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डॉ. पद्मा गुरमेट को लद्दाख यूटी स्टेट अवॉर्ड-2025 से किया गया सम्मानित

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लेह- नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोवा-रिग्पा, लेह के निदेशक डॉ. पद्मा गुरमेट को वर्ष 2025 के लिए यूटी लद्दाख स्टेट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। उन्हें यह सम्मान लद्दाख में सोवा-रिग्पा चिकित्सा पद्धति के संरक्षण, प्रचार-प्रसार और विकास में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया गया।

यह पुरस्कार यूटी स्टेट अवॉर्ड समारोह के दौरान लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने प्रदान किया। समारोह में वर्ष 2022 से 2025 के लिए विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान और अनुकरणीय सेवाओं के लिए कुल 36 विशिष्ट व्यक्तियों को सम्मानित किया गया।

समारोह को संबोधित करते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि इन पुरस्कारों का उद्देश्य ऐसे व्यक्तियों के समर्पण, उत्कृष्टता और सेवा को सम्मानित करना है, जिन्होंने समाज पर महत्वपूर्ण सकारात्मक प्रभाव डाला है। उन्होंने युवा पीढ़ी को उत्कृष्टता की ओर आगे बढ़ने तथा केंद्र शासित प्रदेश के कल्याण और विकास में सकारात्मक योगदान देने के लिए प्रेरित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

डॉ. पद्मा गुरमेट का यह सम्मान नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोवा-रिग्पा के लिए गौरव का विषय है। यह सम्मान लद्दाख की समृद्ध पारंपरिक ज्ञान एवं चिकित्सा प्रणाली सोवा-रिग्पा के संरक्षण, संवर्धन और विकास के लिए उनके लंबे समय से किए जा रहे प्रयासों की महत्वपूर्ण पहचान है।

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोवा-रिग्पा, लेह के फैकल्टी, कर्मचारियों और विद्यार्थियों ने डॉ. पद्मा गुरमेट को इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए हार्दिक बधाई दी। उन्होंने सोवा-रिग्पा के विकास और विस्तार के लिए उनके निरंतर समर्पित प्रयासों की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

लद्दाख में पवित्र पिपरहवा अवशेषों का आगमन, ऐतिहासिक आध्यात्मिक उत्सव की शुरुआत

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गहरे आध्यात्मिक उत्साह और भक्ति से भरे वातावरण के बीच, भगवान  गौतम बुद्ध के पवित्र पिपरहवा अवशेष आज लेह पहुंचे। इसके साथ ही लद्दाख में एक ऐतिहासिक आध्यात्मिक उत्सव का शुभारंभ हुआ।

इन अवशेषों को दिल्ली से विशेष वायुसेना विमान द्वारा लाया गया, जिनके साथ ड्रुकपा थुकसे रिनपोछे और खेनपो थिनलास चोसाल मौजूद थे। आगमन पर विनय कुमार सक्सेना (लद्दाख के उपराज्यपाल) ने धार्मिक और सामाजिक नेताओं की उपस्थिति में इनका भव्य स्वागत किया।

 भव्य स्वागत और धार्मिक अनुष्ठान

  • पारंपरिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित हुए

  • लद्दाख पुलिस द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया

  • बौद्ध भिक्षुओं ने विशेष प्रार्थनाएं कीं

इसके बाद अवशेषों को भव्य शोभायात्रा के साथ जीवेत्सल ले जाया गया, जहां 1 मई (2569वीं बुद्ध पूर्णिमा) से आम जनता के दर्शन के लिए प्रदर्शित किया जाएगा। हजारों श्रद्धालुओं ने पारंपरिक वेशभूषा में इस शोभायात्रा में भाग लिया।

विशेष महत्व

उपराज्यपाल ने इस अवसर को अत्यंत शुभ बताते हुए कहा कि इन पवित्र अवशेषों के आगमन से पूरा क्षेत्र धन्य हो गया है। उन्होंने नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया कि लद्दाख को इस आयोजन के लिए चुना गया।

यह पहली बार है जब इन अवशेषों को भारत में सार्वजनिक दर्शन के लिए उनके मूल स्थान से बाहर लाया गया है, जबकि इससे पहले इन्हें कई देशों में प्रदर्शित किया जा चुका है।

 वैश्विक महत्व और कार्यक्रम

  • थाईलैंड, मंगोलिया, वियतनाम, रूस, सिंगापुर, भूटान, श्रीलंका और म्यांमार में प्रदर्शन

  • 2–10 मई: जीवेत्सल (लेह)

  • 11–12 मई: जांस्कर

  • 13–14 मई: धर्मा सेंटर, लेह

  • 15 मई: दिल्ली वापसी

विशिष्ट अतिथि

इस पवित्र अवसर पर अमित शाह सहित कई केंद्रीय मंत्री, राजदूत, मुख्यमंत्री और बौद्ध संगठनों के प्रतिनिधि लेह पहुंचेंगे।

विशेष तैयारियां

श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए:

  • वृक्षारोपण अभियान

  • फूलों की सजावट

  • शहरभर में स्वच्छता अभियान

यह आयोजन न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि लद्दाख की बौद्ध परंपरा और सांस्कृतिक एकता को भी दर्शाता है।

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