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प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY): कौशल विकास और क्षमता निर्माण से मत्स्य क्षेत्र को नई दिशा

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प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) मत्स्य पालन मूल्य श्रृंखला के आधुनिकीकरण, उत्पादकता बढ़ाने, कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने तथा विपणन संपर्कों की स्थापना के लिए कौशल विकास और क्षमता निर्माण को एक महत्वपूर्ण आधार मानती है। इस योजना का उद्देश्य मानव संसाधन और संस्थागत क्षमता को सुदृढ़ कर मत्स्य एवं जलीय कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाना है।

PMMSY के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने और मत्स्य एवं जलीय कृषि क्षेत्र में विकसित भारत 2047 के विज़न के अनुरूप, केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह) ने राष्ट्रीय मत्स्य कृषक दिवस (10 जुलाई 2025) के अवसर पर भुवनेश्वर (ओडिशा) स्थित ICAR–केंद्रीय मीठाजल जलीय कृषि संस्थान (CIFA) में“ICAR मत्स्य संस्थानों एवं उनके क्षेत्रीय केंद्रों का प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण कार्यक्रम कैलेंडर” तथा “NFDB एवं ICAR द्वारा प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण एवं एक्सपोज़र विज़िट कैलेंडर” का विमोचन किया।

यह कैलेंडर 2025–2027 की अवधि के लिए प्रशिक्षण, एक्सपोज़र विज़िट और ज्ञान-साझाकरण गतिविधियों का एक सुव्यवस्थित रोडमैप प्रदान करता है।

व्यापक कवरेज और प्रशिक्षण पाठ्यक्रम

इन कार्यक्रमों का उद्देश्य मछुआरों और मत्स्य किसानों को तकनीकी रूप से सशक्त बनाना, वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना तथा पर्यावरण-सम्मत कार्यप्रणालियों को बढ़ावा देना है।
तेजी से विकसित हो रही जलीय कृषि तकनीकों और गुणवत्तापूर्ण मत्स्य उत्पादों की बढ़ती मांग को देखते हुए, प्रशिक्षण में पूर्व-उत्पादन, उत्पादन और उत्तर-उत्पादन चरणों को शामिल किया गया है, जिनमें—

  • हैचरी संचालन

  • उन्नत ग्रो-आउट तकनीक

  • समेकित/संयुक्त मत्स्य पालन

  • मत्स्य स्वास्थ्य प्रबंधन

  • फ़ीड निर्माण

  • समुद्री शैवाल (सीवीड) की खेती

  • मूल्यवर्धित मत्स्य प्रसंस्करण

पर विशेष ध्यान दिया गया है।

इसके अतिरिक्त, आधुनिक प्रणालियों जैसे रीसर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (RAS), बायोफ्लॉक, केज कल्चर और सजावटी मछली प्रजनन पर विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है, जिससे किसान अपने कार्यों में विविधता और विस्तार कर सकें।
आजीविका एवं रोजगार केंद्रित प्रशिक्षण—जैसे सजावटी मत्स्य पालन, मत्स्य विपणन संपर्क तथा महिलाओं के लिए मूल्यवर्धित मत्स्य उत्पाद—भी कैलेंडर में सम्मिलित हैं।

अखिल भारतीय स्तर पर आयोजित एक्सपोज़र विज़िट किसानों को उन्नत तकनीकों को प्रत्यक्ष रूप से देखने और व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त करने का अवसर प्रदान करती हैं। साथ ही, फिश फेस्टिवल, मेले आदि के माध्यम से घरेलू मछली/झींगा उपभोग को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।

बजट एवं कार्यान्वयन

इस उद्देश्य से मत्स्य पालन विभाग, भारत सरकार ने ₹2.93 करोड़ की वित्तीय राशि चिन्हित की है, जिसे राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (NFDB), हैदराबाद—PMMSY और PM-MKSSY के अंतर्गत प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण कार्यक्रमों की नोडल कार्यान्वयन एजेंसी—के माध्यम से क्रियान्वित किया जा रहा है।
मछुआरों और मत्स्य किसानों के प्रशिक्षण से संबंधित सभी व्यय विभाग द्वारा वहन किए जा रहे हैं।

प्रशिक्षण का संचालन राज्य एवं केंद्रशासित प्रदेशों के मत्स्य विभागों, ICAR मत्स्य अनुसंधान संस्थानों एवं उनके क्षेत्रीय केंद्रों, कृषि विज्ञान केंद्र (KVKs), एग्रीकल्चर स्किल काउंसिल ऑफ इंडिया (ASCI), CIFNET और NIFPHAT द्वारा किया गया।
पिछले छह महीनों में 499 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनसे 22,921 प्रतिभागी लाभान्वित हुए।

भविष्य की दिशा

मत्स्य पालन विभाग के नेतृत्व में यह पहल न केवल हितधारकों को सशक्त बना रही है, बल्कि मत्स्य एवं जलीय कृषि क्षेत्र के दीर्घकालिक विकास, लचीलापन, रोजगार सृजन, खाद्य एवं पोषण सुरक्षा के लिए एक मजबूत आधार भी तैयार कर रही है। यह प्रयास देश के सामाजिक-आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

प्रशिक्षण कार्यक्रमों का सारांश

  • क्रम सं.
  • संस्थान का नाम
  • प्रशिक्षण कार्यक्रम
  • प्रतिभागी
  • 1
  • ICAR-CIFE, मुंबई एवं क्षेत्रीय केंद्र
  • 55
  • 1830
  • 2
  • ICAR-CIFA, भुवनेश्वर
  • 27
  • 737
  • 3
  • ICAR-CIBA, चेन्नई
  • 31
  • 1207
  • 4
  • ICAR-CIFT, कोच्चि
  • 55
  • 1001
  • 5
  • ICAR-CIFRI, कोलकाता
  • 42
  • 1776
  • 6
  • ICAR–शीत जल मत्स्य अनुसंधान संस्थान, भीमताल
  • 50
  • 3040
  • 7
  • ICAR-CMFRI, कोच्चि
  • 23
  • 622
  • 8
  • ICAR-NBFGR, लखनऊ
  • 58
  • 5592
  • 9
  • ICAR-ATARI, कोलकाता
  • 48
  • 1660
  • 10
  • ICAR-ATARI, जबलपुर
  • 3
  • 75
  • 11
  • ASCI
  • 26
  • 796
  • 12
  • TSP
  • 51
  • 3185
  • 13
  • SCSP
  • 19
  • 950
  • 14
  • CIFNET
  • 11
  • 450
  • कुल

  • 499
  • 22,921




केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुंबई में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत ‘डीप सी फिशिंग वेसल्स’ का किया शुभारंभ, सहकारिता आधारित मत्स्य क्षेत्र को मिलेगा बढ़ावा

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केंद्रीय गृह मंत्री एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज मुंबई के मझगांव डॉक में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (Pradhan Mantri Matsya Sampada Yojana) के तहत ‘डीप सी फिशिंग वेसल्स’ का शुभारंभ किया। इस अवसर पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री अजित पवार और केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोळ भी उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह कदम भारत के समुद्री मत्स्य क्षेत्र के आधुनिकीकरण और तटीय क्षेत्रों में सहकारिता आधारित विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को साकार करने और ब्लू इकॉनमी को सशक्त बनाने के लिए सहकारिता की भावना के साथ कार्य कर रही है।

अमित शाह ने बताया कि आज जिन दो ट्रॉलरों का शुभारंभ किया गया है, वे भारत की मत्स्य संपदा की संभावनाओं को और अधिक बढ़ाने के साथ-साथ यह सुनिश्चित करेंगे कि मछली उद्योग का लाभ मेहनती मछुआरों के घर तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि अब तक मत्स्य ट्रॉलरों पर काम करने वाले लोग वेतन पर काम करते थे, लेकिन सहकारिता आधारित मत्स्य पालन के तहत ट्रॉलरों का पूरा लाभ सीधे मछुआरों तक पहुंचेगा।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि फिलहाल 14 ट्रॉलर प्रदान किए जा रहे हैं, और निकट भविष्य में केंद्र सरकार, सहकारिता मंत्रालय एवं मत्स्य विभाग की ओर से और अधिक ट्रॉलर मछुआरों को सहकारी मॉडल पर दिए जाएंगे। ये ट्रॉलर गहरे समुद्र में 25 दिनों तक रह सकते हैं और 20 टन तक मछलियां ले जा सकते हैं। इसके साथ ही बड़े जहाजों के माध्यम से समुद्र से तट तक मछलियों के परिवहन की भी व्यवस्था की जाएगी।

अमित शाह ने कहा कि लगभग 11,000 किलोमीटर लंबी भारतीय समुद्री तटरेखा पर मछली पकड़कर आजीविका चलाने वाले गरीब भाइयों और बहनों के लिए आने वाले दिनों में एक बड़ी योजना बनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि देश की वास्तविक समृद्धि तभी संभव है जब ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाला गरीब व्यक्ति आर्थिक रूप से सशक्त बने। केवल जीडीपी वृद्धि को विकास का पैमाना मानने से वास्तविक विकास नहीं होता, बल्कि मानवीय दृष्टिकोण से प्रत्येक परिवार की समृद्धि सुनिश्चित करनी होती है।

अमित शाह ने कहा कि मत्स्य क्षेत्र में सहकारिता अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन रही है। भविष्य में मछलियों के प्रसंस्करण, निर्यात और बड़े संग्रहण पोतों की तैनाती की योजनाएं बनाई जा रही हैं। उन्होंने बताया कि ये प्रसंस्करण केंद्र और चिलिंग यूनिट मछुआरों के स्वामित्व में होंगे, और निर्यात भी बहु-राज्य सहकारी समितियों के माध्यम से किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई मत्स्य योजनाओं के सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं। वर्ष 2014-15 में भारत का कुल मत्स्य उत्पादन 102 लाख टन था, जो अब बढ़कर 195 लाख टन हो गया है। इसमें समुद्री मत्स्य उत्पादन 35 लाख टन से बढ़कर 48 लाख टन हुआ है, जबकि मीठे पानी की मत्स्य उत्पादन में 119 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

अमित शाह ने कहा कि महाराष्ट्र की शुगर मिलों ने गांवों की अर्थव्यवस्था को मजबूत किया है, और गुजरात में अमूल ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया है। अमूल के माध्यम से आज लगभग 80,000 करोड़ रुपये का कारोबार ग्रामीण महिलाओं के हाथों में है। यही सहकारिता की भावना है, जो भारत की आत्मा और विकास की दिशा है।

इस अवसर पर श्री शाह ने कहा कि सहकारिता के माध्यम से ही भारत मानव-केंद्रित आर्थिक विकास के लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है — यही “विकसित भारत” की सच्ची परिकल्पना है।

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