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मातृशक्ति के खातों में पहुँची महतारी वंदन योजना की 30वीं किस्त

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 67.20 लाख माताओं और बहनों के खातों में डीबीटी के माध्यम से अंतरित किए 630.55 करोड़ रुपये

महिला सशक्तिकरण की दिशा में सरकार का मजबूत संकल्प, योजना के तहत अब तक 19,444.33 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का वितरण

महतारी वंदन योजना मातृशक्ति के सम्मान, आत्मनिर्भरता और परिवारों की समृद्धि का अभियान - मुख्यमंत्री साय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज मुख्यमंत्री निवास कार्यालय से महतारी वंदन योजना की 30वीं किस्त जारी करते हुए प्रदेश की 67 लाख 20 हजार 125 पात्र महिलाओं के बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से 630 करोड़ 55 लाख 54 हजार 300 रुपये की राशि अंतरित की। इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, प्रमुख सचिव शहला निगार तथा संचालक डॉ. रेणुका श्रीवास्तव उपस्थित थीं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि महतारी वंदन योजना राज्य सरकार की उन प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाओं में से एक है, जिसका उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाकर उन्हें सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि जब माताएं और बहनें आर्थिक रूप से सशक्त होती हैं, तब परिवार मजबूत होता है, बच्चों का भविष्य सुरक्षित होता है और समाज विकास की नई दिशा में आगे बढ़ता है। इसलिए मातृशक्ति का सशक्तिकरण राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह योजना केवल प्रतिमाह एक हजार रुपये की सहायता राशि उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं के आत्मविश्वास, निर्णय क्षमता और सामाजिक भागीदारी को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम बन चुकी है। प्रदेश के लाखों परिवारों में यह राशि शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और आजीविका जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में उपयोग हो रही है, जिससे महिलाओं की आर्थिक भूमिका और अधिक सशक्त हुई है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अनेक महिलाएं महतारी वंदन योजना से प्राप्त राशि का सदुपयोग करते हुए अपने बच्चों की शिक्षा पर खर्च कर रही हैं। कई माताएं अपनी बेटियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए सुकन्या समृद्धि योजना में नियमित निवेश कर रही हैं। वहीं बड़ी संख्या में महिलाओं ने सिलाई-कढ़ाई, ब्यूटी पार्लर, डेयरी, किराना दुकान, सब्जी विक्रय, पशुपालन, अगरबत्ती निर्माण तथा अन्य छोटे स्वरोजगार शुरू कर अपनी आय बढ़ाई है। इससे वे न केवल परिवार की आर्थिक आवश्यकताओं की पूर्ति कर रही हैं, बल्कि स्थानीय स्तर पर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल भी प्रस्तुत कर रही हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सुशासन का अर्थ केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक समय पर और पारदर्शी तरीके से पहुंचे। महतारी वंदन योजना इसी सोच का परिणाम है, जिसमें हर महीने बिना एक हजार रुपए की राशि सीधे महिलाओं के बैंक खातों में पहुंचाई जा रही है। डीबीटी व्यवस्था ने पारदर्शिता बढ़ाई है और महिलाओं में शासन के प्रति विश्वास भी मजबूत किया है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, स्वरोजगार, कौशल विकास तथा वित्तीय समावेशन जैसे विभिन्न क्षेत्रों में लगातार कार्य कर रही है। महतारी वंदन योजना इन सभी प्रयासों का महत्वपूर्ण आधार बनकर महिलाओं को आर्थिक सुरक्षा और सामाजिक सम्मान प्रदान कर रही है।

1 मार्च 2024 से पूरे प्रदेश में लागू है योजना : 30 किस्तों में 19,444.33 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान

महतारी वंदन योजना का शुभारंभ 1 मार्च 2024 को किया गया था। आज जारी की गई 30वीं किस्त के बाद योजना के अंतर्गत वितरित कुल राशि बढ़कर 19 हजार 444 करोड़ 33 लाख रुपये से अधिक हो गई है।महतारी वंदन योजना का प्रभाव अब प्रदेश के लाखों परिवारों में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। नियमित आर्थिक सहायता मिलने से महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ा है, घरेलू निर्णयों में उनकी भागीदारी मजबूत हुई है तथा बच्चों की शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य पर खर्च बढ़ा है। अनेक परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है और महिलाओं ने स्वयं सहायता समूहों तथा छोटे-छोटे व्यवसायों के माध्यम से अतिरिक्त आय अर्जित करना प्रारंभ किया है। महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण ही समावेशी विकास की सबसे मजबूत आधारशिला है। महतारी वंदन योजना इसी सोच को साकार करते हुए मातृशक्ति के सम्मान, स्वाभिमान और आत्मनिर्भरता को नई मजबूती प्रदान कर रही है तथा विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

महतारी वंदन योजना से माताओं और बहनों के जीवन में आया आत्मविश्वास और आर्थिक स्वावलंबन : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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महिलाओं को मिल रहा योजनाओं का सीधा लाभ

महिला सशक्तिकरण, रोजगार, पर्यटन, उद्योग और सुशासन के विजन को मुख्यमंत्री ने किया साझा

बस्तर में शांति, विकास और रोजगार का नया अध्याय शुरू

इमर्जिंग छत्तीसगढ़–सशक्त नारी, समृद्ध प्रदेश कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय  हुए शामिल

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज राजधानी रायपुर में आयोजित 'इमर्जिंग छत्तीसगढ़–सशक्त नारी, समृद्ध प्रदेश' कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने महिला सशक्तिकरण, बस्तर के विकास, रोजगार, उद्योग, पर्यटन, सुशासन और सामाजिक सुधारों पर राज्य सरकार की प्राथमिकताओं को विस्तार से रखा।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ केवल एक राज्य नहीं, बल्कि हम सभी के लिए छत्तीसगढ़ महतारी है। यह माता कौशल्या की पावन जन्मभूमि और भगवान श्रीराम का ननिहाल है। भारतीय संस्कृति में नारी को सर्वोच्च सम्मान देने की परंपरा रही है। उन्होंने वेदों का उल्लेख करते हुए कहा कि "यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता" अर्थात जहां नारी का सम्मान होता है, वहीं देवताओं का वास होता है।

महतारी वंदन योजना से महिलाओं के चेहरे पर लौटी मुस्कान

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं के आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। प्रदेश की लगभग 68 लाख 50 हजार विवाहित महिलाओं को महतारी वंदन योजना के अंतर्गत प्रतिमाह एक हजार रुपये सीधे उनके बैंक खातों में दिए जा रहे हैं। अब तक 29 किश्तों के माध्यम से लगभग 18 हजार 800 करोड़ रुपये महिलाओं के खातों में अंतरित किए जा चुके हैं।

उन्होंने कहा कि जब वे गांवों का दौरा करते हैं तो माताओं और बहनों के चेहरों पर इस योजना से आया आत्मविश्वास और संतोष स्पष्ट दिखाई देता है। बातचीत के दौरान माताएं और बहनें बताती हैं कि किसी ने अपनी बेटी के भविष्य के लिए सुकन्या समृद्धि योजना में निवेश किया है, किसी ने सिलाई मशीन खरीदकर रोजगार शुरू किया है तो किसी ने किराना या सब्जी की दुकान खोलकर आय बढ़ाई है। इससे माताएं और बहनें  आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं और परिवार की निर्णय प्रक्रिया में उनकी भागीदारी भी बढ़ी है।

दानसरा गांव की माताओं और बहनों ने महतारी वंदन की राशि से शुरू किया राम मंदिर निर्माण

मुख्यमंत्री साय ने बताया कि सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के दानसरा गांव की माताओं और बहनों ने महतारी वंदन योजना से प्राप्त राशि को एकत्र कर भगवान श्रीराम के मंदिर के निर्माण का कार्य प्रारंभ किया है। उन्होंने कहा कि यह इस योजना का सबसे प्रेरक उदाहरण है कि महिलाएं इस राशि का उपयोग समाज और संस्कृति के संरक्षण के लिए भी कर रही हैं।

30 लाख से अधिक महिलाएं स्व-सहायता समूहों से जुड़ीं

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में 2 लाख 86 हजार महिला स्व-सहायता समूह सक्रिय हैं, जिनसे लगभग 30 लाख महिलाएं जुड़ी हुई हैं। इन्हें रेडी-टू-ईट कार्यक्रम से जोड़ा जा रहा है तथा ऋण एवं अन्य आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर स्वरोजगार को बढ़ावा दिया जा रहा है।

बस्तर में नक्सलवाद से विकास की ओर ऐतिहासिक परिवर्तन

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि चार-पांच दशकों तक नक्सल हिंसा से प्रभावित रहा बस्तर अब तेजी से विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति, सुरक्षा बलों के अदम्य साहस और स्थानीय जनता के सहयोग से बस्तर में शांति स्थापित हुई है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा कैंप स्थापित करने के साथ-साथ विकास की योजनाओं को भी समानांतर रूप से आगे बढ़ाया गया। पहले सुरक्षा शिविरों के पांच किलोमीटर दायरे तक योजनाओं का लाभ पहुंचता था, जिसे अब बढ़ाकर दस किलोमीटर तक किया गया है।

'नियद नेल्ला नार' से 500 से अधिक गांवों तक पहुंची सरकार

मुख्यमंत्री ने बताया कि नियद नेल्ला नार योजना के अंतर्गत अब 500 से अधिक गांवों को जोड़ा जा चुका है। लगभग 17 विभागों की 40 से अधिक योजनाओं का लाभ इन गांवों तक पहुंचाया जा रहा है। यहां लोगों को राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड सहित अन्य आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

36 लाख लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के अंतर्गत लगभग 36 लाख लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया तथा गंभीर रोगियों को बेहतर उपचार के लिए बड़े अस्पतालों में रेफर किया गया। वहीं बस्तर मुन्ने योजना के माध्यम से अधिकारी स्वयं दूरस्थ गांवों में पहुंचकर लोगों की समस्याओं का त्वरित समाधान कर रहे हैं।

सिंचाई, कृषि और पर्यटन से आत्मनिर्भर बनेगा बस्तर

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर में इंद्रावती नदी पर देउरगांव एवं मटनार सिंचाई परियोजनाएं प्रस्तावित हैं, जिनसे लगभग 80 हजार एकड़ भूमि सिंचित होगी।

उन्होंने कहा कि चित्रकोट जलप्रपात, कुटुमसर गुफाएं, अबूझमाड़ के विशाल वन तथा धुड़मारास जैसे गांव बस्तर को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित कर रहे हैं। नई औद्योगिक नीति में होम-स्टे को भी शामिल किया गया है, जिसके तहत पांच कमरों तक के होम-स्टे निर्माण के लिए ऋण और सब्सिडी उपलब्ध कराई जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इमली, महुआ, हर्रा, बहेड़ा, सीताफल और औषधीय वनोपजों का मूल्य संवर्धन कर स्थानीय लोगों की आय बढ़ाई जा रही है। नेतानार जैसे गांवों में सेवा डेरा के माध्यम से महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई, पैकेजिंग तथा अन्य आजीविका आधारित प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं। आईआईटी की टीम भी स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल विकास का कार्य कर रही है।

धर्मांतरण के विरुद्ध कड़ा कानून लागू

मुख्यमंत्री ने कहा कि धर्मांतरण समाज के लिए गंभीर चुनौती है। विभिन्न राज्यों के कानूनों का अध्ययन कर छत्तीसगढ़ में धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम, 2026 लागू किया गया है। इसके तहत धर्म परिवर्तन करने और करवाने वाले दोनों को निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा। प्रलोभन, दबाव अथवा छलपूर्वक धर्मांतरण करने वालों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।

समान नागरिक संहिता की दिशा में भी तेजी से कार्य

उन्होंने बताया कि समान नागरिक संहिता के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में समिति गठित की गई है तथा राज्य सरकार का प्रयास है कि आगामी शीतकालीन विधानसभा सत्र तक इस दिशा में ठोस प्रगति हो।

पीएससी घोटाले की जांच और रोजगार पर सरकार की प्राथमिकता

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकार के कार्यकाल में हुए पीएससी घोटाले की सीबीआई जांच जारी है तथा दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि वर्तमान सरकार ने विभिन्न विभागों में युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराया है तथा शीघ्र ही 5 हजार शिक्षकों की भर्ती भी की जाएगी।

उन्होंने कहा कि सभी युवाओं को सरकारी नौकरी देना संभव नहीं है, इसलिए नई औद्योगिक नीति के माध्यम से निजी निवेश और उद्योगों को बढ़ावा देकर बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित किया जा रहा है। पिछले डेढ़ वर्षों में राज्य को 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनसे लाखों युवाओं को रोजगार मिलने की संभावना है।

महिलाओं ने साझा किए अपने अनुभव

कार्यक्रम में बलौदाबाजार जिले की मीना देवांगन ने महतारी वंदन योजना के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए बताया कि योजना से प्राप्त राशि से उन्होंने चूड़ी का व्यवसाय शुरू किया है। वहीं श्रीमती सरोज ने कहा कि वे इस राशि से अपने बच्चे की स्कूल फीस का भुगतान कर रही हैं। दोनों महिलाओं ने कहा कि इस योजना ने उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

महतारी वंदन योजना से मातृशक्ति को मिला आर्थिक संबल : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर 69 लाख 48 हजार महिलाओं के खातों में 25वीं किश्त के रूप में 641 करोड़ 58 लाख रुपये अंतरित

बस्तर की धरती से मातृशक्ति को बड़ा संबल : महतारी वंदन योजना की 25वीं किश्त जारी

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर बस्तर के लाल बहादुर शास्त्री मिनी स्टेडियम में आयोजित वृहद महतारी वंदन सम्मेलन–2026 में प्रदेश की माताओं-बहनों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की मातृशक्ति समाज की सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने कहा कि महिलाओं का आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण ही विकसित छत्तीसगढ़ की मजबूत नींव है और राज्य सरकार का हर निर्णय महिलाओं के कल्याण, सम्मान और आत्मनिर्भरता को केंद्र में रखकर लिया जा रहा है। 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर महतारी वंदन योजना की 25वीं किश्त जारी करते हुए प्रदेश की 69 लाख 48 हजार महिलाओं के खातों में 641 करोड़ 58 लाख रुपये अंतरित किए। इसके साथ ही इस योजना के अंतर्गत अब तक महिलाओं को 16 हजार 237 करोड़ रुपये की राशि प्रदान की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि यह योजना केवल आर्थिक सहायता का माध्यम नहीं, बल्कि माताओं-बहनों के आत्मविश्वास, सम्मान और आत्मनिर्भरता को मजबूत करने वाला जनकल्याणकारी अभियान बन चुकी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें 10 मार्च 2024 का वह दिन याद है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महतारी वंदन योजना का शुभारंभ किया था। उसी समय यह संकल्प लिया गया था कि प्रदेश की प्रत्येक पात्र महिला के खाते में हर महीने निर्धारित तिथि पर एक हजार रुपये की राशि पहुंचेगी। पिछले 25 महीनों से यह संकल्प लगातार पूरा किया जा रहा है और इस किश्त के साथ अब तक प्रत्येक हितग्राही महिला को 25 हजार रुपये की राशि प्राप्त हो चुकी है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने जो वादा किया था, उसे पूरी प्रतिबद्धता के साथ निभाया है।

मुख्यमंत्री साय ने बताया कि महतारी वंदन योजना को निर्बाध रूप से जारी रखने के लिए राज्य सरकार ने इस वर्ष के बजट में 8 हजार 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। उन्होंने कहा कि यह राशि माताओं-बहनों के जीवन में प्रत्यक्ष बदलाव ला रही है। महिलाएं इस सहायता का उपयोग बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य, घरेलू जरूरतों, बचत और स्वरोजगार जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में कर रही हैं। इससे परिवारों में आर्थिक स्थिरता बढ़ रही है और समाज के समग्र विकास को नई दिशा मिल रही है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश की माताएं-बहनें केवल परिवार का संचालन ही नहीं करतीं, बल्कि वे उत्कृष्ट वित्तीय प्रबंधक भी होती हैं। उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना से प्राप्त राशि का महिलाओं ने अत्यंत समझदारी से उपयोग किया है। किसी ने बेटियों के भविष्य के लिए बचत की, किसी ने स्वरोजगार शुरू किया, किसी ने परिवार के छोटे व्यवसाय को बढ़ाया, तो किसी ने बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर खर्च कर घर की स्थिति को मजबूत बनाया। यह इस योजना की सबसे बड़ी सफलता है कि महिलाओं ने इसे स्वयं और परिवार की उन्नति का माध्यम बनाया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प तथा सुरक्षा बलों के अदम्य साहस से नक्सलवाद अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है। नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों और आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास के लिए राज्य सरकार ने 15 हजार आवास स्वीकृत किए हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर सहित दूरस्थ अंचलों में शांति, विकास और विश्वास का नया वातावरण बन रहा है, जिसमें महिलाओं की भागीदारी विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के सम्मान और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए राज्य सरकार अनेक स्तरों पर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत पिछले दो वर्षों में 21 हजार 754 बेटियों के विवाह कराए गए हैं। महिलाओं को सुरक्षित, सुविधाजनक और गरिमापूर्ण कार्यस्थल उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश में 368 महतारी सदन बनाने की स्वीकृति दी गई है, जिनमें से 137 महतारी सदन का निर्माण पूर्ण हो चुका है। ग्राम पंचायत स्तर पर इनका उपयोग महिलाओं की बैठकों, प्रशिक्षण, विपणन और सामुदायिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में किया जाएगा।

मुख्यमंत्री साय ने बताया कि स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं की आय बढ़ाने के लिए राज्य सरकार लगातार पहल कर रही है। प्रदेश में अब तक 8 लाख महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाया जा चुका है और अब सरकार का लक्ष्य इसे बढ़ाकर 10 लाख लखपति दीदी बनाने का है। उन्होंने कहा कि महिलाएं अब केवल सहभागी नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नई नेतृत्वकारी शक्ति बनकर उभर रही हैं। इसी दिशा में महिला स्वसहायता समूहों के माध्यम से  रेडी टू ईट फूड निर्माण का कार्य पुनः प्रारंभ कराया गया है और इसे चरणबद्ध रूप से प्रदेश के शेष जिलों में भी लागू किया जा रहा है, ताकि स्थानीय स्तर पर महिलाओं को व्यापक रोजगार के अवसर मिल सकें।

मुख्यमंत्री ने बस्तर क्षेत्र के संदर्भ में कहा कि नियद नेल्ला नार योजना के माध्यम से नक्सल प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाएं पुनः प्रारंभ की गई हैं, बंद पड़े स्कूलों को दोबारा शुरू कराया गया है, बिजली पहुंची है, मोबाइल टावर लगाए जा रहे हैं तथा स्वच्छ पेयजल और बेहतर सड़कों की सुविधा दूरस्थ बसाहटों तक पहुंच रही है। उन्होंने कहा कि केवल सड़कों का निर्माण ही नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री बस सेवा योजना के माध्यम से बस्तर और सरगुजा अंचल के ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन सुविधा भी मजबूत की गई है, जिससे लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों तक पहुंचने में आसानी हो रही है।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री साय ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से धमतरी की नीतू साहू, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी की मिथलेश चतुर्वेदी, जांजगीर-चांपा की सरस्वती केंवट, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही की अनीता साहू तथा सरगुजा की निधि जायसवाल से संवाद किया। 

मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी की मिथलेश चतुर्वेदी ने बताया कि पति के निधन के बाद उनके सामने परिवार चलाने की बड़ी चुनौती थी। शासन से मिली सहायता राशि और महतारी वंदन योजना के संबल से उन्होंने ई-रिक्शा खरीदकर आजीविका का नया साधन शुरू किया, जिससे अब वे अपने परिवार का भरण-पोषण आत्मसम्मान के साथ कर पा रही हैं।

धमतरी की नीतू साहू ने बताया कि मजदूरी से होने वाली सीमित आय के कारण बेटियों के भविष्य के लिए बचत करना कठिन था, लेकिन महतारी वंदन योजना से मिलने वाली राशि से उन्होंने अपनी दोनों बेटियों के नाम सुकन्या समृद्धि योजना के खाते खुलवाकर हर महीने बचत शुरू की है।

इसी तरह सरगुजा की निधि जायसवाल ने महतारी वंदन योजना से मिली राशि को बचाकर “निधि मेकओवर” नाम से ब्यूटी पार्लर शुरू किया, जबकि गौरेला-पेंड्रा-मरवाही की अनीता साहू ने सिलाई का कार्य प्रारंभ कर “अनीता सिलाई सेंटर” स्थापित किया। जांजगीर-चांपा की सरस्वती केंवट ने भी इस राशि को अपने परिवार के व्यवसाय में लगाकर आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह अनुभव अत्यंत सुखद है कि महतारी वंदन योजना की राशि महिलाओं के हाथों में पहुंचकर परिवारों की तरक्की का आधार बन रही है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की माताएं-बहनें दूरदर्शिता, परिश्रम और आत्मविश्वास की अद्भुत मिसाल हैं। जब महिलाओं को अवसर और संबल मिलता है, तो वे न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे समाज को आगे बढ़ाने की शक्ति बन जाती हैं।

इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से ‘लक्ष्मी सखी मिलेट कार्ट’ का शुभारंभ भी किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पहल से पुनर्वासित महिलाओं को जोड़ा गया है, जिन्हें कृषि महाविद्यालय के माध्यम से प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ये महिलाएं मिलेट आधारित खाद्य सामग्री तैयार कर उसका विक्रय करेंगी, जिससे उन्हें सतत आजीविका और आर्थिक लाभ प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि महिलाओं को पशुपालन, सूक्ष्म उद्यम, प्रसंस्करण और स्थानीय विपणन से जोड़कर विशेष रूप से बस्तर और सरगुजा क्षेत्र में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए बजट में भी प्रावधान किए गए हैं।

कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सरकार गठन के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी को लागू करने की दिशा में गंभीरता से कार्य किया गया और उसी क्रम में महतारी वंदन योजना शुरू की गई। उन्होंने कहा कि इस योजना से राज्य की लगभग 70 लाख माताएं-बहनें लाभान्वित हो रही हैं। यह योजना महिलाओं को घरेलू जरूरतों की पूर्ति के साथ आर्थिक संबल भी प्रदान कर रही है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार छत्तीसगढ़ महिला कोष तथा सक्षम योजना के माध्यम से भी महिलाओं को स्वरोजगार स्थापित करने में सहयोग दे रही है।

वन मंत्री केदार कश्यप ने  कहा कि महतारी वंदन योजना के अंतर्गत प्रत्येक माह नियमित रूप से सहायता राशि प्रदान किया जाना सरकार की वचनबद्धता का प्रमाण है।विधायक जगदलपुर किरण देव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से माताएं-बहनें आज घर-परिवार को खुशहाल बनाने के साथ प्रदेश के विकास में भी अहम योगदान दे रही हैं। 

कार्यक्रम के आरंभ में महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव शम्मी आबिदी ने विभागीय योजनाओं की जानकारी दी ।

कार्यक्रम के दौरान महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित योजनाओं की सफलता की कहानियों पर आधारित एक पुस्तिका का विमोचन भी किया गया। महतारी वंदन योजना की हितग्राही महिलाओं ने मुख्यमंत्री को फलों की टोकरी तथा धुरवा तुवाल भेंटकर योजना के लिए आभार व्यक्त किया। 

इस अवसर पर दंतेवाड़ा विधायक चैतराम आटामी, बेवरेज कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष श्रीनिवास राव मद्दी, अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष रूपसिंह मंडावी, जिला पंचायत अध्यक्ष वेदवती कश्यप, महापौर संजय पांडेय, राज्य लघु वनोपज संघ के अध्यक्ष रूपसाय सलाम, राज्य बीज विकास निगम के अध्यक्ष  चंद्रहास चंद्राकर, मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष  भरत मटियारा, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक बस्तर के अध्यक्ष  दिनेश कश्यप, बस्तर संभाग के कमिश्नर डोमन सिंह, आईजी सुंदरराज पी., महिला एवं बाल विकास विभाग की संचालक डॉ. रेणुका श्रीवास्तव  सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी कार्यक्रम में उपस्थित थे।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर बस्तर में होगा ‘वृहद महतारी वंदन सम्मेलन–2026:मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जारी करेंगे महतारी वंदन योजना की 25वीं किस्त

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69 लाख से अधिक महिलाओं के खातों में पहुंचेगी आर्थिक संबल की नई राशि

रायपुर- अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च के अवसर पर बस्तर जिले में ‘वृहद महतारी वंदन सम्मेलन–2026’ का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में शामिल होंगे और सम्मेलन के दौरान प्रदेश की महिलाओं के खातों में महतारी वंदन योजना की 25वीं किस्त जारी करेंगे। 

कार्यक्रम की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह करेंगे।इस गरिमामय आयोजन में केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा एवं अरुण साव, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े तथा वन मंत्री केदार कश्यप सहित अनेक जनप्रतिनिधि, सांसद, विधायक तथा विभिन्न आयोगों और मंडलों के पदाधिकारी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।

महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आयोजित यह सम्मेलन मातृशक्ति के सम्मान, महिला सशक्तिकरण तथा महिलाओं की सामाजिक और आर्थिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम स्थल पर विभागीय स्टॉलों के माध्यम से महिलाओं को शासन की विभिन्न योजनाओं, स्वरोजगार के अवसरों तथा पोषण संबंधी कार्यक्रमों की जानकारी भी प्रदान की जाएगी।

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के उद्देश्य से संचालित महतारी वंदन योजना के अंतर्गत प्रदेश की 69 लाख से अधिक महिलाओं को लाभान्वित किया जा रहा है। योजना के तहत 25वीं किस्त जारी होने के बाद अब तक कुल 16 हजार 237 करोड़ 33 लाख रुपये की राशि महिलाओं के बैंक खातों में अंतरित हो जाएगी। 

इस योजना के माध्यम से महिलाओं को नियमित आर्थिक सहयोग प्राप्त हो रहा है, जिससे वे अपने परिवार की आवश्यकताओं की पूर्ति करने के साथ-साथ बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण पर भी विशेष ध्यान दे पा रही हैं। यह योजना महिलाओं के आत्मसम्मान और आर्थिक स्वावलंबन को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो रही है।

कार्यक्रम के दौरान बस्तर संभाग में आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटी नक्सली महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए विशेष पहल की जाएगी। इन महिलाओं को लखपति दीदी योजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ महिला कोष के माध्यम से ब्याजमुक्त एक-एक लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जाएगा।इसके साथ ही मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा इन महिलाओं को ‘लक्ष्मी-सखी मिलेट किट’ भी प्रदान की जाएगी। इन महिलाओं को इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के सहयोग से मिलेट (मोटे अनाज) आधारित खाद्य उत्पादों के निर्माण का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे इन उत्पादों के निर्माण और बिक्री के माध्यम से स्वरोजगार प्राप्त कर अपनी आय में वृद्धि कर सकें।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाला यह वृहद सम्मेलन महिलाओं के सम्मान, आत्मनिर्भरता और सामाजिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल होगा। सम्मेलन में बड़ी संख्या में महिलाएं, स्व-सहायता समूहों की सदस्याएं तथा विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित हितग्राही शामिल होंगी। यह आयोजन प्रदेश में महिला सशक्तिकरण के संकल्प को और अधिक मजबूत करेगा।

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