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भुवनेश्वर में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ‘मंडिया दिवस’ समारोह का उद्घाटन किया, ओडिशा के मिलेट अभियान की सराहना की

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भुवनेश्वर-केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज भुवनेश्वर स्थित लोक सेवा भवन के कन्वेंशन सेंटर में आयोजित “मंडिया दिवस” (Millet Day) समारोह का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने भारत के बाजरा आंदोलन को जन आंदोलन में परिवर्तित करने में ओडिशा के अनुकरणीय योगदान की सराहना की।

अपने उद्घाटन संबोधन में मंत्री चौहान ने कहा,

“मंडिया दिवस केवल उत्सव का दिन नहीं है, यह ‘श्री अन्न’ को बढ़ावा देने का एक सार्थक अभियान है। कई लोगों ने इसके बारे में बात की, लेकिन ओडिशा ने वास्तव में इस दृष्टि को धरातल पर उतारा है। मैं इस उल्लेखनीय प्रयास के लिए ओडिशा सरकार को हार्दिक बधाई देता हूँ।”

उन्होंने कहा कि श्री अन्न केवल एक अनाज नहीं, बल्कि पोषण, जल संरक्षण, पर्यावरणीय देखभाल और आने वाली पीढ़ियों के लिए स्थिरता का प्रतीक है।

“मिलेट्स शरीर और पृथ्वी दोनों को पोषण देते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में आज मिलेट्स को वैश्विक मान्यता प्राप्त हुई है,” उन्होंने कहा।

 मंत्री चौहान ने कहा कि मिलेट्स के पोषण और पारिस्थितिकीय महत्व के बारे में जनजागरूकता फैलाना आवश्यक है।

“केवल भाषणों से यह संभव नहीं। हमें सीधे किसानों और नागरिकों से संवाद करना होगा, श्री अन्न के प्रति जागरूकता फैलानी होगी और मिलेट आधारित आजीविकाओं को सशक्त बनाना होगा,” उन्होंने जोड़ा।

उन्होंने वैज्ञानिकों से अनुसंधान और प्रसंस्करण तकनीकों पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया और कहा कि मिलेट की खेती अन्य फसलों की तुलना में अधिक किफायती है।

“प्रोसेसिंग (प्रसंस्करण) मिलेट मूल्य श्रृंखला की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। मैं ओडिशा को बधाई देता हूँ जिसने श्री अन्न को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद कर न केवल दिशा दिखाई है बल्कि देश के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है,” उन्होंने कहा।

उन्होंने सुझाव दिया कि पोषण योजनाओं में मिलेट्स को शामिल किया जाना चाहिए, जैसे बच्चों के लिए मिड-डे मील में, और सरकारी विभागों में मिलेट आउटलेट खोले जाने चाहिए ताकि अन्य राज्य भी ओडिशा के मॉडल को अपना सकें। उन्होंने ओडिशा की महिला किसानों की सराहना करते हुए कहा,

“कृषि महिलाओं के बिना आगे नहीं बढ़ सकती। ओडिशा की महिलाएँ आगे बढ़ रही हैं और खेती में नेतृत्व कर रही हैं।”

ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में देश में कई कृषि योजनाओं का सफल कार्यान्वयन हुआ है जिससे लाखों किसानों को लाभ मिला है। उन्होंने कहा,

“कृषि ओडिशा की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। हमारे किसान भाइयों और बहनों ने राज्य सरकार के मार्गदर्शन में उल्लेखनीय प्रगति की है। मिलेट्स पोषक तत्वों से भरपूर, स्वादिष्ट और स्वास्थ्यवर्धक हैं, और मिलेट मिशन के माध्यम से ओडिशा के छोटे और महिला किसान तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।”

इस अवसर पर ओडिशा के उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंह देव, अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (IRRI) की महानिदेशक डॉ. इवॉन पिंटो, विश्व स्वास्थ्य संगठन की पूर्व मुख्य वैज्ञानिक और एम. एस. स्वामीनाथन रिसोर्स फाउंडेशन की अध्यक्ष डॉ. सौम्या स्वामीनाथन, विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) भारत की कंट्री डायरेक्टर  एलिसाबेथ फॉरे, ओडिशा सरकार के कृषि एवं किसान सशक्तिकरण विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. अरविंद कुमार पाढ़ी, तथा कृषि निदेशक शुभम सक्सेना सहित कई वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक और शोधकर्ता उपस्थित थे।

सतत् और आत्मनिर्भर कृषि की दिशा में कदम – शिवराज सिंह चौहान का ओडिशा दौरा कल

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केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान आगामी 10 नवम्बर, 2025 (सोमवार) को ओडिशा के एक दिवसीय दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे राज्य में किसानों की आय बढ़ाने, पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने से जुड़ी प्रमुख गतिविधियों में भाग लेंगे।

कार्यक्रम के अनुसार, मंत्री चौहान प्रातः पटना से रवाना होकर लगभग पूर्वाह्न 11:00 बजे भुवनेश्वर पहुँचेंगे। वहाँ वे ‘मंडिया दिवस (Millet Day)’ के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित होंगे। यह आयोजन लोक सेवा भवन स्थित कन्वेंशन सेंटर में आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर वे ओडिशा सहित देशभर में मिलेट्स (श्री अन्न/मोटे अनाज) के उत्पादन, प्रसंस्करण और उपभोग को बढ़ावा देने हेतु केंद्र सरकार की विभिन्न पहलों पर प्रकाश डालेंगे। कार्यक्रम में मिलेट्स को किसानों की आय वृद्धि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के एक सशक्त माध्यम के रूप में रेखांकित किया जाएगा।

उद्घाटन समारोह के बाद, केंद्रीय मंत्री कटक जिले के सदर क्षेत्र का दौरा करेंगे, जहाँ वे किसानों से सीधे संवाद करेंगे। इस दौरान वे किसानों के अनुभव जानेंगे, उनकी चुनौतियाँ सुनेंगे और कृषि नीतियों से जुड़ी उनके सुझाव प्राप्त करेंगे। साथ ही, वे केंद्र सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कृषि कार्यक्रमों की मैदान स्तर पर स्थिति और प्रभाव का भी आकलन करेंगे।

दोपहर में, मंत्री चौहान आईसीएआर – केंद्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (CRRI), विद्याधरपुर, कटक में आयोजित संयुक्त रणनीतिक बैठक में भाग लेंगे। इस बैठक में प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना, दलहन आत्मनिर्भरता मिशन, तथा राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन जैसे प्रमुख राष्ट्रीय कृषि अभियानों के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तृत विचार-विमर्श किया जाएगा।

इस बैठक में कृषि मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, आईसीएआर के वैज्ञानिक तथा ओडिशा सरकार के प्रतिनिधि भाग लेंगे। बैठक का उद्देश्य भारतीय कृषि को अधिक उत्पादक, सतत् और आत्मनिर्भर बनाने हेतु व्यवहारिक रणनीतियाँ तैयार करना होगा।

 मंत्री चौहान का यह दौरा ओडिशा में सतत् एवं आत्मनिर्भर कृषि को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। वे बार-बार यह बात दोहराते रहे हैं कि —

“भारत का भविष्य उसके किसानों के खेतों में बसता है, और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हम खेती को लाभकारी, पर्यावरण हितैषी और प्रौद्योगिकी-संचालित बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

केंद्रीय मंत्री लगातार विभिन्न राज्यों का दौरा कर किसानों से सीधे संवाद कर रहे हैं ताकि नीति निर्माण और कार्यक्रमों का क्रियान्वयन जमीनी वास्तविकताओं के अनुरूप किया जा सके। उनका मानना है कि कृषि की सफलता दिल्ली के कार्यालयों में नहीं, बल्कि खेतों में किसानों के साथ बातचीत से तय होती है।

मंत्री चौहान के इस दौरे का एक और प्रमुख उद्देश्य क्षेत्र विशेष की कृषि चुनौतियों जैसे मिट्टी की सेहत, फसल विविधीकरण, जल दक्षता और सतत् खेती पद्धतियों को समझना है। इसके साथ ही, वे आधुनिक कृषि तकनीक, उन्नत बीजों, कृषि यंत्रीकरण और मूल्य संवर्धन से संबंधित सरकारी योजनाओं के प्रति किसानों में जागरूकता भी बढ़ाएँगे।

‘मंडिया दिवस’ का यह आयोजन ओडिशा द्वारा मिलेट्स को बढ़ावा देने में निभाई जा रही अग्रणी भूमिका को रेखांकित करता है। वर्ष 2023 को ‘अंतर्राष्ट्रीय मिलेट वर्ष’ घोषित किए जाने के बाद से ओडिशा ने कोरापुट, रायगड़ा और कंधमाल जैसे जिलों में सामुदायिक स्तर पर मिलेट आधारित कृषि प्रणालियों को सफलतापूर्वक विकसित किया है।

केंद्र सरकार द्वारा लागू योजनाओं — जैसे प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना (उत्पादकता वृद्धि हेतु), दलहन आत्मनिर्भरता मिशन (आयात निर्भरता कम करने हेतु), और राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (रासायनिक-मुक्त खेती को बढ़ावा देने हेतु) — के एकीकरण के माध्यम से सतत् कृषि अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव रखी जा रही है।

दिनभर की गतिविधियों के उपरांत, मंत्री चौहान भुवनेश्वर से विजयवाड़ा के लिए रवाना होंगे, जहाँ वे अगले दिन विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेंगे।


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