Media24Media.com: #LandResources

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label #LandResources. Show all posts
Showing posts with label #LandResources. Show all posts

भारत सरकार के भूमि संसाधन सचिव ने छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव से की सौजन्य भेंट

No comments Document Thumbnail

जलग्रहण प्रबंधन, पीएम सिंचाई योजना, डिजिटल राजस्व सुधार और ई-पंजीयन की प्रगति पर हुई चर्चा

रायपुर- भारत सरकार, भूमि संसाधन विभाग के सचिव नरेन्द्र भूषण ने आज मंत्रालय (महानदी भवन) में छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव विकासशील से सौजन्य भेंट की। इस दौरान छत्तीसगढ़ में सुशासन के अंतर्गत जलग्रहण प्रबंधन, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, भुईयां पोर्टल, ई-कोर्ट और पंजीयन एवं स्टाम्प विभाग द्वारा किए जा रहे नवाचारों पर विस्तार से चर्चा की गई।नरेन्द्र भूषण ने राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, वाणिज्यिक कर (पंजीयन) और राज्य जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन एजेंसी के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर विभागीय प्रगति का जायजा लिया।

राजस्व विभाग डिजिटलीकरण और ई-सुशासन

बैठक में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव शम्मी आबिदी ने छत्तीसगढ़ में भू-अभिलेखों के आधुनिकीकरण पर प्रस्तुतीकरण दिया। डिजिटल रिकॉड्स। के रूप में राज्य में भू-अभिलेखों का पूर्ण कंप्यूटरीकरण कर मॉडर्न रिकॉर्ड रूम स्थापित किए गए हैं। भू-नक्शा डिजिटलीकरण के तहत सभी भू-नक्शों को डिजिटल स्वरूप दिया गया है। भुईयां पोर्टल के माध्यम से डिजिटल किसान किताब अपडेट की गई है, जिसे भूमि स्वामी कभी भी डाउनलोड कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि राजस्व प्रकरणों के निराकरण के लिए रेवेन्यू ई-कोर्ट का प्रभावी उपयोग किया जा रहा है। साथ ही, भूमि का ऑटो डायवर्सन ऑनलाइन माध्यम से संपन्न हो रहा है।

पंजीयन एवं स्टाम्प पारदर्शी और पेपरलेस रजिस्ट्री

वाणिज्यिक कर (पंजीयन) विभाग द्वारा तकनीक के समावेश से रजिस्ट्री प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। ई-पंजीयन के तहत दस्तावेजों की रजिस्ट्री अब पूर्णतः ऑनलाइन और पेपरलेस मोड में की जा रही है। पारदर्शिता बढ़ाने के लिए व्हाट्सएप के माध्यम से अपॉइंटमेंट से लेकर रजिस्ट्री पूर्ण होने तक के अपडेट्स क्रेता-विक्रेता को भेजे जा रहे हैं। रजिस्ट्री की प्रति भी व्हाट्सएप से डाउनलोड करने की सुविधा दी गई है।

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, जलग्रहण क्षेत्र विकास

छत्तीसगढ़ राज्य जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन एजेंसी (REWARD) के अधिकारियों ने पीएमकेएसवाई (WDC 2.0) की प्रगति साझा की। वर्ष 2021-22 में स्वीकृत 45 परियोजनाओं के तहत 27 जिलों के 387 माइक्रो वाटरशेड में कार्य जारी है। 2.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र के उपचार हेतु कुल 613.66 करोड़ रुपये की लागत तय है (केंद्र-राज्य अनुपात 60-40 प्रतिशत है)। भारत सरकार द्वारा हाल ही में (28 अप्रैल 2026) 30.14 करोड़ रुपये की केंद्रांश राशि जारी करते हुए परियोजना की अवधि 30 सितंबर 2026 तक बढ़ा दी गई है।

बैठक में वाणिज्यिक कर (पंजीयन) विभाग के सचिव भुवनेश यादव, संयुक्त सचिव भारत सरकार भूमि संसाधन विभाग नितिन खाडे, संचालक भूमि संसाधन भारत सरकार श्री श्याम कुमार सहित छत्तीसगढ़ शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, पंजीयन एवं स्टाम्प, छत्तीसगढ़ राज्य जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन एजेन्सी के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुये।

भूमि संसाधन विभाग द्वारा राजस्व न्यायालय प्रक्रियाओं के आधुनिकीकरण पर दो दिवसीय राष्ट्रीय ‘चिंतन शिविर’ का आयोजन

No comments Document Thumbnail

भूमि संसाधन विभाग (DoLR), भारत सरकार 31 अक्टूबर से 1 नवंबर 2025 तक पुणे स्थित यशदा (YASHADA) में दो दिवसीय राष्ट्रीय ‘चिंतन शिविर’ का आयोजन कर रहा है। यह कार्यशाला राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को एक साथ लाकर राजस्व न्यायालय प्रक्रियाओं के आधुनिकीकरण और राजस्व शब्दावली (Glossary of Revenue Terms) पर सामूहिक चर्चा के लिए एक मंच प्रदान करेगी।

भूमि लेनदेन की संख्या तेजी से बढ़ने के कारण, राजस्व न्यायालयों पर मामलों का बोझ, प्रक्रियागत विलंब और जटिलताओं में वृद्धि हो रही है, जिससे नागरिकों की आजीविका, संपत्ति अधिकार और निवेश प्रभावित हो रहे हैं। यह स्थिति मुख्य रूप से औपनिवेशिक काल से विरासत में मिली भूमि रिकॉर्ड प्रणालियों और प्रक्रियाओं के कारण और अधिक जटिल हो गई है।

इस पृष्ठभूमि में, राष्ट्रीय कार्यशाला चार प्रमुख विषयों पर केंद्रित होगी:

  1. राजस्व न्यायालय केस प्रबंधन प्रणाली (RCCMS) का आधुनिकीकरण – मामलों के शीघ्र, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित निपटान हेतु राज्यों के नवाचारों और तकनीकी श्रेष्ठ प्रथाओं का प्रदर्शन।

  2. एकीकृत राजस्व शब्दावली (Glossary of Revenue Terms) – परिभाषाओं और व्याख्याओं में एकरूपता लाकर भूमि प्रशासन में स्पष्टता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना।

  3. अधिकार अभिलेख (Record of Rights - RoR) और कैडस्ट्रल मानचित्रों का मानकीकरण – ऐतिहासिक विसंगतियों को दूर करने हेतु भूमि रिकॉर्ड के लिए एक समान प्रारूप अपनाना।

  4. लिप्यंतरण एवं अनुवाद से संबंधित मुद्दे – नागरिकों के लिए बहुभाषीय भूमि रिकॉर्ड तक सुगम पहुंच सुनिश्चित करना।

यह कार्यशाला भूमि संसाधन विभाग की पहले से चल रही प्रमुख पहलों जैसे राजस्व न्यायालय प्रक्रियाओं का सरलीकरण, अधिकार अभिलेख प्रारूप का मानकीकरण, और एकीकृत राजस्व शब्दावली का निर्माण को और आगे बढ़ाएगी। यह शब्दावली 22 अनुसूचित भाषाओं में भूमि अभिलेखों को सुलभ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

‘चिंतन शिविर’ एक उच्चस्तरीय संवाद मंच के रूप में कार्य करेगा, जहां इन सुधार पहलों पर गहन चर्चा होगी। अपेक्षित परिणामों में शामिल हैं –

  • राजस्व शब्दों की एकीकृत शब्दावली का निर्माण,

  • भूमि रिकॉर्ड, पंजीकरण प्रणाली और राजस्व न्यायालयों के एकीकरण का रोडमैप,

  • और इन डिजिटल सुधारों का समर्थन करने हेतु आवश्यक विधायी संशोधनों की पहचान।

यह कार्यशाला भारत भर में राजस्व न्यायालयों के आधुनिकीकरण और भूमि प्रशासन में क्रांतिकारी बदलाव लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.