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केंद्रीय क्षेत्र के अग्रिम इलाकों का रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह का दौरा

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रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने 15 से 17 नवंबर 2025 तक केंद्रीय क्षेत्र के अग्रिम इलाकों का एक व्यापक दौरा किया।

पिथोरागढ़ में, रक्षा सचिव को उत्तर भारत क्षेत्र के जनरल ऑफिसर कमांडिंग और 119 (I) इन्फैंट्री ब्रिगेड ग्रुप के कमांडर द्वारा प्रमुख संचालन संबंधी मामलों पर ब्रीफिंग दी गई।

नवीदांग में अपनी यात्रा के दौरान, उन्होंने संबंधित बटालियन कमांडरों और बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (BRO) के चीफ इंजीनियर प्रोजेक्ट हिरक के साथ बातचीत की। उन्होंने उन्हें संचालनात्मक पहलुओं और महत्वपूर्ण सीमा अवसंरचना परियोजनाओं की प्रगति के बारे में जानकारी दी, जिनका उद्देश्य रणनीतिक गतिशीलता को बढ़ाना और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करना है। इस दौरे के दौरान रक्षा सचिव के साथ डायरेक्टर जनरल बॉर्डर रोड्स (DGBR) भी उपस्थित रहे।

इस दौरे ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सीमा क्षेत्रों में संपर्क सुधारने, तैयारियों को बढ़ाने और मजबूत अवसंरचना विकास सुनिश्चित करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को उजागर किया।


त्रि-सेवा अभ्यास ‘त्रिशूल-2025’: भारतीय सेनाओं की संयुक्त क्षमता और एकीकृत युद्धक तैयारी का शानदार प्रदर्शन

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भारतीय नौसेना की अगुवाई में भारतीय थल सेना और भारतीय वायु सेना के साथ संयुक्त रूप से आयोजित त्रि-सेवा अभ्यास (TSE-2025) ‘त्रिशूल’ का आयोजन नवंबर 2025 के प्रारंभ में किया गया।

यह अभ्यास भारतीय नौसेना के पश्चिमी नौसेना कमान, भारतीय थल सेना के दक्षिणी कमान और भारतीय वायु सेना के दक्षिण-पश्चिमी वायु कमान के नेतृत्व में प्रमुख भागीदारी के साथ संचालित हुआ।

अभ्यास में राजस्थान और गुजरात के क्रीक एवं मरुस्थलीय क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर संयुक्त अभियान शामिल थे, साथ ही उत्तर अरब सागर में उभयचर (Amphibious) अभियानों सहित समुद्री क्षेत्र में भी व्यापक ऑपरेशन किए गए। भारतीय तटरक्षक बल, सीमा सुरक्षा बल और अन्य केंद्रीय एजेंसियों ने भी इसमें भाग लिया, जिससे अंतर-एजेंसी समन्वय और संयुक्त संचालन की क्षमता और मजबूत हुई।

अभ्यास का मुख्य उद्देश्य तीनों सेनाओं के बीच समन्वय, तालमेल और बहु-डोमेन एकीकृत संचालन क्षमता को बढ़ाना था। प्रमुख बिंदुओं में शामिल रहे—

  • प्लेटफॉर्म और इंफ्रास्ट्रक्चर की इंटरऑपरेबिलिटी को सुदृढ़ करना

  • तीनों सेवाओं के बीच नेटवर्क एकीकरण को बढ़ावा देना

  • संयुक्त ऑपरेशन की क्षमता को उन्नत करना

  • संयुक्त खुफिया, निगरानी और टोही (ISR) प्रक्रियाओं का सत्यापन

  • इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (EW) और साइबर युद्ध योजनाओं का मूल्यांकन

अभ्यास में भारतीय नौसेना के कैरियर आधारित अभियानों और वायु सेना की जमीनी परिसंपत्तियों के साथ संयुक्त हवाई अभियानों को शामिल किया गया ताकि श्रेष्ठ अनुभवों का आदान-प्रदान किया जा सके और संयुक्त मानक संचालन प्रक्रियाएँ (SOPs) प्रमाणित की जा सकें।

अभ्यास ‘त्रिशूल’ ने स्वदेशी प्रणालियों के प्रभावी उपयोग और आत्मनिर्भर भारत के सिद्धांतों को अंगीकार करने की क्षमता का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। इसके साथ ही उभरते खतरों और आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति को ध्यान में रखते हुए प्रक्रियाओं और तकनीकों के परिष्करण पर भी जोर दिया गया।

त्रि-सेवा अभ्यास 2025 के सफलतापूर्वक आयोजन ने भारतीय सशस्त्र बलों की पूर्णत: एकीकृत तरीके से संचालन करने की सामूहिक प्रतिबद्धता को रेखांकित किया है, जो संयुक्त युद्धक तैयारी और राष्ट्रीय सुरक्षा सुदृढ़ीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।


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