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भारत-थाईलैंड संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘मैत्री-XV’ के लिए भारतीय सेना की टुकड़ी थाईलैंड रवाना

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18 से 31 अगस्त तक होगा 15वां संस्करण, जंगल और अर्ध-शहरी क्षेत्र में आतंकवाद विरोधी अभियानों का होगा संयुक्त प्रशिक्षण

नई दिल्ली- भारत-थाईलैंड संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘मैत्री-XV (2026)’ में हिस्सा लेने के लिए भारतीय सेना की टुकड़ी आज थाईलैंड के लिए रवाना हुई। इस अभ्यास का आयोजन 18 से 31 अगस्त 2026 तक थाईलैंड के विभावादी रंगसित कैंप, सूरत थानी में किया जाएगा। इस अभ्यास का पिछला संस्करण सितंबर 2025 में मेघालय के उमरोई स्थित फॉरेन ट्रेनिंग नोड में आयोजित हुआ था।

अभ्यास में भारतीय सेना और रॉयल थाई आर्मी की 85-85 सैनिकों की टुकड़ियां हिस्सा लेंगी। भारतीय दल में मुख्य रूप से 9 गोरखा राइफल्स के जवान शामिल हैं, जबकि रॉयल थाई आर्मी की टुकड़ी 5वीं डिवीजन की 25वीं इन्फैंट्री ब्रिगेड की 3वीं बटालियन के सैनिकों से बनी है।

जंगल और अर्ध-शहरी क्षेत्र में होगा प्रशिक्षण

मैत्री-XV के दौरान कंपनी स्तर पर संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण दिया जाएगा। अभ्यास का मुख्य फोकस जंगल और अर्ध-शहरी इलाकों में संयुक्त आतंकवाद विरोधी अभियानों को प्रभावी ढंग से अंजाम देने की क्षमता विकसित करना होगा।

यह प्रशिक्षण संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अध्याय VII के तहत आतंकवाद विरोधी अभियानों में दोनों सेनाओं की संयुक्त क्षमता को बढ़ाने पर केंद्रित रहेगा।

फील्ड एक्सरसाइज से लेकर आधुनिक तकनीक का प्रदर्शन

अभ्यास के दौरान फील्ड एक्सरसाइज, युद्ध संबंधी चर्चा, व्याख्यान, प्रदर्शन और अंत में एक वैधता परीक्षण अभ्यास (Validation Exercise) आयोजित किया जाएगा। दोनों देशों के सैनिक संयुक्त अभियानों से जुड़े अपने परिचालन अनुभव साझा करेंगे। साथ ही, संयुक्त अभियानों में इस्तेमाल किए जाने वाले आधुनिक उपकरणों और तकनीकों का भी प्रदर्शन किया जाएगा।

2006 में हुई थी अभ्यास की शुरुआत

‘मैत्री’ सैन्य अभ्यास की शुरुआत वर्ष 2006 में हुई थी। यह भारत और थाईलैंड के बीच सैन्य सहयोग बढ़ाने, सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को साझा करने और दोनों सेनाओं की परिचालन क्षमता को मजबूत करने का महत्वपूर्ण मंच है।

अभ्यास के माध्यम से दोनों सेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी, आपसी समझ और सौहार्द को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, यह भारत और थाईलैंड के बीच लंबे समय से चले आ रहे मजबूत द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूती प्रदान करेगा।

भारत-मलेशिया सैन्य सहयोग उप-समिति (SCMC) की 12वीं बैठक नई दिल्ली में आयोजित

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भारत-मलेशिया सैन्य सहयोग उप-समिति (Sub Committee Meeting on Military Cooperation - SCMC) की 12वीं बैठक 1 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में आयोजित हुई। बैठक की सह-अध्यक्षता भारत के रक्षा मंत्रालय के संयुक्त सचिव अमिताभ प्रसाद और मलेशियाई सशस्त्र बलों के सहायक चीफ ऑफ स्टाफ (रक्षा संचालन एवं प्रशिक्षण) मेजर जनरल अमेर महमूद बिन अब्दुल रहमान ने की।

प्रमुख बिंदु

  • दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय सैन्य सहयोग के सभी पहलुओं की समीक्षा की और अब तक हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया।

  • बैठक में सैन्य आदान-प्रदान, संयुक्त सैन्य अभ्यास, प्रशिक्षण, स्टाफ वार्ता, क्षमता निर्माण, समुद्री सहयोग तथा उभरते क्षेत्रों में सहयोग जैसे विषयों पर चर्चा हुई।

रक्षा सहयोग को मिलेगा और बल

  • दोनों देशों ने नियमित द्विपक्षीय गतिविधियों की सफलता की सराहना की।

  • सैन्य प्रशिक्षण संस्थानों में अधिक भागीदारी, पेशेवर संवाद और सैन्य आदान-प्रदान बढ़ाने पर सहमति बनी।

  • रक्षा उद्योग, रक्षा प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा तथा मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया गया।

इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग

  • दोनों पक्षों ने आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस (ADMM-Plus) में एक-दूसरे की सक्रिय भागीदारी की सराहना की।

  • आतंकवाद-रोधी विशेषज्ञ कार्य समूह (Experts' Working Group on Counter-Terrorism) के तहत व्यावहारिक सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

  • क्षेत्रीय एवं वैश्विक सुरक्षा मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करते हुए अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, स्थिरता, सुरक्षा और नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखने पर सहमति व्यक्त की।

रणनीतिक साझेदारी को मिलेगा नया आयाम

  • बैठक में भारत-मलेशिया उन्नत रणनीतिक साझेदारी (Enhanced Strategic Partnership) में रक्षा सहयोग को एक महत्वपूर्ण स्तंभ बताया गया।

  • दोनों देशों ने आपसी विश्वास, साझा हितों और सुरक्षित, स्थिर एवं समृद्ध इंडो-पैसिफिक की साझा दृष्टि के आधार पर रक्षा संबंधों को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

अन्य प्रमुख गतिविधियां

  • मलेशियाई प्रतिनिधिमंडल ने रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह से मुलाकात की।

  • प्रतिनिधिमंडल ने वर्ल्ड ट्रेड सेंटर, नई दिल्ली स्थित डीपीएसयू भवन का भी दौरा किया।

  • बैठक से पहले मलेशियाई प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख ने राष्ट्रीय समर स्मारक (National War Memorial) पर पुष्पचक्र अर्पित कर भारत के शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि दी।

10वां भारत-थाईलैंड रक्षा संवाद: इंडो-पैसिफिक सुरक्षा और रक्षा सहयोग को मजबूत करने पर जोर

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10वां भारत-थाईलैंड रक्षा संवाद 16 जून 2026 को बैंकॉक में आयोजित किया गया। इस संवाद में दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग के सभी पहलुओं की समीक्षा की गई तथा क्षेत्रीय एवं वैश्विक सुरक्षा से जुड़े पारस्परिक हितों के मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। बैठक की सह-अध्यक्षता थाईलैंड के रक्षा मंत्रालय के उप-स्थायी सचिव एडमिरल नुट्टापोल डियावानिच और भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय में संयुक्त सचिव सत्यजीत मोहंती ने की।

दोनों पक्षों ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के बदलते सुरक्षा परिदृश्य पर चर्चा की और क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए सहयोग को और मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।

प्रतिनिधिमंडलों ने पिछले रक्षा संवाद के बाद से द्विपक्षीय रक्षा सहयोग में हुई प्रगति की समीक्षा की। चर्चा के प्रमुख विषयों में सैन्य-से-सैन्य संपर्क, क्षमता निर्माण पहल, प्रशिक्षण आदान-प्रदान, समुद्री सहयोग तथा अन्य साझा हितों के क्षेत्र शामिल रहे।

बैठक में दोनों देशों के बीच चल रहे रक्षा उद्योग सहयोग की भी समीक्षा की गई। दोनों पक्षों ने रक्षा विनिर्माण, अनुसंधान, नवाचार और सैन्य क्षमताओं के विकास में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा की, ताकि दोनों देशों के रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र के बीच पारस्परिक रूप से लाभकारी साझेदारी को प्रोत्साहन मिल सके।

इसके अतिरिक्त, प्रतिनिधिमंडलों ने Association of Southeast Asian Nations (आसियान) के नेतृत्व वाले तंत्रों सहित क्षेत्रीय और बहुपक्षीय रक्षा मंचों के अंतर्गत सहयोग पर भी विचार-विमर्श किया। दोनों देशों ने संवाद और सहयोग के माध्यम से साझा सुरक्षा चुनौतियों का समाधान करने तथा व्यावहारिक सहयोग को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

बैठक का समापन भविष्य की गतिविधियों और द्विपक्षीय रक्षा सहयोग की आगामी दिशा पर चर्चा के साथ हुआ। उल्लेखनीय है कि भारत और थाईलैंड ने वर्ष 2025 में अपने द्विपक्षीय संबंधों को औपचारिक रणनीतिक साझेदारी (Strategic Partnership) के स्तर तक उन्नत किया था।

भारत–मिस्र रक्षा सहयोग पर बड़ी खबर

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काहिरा- भारत और मिस्र के बीच रक्षा सहयोग को नई मजबूती मिली है। दोनों देशों की संयुक्त रक्षा समिति (JDC) की 11वीं बैठक 20 से 22 अप्रैल तक काहिरा में आयोजित हुई, जिसमें द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को और आगे बढ़ाने पर महत्वपूर्ण चर्चा हुई।

बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व संयुक्त सचिव (अंतरराष्ट्रीय सहयोग) अमिताभ प्रसाद ने किया, जबकि मिस्र की ओर से रक्षा मंत्रालय और सशस्त्र बलों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

क्या रहे मुख्य फैसले?

दोनों देशों ने 2026–27 के लिए रक्षा सहयोग योजना पर सहमति जताई। इसके तहत:

  • सैन्य सहयोग तंत्र को और मजबूत किया जाएगा

  • संयुक्त प्रशिक्षण और अभ्यास बढ़ाए जाएंगे

  • समुद्री सुरक्षा में सहयोग को विस्तार दिया जाएगा

  • सैन्य अभ्यासों का दायरा और जटिलता बढ़ेगी

  • रक्षा उत्पादन और तकनीक में साझेदारी को बढ़ावा मिलेगा

रक्षा उद्योग में बढ़ता सहयोग

भारत ने अपने तेजी से बढ़ते रक्षा उत्पादन पर प्रस्तुति दी:

  • कुल उत्पादन 20 अरब डॉलर से अधिक

  • 100 से ज्यादा देशों को लगभग 4 अरब डॉलर का निर्यात

दोनों देशों ने रक्षा निर्माण में साझा उत्पादन (co-production) और सह-विकास (co-development) के अवसर तलाशने पर सहमति जताई।

नौसेना और वायुसेना सहयोग

  • पहली बार नौसेना-से-नौसेना स्टाफ वार्ता आयोजित हुई

  • भारतीय नौसेना की हिंद महासागर में सुरक्षा भूमिका और सूचना साझाकरण तंत्र को सराहा गया

  • भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने मिस्र वायुसेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल अम्र अब्देल रहमान साकर से भी मुलाकात की

 शहीदों को श्रद्धांजलि

भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने काहिरा के हेलियोपोलिस युद्ध स्मारक पर जाकर
प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध में शहीद भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि दी।

रणनीतिक महत्व

  • 2022 में रक्षा सहयोग पर समझौता (MoU) हुआ था

  • 2023 में संबंधों को रणनीतिक साझेदारी का दर्जा मिला

यह बैठक दोनों देशों के बीच मजबूत होते रिश्तों और क्षेत्रीय सुरक्षा के प्रति उनकी साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है।


भारतीय वायु सेना और रॉयल थाई वायु सेना ने हिंद महासागर क्षेत्र में इन-सिटू अभ्यास किया

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भारतीय वायु सेना (IAF) ने 09 से 12 फरवरी 2026 तक हिंद महासागर क्षेत्र में रॉयल थाई वायु सेना (RTAF) के साथ एक इन-सिटू अभ्यास आयोजित किया, जिससे दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग मजबूत हुआ और आपसी समझ में वृद्धि हुई।

दोनों देशों के बीच यह द्विपक्षीय अभ्यास हवाई युद्ध प्रशिक्षण अभ्यास के रूप में आयोजित किया गया, जिसमें भारतीय वायु सेना के Su-30MKI बहु-भूमिका लड़ाकू विमान और रॉयल थाई वायु सेना के SAAB Gripen जेट विमान शामिल थे। समुद्री क्षेत्र में भारतीय वायु सेना के विमानों के विस्तारित परिचालन को IL-78 मिड-एयर रिफ्यूलिंग टैंकरों द्वारा सुनिश्चित किया गया। यह अभ्यास भारतीय वायु सेना के एयरबोर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (AWACS) विमानों और थाई वायु सेना के ग्राउंड कंट्रोल इंटरसेप्शन (GCI) तत्वों की उन्नत निगरानी और कमांड क्षमताओं के तहत आयोजित किया गया।

अभ्यास में भाग लेने वाली भारतीय वायु सेना की इकाइयाँ अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के एयरबेस से संचालित हुईं, जबकि थाई Gripen विमान थाईलैंड के एयरबेस से संचालित हुए। यह अभ्यास हिंद महासागर क्षेत्र में एक मित्र विदेशी देश के साथ भारतीय वायु सेना की परिचालन क्षमता और अंतर-संचालन (इंटरऑपरेबिलिटी) को प्रदर्शित करने के लिए डिजाइन किया गया था। इस अभ्यास ने दोनों वायु सेनाओं को परिचालन अनुभव प्रदान किया और सर्वोत्तम प्रक्रियाओं के आदान-प्रदान का अवसर दिया।

यह अभ्यास भारत और थाईलैंड के बीच गहरे होते “एक्ट ईस्ट” साझेदारी को दर्शाता है, जो अब एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्र में भी विस्तारित हो रही है।


भारतीय नौसेना ने CTF-154 की कमान संभाली – समुद्री सुरक्षा सहयोग में ऐतिहासिक कदम

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भारतीय महासागर क्षेत्र और उससे आगे सहयोगात्मक समुद्री सुरक्षा तथा क्षमता निर्माण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाते हुए, भारतीय नौसेना ने कंबाइंड टास्क फोर्स (CTF)-154 की कमान संभाल ली है। यह टास्क फोर्स कंबाइंड मैरीटाइम फोर्सेज (CMF) के तहत एक प्रमुख बहुराष्ट्रीय प्रशिक्षण टास्क फोर्स है।

कमांड परिवर्तन समारोह 11 फरवरी 2026 को बहरीन के मनामा स्थित CMF मुख्यालय में आयोजित किया गया, जिसकी अध्यक्षता वाइस एडमिरल कर्ट ए. रेनशॉ, कमांडर CMF / US NAVCENT / US फिफ्थ फ्लीट ने की। इस अवसर पर वाइस एडमिरल तरुण सोबती, डिप्टी चीफ ऑफ नेवल स्टाफ (DCNS), भारतीय नौसेना, तथा अन्य सदस्य देशों के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी उपस्थित थे।

कमोडोर मिलिंद एम. मोकाशी (शौर्य चक्र) ने औपचारिक रूप से इतालवी नौसेना के निवर्तमान कमांडर से CTF-154 की कमान संभाली।

CTF-154 का मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के लिए प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण है। यह 47 सदस्य देशों वाले CMF में भारत की पेशेवर विशेषज्ञता, संचालन अनुभव और पसंदीदा सुरक्षा साझेदार के रूप में बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।

CTF-154 की स्थापना मई 2023 में हुई थी और यह मध्य पूर्व तथा व्यापक क्षेत्र में बहुराष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से समुद्री सुरक्षा बढ़ाने के लिए समर्पित है।

प्रशिक्षण के पाँच प्रमुख स्तंभ हैं:

  1. समुद्री डोमेन जागरूकता (MDA)

  2. समुद्री कानून (Law of the Sea)

  3. समुद्री अवरोधन संचालन

  4. समुद्री बचाव और सहायता

  5. नेतृत्व विकास

टास्क फोर्स नियमित Maritime Security Enhancement Training (MSET) कार्यक्रम, Compass Rose तथा Northern/Southern Readiness जैसे अभ्यास और साझेदार देशों की क्षमता बढ़ाने हेतु आउटरीच गतिविधियाँ आयोजित करता है। इसका उद्देश्य अवैध तस्करी, समुद्री डकैती और अवैध प्रवासन जैसी साझा चुनौतियों से निपटना है।

CTF-154, CMF की अन्य टास्क फोर्सेस—

  • CTF-150 (समुद्री सुरक्षा)

  • CTF-151 (समुद्री डकैती विरोधी)

  • CTF-152 (अरब खाड़ी में समुद्री सुरक्षा)

  • CTF-153 (लाल सागर में समुद्री सुरक्षा)
    के साथ मिलकर कार्य करता है।

भारतीय नौसेना ने उच्च प्रभाव वाले प्रशिक्षण कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने और वैश्विक समुद्री साझेदारियों को मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई है, जिससे शांति, समृद्धि और सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।



थल सेना प्रमुख का यूएई और श्रीलंका का आधिकारिक दौरा सफलतापूर्वक संपन्न

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थल सेना प्रमुख (COAS) जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने 05 से 08 जनवरी 2026 तक संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और श्रीलंका की अपनी आधिकारिक यात्रा सफलतापूर्वक पूर्ण की। यह दौरा पश्चिम एशिया और हिंद महासागर क्षेत्र में मित्र देशों के साथ रक्षा सहयोग को गहरा करने, सैन्य-से-सैन्य संपर्क को सुदृढ़ करने तथा रणनीतिक साझेदारियों को मजबूती प्रदान करने की भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

संयुक्त अरब अमीरात की यात्रा

05 से 06 जनवरी 2026 तक यूएई प्रवास के दौरान, थल सेना प्रमुख ने यूएई सशस्त्र बलों के वरिष्ठ नेतृत्व, विशेष रूप से यूएई थल सेना के कमांडर के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया। इन चर्चाओं में रक्षा सहयोग को सुदृढ़ करने, आपसी संचालन क्षमता (इंटरऑपरेबिलिटी) बढ़ाने तथा संयुक्त प्रशिक्षण और पेशेवर सैन्य आदान-प्रदान के नए अवसरों पर ध्यान केंद्रित किया गया।

जनरल द्विवेदी को यूएई थल सेना की संगठनात्मक संरचना, भूमिकाओं और परिचालन क्षमताओं पर विस्तृत जानकारी दी गई। उन्होंने प्रमुख सैन्य प्रतिष्ठानों का दौरा किया और अधिकारियों तथा सैनिकों से संवाद किया। इन बैठकों से सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान और आपसी हित के क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं को तलाशने का अवसर मिला।

थल सेना प्रमुख ने यूएई नेशनल डिफेंस कॉलेज में अधिकारियों को संबोधित करते हुए रणनीतिक संवाद, नेतृत्व विकास तथा क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों पर साझा दृष्टिकोण के महत्व को रेखांकित किया।

दौरे के दौरान उन्होंने यूएई में भारत के राजदूत डॉ. दीपक मित्तल से भी मुलाकात की, जिसमें रक्षा कूटनीति और द्विपक्षीय सहयोग से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई।

श्रीलंका की यात्रा

07 से 08 जनवरी 2026 तक श्रीलंका दौरे के दौरान, थल सेना प्रमुख ने श्रीलंका सेना के कमांडर, रक्षा उप मंत्री तथा रक्षा सचिव सहित वरिष्ठ सैन्य और असैनिक नेतृत्व के साथ सार्थक चर्चाएं कीं। इन वार्ताओं में प्रशिक्षण सहयोग, क्षमता निर्माण, रक्षा शिक्षा और क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य जैसे विषयों पर विशेष ध्यान दिया गया।

रक्षा क्षमता निर्माण के प्रति भारत की सतत प्रतिबद्धता को दर्शाते हुए, जनरल द्विवेदी ने डिफेंस सर्विसेज कमांड एंड स्टाफ कॉलेज (DSCSC) में अधिकारियों को संबोधित किया तथा आर्मी वॉर कॉलेज, बुट्टाला में अधिकारियों और प्रशिक्षुओं से संवाद किया। आर्मी वॉर कॉलेज में उन्होंने एक खेल परिसर की आधारशिला रखी और एंबुलेंस वैन औपचारिक रूप से सौंपे। इसके अतिरिक्त, उन्होंने श्रीलंका सेना को 20 महिंद्रा स्कॉर्पियो वाहन और सिमुलेटर भी प्रदान किए, जिससे परिचालन क्षमता और प्रशिक्षण अवसंरचना को और मजबूती मिली।

थल सेना प्रमुख ने आईपीकेएफ युद्ध स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित की, भारतीय सैनिकों के सर्वोच्च बलिदान को नमन किया और भारत–श्रीलंका के साझा इतिहास तथा गहरे जन-जन संबंधों को पुनः रेखांकित किया। उन्होंने श्रीलंका में भारत के उच्चायुक्त संतोष झा से भी मुलाकात की।

प्रमुख उपलब्धियां और निष्कर्ष

इस यात्रा के माध्यम से यूएई और श्रीलंका दोनों के साथ रक्षा एवं सैन्य-से-सैन्य सहयोग में उल्लेखनीय प्रगति हुई। रणनीतिक संवाद को मजबूती मिली, पेशेवर सैन्य शिक्षा के आदान-प्रदान का विस्तार हुआ तथा ठोस क्षमता निर्माण पहलों को आगे बढ़ाया गया। इससे आपसी विश्वास सुदृढ़ हुआ, इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ी और एक विश्वसनीय एवं भरोसेमंद रक्षा साझेदार के रूप में भारत की भूमिका और मजबूत हुई।

यह सफल यात्रा हिंद महासागर क्षेत्र और पश्चिम एशिया में शांति, स्थिरता और सहकारी सुरक्षा को बढ़ावा देने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को पुनः स्थापित करती है, साथ ही मित्र राष्ट्रों के साथ दीर्घकालिक रक्षा साझेदारियों को और गहराई प्रदान करती है।

भारत और नीदरलैंड्स के बीच रक्षा साझेदारी को मजबूत करने के लिए मंत्रियों की बैठक

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 18 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली में नीदरलैंड्स के विदेश मंत्री डेविड वैन वील से भेंट की, जिसमें दोनों देशों के बीच मजबूत और बढ़ती रक्षा साझेदारी को पुनः पुष्टि की गई। दोनों मंत्रियों ने द्विपक्षीय सुरक्षा और रक्षा मुद्दों पर चर्चा की, जिसमें रक्षा उपकरणों के सह-विकास और सह-उत्पादन के प्राथमिक क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया। उन्होंने रणनीतिक साझेदारी के एक प्रमुख स्तंभ के रूप में रक्षा सहयोग को विकसित करने के उद्देश्य से सैन्य-से-सैन्य सहयोग को बढ़ाने की प्रतिबद्धता को दोहराया।

चर्चाओं में भारत और नीदरलैंड्स की साझा प्रतिबद्धता को उजागर किया गया कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र स्वतंत्र, खुले, समावेशी और नियम-आधारित होना चाहिए। मंत्रियों ने दोनों देशों के रक्षा उद्योगों को जोड़ने और विशेष रूप से निच तकनीक के क्षेत्र में निकट रक्षा साझेदारी की आवश्यकता पर जोर दिया। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और नीदरलैंड्स के भारत में राजदूत मेरिसा गेरार्ड्स की उपस्थिति में रक्षा सहयोग पर एक समझौता पत्र (Letter of Intent) का आदान-प्रदान किया गया।

दोनों देश तकनीकी सहयोग, प्लेटफ़ॉर्म और उपकरणों के सह-उत्पादन और सह-विकास के लिए रक्षा औद्योगिक रोडमैप विकसित करके पहचाने गए क्षेत्रों में रक्षा सहयोग की संभावनाओं का अन्वेषण करने का इरादा रखते हैं। राजनाथ सिंह ने कहा कि दोनों देशों के बीच जन-संपर्क संबंध बहुत मजबूत हैं, और नीदरलैंड्स में बड़ी भारतीय प्रवासी समुदाय एक जीवित सेतु के रूप में कार्य कर रही है, जो मित्रता के बंधनों को और मजबूत करती है।


भारत-यूके संयुक्त सैन्य अभ्यास “अजेय वारियर-25” का आठवां संस्करण राजस्थान में शुरू

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भारत-यूके संयुक्त सैन्य अभ्यास “अजेय वारियर-25” का आठवां संस्करण आज फॉरेन ट्रेनिंग नोड, महाजन फील्ड फायरिंग रेंजेस, राजस्थान में शुरू हुआ। यह 14 दिवसीय द्विपक्षीय अभ्यास 17 से 30 नवंबर 2025 तक आयोजित किया जाएगा।

इस अभ्यास में 240 कर्मी भाग ले रहे हैं, जिसमें भारतीय सेना और ब्रिटिश सेना का समान प्रतिनिधित्व है। भारतीय सेना का प्रतिनिधित्व सिख रेजिमेंट के सैनिक कर रहे हैं।

संयुक्त राष्ट्र के मैनडेट के तहत आयोजित, यह अभ्यास अर्ध-शहरी वातावरण में सांप्रदायिक विरोधी आतंकवाद संचालन पर केंद्रित है। अगले दो हफ्तों में प्रशिक्षण में ब्रिगेड स्तर पर संयुक्त मिशन योजना, एकीकृत सामरिक अभ्यास, सिमुलेशन आधारित परिदृश्य और कंपनी स्तर के फील्ड प्रशिक्षण अभ्यास शामिल होंगे, जो वास्तविक जीवन की आतंकवाद-रोधी परिस्थितियों की नकल करेंगे।

इस अभ्यास का उद्देश्य सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान, सामरिक दक्षता बढ़ाना और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में जटिल संचालन को समन्वित रूप से प्रबंधित करने की क्षमता विकसित करना है।

2011 से प्रत्येक दो साल में आयोजित होने वाले अजेय वारियर अभ्यास ने भारतीय सेना और ब्रिटिश सेना के बीच एक प्रमुख कार्यक्रम का रूप ले लिया है। 2025 संस्करण पेशेवरता, सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता एवं वैश्विक शांति के प्रति साझा प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है।


नई दिल्ली में 32 देशों के UN शांति मिशन प्रमुखों की कॉन्क्लेव का आयोजन

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नई दिल्ली में 14 से 16 अक्टूबर 2025 तक भारतीय सेना संयुक्त राष्ट्र के टुकड़ी योगदान देने वाले देशों (UNTCC) के प्रमुखों की कॉन्क्लेव का आयोजन करेगी। इस कार्यक्रम में 32 देशों की वरिष्ठ सैन्य नेतृत्व टीमें शामिल होंगी, जो UN शांति मिशनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

13 अक्टूबर 2025 को इन देशों की प्रतिनिधि टीमें नई दिल्ली पहुँचेंगी। UNTCC एक महत्वपूर्ण मंच है, जहां संचालनात्मक चुनौतियों, विकसित होती खतरों, इंटरऑपरेबिलिटी, निर्णय प्रक्रिया में समावेशिता, और शांति मिशनों को मजबूत करने में तकनीक और प्रशिक्षण की भूमिका पर चर्चा की जाती है।

भारत, जो UN मिशनों में सबसे बड़े योगदानकर्ताओं में से एक है, इस उच्च स्तरीय मंच का आयोजन कर संचालनात्मक चुनौतियों, विकसित होती खतरों और सर्वोत्तम प्रथाओं पर विचार-विमर्श करेगा और भविष्य के शांति मिशनों के लिए साझा समझ का निर्माण करेगा। यह कॉन्क्लेव “वसुधैव कुटुम्बकम” की भावना को प्रतिबिंबित करता है।

कार्यक्रम और प्रमुख गतिविधियाँ

  • कार्यक्रम में राजनाथ सिंह, माननीय रक्षा मंत्री, एस. जयशंकर, माननीय विदेश मंत्री और Mr. Jean Pierre Lacroix, Under-Secretary-General for Peace Operations (USG, DPO) के संबोधन शामिल होंगे।

  • प्लेनरी सत्रों में प्रमुख और प्रतिनिधि दलों के प्रमुख अपने विचार साझा करेंगे।

  • साझा क्षमता निर्माण, द्विपक्षीय बैठकें और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के लिए रक्षा प्रदर्शनियाँ भी आयोजित होंगी।

प्रतिभागी देश

कॉन्क्लेव में अल्जीरिया, आर्मेनिया, ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, भूटान, ब्राजील, बुरुंडी, कंबोडिया, मिस्र, इथियोपिया, फिजी, फ्रांस, घाना, इटली, कजाकिस्तान, केन्या, किर्गिज़स्तान, मेडागास्कर, मलेशिया, मंगोलिया, मोरक्को, नेपाल, नाइजीरिया, पोलैंड, रवांडा, श्रीलंका, सेनेगल, तंज़ानिया, थाईलैंड, युगांडा, उरुग्वे और वियतनाम शामिल होंगे।

यह कार्यक्रम भारत की वैश्विक शांति, स्थिरता और साझा समृद्धि के प्रति अडिग प्रतिबद्धता का प्रतीक है।


भारतीय सेना की टुकड़ी ऑस्ट्रेलिया में AUSTRAHIND 2025 अभ्यास में भाग लेने के लिए रवाना

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कल 120 भारतीय सेना के कर्मियों की एक टुकड़ी इरविन बैरक्स, पर्थ, ऑस्ट्रेलिया के लिए रवाना हुई, जो 13 से 26 अक्टूबर 2025 तक आयोजित होने वाले चौथे संस्करण के भारत-ऑस्ट्रेलिया संयुक्त सैन्य अभ्यास AUSTRAHIND 2025 में भाग लेगी।

भारतीय सेना की इस टुकड़ी का नेतृत्व गोर्खा राइफल्स के बटालियन के साथ अन्य हथियारों और सेवाओं के जवान कर रहे हैं।

अभ्यास का उद्देश्य और गतिविधियाँ

  • AUSTRAHIND 2025 का वार्षिक अभ्यास सैन्य सहयोग बढ़ाने, इंटरऑपरेबिलिटी सुधारने, और शहरी/अर्ध-शहरी इलाकों में उप-संविधानिक युद्ध तकनीकों का आदान-प्रदान करने का मंच प्रदान करने के लिए आयोजित किया जाता है।

  • इस अभ्यास में जॉइंट कंपनी स्तर की ऑपरेशन्स पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जिसमें जवान साझा योजना, सामरिक ड्रिल और विशेष हथियार कौशल का प्रदर्शन करेंगे।

  • यह अभ्यास ऑपरेशनल क्षमताओं को निखारने, नई तकनीकों को एकीकृत करने, और संयुक्त युद्ध वातावरण में संचालन करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करेगा।

सहयोग और मित्रता को मजबूत करना

Exercise AUSTRAHIND 2025 में भाग लेने से भारतीय और ऑस्ट्रेलियाई सेना के बीच सैन्य सहयोग और मित्रता को और मजबूत किया जाएगा। यह अभ्यास सहयोग की भावना और आपसी विश्वास को भी सुदृढ़ करने का अवसर प्रदान करता है।


भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा उद्योग साझेदारी: राजनाथ सिंह ने सिडनी में पहली रक्षा इंडस्ट्री बिजनेस राउंड टेबल को संबोधित किया

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सिडनी- केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज सिडनी में आयोजित भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा उद्योग बिजनेस राउंड टेबल को संबोधित करते हुए दोनों देशों के बीच रणनीतिक, औद्योगिक और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता दोहराई।

राजनाथ सिंह ने कहा, “2020 में स्थापित हमारी व्यापक रणनीतिक साझेदारी (Comprehensive Strategic Partnership) के तहत, हम एक निर्णायक मोड़ पर हैं, जहाँ हमारी रक्षा संबंधों को केवल साझीदारों के रूप में नहीं, बल्कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षित और समृद्ध भविष्य के सह-निर्माता के रूप में पुनःपरिभाषित किया जा सकता है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह राउंड टेबल केवल संवाद नहीं, बल्कि भारत और ऑस्ट्रेलिया को व्यावसायिक, औद्योगिक और नवाचार में प्राकृतिक सहयोगी बनाने का इरादा है।

राजनाथ सिंह ने बताया कि हाल के वर्षों में हुई उच्च-स्तरीय बैठकों ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत किया है, जिसमें भारत-ऑस्ट्रेलिया शिखर सम्मेलन (नवंबर 2024), 2+2 मंत्री स्तरीय वार्ता (अक्टूबर 2024), ऑस्ट्रेलिया के उप प्रधानमंत्री एवं रक्षा मंत्री की भारत यात्रा (जून 2025) और उनके वर्तमान दौरे का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों का संबंध साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और संस्थागत समानताओं पर आधारित है।

मंत्री ने बताया कि मजबूत द्विपक्षीय संबंधों के तीन मुख्य स्तंभ हैं:

  1. सरकार से सरकार सहयोग (Government-to-Government collaboration)

  2. जनता से जनता का संपर्क (People-to-People Connect)

  3. व्यावसायिक हितों का संगम (Convergence of Business Interests)

उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया क्वांटम सिस्टम, स्वायत्त जल-उपग्रह और उन्नत समुद्री निगरानी जैसी निश तकनीकों में उत्कृष्ट है, जबकि भारत निर्माण क्षमता, सॉफ्टवेयर कौशल, जहाज निर्माण, मिसाइल प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष क्षेत्र में दक्ष है। इस राउंड टेबल के माध्यम से दोनों देशों के बीच अविकसित रक्षा उद्योग सहयोग की क्षमता को उजागर किया जा सकता है।

राजनाथ सिंह ने भारत की हाल की आर्थिक और औद्योगिक उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। भारत का रक्षा उत्पादन पिछले वित्तीय वर्ष में ₹1.51 लाख करोड़ (लगभग 18 बिलियन अमेरिकी डॉलर) रहा, जो अब तक का सबसे बड़ा है। रक्षा निर्यात ₹23,622 करोड़ (2.76 बिलियन अमेरिकी डॉलर) तक पहुंच गया है और भारतीय कंपनियां लगभग 100 देशों को निर्यात कर रही हैं।

मंत्री ने ऑस्ट्रेलियाई कंपनियों को सह-विकास और सह-उत्पादन के लिए आमंत्रित किया, जिसमें प्रणोदन तकनीक, स्वायत्त जल-उपग्रह, फ्लाइट सिम्युलेटर और उन्नत सामग्री शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ये परियोजनाएं रणनीतिक उद्देश्यों के अनुरूप अंतर-कार्यशील प्लेटफार्मों के निर्माण में मदद करेंगी।

उन्होंने भारत की Make in India, PLI स्कीम, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और FDI नीति का हवाला देते हुए बताया कि ये पहल नवाचार और निवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर रही हैं। उन्होंने निजी क्षेत्र में रक्षा अनुसंधान और नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए DRDO द्वारा मुफ़्त तकनीक हस्तांतरण और उन्नत प्रौद्योगिकियों के विकास के लिए आकर्षक योजनाओं का भी उल्लेख किया।

राजनाथ सिंह ने यह भी बताया कि DRDO और ऑस्ट्रेलिया का Defence Science & Technology Group पहले ही टॉव्ड एरे सेंसर और अन्य क्षेत्रों जैसे क्वांटम तकनीक, AI, साइबर सुरक्षा, सूचना युद्ध और उन्नत विज्ञान व तकनीक पर सहयोग कर रहे हैं।

मंत्री ने कहा कि भारत की जहाज निर्माण क्षमता, विविध निर्माण आधार और निजी क्षेत्र के नवप्रवर्तक व स्टार्ट-अप्स इसे एक भरोसेमंद साझेदार बनाते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि Indo-MIM Pvt. Ltd. – Thales Australia, Tata Advanced Systems – W&E Platt Pty Ltd, Munitions India Ltd. – Aqusport जैसी साझेदारियां दोनों देशों के औद्योगिक पारिस्थितिक तंत्र को मजबूत करती हैं।

उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के रक्षा उपकरण और सेवाओं की पारस्परिक सुविधा MoU का स्वागत किया और कहा कि ऑस्ट्रेलिया ने भारत को Top Tier Partner के रूप में मान्यता दी है, जिससे तकनीकी साझेदारी आसान हो गई है।

राजनाथ सिंह ने कहा कि नौसेना जहाजों और उप-प्रणालियों का सह-उत्पादन, जहाज मरम्मत, रिफिट और MRO सहायता, स्वायत्त प्रणाली और ग्रीन शिपबिल्डिंग टेक्नोलॉजी में संयुक्त R&D जैसी विशाल संभावनाएं मौजूद हैं।

अंत में उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई उद्योग जगत को भारत में निवेश, सहयोग और नवाचार के लिए आमंत्रित किया और कहा कि दोनों देश मिलकर उन्नत प्लेटफॉर्म और प्रौद्योगिकी विकसित कर सकते हैं, जिससे उद्योग केवल आपूर्तिकर्ता नहीं, बल्कि शांति और सुरक्षा के रणनीतिक समर्थक बनें।

इस राउंड टेबल का आयोजन भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय, ऑस्ट्रेलियाई रक्षा विभाग, Newland Global Group और Australia-India Business Council ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम में ऑस्ट्रेलिया के असिस्टेंट मिनिस्टर फॉर डिफेंस Mr. Peter Khalil, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, राजनयिक, उद्योग विशेषज्ञ और शोध संस्थान शामिल थे।


भारत-यूके रक्षा साझेदारी को नई उड़ान: 468 मिलियन डॉलर के मिसाइल सौदे पर हस्ताक्षर

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नई दिल्ली- भारत और यूनाइटेड किंगडम (यूके) के बीच रक्षा सहयोग को एक नई दिशा मिली है। दोनों देशों ने लगभग 468 मिलियन अमेरिकी डॉलर (350 मिलियन पाउंड) के समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत यूके भारत को लाइटवेट मल्टीरोल मिसाइलें (Lightweight Multirole Missiles - LMMs) उपलब्ध कराएगा।

यह सौदा दोनों देशों के बीच रणनीतिक और रक्षा संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, ब्रिटेन की अग्रणी रक्षा कंपनी MBDA UK इस परियोजना को कार्यान्वित करेगी। इन मिसाइलों का उपयोग भारत की नौसेना और वायुसेना के बेड़ों में किया जाएगा, जिससे उनकी टारगेटिंग क्षमता, सटीकता और ऑपरेशनल दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस सौदे से भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता (Defence Self-Reliance) और “मेक इन इंडिया” पहल को भी प्रोत्साहन मिलेगा, क्योंकि इस समझौते में स्थानीय उत्पादन और तकनीकी हस्तांतरण (Technology Transfer) पर भी विशेष जोर दिया गया है।

ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह समझौता भारत के साथ दीर्घकालिक रक्षा सहयोग और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से किया गया है।

भारत के रक्षा विशेषज्ञों ने इसे दोनों देशों के बीच विश्वास और पारस्परिक सहयोग की नई मिसाल बताया है।

मुख्य बिंदु:

  • समझौते की कुल राशि: £350 मिलियन (≈ USD 468 मिलियन)

  • उद्देश्य: भारत को लाइटवेट मल्टीरोल मिसाइलों की आपूर्ति

  • कंपनी: MBDA UK

  • लाभ: भारत की नौसेना और वायुसेना की युद्धक क्षमता में बढ़ोतरी

  • फोकस: टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और मेक इन इंडिया पहल को बढ़ावा


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