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जियो पारसी योजना से पारसी समुदाय की आबादी बढ़ाने के प्रयास जारी

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नई दिल्ली- राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम, 1992 के तहत मान्यता प्राप्त पारसी (ज़ोरास्ट्रियन) समुदाय की आबादी 1941 में 1,14,000 थी, जो 2011 की जनगणना के अनुसार घटकर 57,264 रह गई है। आबादी में इस गिरावट को रोकने और पलटने के लिए भारत सरकार ने 2013-14 में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के माध्यम से जियो पारसी योजना शुरू की।

योजना के प्रमुख घटक:

  1. मेडिकल सहायता – बांझपन, गर्भावस्था और नवजात शिशु संबंधित जटिलताओं के इलाज के लिए पारसी दंपतियों को वित्तीय सहायता। यह सुविधा वार्षिक पारिवारिक आय 30 लाख रुपये तक वाले पारसी दंपतियों के लिए उपलब्ध है।

  2. सामुदायिक स्वास्थ्य – बच्चों और आश्रित बुजुर्ग परिवार के सदस्यों की देखभाल के लिए पारसी दंपतियों को वित्तीय सहायता। यह सुविधा वार्षिक पारिवारिक आय 15 लाख रुपये तक वाले पारसी दंपतियों के लिए उपलब्ध है।

  3. अधिकारिता (Advocacy) – योजना के लाभों के प्रति जागरूकता बढ़ाना।

योजना के तहत सहायता डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से लाभार्थियों को दी जाती है, जिसमें बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण और संबंधित राज्य सरकारों द्वारा अन्य सत्यापन शामिल हैं।

पिछले 5 वर्षों (2020-21 से 2024-25) में योजना पर 17.64 करोड़ रुपये खर्च किए गए और इसके तहत 232 शिशुओं का जन्म हुआ।

अंतरराष्ट्रीय जनसंख्या विज्ञान संस्थान (IIPS) द्वारा 2025 में किए गए मूल्यांकन अध्ययन के अनुसार, योजना अपने लक्षित समुदाय तक प्रभावी रूप से पहुंची और लाभार्थियों ने इसे पारसी आबादी बढ़ाने में उपयोगी माना।

योजना को अगले वित्त आयोग चक्र में जारी रखने पर विचार किया जा रहा है।

यह जानकारी लोकसभा में अल्पसंख्यक मामलों के केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजु द्वारा दी गई।

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