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व्यक्तित्व : भास्कर का पत्रकारिता में उदभव और विकास

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महासमुन्द : छत्तीसगढ़ शासन में संसदीय सचिव, खल्लारी विधायक द्वारिकाधीश यादव ने भास्कर राव को मीडिया प्रभारी नियुक्त किया है। जैसे ही यह खबर आई, अनेक लोगों के मन में सवाल आया। कौन हैं ये भास्कर राव ? मीडिया से जुड़े हुए साथी जानते हैं कि कोमाखान (बागबाहरा) के रहने वाले हैं। सोशल मीडिया में सक्रिय रहते हैं। जन जिज्ञासा को शांत करने हमने भास्कर राव पांढरे की कुंडली खंगाली। तो अनेक चौकने वाली बातें सामने आई। आइये जानते हैं कौन हैं भास्कर राव?और पत्रकारिता में कैसे हुआ इनका उदभव और विकास?





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पारिवारिक पृष्ठभूमि:-





भास्कर राव पांढरे का जन्म 25 अगस्त 1985 को छुरा (जिला गरियाबंद) में हुआ। महाराष्ट्रीयन ब्राह्मण "देशस्थ" परिवार में जन्मे भास्कर के पिता श्री लक्ष्मण राव पांढरे बिजली मिस्त्री थे। वे वर्तमान में खुद का व्यवसाय कर रहे हैं। उनकी माता श्रीमती तारा देवी पांढरे गृहिणी हैं।





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शिक्षा-दीक्षा





भास्कर राव की प्राथमिक शिक्षा से लेकर हायर सेकेंडरी तक की शिक्षा छुरा में हुई। तत्पश्चात स्नातक उन्होंने वेद शास्त्र विषय के साथ बीए किया। वेदाचार्य बनने उन्होंने संस्कृत में एमए किया। शिक्षा के प्रति लगन और इसे कैरियर बनाने उन्होंने बीएड और एम. फिल.की डिग्री ली।
वर्तमान में डॉ रामकिशोर मिश्र वेदाचार्य के निर्देशन में पंडित रविशंकर विश्वविद्यालय से सामवेद में पी.एच.डी. की पढ़ाई कर रहे हैं।









पत्रकारिता से ऐसे हुआ जुड़ाव





ग्रामीण परिवेश में जन्में भास्कर के परिवार की आर्थिक स्थिति तब ठीक नहीं थी। कक्षा छठवीं से आठवीं की पढ़ाई के दौरान परिवार आर्थिक समस्याओं से जूझ रहा था। अपनी शिक्षा पूरी करने वे अखबार बांटने लगे। तब पत्रकारिता जगत का आकर्षण उन्हें भा गया। आठवीं कक्षा की पढ़ाई के बाद पिताजी के साथ बिजली फिटिंग कार्य में हाथ बंटाने लगे। बाद 2009 से 2012 तक पत्रकारिता जगत से सीधा जुड़कर विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं के लिए स्वतंत्र कार्य करने लगे।









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न्यूज़ चैनल के संवाददाताओं के अधीनस्थ कार्य करते रहे। पारिवारिक और आर्थिक समस्याओं के कारण पत्रकारिता जगत का त्याग कर शिक्षण संस्थान से जुड़ गए। 2012 से अक्टूबर 2018 तक सीबीएसई विद्यालयों में कवर्धा में शिक्षक कार्य किया। साथ ही साथ पत्रकारिता जगत से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष जुड़ाव जारी रहा।






अक्टूबर 2018 में विदेश में नौकरी का अच्छा पैकेज मिला। इस बीच पारिवारिक जिम्मेदारियों के निर्वहन के लिए शिक्षकीय कार्य से त्यागपत्र देकर कोमाखान आ गए। यहां अपने चाचा का देखभाल करते हुए पत्रकारिता कर रहे हैं।





पत्रकारिता से लगाव





अक्टूबर 2018 से पुनः पत्रकारिता जगत में कदम रखा। बाल्यकाल से मन में पत्रकारिता का आकर्षण एक बार फिर जाग गया। मल्टीमीडिया के युग में खुद का वेब न्यूज़ पोर्टल और यू-ट्यूब चैनल की शुरुआत की। मीडिया जगत में वरिष्ठजनों के सहयोग और मित्रों के मार्गदर्शन में एक नई पहचान बन गई।





जिले के अंतिम छोर के गांव कोमाखान में रहते हुए भी महासमुंद जिले की हर बड़ी घटना अथवा समाचार का ब्रेकिंग फोटो बनाकर, वेब न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब के द्वारा सोशल मीडिया में जन-जन तक पहुंचाना किसी चुनौती से कम नहीं था। बहुत कम समय में मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की बारीकियों का ज्ञान हासिल कर चर्चा में आ गए।





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इस बीच अमर स्तंभ के स्थानीय संपादक प्रकाश यादव के द्वारा उप संपादक के पद का ऑफर मिलने से वहां भी सेवा दे रहे हैं। महासमुंद जिले के समस्त राजनीतिक, सामाजिक, प्रशासनिक कार्यक्रमों का यथा योग्य कवरेज दूरस्थ अंचल के गांव में रहकर करने की चुनौती है। फिर भी निराश नहीं हुए।





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अब संसदीय सचिव के मीडिया प्रभारी





इस बीच संसदीय सचिव छत्तीसगढ़ शासन द्वारकाधीश यादव के द्वारा मीडिया प्रभारी के रूप में नियुक्ति की गई । मीडिया प्रभारी नियुक्त होने के बाद भास्कर राव ने विधायक द्वारिकाधीश यादव का आभार व्यक्त करते हुए बताया कि इस नए दायित्व का निर्वहन पूरी कर्तव्य निष्ठा से करूंगा। इस प्रकार एक साधारण परिवार में भास्कर का उदभव हुआ और नाम के अनुरूप अपनी प्रतिभा का प्रकाश फैलाते हुए पत्रकारिता के आकाश में छा गए।


महासमुंद में 1 करोड़ 62 लाख रुपए कीमत का गांजा को जब्त

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महासमुंद: जिला पुलिस ने अवैध मादक पदार्थ गांजा की तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए गाड़ी में खाली कैरेट के नीचे रखकर ले जाए जा रहे 1 करोड़ 62 लाख रुपए कीमत का 8 क्विंटल 10 किलोग्राम गांजा को जब्त किया है. मामले में राजस्थान के दो तस्करों को गिरफ्तार किया गया है.अवैध गांजा परिवहन व अवैध शराब तस्करी के खिलाफ कार्रवाई के पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल ठाकुर से मिले निर्देश पर सतर्क जिले के सरहदी थाना के प्रभारी को मुखबिर से सूचना मिली कि ओड़िशा से अवैध मादक पदार्थ गांजा का परिवहन होने वाला है.





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थाना कोमाखान थाना प्रभारी ने इस पर पुलिस टीम को अलर्ट किया. चेकिंग के दौरान ओड़िशा से आ रहे ट्रक क्रमांक RJ 02 GA 5686 को ग्राम टेमरी फारेस्ट नाका के पास रोका गया. वाहन की तलाशी में खाली कैरेट के नीचे 26 बोरियों में भरा 165 पैकेट खाखी रंग के झिल्ली में लिपटा हुआ गांजा मिला.मामले में गाड़ी में सवार भरतपुर, राजस्थान निवासी 20 वर्षीय खालिद पिता स्माईल और अलवर, राजस्थान निवासी 32 वर्षीय साकिर हुसैन पिता सौकत अली से पूछताछ करने पर उन्होंने गांजा को भवानीपटना, ओडिशा से दिल्‍ली ले जाना बताये.





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इस तरह से आरोपियों के कब्जे से 1,62,00,000 रुपए कीमत का 8 क्विंटल 10 किलोग्राम अवैध मादक पदार्थ गांजा जब्त कर गिरफ्तार किया गया. आरोपियों के खिलाफ थाना कोमाखान में धारा 20(ख) नारकोटिक एक्ट के तहत् कार्यवाही की जा रही है.


CM साहब ! जनता के प्रति जवाबदेह नहीं है महासमुन्द जिला प्रशासन ?

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क्या जनता के प्रति जवाबदेह नहीं है महासमुन्द का जिला प्रशासन? यह अहम सवाल मेरे जैसे सैकड़ों कलमकारों के जेहन में है। इसका जवाब छत्तीसगढ़ सरकार के मुखिया से मांगने का समय अब आ गया है। वह इसलिए, क्योंकि जब जन सामान्य कोरोना संकटकाल में अनेक परेशानियों से जूझ रहा है। उन्हें लॉकडाउन नियमों का पालन, आजीविका के लिए उपाय करने की चिंता है। कोरोना संक्रमण का खतरा उठाते हुए भी मीडियाकर्मी बखूबी अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। तब जिला प्रशासन के आला अधिकारियों का रवैया गैर जिम्मेदाराना भला कैसे हो सकता है?





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निरंतर बन रही संवादहीनता की स्थिति से अनेक गलतफहमियां पैदा हो रही है। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के ज्यादातर साथियों का कहना है कि जिला प्रशासन के मुखिया न तो फोन कॉल अटेंड करते हैं। और सोशल मीडिया में जानकारी मांगने पर भी कोई जवाब देना उचित नहीं समझते हैं।





जिला कार्यालय में भी ऐसी व्यवस्था कर रखे हैं कि मीडिया के प्रतिनिधि उनसे मिल नहीं सकते। अनेक पत्रकारों ने बताया कि आधा से पौन घंटे तक इंतजार के बाद भी मिलने का उन्हें समय नहीं दिया जा रहा है। इस तरह की शिकायतें लगातार मिल रही है। इससे जनता और शासन-प्रशासन के बीच का सेतुबंध टूटने लगा है।





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समन्वय स्थापित करने में मीडिया की भूमिका अहम





जनता और शासन-प्रशासन के बीच समन्वय स्थापित करने में मीडिया की भूमिका अहम है। इसे नकारा नहीं जा सकता है। मीडिया की कड़ी टूटेगी तो सभी की दिक्कतें बढ़ना स्वाभाविक है। यहां आम आदमी परेशान हैं। गरीबों को दो वक्त की रोटी के लाले पड़ रहे हैं। रोज कमाने-खाने वाले हजारों लोग भूखे मरने के कगार पर हैं। एसी कमरे में कांच के घेरे में बैठे अफसरों की नजर में जमीनी स्तर पर सबकुछ ठीक चल रहा है। जबकि, जमीनी हकीकत इससे अलग है। इनकी तकलीफ को शासन-प्रशासन तक मीडिया ही पहुंचाती है। जिसकी अनदेखी और असहयोग से सभी परेशान हैं। जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली से सभी वर्ग के लोग आहत हैं।





यहां लोक सेवक समझने लगे हैं खुद को खुदा





जन सामान्य के बीच यह चर्चा का विषय है कि लोकसेवक यहां खुद को खुदा समझने लगे हैं। इस स्थिति में विद्रोह होना स्वाभाविक है। मैदानी क्षेत्रों से लोक सेवकों की मनमानी की ढेरों शिकायतें मिल रही है। जनता से जुड़े मुद्दे कलमकार प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, सोशल मीडिया पर लगातार उठा रहे हैं। सूचना क्रांति के वर्तमान समय में सब कुछ बहुत तेजी से वायरल हो जाता है। बावजूद संज्ञान में लेना तो दूर मामला उजागर करने वाले को ही संदेह की नजरों से देखा जाने लगा है।





ऐसा हुआ एक ताजा मामला





सोशल मीडिया पर "महासमुन्द जिले की खबरें" व्हाट्सएप्प ग्रुप में आज एक प्रकरण वायरल हुआ। पिथौरा के तहसीलदार ने पटवारी को नोटिस दिया है, उसे एक मीडिया प्रतिनिधि ने ग्रुप में शेयर किया। जिले के इस महत्वपूर्ण ग्रुप में कल रात भी कुछ मसलों पर कलमकारों की तीखी प्रतिक्रिया आई थी। सूत्रों के अनुसार यह अफसरों को नागवार गुजरा। लॉकडाउन के मसले पर मंथन करने पुलिस और प्रशासन के अधिकारी जिला कार्यालय में एकत्र थे। तब इस व्हाट्सएप्प ग्रुप पर चर्चा हुई। और जिला प्रशासन के तीन शीर्ष अफसर एक साथ लेफ्ट हो गए।





CM साहब ! जनता के प्रति जवाबदेह नहीं है महासमुन्द जिला प्रशासन ?









सोशल मीडिया पर पोस्ट के बाद एक साथ लेफ्ट हुए ये अधिकारी।









किसी ग्रुप में रहना, हट जाना निश्चय ही संबंधित का विशेषाधिकार है। लेकिन, अहम सवाल यह है कि जनता से जुड़े मामलों पर क्या आला अधिकारी जवाबदेही से बचने का प्रयास कर रहे हैं? जब शीर्ष अफसरों का रवैय्या ऐसा नकारात्मक रहेगा, तो जमीनी अमला आम आदमी का काम कहां करने वाले हैं। बहरहाल, अधिकारियों के एक साथ ग्रुप छोड़ने से मीडियाकर्मियों से जुड़े इस ग्रुप में तरह- तरह की चर्चाएं हो रही है।





बड़ों का अनुशरण करते हैं छोटे





यह प्रकृति का नियम है कि बड़ों का अनुशरण छोटे करते हैं। जब तीन शीर्ष अफसर एक साथ ग्रुप से लेफ्ट हुए। तब छोटे कहां पीछे रहने वाले हैं। इस ग्रुप से सहायक जनसंपर्क अधिकारी भी लेफ्ट हो गए। अधिकारियों के नकारात्मक रवैया से रूष्ट होकर ग्रुप के एडमिन ने उन्हें अन्य ग्रुपों से भी रिमूव कर दिया। क्या ये किसी प्रकार की जवाबदेही से बच रहे हैं? सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के बीच शुतुरमुर्ग वाला व्यवहार किसी के हित में नहीं है। मीडिया, प्रशासन, शासन सबकी जनता के प्रति बराबर जवाबदेही है। और मीडिया को चौथे स्तंभ का दर्जा भारतीय लोकतंत्र में ऐसे ही नहीं मिला है। यह बात खुद को खुदा समझने वाले नौकरशाह को बखूबी समझना ही चाहिए।





आनंदराम साहू
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार व प्रेस क्लब-महासमुन्द के अध्यक्ष हैं)


Godhan Nyay Yojna : किसान ने 15 दिन में गोबर बेच कर कमाया 44000 रूपये

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महासमुंद । छत्तीसगढ़

खेती किसानी और पशुपालन करने वाले लिंगराज आज खुशी से झूम रहा है। यह खुशी उसे गोधन न्याय योजना के जरिए मिली है। महासंमुद जिले के दूरस्थ गांव छिबर्रा के रहने वाले और खेती किसानी के साथ पशुपालन का काम करने वाले लिंगराज ने गोधन न्याय योजना के शुभारंभ 20 जुलाई से 4 अगस्त तक 15 दिनों में 221 क्विंटल गोबर बेचा। आज किसान के खाते में 44200 रूपए आने की सूचना उसे मोबाइल पर  एसएमएस (अलर्ट टोन्स) से मिली। तो खुशियों का ठिकाना नहीं रहा। लिंगराज ने सपने में भी नहीं सोचा था कि गोबर बेचने से 15 दिन में इतने पैसे मिल सकते हैं।

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लेकिन यह सब मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल की इस महात्वाकांक्षी योजना ने उसके और उसके जैसे हजारों पशुपालकों के सपने को साकार कर दिया। राज्य सरकार दो रूपये प्रतिकिलो की दर से गौठानों में पशुपालकों से गोबर खरीद रही है और वायदे के मुताबित 15 दिन के भीतर उसका भुगतान भी कर दिया। किसान गोपालक लिंगराज के पास खेती के अलावा 25 गाय है। जिसका दूध वह  आसपास के बाजार में बेचता है। लेकिन लाॅकडाउन के चलते उसका दूध ज्यादा नहीं बिक रहा था।  अब गोबर बेचने से उसकी दूध नहीं बिकने की भरपायी जरूर हो गयी है। इससे वह राहत महसूस कर रहा है।

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ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ सरकार की ‘‘गोधन न्याय योजना‘‘ का हरेली पर्व 20 जुलाई को शुरूआत हुई थी। जिले में इस योजना के शुरू होने से अब तक  15 दिन के भीतर जिले के 84 गौठानों में 1635 किसान, पशुपालकों ने 45551क्विंटल गोबर बेचा (विक्रय) किया है । इक्यासी (81) गौठान समिति द्वारा इसके एवज में 911186 रूपए का भुगतान जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक द्वारा पब्लिक फायनेंसीयल मेनेजमेंट सिस्टम (पीएफएमएस) से सभी 1635 किसान, पशुपालक को किया गया है ।

पीएफएमएस एक ऐसा प्लेटफॉर्म है, जिसके द्वारा ई-पेमेन्ट सब्सिडी का भुगतान डायरेक्ट बेनिफिट ट्रान्सफर (डीबीटी) से होता है। आपको बतादें कि जिले में 84 गौठानों में 78 ग्रामीण क्षेत्र के तथा 6 नगरीय निकाय क्षेत्र के है। इनमें अब तक  4 अगस्त कुल 1935 किसान, पशुपालक हितग्राहियों ने गोबर बेचने के लिए पंजीयन कराया है।

रियलिटी चेक:- जनसंपर्क अधिकारी जिला महासमुन्द की ओर से जारी इस खबर के तथ्यों की पड़ताल करने पर ज्ञात हुआ कि किसान लिंगराज ने पन्द्रह दिनों में 221 क्विंटल गोबर बेचा है।  जिसके एवज में उसे 2 रुपये प्रतिकिलो की दर से ऑनलाइन भुगतान किया गया है। चूंकि किसान के पास 25 मवेशी होने का खबर में उल्लेख है। जिसके अनुसार एक मवेशी प्रतिदिन करीब उनसठ किलो गोबर कैसे दे सकता है। जो आश्चर्यजनक और अविश्वसनीय है। इस संबंध में पूछने पर जनसंपर्क विभाग के महासमुन्द सहायक संचालक शशिरत्न पराशर का कहना हैं कि कृषि विभाग के उपसंचालक के द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार खबर प्रसारित किया गया हैं। संभवतः किसान ने महीनेभर का गोबर एकत्र करके अथवा पड़ोसियों का भी गोबर को  मिलाकर बेचा होगा। 
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