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नशीली दवाओं की अवैध तस्करी पर DRI की बड़ी कार्रवाई

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नशीली दवाओं और मन:प्रभावी पदार्थों के अवैध निर्माण तथा अंतरराष्ट्रीय तस्करी के खिलाफ लगातार जारी कार्रवाई के तहत राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने एक संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। यह नेटवर्क ट्रामाडोल हाइड्रोक्लोराइड की गोलियों का गुप्त रूप से निर्माण, छिपाने और अफ्रीकी देशों में अवैध निर्यात करने में शामिल था।

एक सप्ताह तक चले खुफिया-आधारित अभियान में 1 लाख ट्रामाडोल हाइड्रोक्लोराइड टैबलेट, 1 लाख टैपेंटाडोल टैबलेट, मन:प्रभावी पदार्थों के गुप्त निर्माण में इस्तेमाल होने वाली मशीनरी एवं कच्चा माल जब्त किया गया। कार्रवाई में सिंडिकेट के तीन प्रमुख सदस्यों को गिरफ्तार किया गया।

2 अगस्त 2026 को खुफिया सूचना के आधार पर DRI अधिकारियों ने मुंबई एयर कार्गो कॉम्प्लेक्स में नाइजीरिया भेजे जा रहे एक निर्यात कंसाइनमेंट को रोका। दस्तावेजों में इस खेप को 300 मिलीग्राम प्रेगाबालिन कैप्सूल बताया गया था। हालांकि, विस्तृत जांच में इसके भीतर छिपाकर रखी गई 1 लाख ट्रामाडोल हाइड्रोक्लोराइड टैबलेट (250 मिलीग्राम), जिनका वजन लगभग 25 किलोग्राम, और 1 लाख टैपेंटाडोल टैबलेट (200 मिलीग्राम), जिनका वजन लगभग 20 किलोग्राम था, बरामद की गईं।

DRI की त्वरित जांच में एक सुव्यवस्थित आपूर्ति श्रृंखला का खुलासा हुआ, जो कई स्तरों पर संचालित हो रही थी। ट्रामाडोल की गोलियों का महाराष्ट्र के अंबरनाथ स्थित एक कारखाने में गुप्त रूप से निर्माण किया जाता था। उनकी पहचान छिपाने के लिए उन्हें सादे कार्टन में पैक किया जाता था। इसके बाद खेप को मुंबई एयर कार्गो कॉम्प्लेक्स के पास स्थित एक गोदाम में ले जाया जाता था, जहां उन्हें दोबारा सफेद बोरियों में पैक कर नाइजीरिया अवैध रूप से भेजने की तैयारी की जाती थी।

सप्ताहभर में की गई कई समन्वित अनुवर्ती कार्रवाइयों के दौरान DRI अधिकारियों ने निर्यातक, निर्माता, आपूर्तिकर्ता, परिवहनकर्ता और भंडारण गोदाम से जुड़े विभिन्न स्थानों पर तलाशी ली। निर्माण इकाई में की गई तलाशी के दौरान टैबलेट बनाने वाली मशीनरी के साथ-साथ बड़ी मात्रा में कच्चा माल भी जब्त किया गया, जिसका इस्तेमाल मन:प्रभावी पदार्थों के गुप्त निर्माण में किया जाना था।

इस अभियान में तीन प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इनमें IEC धारक/निर्यातक, आपूर्तिकर्ता-सह-समन्वयक और ट्रामाडोल टैबलेट का गुप्त निर्माता शामिल हैं।

ट्रामाडोल और टैपेंटाडोल पर कड़े नियंत्रण

ट्रामाडोल और टैपेंटाडोल सिंथेटिक ओपिओइड दर्द निवारक दवाएं हैं, जिनका उपयोग चिकित्सकीय निगरानी में मध्यम से गंभीर दर्द के उपचार के लिए किया जाता है। इनके दुरुपयोग और निर्भरता के जोखिम को देखते हुए दोनों दवाएं कड़े नियामकीय नियंत्रण के अधीन हैं।

ट्रामाडोल को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम, 1985 के तहत मन:प्रभावी पदार्थ के रूप में अधिसूचित किया गया है। वहीं, टैपेंटाडोल वर्तमान में NDPS अधिनियम की अनुसूची में शामिल नहीं है, लेकिन यह ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स अधिनियम और उसके तहत बनाए गए नियमों के अंतर्गत कड़ाई से नियंत्रित है।

इन दवाओं का अवैध निर्माण, डायवर्जन और तस्करी सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है और अक्सर संगठित अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी नेटवर्क से जुड़ी होती है।

इस कार्रवाई के माध्यम से DRI ने मन:प्रभावी पदार्थों के अवैध निर्माण, भंडारण, छिपाने और उन्हें विदेश भेजने के प्रयास में शामिल एक संगठित नेटवर्क को प्रभावी रूप से ध्वस्त कर दिया है।

गुवाहाटी में BRICS एंटी-ड्रग एजेंसियों की दो दिवसीय बैठक शुरू, सिंथेटिक ड्रग्स पर रहेगा मुख्य फोकस

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गुवाहाटी- ब्रिक्स (BRICS) देशों की मादक पदार्थ निरोधक एजेंसियों की दो दिवसीय उच्चस्तरीय बैठक सोमवार से गुवाहाटी में शुरू हो गई। बैठक में सदस्य देशों के वरिष्ठ अधिकारी नशीले पदार्थों की तस्करी, विशेष रूप से सिंथेटिक ड्रग्स के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए साझा रणनीति पर चर्चा करेंगे।

बैठक का प्रमुख उद्देश्य सदस्य देशों के बीच खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान को मजबूत करना, सीमा पार मादक पदार्थों की तस्करी पर प्रभावी रोक लगाने के लिए समन्वय बढ़ाना और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच सहयोग को और सशक्त बनाना है।

इस दौरान ड्रग तस्करी के बदलते तौर-तरीकों, नई चुनौतियों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संयुक्त कार्रवाई को लेकर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि इस बैठक से ब्रिक्स देशों के बीच नशीले पदार्थों के खिलाफ अभियान को नई मजबूती मिलेगी और क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग को भी बढ़ावा मिलेगा।

भारतीय तटरक्षक बल और ATS की संयुक्त कार्रवाई में मुंद्रा तट के पास 115 किग्रा कोकीन जब्त, कीमत लगभग 1150 करोड़ रुपये

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भारतीय तटरक्षक बल (ICG) ने समुद्री मादक पदार्थ तस्करी के खिलाफ एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए लगभग 115 किलोग्राम कोकीन जब्त की है। यह कार्रवाई 25–26 मई 2026 के दौरान गुजरात के मुंद्रा तट के पास एंटी-टेररिज्म स्क्वाड (ATS) गुजरात के साथ संयुक्त खुफिया आधारित ऑपरेशन में की गई। जब्त किए गए मादक पदार्थों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत लगभग 1150 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

ATS गुजरात द्वारा दी गई विशिष्ट और सटीक खुफिया जानकारी के आधार पर भारतीय तटरक्षक बल की इंटरसेप्टर नौकाओं ने ATS कर्मियों के साथ मुंद्रा एंकरज क्षेत्र में व्यापक तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान एक कंटेनर जहाज पर संदिग्ध गतिविधि देखी गई। त्वरित कार्रवाई और दोनों एजेंसियों के बीच उत्कृष्ट समन्वय का प्रदर्शन करते हुए टीम ने तुरंत मौके पर पहुंचकर समुद्र से पांच बैग बरामद किए।

जांच के दौरान इन बैगों में सफेद पाउडर जैसा पदार्थ पाया गया, जिसकी जांच में कोकीन होने की पुष्टि हुई। कुल 115 पैकेट, प्रत्येक लगभग एक किलोग्राम वजन के, यानी लगभग 115 किलोग्राम मादक पदार्थ जब्त किया गया। इसके बाद संबंधित जहाज को आगे की जांच के लिए बंदरगाह पर लाया गया।

यह पिछले पांच वर्षों में भारतीय तटरक्षक बल और ATS द्वारा किया गया 15वां सफल संयुक्त मादक पदार्थ विरोधी अभियान है, जो समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने और “नशा मुक्त भारत” के राष्ट्रीय लक्ष्य को साकार करने की उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

मध्य प्रदेश में CBN की बड़ी कार्रवाई: मेथामफेटामिन फैक्ट्री का भंडाफोड़, 51.992 किलो MD जब्त

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मध्य प्रदेश में अब तक किसी एजेंसी द्वारा की गई सबसे बड़ी कार्रवाई में से एक में, केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN) के अधिकारियों ने तीन दिनों तक चले अभियान के दौरान इंदौर जिले के महू तहसील के थावलाय गांव में स्थित एक अवैध ड्रग फैक्ट्री का पता लगाया।

इस दौरान 43.820 किलोग्राम उच्च गुणवत्ता वाली मेथामफेटामिन (MD), 260 किलोग्राम से अधिक रसायन और अत्याधुनिक उपकरण जब्त किए गए। पूरे ऑपरेशन में कुल 51.992 किलोग्राम MD बरामद हुई। सभी जब्त पदार्थ और रसायन NDPS अधिनियम, 1985 के तहत जब्त किए गए।

बस में पकड़े गए आरोपी, 8.172 किलो MD बरामद

13 फरवरी 2026 की रात, CBN नीमच शाखा को मिली विशेष खुफिया जानकारी के आधार पर, मंदसौर में एक बस में यात्रा कर रहे दो यात्रियों से 8.172 किलोग्राम क्रिस्टल मेथामफेटामिन बरामद की गई।

CBN की टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए बस को रोका और NDPS अधिनियम के तहत तलाशी ली। तलाशी के दौरान एक यात्री के पास संदिग्ध बॉक्स मिला, जिसमें उसने MD होने की बात स्वीकार की। दूसरे साथी से भी बॉक्स बरामद हुआ। दोनों आरोपियों ने ड्रग्स रखने की बात स्वीकार की और बताया कि वे इसे सीधे एक गुप्त लैब से ला रहे थे।

गुप्त लैब का पता लगाया गया

जानकारी मिलने के बाद CBN ने नीमच, मंदसौर, जावरा और उज्जैन की संयुक्त विशेष टीम बनाई और संदिग्ध लैब की तलाश शुरू की। जांच के बाद महू के पास लैब का पता चला।

14 फरवरी 2026 की सुबह संदिग्ध परिसर की पहचान की गई, लेकिन तेज रासायनिक गैस और बदबू के कारण तुरंत प्रवेश नहीं किया जा सका। स्वास्थ्य जोखिम को देखते हुए PPE (सुरक्षा उपकरण) के साथ विशेषज्ञ टीम को बुलाया गया।

आधुनिक मशीनरी और तकनीकी टीम की मदद

लैब में आधुनिक मशीनरी और प्लांट लगे थे। इन्हें हटाने के लिए Government Opium and Alkaloid Works (GOAW), नीमच के इंजीनियर और रसायन विशेषज्ञों की मदद ली गई। मशीनरी को हटाकर जब्त किया गया और पूरी कार्रवाई 15 फरवरी 2026 की सुबह पूरी हुई।

आरोपी गिरफ्तार, जांच जारी

मंदसौर में पकड़े गए दोनों आरोपियों पर NDPS अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। जिस घर में लैब चल रही थी, उसके मालिक को भी हिरासत में लिया गया है।
आगे की जांच में ड्रग्स के निर्माण और वितरण से जुड़े पूरे नेटवर्क को तोड़ने की कोशिश की जा रही है।

CBN का संदेश

CBN ने कहा कि यह कार्रवाई उनकी प्रतिबद्धता, समन्वय और तेजी से की गई खुफिया कार्रवाई का उदाहरण है। एजेंसी ने नशीली दवाओं के खिलाफ लड़ाई जारी रखने और भारत को ड्रग-फ्री बनाने का संकल्प दोहराया।


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