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपने संदेश में कहा कि वे भारतीय गौरव के अमर प्रतीक और राष्ट्रीय स्वाभिमान के शाश्वत रक्षक छत्रपति शिवाजी महाराज के चरणों में श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं।

अमित शाह ने कहा कि शिवाजी महाराज ने धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए लोगों को एकजुट किया और हिंदवी स्वराज की स्थापना की। समुद्री शक्ति के महत्व को समझते हुए उन्होंने एक सशक्त नौसेना का निर्माण किया, जो उनकी दूरदर्शिता और अद्वितीय रणनीतिक क्षमता को दर्शाता है।

उन्होंने आगे कहा कि शिवाजी महाराज का जीवन इस बात का आदर्श उदाहरण है कि एक शासक कैसे अपनी संस्कृति और भाषा की रक्षा करते हुए जनकल्याण के उच्चतम मानक स्थापित कर सकता है।

अमित शाह ने अपने संदेश में कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज का संघर्ष और उनका जीवन देशवासियों को सदैव मातृभूमि के प्रति समर्पण और निष्ठा की प्रेरणा देता रहेगा।

एक जिला, एक उत्पाद: ग्रामीण कौशल से राष्ट्रीय गौरव तक

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मुख्य बातें (Key Takeaways)

  • ODOP स्थानीय कारीगरों को सशक्त बनाकर पारंपरिक कला और कौशल को पुनर्जीवित करता है।

  • यह पहल पूरे देश में फैल चुकी है और 770 से अधिक जिलों को आर्थिक केंद्र में बदल चुकी है।

  • उत्तर प्रदेश से शुरू हुई यह पहल अब देश की सबसे प्रमुख स्थानीय आर्थिक परिवर्तन योजना बन चुकी है।

  • GeM-ODOP बाज़ार जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर ODOP उत्पादों को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित किया जा रहा है।

परिचय: जहां से स्थानीय कला ने राष्ट्रीय क्रांति की शुरुआत की

उत्तर प्रदेश के मोरादाबाद में सदियों से कारीगर पीढ़ियों से पीढ़ियों तक पीतल के बर्तन बनाते आए हैं। छोटे-छोटे कार्यशालाओं में काम करने वाले ये कारीगर अक्सर अपनी कला के बावजूद दुनिया से दूर रह जाते थे।

लेकिन 2018 में एक नई शुरुआत हुई। राज्य सरकार के नेतृत्व में शुरू की गई एक अभिनव योजना के तहत मोरादाबाद के पीतल उद्योग को उस जिले की विशिष्ट पहचान के रूप में चुना गया—One District One Product (ODOP) के तहत।

यह विचार जितना सरल था, उतना ही क्रांतिकारी भी—हर जिले की एक विशिष्ट वस्तु को पहचान देना, उसे ब्रांडिंग, मार्केटिंग, संस्थागत समर्थन और visibility देना, और उस समुदाय को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना।

आज मोरादाबाद के हस्तशिल्प अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंचों पर प्रदर्शित होते हैं। स्थानीय गौरव बढ़ा, आय में वृद्धि हुई और वह जिला आर्थिक दृष्टि से एक मॉडल बन गया।

मोरादाबाद एक अपवाद नहीं रहा; यह ODOP की बड़ी कहानी की पहली कड़ी बन गया। दिसंबर 2025 तक ODOP राष्ट्रीय स्तर पर अपनाई जा चुकी है और 770 से अधिक जिलों तक पहुंच चुकी है, जिससे लाखों कारीगर, उद्यमी और किसान लाभान्वित हुए हैं।

जो शुरुआत उत्तर प्रदेश से हुई, वह अब देश की सबसे प्रशंसित स्थानीय आर्थिक परिवर्तन पहल बन चुकी है।

ODOP: विकास और समृद्धि का इंजन

संतुलित क्षेत्रीय विकास

ODOP का उद्देश्य हर जिले की विशिष्ट आर्थिक क्षमता को पहचान कर उसे विकसित करना है, ताकि क्षेत्रीय असंतुलन घटे और समावेशी विकास सुनिश्चित हो।

कारीगरों और उत्पादकों का सशक्तिकरण

ODOP किसानों, कारीगरों, बुनकरों और स्थानीय उत्पादकों को आत्मनिर्भर बनाकर रोजगार सृजन को बढ़ावा देता है।

निर्यात को बढ़ावा

ODOP उत्पादों को वैश्विक बाजारों में पहचान दिलाकर निर्यात को बढ़ावा मिलता है।

संस्कृति और विरासत का संरक्षण

परंपरागत कला और शिल्प को संरक्षित करते हुए यह योजना सांस्कृतिक विरासत को भी बचाती है।

आर्थिक प्रभाव और रोजगार

ODOP ने स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ाने और आय में वृद्धि करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

वैश्विक पहचान

ब्रांडिंग, प्रदर्शनियों और वैश्विक प्लेटफॉर्म के माध्यम से ODOP उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है।

जिलों को विकास का इंजन बनाना

ODOP को DPIIT (Department for Promotion of Industry and Internal Trade) द्वारा संचालित किया जाता है। इसका लक्ष्य हर जिले की अनूठी आर्थिक क्षमता को पहचान कर उसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ना है।

इस पहल के तहत राज्य और केंद्र सरकार मिलकर जिला प्रशासन के साथ काम करते हैं। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा क्षेत्र में उपलब्ध पारिस्थितिकी तंत्र के आधार पर उत्पाद चुने जाते हैं और DPIIT को सूची भेजी जाती है।

अब तक 1200 से अधिक ODOP उत्पाद DPIIT के डिजिटल पोर्टल पर सूचीबद्ध किए जा चुके हैं, जिनमें वस्त्र, खाद्य पदार्थ, हस्तशिल्प और खनिज शामिल हैं।

ई-कॉमर्स के जरिए बाजार विस्तार: GeM-ODOP बाज़ार

सरकार ने ODOP उत्पादों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़कर उनकी पहुंच बढ़ाई है। GeM-ODOP बाज़ार जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर ODOP उत्पादों को प्रदर्शित कर देश भर में और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बिक्री को बढ़ावा दिया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश: देश के लिए उदाहरण

ODOP की शुरुआत करने वाला उत्तर प्रदेश इस योजना के तहत सबसे बड़े बदलाव का अनुभव कर रहा है।

UPITS 2025 (Uttar Pradesh International Trade Show) में ODOP को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस अवसर पर ODOP को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की सफलता को सराहा।

ODOP पवेलियन में 466 स्टॉल लगाए गए और ₹20.77 करोड़ के व्यापार सौदे हुए।

महाकुंभ 2025 में ODOP ने एक प्रमुख मंच के रूप में अपनी पहचान बनाई। 6,000 वर्ग मीटर के प्रदर्शनी क्षेत्र में पूरे देश के कारीगरों ने अपनी कला दिखाई।

इसमें शामिल प्रमुख हस्तशिल्प:

  • बनारसी ब्रोकैड

  • कुशीनगर कालीन

  • फिरोजाबाद कांच

  • वाराणसी लकड़ी के खिलौने

  • धातु हस्तशिल्प

  • उत्तर प्रदेश के 75 GI टैग्ड उत्पाद (34 काशी क्षेत्र से)

उत्तर प्रदेश में ODOP के प्रभाव (Impact)

  • निर्यात में 76% वृद्धि, 2017-18 के ₹88,967 करोड़ से बढ़कर 2023-24 में ₹1.71 लाख करोड़

  • ODOP मार्जिन मनी योजना के तहत ₹6,000 करोड़ के प्रोजेक्ट स्वीकृत

  • ODOP कौशल विकास और टूलकिट वितरण योजना के तहत 1.25 करोड़ से अधिक कारीगरों को प्रशिक्षण और आधुनिक उपकरण दिए गए

PM Ekta Malls: कारीगरी की विरासत के प्रतीक

PM Ekta Malls (Unity Malls) ODOP, GI और हस्तशिल्प उत्पादों को प्रदर्शित और बेचने के लिए विशेष रूप से बनाए जा रहे हैं। हर राज्य/केंद्र शासित प्रदेश के लिए स्थान आरक्षित किया जाएगा ताकि वे अपने उत्पादों को एक राष्ट्रीय मंच पर दिखा सकें।

मुख्य विशेषताएँ (Highlights)

  • सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के लिए अलग-अलग स्थान

  • ₹5,000 करोड़ का ब्याज रहित समर्थन, जिसमें हर राज्य को कम से कम ₹100 करोड़

  • 27 राज्यों में 29 Unity Malls को मंजूरी

  • आधुनिक सुविधाओं सहित आकर्षक वास्तुकला, अनुभव क्षेत्र, थिएटर, फूड कोर्ट

  • PPP मॉडल पर काम, राज्य की मालिकाना और पेशेवर प्रबंधन

  • ODOP को राष्ट्रीय सांस्कृतिक केंद्र और वैश्विक बाजार का मंच बनाना

ODOP का वैश्विक विस्तार

ODOP भारत के जिलों को वैश्विक अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदानकर्ता बनाने में भी मदद कर रहा है।

क्या आप जानते हैं?

  • ODOP वॉल SARAS Aajeevika Stores जैसे प्लेटफॉर्म पर जिला-विशिष्ट उत्पादों को प्रदर्शित करता है।

  • 80+ भारतीय मिशनों ने ODOP उत्पादों को विदेशों में प्रदर्शनों, स्टोरों या डिप्लोमैटिक गिफ्टिंग के माध्यम से बढ़ावा दिया है।

  • G-20 बैठकों में ODOP उत्पादों को उपहार के रूप में शामिल किया गया।

  • तीन अंतरराष्ट्रीय स्टोर्स में ODOP उत्पादों की बिक्री हो रही है:

    • सिंगापुर (Mustafa Centre और Kashmir Heritage)

    • कुवैत (Hakimi Centre)

निष्कर्ष: जिले की कहानी विश्व मंच पर चमक रही है

ODOP की कहानी भारत की कहानी है—वह कहानी जो पारंपरिक कारीगरी, जीवटता और आत्मनिर्भरता की है। मोरादाबाद के चमकते पीतल से लेकर PM Ekta Malls की शेल्फ तक, ODOP ने स्थानीय कौशल को राष्ट्रीय गौरव और वैश्विक अवसर में बदल दिया है।

अब “एक जिला, एक उत्पाद” केवल एक योजना नहीं रह गई; यह लाखों आशाओं का प्रतीक बन चुकी है, जो अपने गाँव से निकलकर विश्व मंच पर चमक रही है। जैसे-जैसे नए बाजार खुलते हैं और PM Ekta Malls उभरते हैं, भारत की स्थानीय गलियाँ आत्मविश्वास के साथ दुनिया के मंच पर कदम रख रही हैं, और हर कारीगर के सपने साकार हो रहे हैं।


वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष: राजीव चौक में भारतीय वायु सेना बैंड की देशभक्ति से ओतप्रोत प्रस्तुति

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 भारत देश अपने राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने का उत्सव पूरे देश में बड़े उत्साह के साथ मना रहा है। इस अवसर पर सामूहिक गायन, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और सैन्य बैंड प्रस्तुतियों का आयोजन देश के प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर किया जा रहा है। इन आयोजनों का उद्देश्य नागरिकों में राष्ट्रीय गौरव, एकता और देशभक्ति की भावना को सुदृढ़ करना है।

इन्हीं समारोहों के अंतर्गत 21 जनवरी 2026 को नई दिल्ली के राजीव चौक स्थित एम्फीथिएटर में भारतीय वायु सेना (IAF) बैंड द्वारा एक भव्य संगीतमय प्रस्तुति दी गई। 31 संगीतकारों से युक्त इस बैंड ने लगभग 45 मिनट की प्रस्तुति में ब्रास, रीड, स्ट्रिंग और इलेक्ट्रॉनिक वाद्ययंत्रों के संयोजन से 11 मनमोहक धुनें प्रस्तुत कीं। कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षणों में ‘वंदे मातरम्’ की भावपूर्ण प्रस्तुति तथा ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों के पराक्रम को समर्पित गीत ‘सिंदूर’ शामिल रहे।

सदियों से संगीत भारतीय संस्कृति का एक अमूल्य रत्न रहा है और यह भारत की समृद्ध सैन्य परंपरा का भी अभिन्न अंग है, जो एकता को प्रोत्साहित करता है और वीरता की प्रेरणा देता है। वर्ष 1944 में स्थापना के बाद से भारतीय वायु सेना बैंड, भारतीय और पाश्चात्य संगीत के अपने विविध संग्रह के माध्यम से देश की सैन्य परंपराओं का सशक्त प्रतीक बना हुआ है।

भारतीय वायु सेना बैंड का उद्देश्य अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियों के माध्यम से देशवासियों में देशभक्ति की भावना को जागृत करना और राष्ट्रीय एकता के संदेश को जन-जन तक पहुँचाना है।


वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ पर राज्यभर में द्वितीय चरण के कार्यक्रम 19 से 26 जनवरी तक

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26 जनवरी को रायपुर में राज्यपाल तथा जगदलपुर में मुख्यमंत्री के आतिथ्य में होंगे विशेष आयोजन

व्यापक जनभागीदारी के साथ ग्राम पंचायत, जनपद, जिला एवं राज्य स्तर पर कार्यक्रमों का होगा आयोजन

रायपुर- छत्तीसगढ़ शासन के संस्कृति विभाग द्वारा राष्ट्रगीत वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर राज्यभर में चार चरणों में विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, जिसके तहत द्वितीय चरण में कार्यक्रमों का आयोजन 19 से 26 जनवरी 2026 तक किया जाएगा। 

गणतंत्र दिवस के दिन रायपुर में राज्यपाल तथा जगदलपुर में मुख्यमंत्री के आतिथ्य में विशेष कार्यक्रम आयोजित होंगे। साथ ही राज्य के सभी जिला मुख्यालयों, ब्लॉक मुख्यालयों, ग्राम पंचायतों तथा स्कूल-कॉलेजों में ध्वजारोहण एवं राष्ट्रगान के पश्चात बड़े पैमाने पर सामूहिक वंदे मातरम् गायन किया जाएगा। इन कार्यक्रमों में मंत्रीगण, सांसद, विधायक, जनप्रतिनिधि, स्थानीय अधिकारी, प्रमुख हस्तियां और नागरिकों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी।

द्वितीय चरण में 19 से 26 जनवरी तक राज्य के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में एनसीसी, एनएसएस, स्काउट एवं गाइड की सहभागिता के साथ वंदे मातरम् से संबंधित संगीतमय प्रस्तुतियाँ, विशेष सभाएँ, निबंध प्रतियोगिता, वाद-विवाद, प्रश्नोत्तरी, पोस्टर निर्माण, रंगोली, चित्रकला एवं प्रदर्शनी आयोजित की जाएंगी। राज्य पुलिस बैंड द्वारा सार्वजनिक स्थलों पर वंदे मातरम् एवं देशभक्ति गीतों पर आधारित प्रस्तुतियाँ दी जाएंगी।

सार्वजनिक एवं निजी सहभागिता के तहत प्रदेश में वंदे मातरम् ऑडियो-वीडियो बूथ स्थापित किए जाएंगे, जहां नागरिक अपनी आवाज में वंदे मातरम् का गायन रिकॉर्ड कर अभियान के पोर्टल पर अपलोड कर सकेंगे। पोर्टल पर वंदे मातरम् की पूर्व रिकॉर्डेड धुन के साथ गायन की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। 

उल्लेखनीय है कि प्रथम चरण का आयोजन 7 से 14 नवंबर 2025 को सफलतापूर्वक किया जा चुका है। वही तृतीय चरण 7 से 15 अगस्त 2026 को हर घर तिरंगा अभियान के साथ संचालित किया जाएगा एवं चतुर्थ चरण का आयोजन 1 से 7 नवंबर 2026 को किया जाएगा। भारत सरकार, संस्कृति मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप यह आयोजन ग्राम पंचायत, जनपद, जिला एवं राज्य स्तर पर व्यापक जनभागीदारी के साथ कार्यक्रमों को संपन्न कराया जाएगा, जिसका उद्देश्य नागरिकों में राष्ट्रगीत के प्रति भावनात्मक जुड़ाव और राष्ट्रभक्ति की भावना को सुदृढ़ करना है।

वंदे मातरम् की गौरव गाथा का स्मरण हर भारतीय के लिए गर्व का विषय – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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रायपुर- राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर छत्तीसगढ़ विधानसभा में आयोजित विशेष चर्चा में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने  वंदेमातरम के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि वंदे मातरम्  देशप्रेम का वह जज्बा था जिसकी गूंज से ब्रिटिश हुकूमत तक कांप उठती थी। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यह उद्घोष करोड़ों भारतीयों के हृदय में साहस, त्याग और बलिदान की अग्नि प्रज्वलित करता रहा। उन्होंने कहा कि यह वही स्वर था जिसने गुलामी की जंजीरों को तोड़ने की शक्ति प्रदान की।

उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के अमर बलिदानियों को स्मरण करते हुए कहा कि भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, खुदीराम बोस सहित असंख्य क्रांतिकारी वंदे मातरम् का जयघोष करते हुए मां भारती के लिए हंसते-हंसते फांसी के फंदे पर चढ़ गए। उनका बलिदान आज भी हर भारतीय को राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का स्मरण कराता है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वंदे मातरम् की गौरव गाथा का स्मरण करना हर भारतीय के लिए गर्व का विषय है। यह गीत हमें उस संघर्ष, उस पीड़ा और उस अदम्य साहस की याद दिलाता है, जिसने भारत को स्वतंत्रता दिलाई। यह हमारी राष्ट्रीय चेतना का आधार स्तंभ है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की पहचान केवल उसकी भौगोलिक सीमाओं से नहीं होती, जो मानचित्र पर अंकित होती हैं। किसी राष्ट्र की वास्तविक पहचान उसकी सभ्यता, संस्कृति, परंपराओं और उन मूल्यों से होती है, जो सदियों से उसके आचार-विचार और जीवन पद्धति का हिस्सा रहे हैं। भारत की यह सांस्कृतिक निरंतरता विश्व में अद्वितीय है।

उन्होंने कहा कि विधानसभा में वंदे मातरम् पर विशेष चर्चा आयोजित करने का उद्देश्य यह भी है कि हम इतिहास की उन गलतियों को कभी न भूलें, जिन्होंने देश को गहरे घाव दिए, जिनकी पीड़ा आज भी हमारे समाज में कहीं-न-कहीं महसूस की जाती है। इतिहास से सीख लेकर ही हम एक सशक्त और समरस भारत का निर्माण कर सकते हैं।

मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के उन सभी वीर सपूतों को नमन किया, जिन्होंने वंदे मातरम् के भाव को अपने जीवन का लक्ष्य बनाकर भारत माता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् हमें हमारी विरासत, हमारी सांस्कृतिक चेतना और हजारों वर्षों की सभ्यता से जोड़ता है। यह उन आदर्शों की सामूहिक अभिव्यक्ति है, जिन्हें हमने युगों-युगों में आत्मसात किया है।

उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में धरती को माता के रूप में पूजने की भावना रही है, जिसे हम मातृभूमि कहते हैं। वंदे मातरम् इसी भाव का सशक्त और पवित्र स्वरूप है, जो हमें प्रकृति, भूमि और राष्ट्र के प्रति सम्मान और कर्तव्यबोध सिखाता है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रगीत वंदे मातरम् की 150वीं जयंती के अवसर पर छत्तीसगढ़ विधानसभा में इस विशेष चर्चा के आयोजन के लिए विधानसभा अध्यक्ष तथा सभी  सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे विमर्श नई पीढ़ी को राष्ट्रप्रेम, सांस्कृतिक गौरव और ऐतिहासिक चेतना से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विजय दिवस पर शहीदों को किया नमन

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विजय दिवस (16 दिसंबर) के अवसर पर राष्ट्र के वीर शहीदों को श्रद्धापूर्वक नमन किया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विजय दिवस भारतीय सेना के शौर्य, साहस और अदम्य पराक्रम का गौरवपूर्ण प्रतीक है, जो देशवासियों के हृदय में गर्व और कृतज्ञता का भाव जाग्रत करता है।

मुख्यमंत्री साय ने 1971 के ऐतिहासिक युद्ध का स्मरण करते हुए कहा कि हमारे वीर जवानों ने असाधारण साहस, त्याग और बलिदान का परिचय देकर देश की अखंडता और संप्रभुता की रक्षा की। उनके पराक्रम से न केवल भारत की सैन्य शक्ति विश्व मंच पर स्थापित हुई, बल्कि मानवीय मूल्यों और राष्ट्रधर्म की मिसाल भी प्रस्तुत हुई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शहीदों का बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए राष्ट्रभक्ति, कर्तव्यनिष्ठा और समर्पण की अमर प्रेरणा है। उन्होंने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे देशभक्ति, अनुशासन और एकता के मूल्यों को आत्मसात करते हुए राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय सहभागिता निभाएं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शहीदों के आदर्शों पर चलना, राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखना और देश सेवा के लिए सदैव तत्पर रहना ही विजय दिवस पर उन्हें सच्ची और स्थायी श्रद्धांजलि है।

प्रधानमंत्री मोदी 7 नवंबर को ‘वन्दे मातरम्’ के 150 वर्षों के समारोह का करेंगे उद्घाटन

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नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 7 नवंबर 2025 को सुबह लगभग 9:30 बजे इंदिरा गांधी इनडोर स्टेडियम, नई दिल्ली में राष्ट्रीय गीत “वन्दे मातरम्” के साल भर चलने वाले समारोह का उद्घाटन करेंगे।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री स्मारक डाक टिकट और सिक्का भी जारी करेंगे। यह कार्यक्रम 7 नवंबर 2025 से 7 नवंबर 2026 तक पूरे देश में आयोजित होने वाले समारोह की औपचारिक शुरुआत का प्रतीक है, जो इस कालजयी रचना के 150 वर्षों का उत्सव मनाएगा। “वन्दे मातरम्” ने भारत की स्वतंत्रता संग्राम में प्रेरणा दी और आज भी राष्ट्रीय गर्व और एकता की भावना को उजागर करता है।

इस समारोह में सुबह लगभग 9:50 बजे पूरे देश के सार्वजनिक स्थलों पर “वन्दे मातरम्” के पूर्ण संस्करण का सामूहिक गायन आयोजित किया जाएगा, जिसमें समाज के सभी वर्गों के नागरिक भाग लेंगे।

वर्ष 2025 में “वन्दे मातरम्” की 150वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है। यह गीत बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा लिखा गया था और यह अक्षय नवमी, 7 नवंबर 1875 के अवसर पर रचित हुआ। “वन्दे मातरम्” पहली बार उनके उपन्यास आनंदमठ के हिस्से के रूप में साहित्यिक पत्रिका बंगादर्शन में प्रकाशित हुआ। इस गीत में मातृभूमि को शक्ति, समृद्धि और दिव्यता का प्रतीक बताया गया है और इसने भारत के जागृत राष्ट्रभाव और आत्म-सम्मान की भावना को काव्यात्मक रूप में व्यक्त किया। जल्दी ही यह गीत देशभक्ति का एक स्थायी प्रतीक बन गया।

MY Bharat राष्ट्रीय ध्वज क्विज़ के विजेताओं का सियाचिन यात्रा के बाद नई दिल्ली में गर्मजोशी से स्वागत

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MY Bharat राष्ट्रीय ध्वज क्विज़ के विजेताओं ने सियाचिन की ऐतिहासिक यात्रा पूरी करने के बाद नई दिल्ली पहुंचकर युवा मामले और खेल मंत्री तथा श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया का गर्मजोशी से स्वागत किया।

राष्ट्रीय ध्वज क्विज़ के 25 विजेताओं का दल 26 सितंबर से 1 अक्टूबर 2025 तक सियाचिन बेस कैंप गया था। दुनिया के सबसे ऊँचे युद्ध क्षेत्र के कठोर, लेकिन प्रेरणादायक माहौल में, उन्होंने भारतीय सेना के साथ संवाद किया, स्मारकों पर श्रद्धांजलि अर्पित की और मोर्चे पर जीवन की वास्तविकताओं का प्रत्यक्ष अनुभव किया।

नई दिल्ली में डॉ. मंडाविया से मुलाकात करते हुए युवा प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए और सैनिकों में देखी गई वीरता, अनुशासन और बलिदान की भावना पर जोर दिया। एक युवा प्रतिभागी ने कहा कि सियाचिन जाना उनके जीवन का सबसे परिवर्तनकारी अनुभव रहा। इतनी कठिन परिस्थितियों में देश की रक्षा करते भारतीय सैनिकों को देखकर उन्होंने भी देश की सेवा के लिए वही जोश अपनाने का संकल्प लिया।

युवा प्रतिभागी मानस मंडल ने कहा, "इस यात्रा के दौरान मैंने अनुशासन, दृढ़ता और साथीभाव का वास्तविक महत्व जाना। मैं देश के प्रति और अधिक जिम्मेदार महसूस करता हूँ और इस संदेश को अपने साथियों तक पहुँचाने का संकल्प लेता हूँ।"

इस अवसर पर डॉ. मनसुख मंडाविया ने युवाओं की उत्सुकता और सेवा-भाव तथा कर्तव्य-बोध के मूल्यों को अपनाने की सराहना की, जो MY Bharat पहल का केंद्र हैं। उन्होंने युवाओं से कहा कि इस अनुभव और सीख को अपने दैनिक जीवन और समुदायों में उतारें। "आपको इस अनुभव और यात्रा के संदेश को देश के युवाओं तक पहुँचाना चाहिए," उन्होंने कहा।

इस अवसर पर युवाओं ने राष्ट्रीय गर्व, सेवा और शक्ति का संदेश पूरे भारत में फैलाने की शपथ ली। उन्होंने MY Bharat के सक्रिय स्वयंसेवक बने रहने और विकसित भारत की दृष्टि में योगदान देने का संकल्प दोहराया।



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