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निर्विरोध चयन बना मिसाल, संकुल केंद्र खट्टा के नए समन्वयक बने गेंदलाल कोकडिया

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महासमुंद- संकुल केंद्र खट्टा में नए संकुल समन्वयक के चयन में शिक्षकों ने एकजुटता और लोकतांत्रिक परंपरा की अनूठी मिसाल पेश की। शासकीय विद्यालय कोकड़ी के शिक्षक एवं चेतना विकास मूल्य शिक्षा से जुड़े गेंदलाल कोकडिया का सर्वसम्मति एवं निर्विरोध संकुल समन्वयक के रूप में चयन किया गया।

संकुल अंतर्गत सभी विद्यालयों के प्रधानपाठकों, शिक्षकों, संकुल प्राचार्य लिकेश कुमार साहू, पूर्व संकुल समन्वयक सुरेश कुमार साहू तथा वरिष्ठ शिक्षक ओमनारायण शर्मा की उपस्थिति में कोकडिया के नाम का प्रस्ताव रखा गया, जिसे सभी शिक्षकों और प्रधानपाठकों ने एकमत से समर्थन दिया। निर्विरोध चयन के बाद शिक्षकों ने कोकडिया का स्वागत कर उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं।

नवनियुक्त संकुल समन्वयक गेंदलाल कोकडिया ने अपने चयन का श्रेय वरिष्ठ शिक्षक ओमनारायण शर्मा, पूर्व समन्वयक सुरेश कुमार साहू तथा संकुल के सभी शिक्षकों को देते हुए उनके प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि समन्वयक का कार्य सभी शिक्षकों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाना है।

उन्होंने कहा कि उनका प्रमुख लक्ष्य संकुल के सभी विद्यालयों में जीवन विद्या अध्ययन और चेतना विकास मूल्य शिक्षा को प्रभावी ढंग से लागू करना है, ताकि प्रत्येक बच्चे का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके। उन्होंने शिक्षकों से राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप पाठ योजना तैयार करने, नियमित रूप से डेली डायरी संधारित करने, विद्यार्थियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने, विद्यालयों में अनमोल वचन, स्वच्छता, अनुशासन, स्वानुशासन, सहयोग, आज्ञापालन तथा मानसिक स्वास्थ्य जैसे विषयों पर बच्चों से नियमित संवाद करने का भी आग्रह किया।

कोकडिया ने कहा कि संकुल के सभी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए सामूहिक प्रयास किए जाएंगे और प्रत्येक शिक्षक की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

उल्लेखनीय है कि जहां कई स्थानों पर संकुल समन्वयक के चयन को लेकर मतभेद और खींचतान देखने को मिलती है, वहीं संकुल केंद्र खट्टा में शिक्षकों ने निर्विरोध एवं सर्वसम्मति से समन्वयक का चयन कर आपसी विश्वास, सहयोग और लोकतांत्रिक मूल्यों का परिचय दिया है। शिक्षकों का यह निर्णय न केवल अन्य संकुलों बल्कि जनप्रतिनिधियों के लिए भी एक सकारात्मक संदेश है कि अच्छे कार्य करने वाले व्यक्ति को समाज और सहयोगियों का स्वतः समर्थन प्राप्त होता है।

प्रिंसिपल ऑफ द ईयर समीर प्रधान का सम्मान समारोह आयोजित, शिक्षा के मानवीयकरण में योगदान को सराहा

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महासमुंद- संकुल केंद्र खट्टा द्वारा 'प्रिंसिपल ऑफ द ईयर' से सम्मानित एवं स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, पटेवा के प्राचार्य समीर चंद्र प्रधान के सम्मान एवं विदाई समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में शिक्षकों ने उनके 37 वर्षों के शैक्षणिक योगदान, मानवीय मूल्यों पर आधारित शिक्षा तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन में उनकी भूमिका की सराहना की।

संकुल केंद्र खट्टा के प्रतिनिधि शिक्षक एवं चेतना विकास मूल्य शिक्षा से जुड़े गेंदलाल कोकड़िया ने कहा कि समीर प्रधान का संपूर्ण शिक्षकीय जीवन शिक्षा के मानवीयकरण और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए समर्पित रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधान ने विद्यार्थियों में अभिव्यक्ति क्षमता, समय प्रबंधन, अनुशासन, चित्रकला, कविता, स्काउट-गाइड तथा जीवन विद्या अध्ययन जैसे क्षेत्रों को बढ़ावा दिया। वे छुट्टी के दिनों में भी विद्यालय में गतिविधियां संचालित करते थे और कई बार स्वयं घर-घर जाकर बच्चों को विद्यालय लाने का कार्य भी करते थे।

उन्होंने बताया कि समीर प्रधान ने महासमुंद डीएमएस, स्वामी आत्मानंद विद्यालय पटेवा तथा मध्यप्रदेश के सागर सहित विभिन्न संस्थानों में लगभग 37 वर्षों तक शिक्षा के क्षेत्र में सेवाएं दीं। उन्हें 'प्रिंसिपल ऑफ द ईयर', 'द बेस्ट प्रिंसिपल' तथा 'द मास्टर' सहित अनेक सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है। उनके कार्यों का उल्लेख अमेरिका की प्रतिष्ठित फोर्ब्स पत्रिका में भी प्रकाशित हो चुका है।

गेंदलाल कोकड़िया ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के निर्माण के दौरान दिल्ली में आयोजित नीति निर्माण समिति की बैठक में समीर प्रधान ने छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करते हुए राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी), रायपुर की ओर से लगभग 30 मिनट का प्रस्तुतीकरण दिया था, जिसका भारत सरकार द्वारा सीधा प्रसारण किया गया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों को नवाचार, नैतिक मूल्यों, कौशल विकास और समग्र शिक्षा के बेहतर अवसर प्रदान करती है।

सम्मान समारोह में समीर प्रधान ने संकुल केंद्र खट्टा के प्राचार्य लिकेश कुमार साहू, समन्वयक सुरेश कुमार साहू, वरिष्ठ शिक्षक ओमनारायण शर्मा, शिक्षक गेंदलाल कोकड़िया तथा सभी शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जीवन विद्या अध्ययन एक बेहतर शिक्षक और बेहतर इंसान बनने का प्रभावी माध्यम है तथा इसे विद्यालयों के अनिवार्य पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए।

इस अवसर पर वरिष्ठ शिक्षक ओमनारायण शर्मा ने समीर प्रधान को सिद्धांतनिष्ठ एवं आदर्श नीति निर्धारक बताया। वहीं प्राचार्य लिकेश कुमार साहू ने उन्हें शिक्षा के मानवीयकरण के लिए समर्पित प्रेरणादायी व्यक्तित्व बताया। समन्वयक सुरेश कुमार साहू ने उनके प्रशासनिक कौशल एवं व्यवहारिक नेतृत्व की सराहना की।

कार्यक्रम में दुलारी चंद्राकर, लखन साहू, चंद्रभान ध्रुव, तुलसी देवांगन सहित संकुल केंद्र खट्टा के अनेक शिक्षक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन सितोष जुल्फे ने किया। समारोह के दौरान शिक्षकों ने समीर प्रधान के साथ बिताए अनुभव साझा करते हुए उनके उज्ज्वल एवं प्रेरणादायी शिक्षकीय जीवन की सराहना की।

विकसित भारत-विकसित संसार का आधार है जीवन विद्या अध्ययन : गेंदलाल कोकड़िया

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 महासमुंद- विकसित भारत और विकसित संसार के निर्माण के लिए जीवन विद्या अध्ययन एवं चेतना विकास मूल्य शिक्षा का व्यापक प्रसार आवश्यक है। यह बात शिक्षक एवं चेतना विकास मूल्य शिक्षा संचालित अभिभावक विद्यालय कोकड़ी के संचालक गेंदलाल कोकड़िया ने रायपुर स्थित निरंजन धर्मशाला में आयोजित बैठक को संबोधित करते हुए कही।

उन्होंने कहा कि जीवन विद्या अध्ययन को देश के सभी राज्यों के विद्यालयों एवं महाविद्यालयों के अनिवार्य पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए। साथ ही शिक्षकों, अभिभावकों तथा शाला प्रबंधन एवं विकास समिति के सदस्यों को चेतना विकास मूल्य शिक्षा कार्यशालाओं से जोड़ा जाना आवश्यक है, ताकि शिक्षा का मानवीयकरण हो सके।

बैठक में अभ्युदय संस्थान अछोटी (दुर्ग) में प्रस्तावित जीवन विद्या अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन-2026 की रूपरेखा तैयार की गई। इस अवसर पर भारत के विभिन्न राज्यों से आए शिक्षक, अभिभावक, समाजसेवी एवं जीवन विद्या अध्ययन केंद्रों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

सात दिवसीय जीवन विद्या अध्ययन बिंदु शिविर का प्रबोधन सोम देव त्यागी भैयाजी ने किया। उन्होंने जीव चेतना और मानव चेतना के बीच के अंतर को स्पष्ट करते हुए जीवन विद्या अध्ययन के महत्व पर प्रकाश डाला। शिविर के पश्चात आयोजित संवाद में रंजीत अग्रवाल, अंजनी अग्रवाल एवं अन्य वक्ताओं ने कहा कि जीवन विद्या अध्ययन मानवीय मूल्यों की अभिव्यक्ति और जीवन कौशल को विकसित करता है।

अंतरराष्ट्रीय मानव वैज्ञानिक डॉ. संकेत ठाकुर ने भी जीवन विद्या के विभिन्न आयामों पर संवाद किया। शिविर में गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र तथा छत्तीसगढ़ सहित देश के विभिन्न राज्यों से लगभग 200 जिज्ञासुओं ने भाग लिया।

कार्यक्रम में मंजित चाचाजी, संस्थापक सदस्य अभ्युदय संस्थान अछोटी दुर्ग ने आगामी अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन की तैयारियों एवं लगभग 30 हजार प्रतिभागियों के लिए भोजन एवं आवास व्यवस्था संबंधी प्रस्तावों पर चर्चा की। उन्होंने सभी सहयोगियों एवं आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया।

बैठक में अंकित पोगुला (मानव तीर्थ, बेमेतरा) ने जीवन विद्या अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन की रूपरेखा प्रस्तुत की। कार्यक्रम में बी.आर. अग्रवाल, रजनी, राकेश अग्रवाल, सुचित्रा श्रीवास्तव, मीना अग्रवाल, बसंत, पूनम साहू, गोविंद पटेल, महावीर अग्रवाल, चंद्रशेखर राठौर सहित देशभर से आए जीवन विद्या अध्ययन केंद्रों के प्रभारी एवं समाजसेवी उपस्थित रहे।

वक्ताओं ने कहा कि निरंतर सुख, मानवीय मूल्यों की स्थापना तथा अपराध एवं संघर्षमुक्त समाज के निर्माण के लिए जीवन विद्या अध्ययन एक प्रभावी माध्यम सिद्ध हो सकता है। इसी उद्देश्य से प्रदेशभर में क्षेत्रीय सम्मेलन आयोजित करने का भी निर्णय लिया गया।


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