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प्रधानमंत्री मोदी ने मणिपुर, मेघालय और त्रिपुरा के स्थापना दिवस पर दी शुभकामनाएं

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज पूर्वोत्तर भारत के तीन राज्यों—मणिपुर, मेघालय और त्रिपुरा—के स्थापना दिवस के अवसर पर वहां के लोगों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने क्षेत्र के सभी भाई-बहनों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि अपने निरंतर प्रयासों के बल पर वे जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त करें।

प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर निरंतर परिश्रम और प्रगति की भावना को दर्शाने वाला एक संस्कृत सुभाषित भी साझा किया। यह श्लोक सतत प्रयास के महत्व को रेखांकित करता है और आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा देता है।

साझा किया गया संस्कृत श्लोक है—

“चरैवेति चरैवेति चरन्वै मधु विन्दति।
सूर्यास्य पश्य श्रेमाणं न मामार न जीर्यति॥”

इस श्लोक का भावार्थ है कि जो व्यक्ति निरंतर आगे बढ़ता रहता है, वही प्रगति की मधुरता का अनुभव करता है। जैसे सूर्य बिना थके निरंतर प्रकाश देता रहता है, वैसे ही सतत परिश्रम से ही सफलता प्राप्त होती है।

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपने संदेश में लिखा कि उत्तर पूर्व के ये तीनों राज्य आज अपना स्थापना दिवस मना रहे हैं और इस अवसर पर उन्होंने वहां के नागरिकों को ढेरों शुभकामनाएं दीं।

प्रधानमंत्री के इस संदेश से न केवल पूर्वोत्तर राज्यों के लोगों में उत्साह का संचार हुआ, बल्कि निरंतर प्रयास और विकास के पथ पर आगे बढ़ने की प्रेरणा भी मिली।

मणिपुर के जनजातीय समुदायों के समावेशी विकास को राष्ट्रीय प्राथमिकता बताया: राष्ट्रपति मुर्मु

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भारत की राष्ट्रपति, द्रौपदी मुर्मु आज (12 दिसंबर, 2025) मणिपुर के सेनापति में एक जनसभा में शामिल हुईं। इस अवसर पर उन्होंने कई विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन भी किया।

सभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि मणिपुर के जनजातीय समुदायों के लिए गरिमा, सुरक्षा और विकास के अवसर सुनिश्चित करना तथा देश की प्रगति में उनकी अधिक भागीदारी बढ़ाना एक राष्ट्रीय प्राथमिकता है। भारत सरकार मणिपुर में विकास को समावेशी और सतत बनाने हेतु स्थानीय नेताओं, नागरिक समाज और समुदायों के साथ मिलकर कार्य कर रही है।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत सरकार देश के हर कोने तक विकास पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों के विकास पर विशेष ध्यान दे रही है। हाल के वर्षों में मणिपुर के पर्वतीय जिलों को सड़क और पुल संपर्क—जिसमें राष्ट्रीय राजमार्ग और ग्रामीण सड़कें शामिल हैं—स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल और बिजली आपूर्ति जैसे क्षेत्रों में केंद्रित निवेशों का लाभ मिला है। कौशल प्रशिक्षण, स्वयं सहायता समूह (SHGs) और वन धन जैसी आजीविका योजनाएँ लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार ला रही हैं। ये प्रयास सरकार की उस प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं, जिसके तहत जनजातीय समुदायों के समर्थन के साथ उनकी विशिष्ट पहचान और परंपराओं का सम्मान किया जाता है।


राष्ट्रपति ने कहा कि मणिपुर की शक्ति उसकी विविधता में निहित है—उसकी संस्कृति, भाषाएँ और परंपराएँ। पहाड़ और घाटी सदैव एक-दूसरे के पूरक रहे हैं, जैसे एक ही सुंदर भूमि के दो पहलू। उन्होंने सभी समुदायों से शांति, समझ और मेल-मिलाप के प्रयासों को आगे बढ़ाने का आग्रह किया। भारत सरकार मणिपुर के लोगों की आकांक्षाओं को समझती है। उन्होंने मणिपुर के लोगों, विशेषकर इस क्षेत्र के लोगों के कल्याण और प्रगति के प्रति भारत सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि हमें एक शांतिपूर्ण और समृद्ध मणिपुर के लिए मिलकर काम करते रहना चाहिए।

इससे पहले, राष्ट्रपति ने इंफाल स्थित नुपी लान मेमोरियल कॉम्प्लेक्स में मणिपुर की वीरांगनाओं को श्रद्धांजलि अर्पित की। यह स्मारक मणिपुरी महिलाओं के साहस और त्याग को समर्पित है और उन ऐतिहासिक आंदोलनों की याद दिलाता है, जिनमें महिलाओं ने ब्रिटिश और सामंती शक्तियों को अद्वितीय साहस के साथ चुनौती दी थी।


“राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का मणिपुर में नागरिक अभिनंदन, विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन”

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भारत की राष्ट्रपति,द्रौपदी मुर्मु ने आज (11 दिसंबर, 2025) इम्फाल स्थित सिटी कन्वेंशन सेंटर में मणिपुर सरकार द्वारा उनके सम्मान में आयोजित नागरिक अभिनंदन समारोह में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने कई विकासात्मक परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन भी किया।

सभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि मणिपुर दृढ़ता, साहस और अद्वितीय सांस्कृतिक समृद्धि की भूमि है। यहां के लोगों ने पीढ़ियों से खेल, सशस्त्र बल, कला और संस्कृति तथा लोक-सेवा सहित विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान देकर राष्ट्र को समृद्ध किया है।

राष्ट्रपति ने कहा कि वह मणिपुर के लोगों द्वारा हाल की दुर्भाग्यपूर्ण हिंसा के कारण झेले गए दर्द से भली-भांति अवगत हैं। उन्होंने आश्वस्त किया कि मणिपुर के लोगों की चिंताओं का समाधान करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार सामंजस्य को मजबूत करने, सुरक्षा सुनिश्चित करने और मणिपुर को स्थिरता और समृद्धि की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। सरकार राज्य में समान रूप से विकास को बढ़ावा देने के लिए भी दृढ़ संकल्पित है और यह सुनिश्चित करेगी कि विकास और प्रगति के लाभ राज्य के हर कोने तक पहुँचें।

राष्ट्रपति ने कहा कि मणिपुर दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ भारत की जीवंत सहभागिता का प्रवेश द्वार है। यहां के युवाओं, संस्कृति और प्राकृतिक सुंदरता के कारण यह राज्य असीम संभावनाओं से भरा हुआ है। मणिपुर अपनी स्वावलंबी और सशक्त महिलाओं के लिए भी जाना जाता है। ऐतिहासिक नूपी लाल या महिलाओं के युद्ध 20वीं शताब्दी के शुरुआती दशकों में मणिपुर की वीर महिलाओं द्वारा लड़े गए थे। उन्होंने औपनिवेशिक और सामंती शक्तियों को अपनी उचित मांगें मानने पर मजबूर कर दिया था। वह हर भारतीय के लिए प्रेरणा हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि मणिपुर के लोग प्रतिभाशाली और मेहनती हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि घाटी और पहाड़ दोनों के लोग नए सामंजस्य के साथ एकजुट रहेंगे और राज्य को समृद्धि व खुशहाली की नई ऊँचाइयों पर ले जाएंगे।

राष्ट्रपति ने मणिपुर के लोगों से सामंजस्य और विकास के प्रयासों का निरंतर समर्थन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हमें मिलकर ऐसा मणिपुर बनाना है जहाँ हर बच्चा सुरक्षित महसूस करे, हर महिला सशक्त हो, हर समुदाय शामिल महसूस करे, और हर नागरिक उज्ज्वल भविष्य की ओर आगे बढ़े।

इससे पहले राष्ट्रपति ने ऐतिहासिक मपाल कंग्जेइबुंग में आयोजित पोलो प्रदर्शनी मैच भी देखा।



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