Media24Media.com: #MaoistSurrender

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label #MaoistSurrender. Show all posts
Showing posts with label #MaoistSurrender. Show all posts

पूना मार्गम: पुनर्वास से पुनर्जीवन — 15 सशस्त्र माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण

No comments Document Thumbnail

कार्यालय पुलिस अधीक्षक, महासमुंद

दिनांक: 01.03.2026

15 सशस्त्र माओवादी समाज की मुख्यधारा में लौटे

राज्य शासन की पुनर्वास नीति एवं सतत संवाद प्रयासों के परिणामस्वरूप प्रतिबंधित संगठन Communist Party of India (Maoist) की ओडिशा राज्य कमेटी के पश्चिमी सब-जोन अंतर्गत बरगढ़-बलांगीर-महासमुंद (BBM) डिविजनल कमेटी (DVC) के सभी 15 माओवादियों ने अपने धारित हथियारों के साथ जिला पुलिस महासमुंद के समक्ष आत्मसमर्पण किया।

आत्मसमर्पण करने वालों में 9 महिलाएं एवं 6 पुरुष शामिल हैं। सभी ने संविधान एवं तिरंगा ध्वज के प्रति आस्था व्यक्त करते हुए विश्वास, सुरक्षा और विकास का मार्ग चुना।

73 लाख रुपये का कुल इनाम

इन 15 नक्सलियों पर कुल 73 लाख रुपये का इनाम घोषित था, जिसमें—

  • 01 स्टेट कमेटी मेंबर (SCM) – ₹25 लाख

  • 02 डिविजनल कमेटी मेंबर (DCM) – ₹8-8 लाख

  • 05 एरिया कमेटी मेंबर (ACM) – ₹5-5 लाख

  • 07 पार्टी मेंबर (PM) – ₹1-1 लाख


14 अत्याधुनिक हथियार बरामद

आत्मसमर्पण के दौरान कुल 14 हथियार जमा किए गए, जिनमें—

  • 03 एके-47 रायफल

  • 02 एसएलआर रायफल

  • 02 इंसास रायफल

  • 04 .303 रायफल

  • 03 बारह बोर बंदूक

वरिष्ठ नक्सली का आत्मसमर्पण

आत्मसमर्पण करने वालों में सबसे वरिष्ठ विकास उर्फ सुदर्शन उर्फ जंगू उर्फ बाबन्ना उर्फ राजन्ना उर्फ मुप्पीड़ी साम्बैया (उम्र 57 वर्ष), ग्राम तारलापल्ली, थाना हनुमाकोण्डा, जिला वारंगल (तेलंगाना) का निवासी है। वह वर्ष 1985 से संगठन में सक्रिय था और स्टेट कमेटी मेंबर (SCM) के पद पर कार्यरत था। वह BBM डिविजन का प्रभारी था और एके-47 के साथ आत्मसमर्पण किया।

डिविजनल कमेटी सदस्य मंगेश उर्फ रमेश (ग्राम हिदूर, जिला कांकेर) एवं बाबू उर्फ सैतु उर्फ बबलू (जिला नारायणपुर) पर ₹8-8 लाख का इनाम घोषित था। दोनों पूर्व में दण्डकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) के विभिन्न डिविजनों में सक्रिय रहे हैं।

आत्मसमर्पण करने वाले 6 सदस्य (नीला, सोनू, रीना, दनेश, दीपना, रनीला) पूर्व में सेंट्रल कमेटी सदस्य चलपति के सुरक्षा दस्ते में कार्यरत रहे थे। गरियाबंद के कुल्हाड़ीघाट ऑपरेशन के बाद इन्हें BBM डिविजन में स्थानांतरित किया गया था।

आत्मसमर्पण के कारण

महासमुंद जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों में सक्रिय BBM डिविजनल कमेटी के सदस्यों से आत्मसमर्पण कराने हेतु आकाशवाणी, बैनर, पोस्टर, पाम्फलेट एवं अन्य संवाद माध्यमों से लगातार अपील की जा रही थी। शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत—

  • पदानुसार प्रोत्साहन राशि

  • हथियार सहित आत्मसमर्पण पर अतिरिक्त लाभ

  • स्वास्थ्य सुविधा

  • आवास एवं रोजगार की व्यवस्था

का व्यापक प्रचार-प्रसार किया गया।

जंगलों में कठिन जीवन, परिवार से दूरी, वैचारिक भ्रम तथा पूर्व में आत्मसमर्पण कर चुके साथियों को योजनाओं का लाभ उठाकर परिवार सहित सामान्य जीवन जीते देख इन माओवादियों ने हिंसा का मार्ग त्यागकर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया।

सम्मान एवं पुनर्वास

आत्मसमर्पण उपरांत परसदा स्थित सुरक्षित केंद्र परिसर में सभी को तिरंगा ध्वज, संविधान की प्रति तथा शांति, प्रेम और नए जीवन के प्रतीक स्वरूप लाल गुलाब भेंट कर सम्मानित किया गया।

महत्वपूर्ण उपलब्धि

इन 15 नक्सलियों के आत्मसमर्पण के बाद ओडिशा स्टेट कमेटी का पश्चिमी सब-जोन, जिसमें एक वर्ष पूर्व तक 2 डिविजन एवं 7 एरिया कमेटियां सक्रिय थीं, पूर्णतः समाप्त हो गया है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ का रायपुर पुलिस रेंज एवं ओडिशा का संबलपुर रेंज नक्सल प्रभाव से मुक्त हो गए हैं।

मार्च 2026 तक नक्सलवाद के समूल उन्मूलन के लक्ष्य की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

पुलिस की अपील

बस्तर क्षेत्र एवं ओडिशा के पूर्वी सब-जोन में सक्रिय शेष नक्सलियों से अपील की जाती है कि वे हथियार त्यागकर संविधान एवं तिरंगा ध्वज के प्रति निष्ठा जताएं और विश्वास, सुरक्षा एवं विकास की मुख्यधारा से जुड़ें।

राज्य शासन की व्यापक नक्सल उन्मूलन नीति तथा “पूना मार्गम: पुनर्वास से पुनर्जीवन” कार्यक्रम के अंतर्गत यह आत्मसमर्पण शांति, संवाद एवं विकास आधारित रणनीति की एक बड़ी सफलता है।

आत्मसमर्पित नक्सलियों का विवरण इस प्रकार है —






नक्सल मुक्त बस्तर की दिशा में एक और निर्णायक कदम : चार इनामी माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण

No comments Document Thumbnail

सुरक्षा बलों के समन्वित प्रयास, सुदृढ़ कैम्प व्यवस्था और बेहतर कनेक्टिविटी से माओवादी प्रभाव क्षेत्र लगातार रहा है सिमट - मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर- किस्टाराम क्षेत्र में 8 लाख रुपये के इनामी चार सक्रिय माओवादी कैडरों द्वारा हिंसा का मार्ग त्यागकर मुख्यधारा से जुड़ने का निर्णय बस्तर में बढ़ते विश्वास, सुरक्षा और विकास के वातावरण का स्पष्ट प्रमाण है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि “नक्सल मुक्त बस्तर – सुरक्षित छत्तीसगढ़” का संकल्प अब जमीनी स्तर पर साकार होता दिखाई दे रहा है। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह परिवर्तन सुरक्षा बलों के समन्वित एवं सतत प्रयासों, सुदृढ़ कैम्प व्यवस्था, प्रभावी क्षेत्रीय उपस्थिति तथा बेहतर सड़क और संचार कनेक्टिविटी का प्रत्यक्ष परिणाम है। इन प्रयासों से माओवादी प्रभाव क्षेत्र लगातार सिमट रहा है और उनका सामाजिक आधार कमजोर हो रहा है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की स्पष्ट नीति है कि जो लोग हिंसा छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, उन्हें अवसर, सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराया जाएगा। बस्तर में शांति, विश्वास और विकास की यह यात्रा आगे भी पूरी प्रतिबद्धता के साथ जारी रहेगी।

छत्तीसगढ़ की पुनर्वास नीति से लौटी उम्मीदें,सुकमा में आत्मसमर्पित माओवादियों को मिला सम्मानजनक नया जीवन

No comments Document Thumbnail

75 को 5G स्मार्टफोन, 25 को मेसन किट का वितरण

रायपुर- छत्तीसगढ़ शासन की संवेदनशील और दूरदर्शी नक्सल पुनर्वास नीति ज़मीनी स्तर पर सकारात्मक बदलाव का सशक्त उदाहरण बन रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के स्पष्ट निर्देशों एवं उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन में सुकमा जिले के नक्सल पुनर्वास केंद्र में आत्मसमर्पित माओवादियों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई।

आत्मसमर्पण करने वाल 25 युवाओं को रोजगारोन्मुख मेसन (राजमिस्त्री) किट

इस क्रम में 75 आत्मसमर्पित नक्सलियों को अत्याधुनिक 5G स्मार्टफोन तथा 25 युवाओं को रोजगारोन्मुख मेसन (राजमिस्त्री) किट वितरित की गई। यह कार्यक्रम कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव एवं पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण के मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ।

75 आत्मसमर्पित नक्सलियों को अत्याधुनिक 5G स्मार्टफोन

कार्यक्रम के दौरान 75 पुनर्वासित युवाओं को सैमसंग गैलेक्सी M06 5G स्मार्टफोन प्रदान किए गए, जिनमें 50 मेगापिक्सल डुअल कैमरा तथा 5000 mAh फास्ट-चार्जिंग बैटरी जैसी आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध हैं। इन स्मार्टफोनों के माध्यम से युवा अब डिजिटल शिक्षा, कौशल विकास कार्यक्रमों, सरकारी योजनाओं तथा देश-दुनिया की जानकारी से सहजता से जुड़ सकेंगे।

इसके साथ ही 25 पुनर्वासित युवाओं को मेसन किट प्रदान कर निर्माण क्षेत्र में रोजगार एवं स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित किया गया। यह पहल प्रधानमंत्री आवास योजना–ग्रामीण सहित अन्य विकास कार्यों के लिए कुशल श्रमशक्ति तैयार करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

मुचाकी रनवती

आत्मसमर्पण करने वाले लोगों स्वरोजगार के नए अवसरों उपलब्ध कराने संकल्पित

जिला प्रशासन ने बताया कि नक्सल पुनर्वास को केवल आर्थिक सहायता तक सीमित न रखते हुए इसे आत्मनिर्भरता, सम्मान और सामाजिक समावेशन से जोड़ा जा रहा है। 5G स्मार्टफोन के माध्यम से पुनर्वासित युवा अब ऑनलाइन प्रशिक्षण, आधुनिक कृषि तकनीकों, छोटे व्यवसायों और स्वरोजगार के नए अवसरों को समझने और अपनाने में सक्षम होंगे।आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी लोगों स्वरोजगार के नए अवसरों उपलब्ध कराने सरकार संकल्पित है l 

पुनर्वासित युवाओं ने साझा किए अनुभव

पोलमपल्ली निवासी पुनर्वासित पोड़ियम भीमा ने बताया कि वे लगभग 30 वर्षों तक डीवीसी सदस्य के रूप में संगठन से जुड़े रहे। पुनर्वास के बाद उन्हें बेहतर आवास, भोजन और प्रशिक्षण की सुविधा मिल रही है। उन्होंने बताया कि वे राजमिस्त्री के साथ-साथ इलेक्ट्रीशियन और मैकेनिक का प्रशिक्षण भी प्राप्त कर चुके हैं।

पोड़ियम भीमा

पुवर्ती निवासी मुचाकी रनवती ने बताया कि वे 24 वर्षों तक एसीएम सदस्य के रूप में नक्सल संगठन से जुड़ी रहीं। पुनर्वास के बाद उन्होंने सिलाई प्रशिक्षण प्राप्त किया और वर्तमान में राजमिस्त्री प्रशिक्षण ले रही हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें अपने परिजनों से मिलने का अवसर मिला तथा बस्तर ओलंपिक की संभागस्तरीय प्रतियोगिता में भाग लेकर प्रथम पुरस्कार भी प्राप्त किया।

डब्बमरका, सुकमा निवासी गंगा वेट्टी ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि जिला प्रशासन द्वारा मोबाइल और मेसन किट मिलने से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। उन्होंने कहा कि जंगल के जीवन की तुलना में वर्तमान जीवन सुरक्षित और सम्मानजनक है। शिविर लगाकर उनका आधार कार्ड, आयुष्मान कार्ड, राशन कार्ड एवं जॉब कार्ड बनाया गया तथा शासन की सभी योजनाओं का लाभ उन्हें मिल रहा है।

सुकमा में की गई यह पहल इस बात का प्रमाण है कि छत्तीसगढ़ शासन की नीति केवल नक्सलवाद से मुकाबले तक सीमित नहीं है, बल्कि भटके हुए युवाओं को विश्वास, अवसर और सम्मान के साथ नया जीवन देने की ठोस कोशिश भी है। यह मॉडल नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति, विकास और सामाजिक समरसता की मजबूत नींव रख रहा है। इस अवसर पर जिले के प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे।

‘पूना मारगेम’ से शांति की ओर मजबूती से बढ़ते कदम: बीजापुर में 34 माओवादी कैडरों ने किया आत्मसमर्पण

No comments Document Thumbnail

छत्तीसगढ़ को शांति, विश्वास और उज्ज्वल भविष्य का प्रदेश बनाना राज्य सरकार का अटल संकल्प - मुख्यमंत्री साय

रायपुर- बस्तर अंचल में शांति, विश्वास और विकास की दिशा में एक और महत्वपूर्ण सफलता मिली है। बीजापुर जिले में ₹84 लाख के इनामी 34 माओवादी कैडरों ने हिंसा का मार्ग त्यागते हुए भारतीय संविधान में आस्था जताई है और समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व एवं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जी की दृढ़ इच्छाशक्ति के अनुरूप छत्तीसगढ़ को नक्सलमुक्त बनाने की दिशा में चल रहे सतत और ठोस प्रयासों का परिणाम है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार की ‘पूना मारगेम’ नीति ने यह सिद्ध कर दिया है कि संवाद, संवेदनशीलता और विकास, हिंसा से कहीं अधिक प्रभावी समाधान हैं। यह आत्मसमर्पण केवल हथियार छोड़ने की घटना नहीं है, बल्कि भय और भ्रम से मुक्त होकर सम्मानजनक जीवन की ओर लौटने का निर्णय है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार आत्मसमर्पण करने वाले सभी व्यक्तियों के पुनर्वास, सुरक्षा, आजीविका, कौशल विकास और सामाजिक पुनर्समावेशन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, ताकि वे समाज में आत्मनिर्भर बन सकें।

मुख्यमंत्री ने आज भी भटके हुए युवाओं से अपील करते हुए कहा कि वे हिंसा का मार्ग त्यागें, लोकतंत्र और विकास के साथ कदम से कदम मिलाकर चलें तथा प्रदेश और देश के निर्माण में सहभागी बनें।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ को शांति, विश्वास और उज्ज्वल भविष्य का प्रदेश बनाना राज्य सरकार का अटल संकल्प है और इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सभी स्तरों पर समन्वित प्रयास जारी रहेंगे।

बस्तर में शांति और विकास की नई दिशा : 65 लाख के इनामी 10 माओवादी आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटे

No comments Document Thumbnail

बस्तर में विश्वास, सुरक्षा और स्थायी शांति का वातावरण हो रहा है स्थापित - मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि  “आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति 2025” तथा “पूना मारगेम : पुनर्वास से पुनर्जीवन” जैसी मानवीय, संवेदनशील और दूरदर्शी पहल ने बस्तर में विश्वास, सुरक्षा और स्थायी शांति का वातावरण स्थापित किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि माओवादी भ्रमजाल में फँसे अनेक लोग अब हिंसा का मार्ग छोड़कर विकास और मुख्यधारा की ओर लौट रहे हैं। इसी क्रम में आज दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के वरिष्ठ सदस्य एवं 25 लाख के इनामी चैतू उर्फ श्याम दादा सहित कुल 65 लाख रुपए के इनाम वाले 10 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है। मुख्यमंत्री ने इसे बदलते बस्तर और सरकार की नीतियों की सफलता का स्पष्ट प्रमाण बताया।

मुख्यमंत्री साय ने यह भी कहा कि सरकार की प्रतिबद्धता के अनुरूप सभी आत्मसमर्पित साथियों को सुरक्षित, सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन हेतु आवश्यक पुनर्वास सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँगी। उन्होंने उल्लेख किया कि आत्मसमर्पण की बढ़ती संख्या यह दर्शाती है कि जनता सरकार की नीतियों पर भरोसा कर रही है और बस्तर तेजी से शांति, विश्वास और विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री ने इसे राज्य की प्रभावी रणनीति, पुलिस प्रशासन की सतत मेहनत और जनविश्वास का सामूहिक परिणाम बताते हुए बस्तर में स्थायी शांति स्थापना की दिशा में इसे एक महत्वपूर्ण उपलब्धि कहा।

Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.