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भारत में भूजल प्रबंधन में नई क्रांति: सतत जल सुरक्षा के लिए कई महत्वपूर्ण पहलें तेज़ी से आगे बढ़ीं

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भारत में भूजल (Groundwater) प्रबंधन के क्षेत्र में कई प्रमुख पहलों ने महत्वपूर्ण प्रगति हासिल की है। देश में भूजल की सतत उपलब्धता और जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा कई वैज्ञानिक, नीतिगत और समुदाय-आधारित कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।

भूजल भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह देश की कृषि, पीने के पानी और उद्योगों की मुख्य आधारशिला है। भारत में लगभग 62% सिंचाई, 85% ग्रामीण जल और 50% शहरी जल की मांग भूजल से पूरी होती है। बढ़ती जनसंख्या, कृषि विस्तार, औद्योगिक विकास और शहरीकरण के कारण भूजल पर दबाव बढ़ा है। अतः भूजल के संरक्षण और संतुलित उपयोग के लिए वैज्ञानिक और प्रभावी प्रबंधन अनिवार्य हो गया है।

मुख्य तथ्य (Key Takeaways):

  • भारत में 43,228 भूजल स्तर निगरानी स्टेशन, 712 जल शक्ति केंद्र, और 53,264 जल गुणवत्ता निगरानी स्टेशन कार्यरत हैं।

  • जल शक्ति अभियान: कैच द रेन (JSA: CTR), जल संचय जन भागीदारी (JSJB), अटल भूजल योजना, और मिशन अमृत सरोवर जैसी योजनाओं ने भूजल प्रबंधन में महत्वपूर्ण प्रगति दिखाई है।

  • भूजल प्रबंधन सतत विकास लक्ष्यों (SDG 6, SDG 11, SDG 12) की दिशा में अहम भूमिका निभाता है।

सरकारी पहलें और उनकी प्रगति:

1. मॉडल ग्राउंडवाटर बिल (Model Groundwater Bill):

केंद्र सरकार ने भूजल संरक्षण, नियंत्रण और प्रबंधन हेतु मॉडल बिल तैयार किया है, जिसे 21 राज्य/संघ शासित प्रदेशों ने अपनाया है। इस बिल के माध्यम से राज्य स्तर पर भूजल की अंधाधुंध निकासी पर नियंत्रण और संतुलित उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।

2. जल शक्ति अभियान: कैच द रेन (JSA: CTR):

यह अभियान 22 मार्च 2021 को World Water Day के अवसर पर शुरू किया गया। इसका उद्देश्य पानी संरक्षण, वर्षा जल संचयन, जल निकायों की पहचान एवं जीओ-टैगिंग, और जागरूकता बढ़ाना है।

3. जल संचय जन भागीदारी (JSJB):

यह पहल 6 सितंबर 2024 को शुरू हुई और भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा देती है।
22 जनवरी 2026 तक कुल 39,60,333 कृत्रिम भूजल पुनर्भरण और जल संचयन कार्य पूरे किए जा चुके हैं।

4. राष्ट्रीय एक्विफर मैपिंग और प्रबंधन कार्यक्रम (NAQUIM 2.0):

यह कार्यक्रम उच्च-स्तरीय डेटा और वैज्ञानिक inputs प्रदान करता है। इसका लक्ष्य पंचायत स्तर तक जल-स्तर और गुणवत्ता की जानकारी पहुंचाना है, ताकि स्थानीय स्तर पर प्रभावी निर्णय लिए जा सकें।

5. अटल भूजल योजना (Atal Jal):

7 राज्यों में सामुदायिक नेतृत्व वाली भूजल प्रबंधन पहल के तहत जल उपयोग में दक्षता और डिजिटल निगरानी जैसे उपाय किए जा रहे हैं।
20 जनवरी 2026 तक 6,68,683 हेक्टेयर क्षेत्र में जल उपयोग दक्षता बढ़ी है और 6,271 डिजिटल वॉटर लेवल रिकॉर्डर स्थापित किए गए हैं।

6. मिशन अमृत सरोवर:

24 अप्रैल 2022 को शुरू इस मिशन के तहत प्रत्येक जिले में कम से कम 1 एकड़ के अमृत सरोवर बनाए जा रहे हैं। यह न केवल जल संरक्षण बढ़ाता है बल्कि भूजल स्तर में सुधार भी करता है।

निष्कर्ष:

भूजल भारत की जल सुरक्षा का मुख्य आधार है, लेकिन इसकी स्थिति में लगातार गिरावट और गुणवत्ता में गिरावट चिंता का विषय है। इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने वैज्ञानिक, नीतिगत और सामुदायिक भागीदारी पर आधारित एक समग्र रणनीति अपनाई है।
मॉडल बिल, JSA: CTR, JSJB, NAQUIM 2.0, अटल भूजल योजना और मिशन अमृत सरोवर जैसी पहलें भूजल संरक्षण, पुनर्भरण, निगरानी और समुचित उपयोग को बढ़ावा दे रही हैं।
इन प्रयासों से भारत जल-संरक्षण, जल-प्रबंधन और सतत विकास की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है।


मिशन अमृत सरोवर बना खुशहाली का स्रोत

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 20 साल पुराने तालाब का कायाकल्प,  सिंचाई और मछलीपालन से बदल रही है ग्रामीणों की जिंदगी

रायपुर-कोरिया जिले के सोनहत जनपद पंचायत क्षेत्र के ग्राम किशोरी में मिशन अमृत सरोवर के तहत नवीनीकृत हुआ तालाब आज ग्रामीण जीवन को नई दिशा दे रहा है। कभी अनुपयोगी हो चुका यह तालाब अब ग्रामीणों के लिए दैनिक निस्तार, पशुओं के पेयजल, खेती-बाड़ी और आजीविका संवर्धन का महत्वपूर्ण साधन बन चुका है।

20 साल पुराने तालाब का कायाकल्प

ग्राम पंचायत किशोरी में लगभग 20 वर्ष पुराना तालाब लंबे समय तक उपेक्षा के कारण अनुपयोगी हो गया था। वित्तीय वर्ष 2022- 23 में पंचायत के प्रस्ताव पर इसे मिशन अमृत सरोवर के तहत पुनर्जीवित किया गया। करीब 10 लाख रुपये की लागत से तालाब का जीर्णाेद्धार कर इसकी जलभराव क्षमता को तीन गुना बढ़ाकर 10 हजार घनमीटर कर दिया गया।

18 एकड़ खेतों में पहुंचा पानी

तालाब के पुनरुद्धार से आसपास के किसानों को सीधा लाभ मिल रहा है। किसान मनोज रक्सेल और अरविन्द सिंह की तीन-तीन एकड़, जबकि सुरेन्द्र, लक्ष्मण, वीरेन्द्र और आनंद की दो-दो एकड़ से ज्यादा भूमि अब सिंचित हो रही है। इसके अलावा जगबली यादव की लगभग सवा एकड़ ज़मीन भी इस सरोवर से सींची जा रही है। किसानों ने बताया कि अब वे खरीफ के साथ रबी की फसलें भी लेने लगे हैं, जिससे उनकी आमदनी में सुधार हुआ है।

महिलाओं की कमाई 75 हजार रुपए

ग्राम पंचायत ने अमृत सरोवर को आजीविका संवर्धन के रूप में स्थानीय महिला स्व-सहायता समूह को लीज पर उपलब्ध कराया है। जय मां महिला स्व-सहायता समूह की सदस्य महिलाओं ने इस तालाब से बीते ग्रीष्म में 75 हजार रुपये की मछली बेचकर लाभ कमाया। समूह की अध्यक्ष सोनकुंवर और सचिव जीराबाई ने बताया कि इस साल लगभग तीन लाख रुपए के मछली उत्पादन की उम्मीद है। यह पहल महिलाओं के लिए अतिरिक्त आय का जरिया और पोषण संवर्धन का साधन बन रही है।

खुशहाली का प्रतीक बना अमृत सरोवर

किशोरी ग्राम पंचायत का यह अमृत सरोवर आज केवल जल संरक्षण का साधन नहीं, बल्कि किसानों की समृद्धि और महिलाओं की आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि अब उनके जीवन में स्थायी परिवर्तन दिखाई दे रहा है।


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