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राष्ट्रीय विद्यालय बैंड प्रतियोगिता 2026: जोनल स्तर का समापन, ग्रैंड फिनाले के लिए 16 टीमें चयनित

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गणतंत्र दिवस समारोह 2026 के अंतर्गत आयोजित राष्ट्रीय विद्यालय बैंड प्रतियोगिता का जोनल स्तर सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। इसके अंतर्गत देश भर से 16 टीमों का चयन किया गया है, जो 24 जनवरी 2026 को नेशनल बाल भवन, नई दिल्ली में आयोजित होने वाले भव्य फाइनल में अपनी प्रस्तुति देंगी।

इन 16 टीमों का चयन पूर्व, पश्चिम, उत्तर और दक्षिण—चारों जोनों से किया गया है। प्रत्येक जोन से ब्रास बैंड बॉयज़, ब्रास बैंड गर्ल्स, पाइप बैंड बॉयज़ और पाइप बैंड गर्ल्स—चार श्रेणियों में एक-एक टीम को फाइनल के लिए चुना गया है। इस प्रतियोगिता का उद्देश्य देशभर के स्कूली बच्चों में देशभक्ति, एकता और अनुशासन की भावना को प्रोत्साहित करना है।

ग्रैंड फिनाले के लिए चयनित 16 टीमें

ब्रास बैंड (लड़के)

  1. सेंट जेवियर्स हाई स्कूल, लुपुंगुटु, चाईबासा, पश्चिमी सिंहभूम – झारखंड (पूर्व)

  2. संजीवनी सैनिक स्कूल एवं जूनियर कॉलेज, कोपरगांव – महाराष्ट्र (पश्चिम)

  3. सिटी मॉन्टेसरी स्कूल, कानपुर रोड, लखनऊ – उत्तर प्रदेश (उत्तर)

  4. पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय, पेरिये, कासरगोड – केरल (दक्षिण)

ब्रास बैंड (लड़कियां)

  1. होली क्रॉस हाई स्कूल, कारबुक, गोमती – त्रिपुरा (पूर्व)

  2. डॉन बॉस्को हाई स्कूल एवं जूनियर कॉलेज, मुंबई – महाराष्ट्र (पश्चिम)

  3. सेंट जोसेफ कॉलेज, आशियाना, लखनऊ – उत्तर प्रदेश (उत्तर)

  4. प्रोविडेंस गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल, कोझिकोड – केरल (दक्षिण)

पाइप बैंड (लड़के)

  1. कैराली स्कूल, एचईसी टाउनशिप, रांची – झारखंड (पूर्व)

  2. श्री स्वामीनारायण गुरुकुल कुमार विद्यालय, गिर सोमनाथ – गुजरात (पश्चिम)

  3. गवर्नमेंट बॉयज़ सीनियर सेकेंडरी स्कूल, बदली – दिल्ली (उत्तर)

  4. द ग्रेट इंडिया सैनिक स्कूल, रायपुर – छत्तीसगढ़ (दक्षिण)

पाइप बैंड (लड़कियां)

  1. कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, कांके, रांची – झारखंड (पूर्व)

  2. पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय, सूरतगढ़ – राजस्थान (पश्चिम)

  3. गवर्नमेंट सर्वोदय कन्या विद्यालय, पालम कॉलोनी – दिल्ली (उत्तर)

  4. पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय, एएससी सेंटर, बेंगलुरु – कर्नाटक (दक्षिण)

पुरस्कार एवं मूल्यांकन

प्रत्येक श्रेणी में शीर्ष तीन टीमों को नकद पुरस्कार, ट्रॉफी और प्रमाण पत्र प्रदान किए जाएंगे—

  • प्रथम पुरस्कार: ₹51,000

  • द्वितीय पुरस्कार: ₹31,000

  • तृतीय पुरस्कार: ₹21,000

शेष टीम को ₹11,000 का सांत्वना पुरस्कार दिया जाएगा। प्रस्तुतियों का मूल्यांकन रक्षा मंत्रालय द्वारा नियुक्त जूरी करेगी, जिसमें थल सेना, नौसेना और वायु सेना के सदस्य शामिल होंगे।

आयोजन एवं भागीदारी

यह प्रतियोगिता रक्षा मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित की जा रही है। इसके प्रथम चरण में सीबीएसई, आईसीएसई, केवीएस, एनवीएस, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय विद्यालय, पीएम-श्री और सैनिक स्कूलों सहित सभी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के विद्यालयों ने भाग लिया।

इस वर्ष प्रतियोगिता में उत्साह और भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

  • 763 स्कूल बैंड टीमों ने राज्य स्तर पर भाग लिया

  • इनमें से 94 टीमें जोनल स्तर के लिए चयनित हुईं

  • जोनल स्तर पर 30 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों की 80 टीमों के 2,217 बच्चों ने हिस्सा लिया

यह प्रतियोगिता देशभर के विद्यार्थियों में अनुशासन, सांस्कृतिक एकता और राष्ट्रीय गौरव की भावना को और सशक्त बनाने का एक प्रभावशाली मंच बन रही है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीपीएसयू की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की, चार उपक्रमों को मिला मिनीरत्न दर्जा

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 10 नवम्बर 2025 को नई दिल्ली स्थित नरोज़ी नगर के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में नव-निर्मित डीपीएसयू भवन में रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों (DPSUs) की व्यापक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस अवसर पर चार डीपीएसयू — म्यूनिशन्स इंडिया लिमिटेड (MIL), आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड (AVNL), इंडिया ऑप्टेल लिमिटेड (IOL) और हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL) — को मिनीरत्न (श्रेणी-I) का दर्जा प्राप्त होने पर सम्मानित किया गया।

बैठक को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने भारत की रक्षा विनिर्माण प्रणाली को सशक्त बनाने और आत्मनिर्भर भारत के विजन को आगे बढ़ाने में डीपीएसयू की निरंतर भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा, “हमारे सभी 16 डीपीएसयू देश की आत्मनिर्भरता के मजबूत स्तंभ हैं। ऑपरेशन सिंदूर जैसी गतिविधियों में उनकी उत्कृष्ट भूमिका हमारी स्वदेशी प्रणालियों की विश्वसनीयता और क्षमता को दर्शाती है।”

रक्षा मंत्री ने एचएसएल, एवीएनएल, आईओएल और एमआईएल को मिनीरत्न का दर्जा मिलने पर बधाई दी और इसे उनकी बढ़ती दक्षता, स्वायत्तता और रक्षा क्षेत्र में योगदान का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि 2021 में ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड के सात नए डीपीएसयू में पुनर्गठन से परिचालन स्वतंत्रता, नवाचार और प्रतिस्पर्धा में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि मिनीरत्न का दर्जा इन डीपीएसयू को क्षमता विस्तार, आधुनिकीकरण और नए उपक्रमों, संयुक्त उपक्रमों व सार्वजनिक-निजी सहयोग की दिशा में आगे बढ़ने में सक्षम बनाएगा।

राजनाथ सिंह ने बताया कि वर्ष 2024-25 में भारत का रक्षा उत्पादन ₹1.51 लाख करोड़ तक पहुंचा, जिसमें डीपीएसयू का योगदान 71.6% रहा। रक्षा निर्यात ₹6,695 करोड़ तक पहुंचा, जो ‘मेक इन इंडिया’ प्रणालियों पर वैश्विक विश्वास का प्रतीक है। उन्होंने कहा, “यह स्पष्ट दर्शाता है कि ‘मेड इन इंडिया’ रक्षा उत्पादों को अब वैश्विक स्तर पर सम्मान मिल रहा है।”

रक्षा मंत्री ने डीपीएसयू को निर्देश दिया कि वे स्वदेशी तकनीकों के त्वरित विकास, अनुसंधान एवं विकास (R&D) को सुदृढ़ करने, उत्पाद गुणवत्ता बढ़ाने, समय पर डिलीवरी सुनिश्चित करने और निर्यात बढ़ाने के लिए रणनीतिक दृष्टिकोण अपनाएं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक डीपीएसयू को स्पष्ट स्वदेशीकरण और अनुसंधान रोडमैप तैयार कर अगली समीक्षा बैठक में प्रस्तुत करना चाहिए।

इस अवसर पर डीपीएसयू के बीच तीन प्रमुख समझौता ज्ञापनों (MoUs) का आदान-प्रदान किया गया। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) ने यंत्र इंडिया लिमिटेड (YIL) के साथ इसके आधुनिकीकरण एवं 10,000 टन फोर्जिंग प्रेस सुविधा की स्थापना के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए। एचएएल ने ₹435 करोड़ का ब्याज-मुक्त अग्रिम प्रदान किया है, जबकि बीडीएल अगले 10 वर्षों में 3,000 मीट्रिक टन तक का निरंतर कार्यभार प्रदान करेगा। तीसरा एमओयू एमआईडीएचएएनआई में ‘मेटल बैंक’ की स्थापना से संबंधित था, जो रक्षा परियोजनाओं के लिए आवश्यक कच्चे माल की सतत उपलब्धता सुनिश्चित करेगा।

रक्षा मंत्री ने एचएएल आरएंडडी मैनुअल और डीपीएसयू आरएंडडी रोडमैप सहित कई अनुसंधान एवं विकास पहलों का अनावरण किया, जो स्वदेशी डिजाइन और विकास की दिशा में एक निर्णायक कदम है।

सतत रक्षा विनिर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में, उन्होंने ‘स्वयम’ (Sustainable and Green Defence Manufacturing) पहल लॉन्च की। यह व्यापक संकलन डीपीएसयू में हरित परिवर्तन की दिशा में उठाए गए कदमों को दर्शाता है। इस पहल के तहत ऊर्जा दक्षता बढ़ाने, नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को प्रोत्साहित करने और कार्बन उत्सर्जन कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

राजनाथ सिंह ने आईओएल और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) को 100% हरित ऊर्जा उपयोग प्राप्त करने पर सम्मानित किया। आईओएल ने सितंबर 2025 से पूरी तरह नवीकरणीय ऊर्जा अपनाकर 8,669 टन CO₂ उत्सर्जन में कमी की और पहले तिमाही में ₹26.36 लाख की बचत की। बीईएल जनवरी 2025 में RE100 लक्ष्य प्राप्त करने वाला पहला नवरत्न डीपीएसयू बना।

रक्षा मंत्री ने कहा, “हम सब यह संकल्प लें कि भारत को न केवल रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाएं, बल्कि इसे वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करें।”

नव-स्थापित डीपीएसयू भवन को रक्षा उत्पादन विभाग द्वारा विकसित किया गया है और यह सभी 16 डीपीएसयू के लिए एक साझा मंच के रूप में कार्य करेगा। ‘संगच्छध्वं संवदध्वं’ के मंत्र पर आधारित यह भवन नवाचार, सहयोग और समन्वय को प्रोत्साहित करेगा तथा देशी एवं विदेशी हितधारकों को भारत की रक्षा उत्पादन क्षमताओं से अवगत कराएगा।

इस अवसर पर रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार, सभी डीपीएसयू के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक तथा रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

भारत-वियतनाम रक्षा नीति वार्ता के 15वें संस्करण का हनोई में आयोजन

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भारत-वियतनाम रक्षा नीति वार्ता (डीपीडी) का 15वां संस्करण आज, 10 नवंबर 2025 को हनोई में आयोजित हुआ। इस वार्ता की सह-अध्यक्षता भारत के रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और वियतनाम के राष्ट्रीय रक्षा उपमंत्री वरिष्ठ लेफ्टिनेंट जनरल होआंग ज़ुआन चिएन ने की। दोनों पक्षों ने हाइड्रोग्राफी सहयोग, क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण, संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना अभियानों, बंदरगाह यात्राओं, जहाज दौरों तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और शिपयार्ड उन्नयन जैसे विशिष्ट क्षेत्रों में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया।

दोनों देशों ने साइबर सुरक्षा, वास्तविक समय सूचना आदान-प्रदान, सैन्य चिकित्सा तथा विशेषज्ञों के आदान-प्रदान जैसे नए उभरते क्षेत्रों में सहयोग को और विस्तार देने का निर्णय लिया। इसके साथ ही, दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति पर विचार-विमर्श भी किया।

वार्ता के दौरान, पनडुब्बी खोज, बचाव सहायता और सहयोग के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoA) पर हस्ताक्षर किए गए, जो इस क्षेत्र में आपसी सहयोग के लिए एक ढांचा प्रदान करेगा।

इसके अतिरिक्त, रक्षा उद्योग सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए एक आशय पत्र (Letter of Intent) पर भी हस्ताक्षर किए गए। इसमें तकनीकी हस्तांतरण, उच्च प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में सहयोग, संयुक्त अनुसंधान, संयुक्त उद्यम, रक्षा उत्पादन के लिए उपकरणों की खरीद, विशेषज्ञों का आदान-प्रदान तथा उपकरणों की डिजाइन और निर्माण को प्राथमिकता देने पर बल दिया गया।

भारत के रक्षा उत्पादन विभाग और वियतनाम के रक्षा उद्योग के महा विभाग के बीच चल रहे रक्षा उद्योग सहयोग के कार्यान्वयन व्यवस्था के अंतर्गत, दोनों पक्षों ने दिसंबर 2025 में अगली बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया।

वार्ता के बाद रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने वियतनाम के राष्ट्रीय रक्षा मंत्री जनरल फान वान जियांग से मुलाकात की और डीपीडी से संबंधित प्रमुख निर्णयों की जानकारी दी। डीपीडी का 16वां संस्करण 2026 में भारत में आयोजित किया जाएगा।

रक्षा नीति वार्ता भारत-वियतनाम रक्षा साझेदारी की समीक्षा और उसे दिशा देने का प्रमुख तंत्र है तथा यह भारत-वियतनाम संयुक्त दृष्टि वक्तव्य 2030 के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

वियतनाम, भारत की एक्ट ईस्ट नीति और इंडो-पैसिफिक दृष्टिकोण का एक महत्वपूर्ण साझेदार है। रक्षा सचिव की वियतनाम यात्रा ने दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग को और सुदृढ़ किया है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे ‘देश में रक्षा विनिर्माण के अवसर’ विषयक राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 7 अक्टूबर, 2025 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में ‘देश में रक्षा विनिर्माण में अवसर’ विषय पर राष्ट्रीय स्तर के सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे। यह सम्मेलन रक्षा मंत्रालय (MoD) के रक्षा उत्पादन विभाग के तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। इस आयोजन का उद्देश्य रक्षा मंत्रालय और राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों के बीच समन्वय को मजबूत करना है, ताकि क्षेत्रीय औद्योगिक नीतियों और अवसंरचना विकास को रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप बनाया जा सके।

कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्री ‘डिफेंस एक्सिम पोर्टल’ (Defence Exim Portal) का शुभारंभ करेंगे, जो निर्यात और आयात प्राधिकरण जारी करने की प्रक्रिया को सुगम बनाएगा। साथ ही ‘सृजन डीप’ (Srijan DEEP - Defence Establishments and Entrepreneurs Platform) पोर्टल भी लॉन्च किया जाएगा, जो भारतीय रक्षा उद्योगों की क्षमताओं और उत्पादों का डिजिटल भंडार (repository) होगा। इस अवसर पर दो महत्वपूर्ण प्रकाशन — ‘राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेशों की एयरोस्पेस एवं रक्षा क्षेत्र नीति संकलन’ और iDEX कॉफी टेबल बुक ‘Shared Horizons of Innovation’ भी जारी की जाएंगी।

सम्मेलन में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के उद्योग विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे। वे भारत के रक्षा विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को आगे बढ़ाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका पर चर्चा करेंगे। कार्यक्रम में देश में चल रहे स्वदेशीकरण (Indigenisation) प्रयासों, रक्षा निर्यात में वृद्धि, और क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहन देने के लिए राष्ट्रीय पहल पर भी प्रकाश डाला जाएगा।

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