Media24Media.com: #MDL

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label #MDL. Show all posts
Showing posts with label #MDL. Show all posts

भारतीय तटरक्षक बल के लिए चौथे नेक्स्ट जेनरेशन ऑफशोर पेट्रोल वेसल (NGOPV) की कील रखी गई

No comments Document Thumbnail

मुंबई- भारतीय तटरक्षक बल (ICG) के लिए बनाए जा रहे छह नेक्स्ट जेनरेशन ऑफशोर पेट्रोल वेसल (NGOPV) में से चौथे पोत की कील रखने (Keel Laying) की रस्म आज मुंबई में संपन्न हुई। यह पोत मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) द्वारा स्वदेशी रूप से डिजाइन, विकसित और निर्मित किया जा रहा है।

अत्याधुनिक मशीनरी और आधुनिक प्रणालियों से लैस यह पोत आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत देश की स्वदेशी रक्षा एवं समुद्री निर्माण क्षमताओं को और मजबूत करेगा। यह परियोजना भारतीय तटरक्षक बल की परिचालन क्षमता बढ़ाने और तटीय सुरक्षा को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

समारोह में भारतीय तटरक्षक बल और मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। उल्लेखनीय है कि इन छह नेक्स्ट जेनरेशन ऑफशोर पेट्रोल वेसल्स के निर्माण का अनुबंध 20 दिसंबर 2023 को संपन्न हुआ था।

इन अत्याधुनिक पोतों के शामिल होने से भारतीय तटरक्षक बल की समुद्री निगरानी, खोज एवं बचाव अभियान, तटीय सुरक्षा और समुद्री कानून प्रवर्तन क्षमताओं में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। साथ ही, यह परियोजना भारत की सामरिक आत्मनिर्भरता को मजबूत करने और स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।


आधुनिक युद्धपोत ‘तारागिरी’ की डिलीवरी: स्वदेशी डिज़ाइन व निर्माण की नई मिसाल

No comments Document Thumbnail

तारागिरी (यार्ड 12653)—निलगिरी श्रेणी (प्रोजेक्ट 17A) का चौथा और मझगाँव डॉक शिपबिल्डिंग लिमिटेड (MDL) द्वारा निर्मित तीसरा युद्धपोत—28 नवंबर 2025 को मुंबई स्थित MDL में भारतीय नौसेना को सौंप दिया गया। यह उपलब्धि युद्धपोत डिज़ाइन और निर्माण में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। प्रोजेक्ट 17A फ्रिगेट्स बहुउद्देश्यीय और आधुनिक युद्ध आवश्यकताओं के अनुरूप डिजाइन किए गए हैं, जो वर्तमान और भावी समुद्री चुनौतियों से निपटने में सक्षम हैं।

तारागिरी पूर्व INS Taragiri का पुनर्जन्म है, जो एक लींडर श्रेणी का फ्रिगेट था और 16 मई 1980 से 27 जून 2013 तक भारतीय नौसेना का हिस्सा रहा, तथा राष्ट्र की सेवा में 33 वर्ष का गौरवशाली योगदान दिया। यह अत्याधुनिक फ्रिगेट नौसैनिक डिज़ाइन, स्टील्थ, अग्निशक्ति, स्वचालन और जीवटता में एक बड़ी छलांग का प्रतीक है और युद्धपोत निर्माण में आत्मनिर्भर भारत की पहचान दर्शाता है।

वॉरशिप डिज़ाइन ब्यूरो (WDB) और वॉरशिप ओवरसीइंग टीम (मुंबई) की देखरेख में विकसित प्रोजेक्ट 17A फ्रिगेट्स स्वदेशी डिज़ाइन, स्टील्थ तकनीक, जीवटता और युद्ध क्षमता में एक पीढ़ीगत उन्नयन हैं। इंटीग्रेटेड कंस्ट्रक्शन की अवधारणा पर आधारित इन जहाज़ों का निर्माण निर्धारित समयसीमा में पूरा किया गया।

P17A जहाज़ आधुनिक हथियार और सेंसर प्रणालियों से लैस हैं, जो P17 (शिवालिक) श्रेणी की तुलना में अधिक उन्नत हैं। इनमें CODOG (कम्बाइंड डीज़ल ऑर गैस) प्रणोदन प्रणाली लगी है, जिसमें डीज़ल इंजन और गैस टर्बाइन दोनों शामिल हैं, जो प्रत्येक शाफ्ट पर कंट्रोलरेबल पिच प्रोपेलर (CPP) को चलाते हैं। साथ ही, अत्याधुनिक इंटीग्रेटेड प्लेटफॉर्म मैनेजमेंट सिस्टम (IPMS) भी स्थापित है।

इनकी शक्तिशाली हथियार और सेंसर शृंखला में ब्रहमोस सुपरसोनिक मिसाइल, MF-STAR और MRSAM प्रणाली, 76 मिमी SRGM, 30 मिमी और 12.7 मिमी क्लोज़-इन वेपन सिस्टम, तथा पनडुब्बी रोधी युद्ध के लिए रॉकेट और टॉरपीडो शामिल हैं।

तारागिरी पिछले 11 महीनों में भारतीय नौसेना को सौंपा गया चौथा P17A युद्धपोत है। पहले दो जहाज़ों के निर्माण अनुभव ने निर्माण समय को कम करने में मदद की, जिसके परिणामस्वरूप तारागिरी मात्र 81 महीनों में तैयार हुआ, जबकि प्रथम श्रेणी के जहाज़ (निलगिरी) को 93 महीने लगे थे। शेष तीन P17A जहाज़ (एक MDL में और दो GRSE में) अगस्त 2026 तक क्रमवार रूप से नौसेना को सौंप दिए जाएंगे।

तारागिरी की डिलीवरी देश की डिज़ाइन, शिप निर्माण और इंजीनियरिंग क्षमताओं को प्रदर्शित करती है और युद्धपोत डिज़ाइन व निर्माण में भारतीय नौसेना के आत्मनिर्भरता पर निरंतर ध्यान को दर्शाती है। 75% स्वदेशीकरण के साथ, इस परियोजना में 200 से अधिक MSMEs शामिल हुए और लगभग 4,000 प्रत्यक्ष तथा 10,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित हुए।


Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.