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'पीएम मोदी की उम्मीदों पर खरा उतरूँगा, पूरी जिम्मेदारी से निभाऊँगा कर्तव्य'

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 नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार संभालने के बाद शनिवार को देश को आश्वस्त किया कि वे इस नई भूमिका को पूरी विनम्रता, ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ निभाएंगे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार किए जाने के बाद जोशी को यह नई जिम्मेदारी सौंपी गई है।


पदभार ग्रहण करने के बाद प्रह्लाद जोशी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा, "प्रधानमंत्री जी ने मुझ पर विश्वास जताते हुए इतनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। उनके मार्गदर्शन और नेतृत्व में, मैं पूरी निष्ठा के साथ काम करूँगा और इस विभाग में उनकी सभी अपेक्षाओं को पूरा करने का भरसक प्रयास करूँगा।"

NEP के क्रियान्वयन और धर्मेंद्र प्रधान के योगदान की सराहना

नवनियुक्त शिक्षा मंत्री ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के सफल क्रियान्वयन का श्रेय पूर्व मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को दिया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के पिछले 12 वर्षों के कार्यकाल में शिक्षा के क्षेत्र में कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल हुई हैं। बीते 4-5 वर्षों में देश की शिक्षा व्यवस्था में जो परिवर्तन और प्रगति हुई है, उसमें धर्मेंद्र प्रधान की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

छात्र प्रदर्शनों के बीच धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा

गौरतलब है कि NEET परीक्षा पत्र लीक मामले को लेकर देशभर में हो रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। शनिवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर अपना त्यागपत्र साझा करते हुए उन्होंने लिखा कि देश की एकता और छात्रों का हित उनके लिए सर्वोपरि है।

उन्होंने पत्र में स्पष्ट किया, "जंतर-मंतर और देश के अन्य हिस्सों में उत्पन्न स्थितियों का राष्ट्र-विरोधी ताकतों द्वारा दुरुपयोग न हो और छात्रों का भविष्य कानूनी उलझनों में न फँसे, इसी उद्देश्य से मैंने माननीय प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा सौंपा है।"

राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर आधारित चेतना विकास कार्यशाला सम्पन्न, जीवन विद्या पर दिया गया जोर

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महासमुंद- राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रकाश में संकुल केंद्र खट्टा में आयोजित राज्य स्तरीय चेतना विकास मूल्य शिक्षा कार्यशाला सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई। कार्यशाला में शिक्षकों, जनप्रतिनिधियों एवं समाजसेवियों ने शिक्षा के उद्देश्य, मानवीय मूल्यों और जीवन विद्या के महत्व पर विस्तृत चर्चा की।


कार्यक्रम के दौरान शिक्षक गेंदलाल कोकडिया ने बताया कि कार्यशाला में शिक्षा के विभिन्न आयामों जैसे—शिक्षा का उद्देश्य, जीवन विद्या अध्ययन, परिवार एवं समाज में मूल्य, प्रकृति एवं पर्यावरण संरक्षण, तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन पर संवाद किया गया। उन्होंने कहा कि “राष्ट्रीय शिक्षा नीति बच्चों के सर्वांगीण विकास के साथ-साथ नैतिक और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देती है।”

समापन सत्र में जनपद पंचायत अध्यक्ष दिशारामस्वरूप दीवान ने कहा कि बच्चों में संस्कार और मूल्य विकसित करने के लिए माताओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने जीवन विद्या अध्ययन शिविर और चेतना विकास मूल्य शिक्षा कार्यशालाओं को समाज के हर वर्ग के लिए आवश्यक बताया।

कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से आए समाजसेवियों एवं शिक्षकों ने भी अपने विचार रखे और शिक्षा में जीवन विद्या को शामिल करने पर जोर दिया। वक्ताओं ने कहा कि इस प्रकार की पहल से समाज में जागरूकता बढ़ेगी, पारिवारिक और सामाजिक समरसता मजबूत होगी तथा देशभक्ति की भावना विकसित होगी।

कार्यशाला के आयोजन के लिए विभिन्न शिक्षण संस्थाओं, अधिकारियों और शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। आयोजकों ने इसे शिक्षा के मानवीयकरण और सामाजिक जागरूकता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।


राष्ट्रीय माध्यम- cum- मेरिट छात्रवृत्ति योजना (NMMSS) की समीक्षा और रणनीति कार्यशाला आयोजित

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शिक्षा मंत्रालय के स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग (DoSEL) ने 06 दिसंबर 2025 को राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारियों के साथ एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया, जिसमें राष्ट्रीय माध्यम- cum- मेरिट छात्रवृत्ति योजना (NMMSS) के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा और रणनीतियों को अंतिम रूप देने पर चर्चा की गई।

कार्यक्रम की शुरुआत में मंत्रालय ने NMMSS की विशेषताओं पर प्रकाश डाला। यह योजना केंद्रीय क्षेत्र की प्रमुख योजनाओं में से एक है, जो हर साल एक लाख नई छात्रवृत्तियाँ प्रदान करती है। योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के मेधावी छात्रों को प्रोत्साहित करना और कक्षा VIII के बाद ड्रॉपआउट दर को कम करना है ताकि छात्र कक्षा XII तक अपनी शिक्षा पूरी कर सकें।

कार्यशाला में केंद्र सरकार और राज्य/केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन के बीच घनिष्ठ सहयोग पर जोर दिया गया। इसमें सुझाव दिए गए कि योजना के प्रचार-प्रसार को बढ़ाया जाए, वितरण प्रणाली को सुधारें और यह सुनिश्चित किया जाए कि छात्रवृत्ति योग्य लाभार्थियों तक प्रभावी रूप से पहुँच सके।

कार्यक्रम में NMMSS पर विस्तृत प्रस्तुति दी गई, जिसमें 2021–22 से 2024–25 तक की योजना की प्रगति, कोटा उपयोग, NMMSS परीक्षा संचालन और छात्रवृत्ति नवीनीकरण में चुनौतियों पर चर्चा की गई। इसके बाद राज्य और केंद्र शासित प्रदेश के नोडल अधिकारियों के साथ हितधारक परामर्श हाइब्रिड मोड में आयोजित किए गए।

राष्ट्रीय माध्यम- cum- मेरिट छात्रवृत्ति योजना (NMMSS) की मुख्य बातें

  • यह केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, जो आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि के मेधावी छात्रों का समर्थन करती है।

  • प्रत्येक वर्ष कक्षा IX के छात्रों को एक लाख छात्रवृत्तियाँ प्रदान की जाती हैं।

  • छात्रवृत्ति कक्षा X से XII तक नवीनीकरण योग्य है।

  • योजना के लिए पात्र छात्र सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और स्थानीय निकायों के स्कूलों में अध्ययनरत होना चाहिए।

  • छात्रवृत्ति की राशि ₹7,12,000 प्रति वर्ष है।

  • छात्र के माता-पिता की वार्षिक आय ₹3,50,000 से अधिक नहीं होनी चाहिए।

  • चयन परीक्षा के लिए छात्र ने कक्षा VII में कम से कम 55% अंक प्राप्त किए होने चाहिए, जबकि अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के छात्रों के लिए 5 प्रतिशत की छूट दी जाती है।


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