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पूर्वोत्तर में खेलो इंडिया सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और हाई परफॉर्मेंस सेंटर का रक्ष खडसे ने किया दौरा, खेल इकोसिस्टम की समीक्षा की

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खेल एवं युवा मामलों की राज्य मंत्री रक्ष खडसे ने आज असम स्थित खेलो इंडिया स्टेट सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (KISCE) और गुवाहाटी के हाई परफॉर्मेंस सेंटर का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने खिलाड़ियों, कोचों, खेल विज्ञान विशेषज्ञों और अधिकारियों से बातचीत की तथा पूर्वोत्तर क्षेत्र में विकसित हो रहे उच्च-प्रदर्शन खेल पारिस्थितिकी तंत्र की समीक्षा की।

दौरे के दौरान मंत्री ने हाई परफॉर्मेंस सेंटर की विभिन्न प्रशिक्षण और पुनर्वास सुविधाओं का निरीक्षण किया, जिनमें खेल विज्ञान प्रयोगशालाएं, रिकवरी एवं रिहैबिलिटेशन यूनिट्स, फिजियोलॉजिकल और बायोमैकेनिकल असेसमेंट सुविधाएं तथा खिलाड़ी सहायता प्रणाली शामिल हैं। इस निरीक्षण ने भारत के खेल ढांचे में खेल विज्ञान, तकनीक और डेटा-आधारित प्रशिक्षण के बढ़ते उपयोग को दर्शाया।

मंत्री के साथ इस दौरे में कौसर जमील हिलाली (विशेष सचिव, खेल एवं युवा कल्याण विभाग), अंकुर भाराली (निदेशक, खेल एवं युवा कल्याण विभाग), डी.के. मित्तल (क्षेत्रीय निदेशक, SAI गुवाहाटी), KISCE असम के हाई परफॉर्मेंस मैनेजर सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

खिलाड़ियों से बातचीत करते हुए रक्ष खडसे ने उनके समर्पण और मेहनत की सराहना की और उन्हें अनुशासन तथा दृढ़ संकल्प के साथ उत्कृष्टता की ओर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने देशभर में खेल अवसंरचना को मजबूत करने और खिलाड़ियों के लिए विश्वस्तरीय प्रशिक्षण वातावरण तैयार करने पर सरकार के निरंतर फोकस को भी रेखांकित किया।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत का खेल ढांचा, खिलाड़ी सहायता प्रणाली और वैज्ञानिक प्रशिक्षण पद्धतियां तेजी से विकसित हो रही हैं। उन्होंने बताया कि Khelo India State Centre of Excellence Assam और हाई परफॉर्मेंस सेंटर जैसी संस्थाएं प्रतिभाओं को निखारने और अंतरराष्ट्रीय सफलता के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

हाई परफॉर्मेंस सेंटर इस क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण खेल विज्ञान और पुनर्वास सुविधा के रूप में उभरा है, जिसमें चोट प्रबंधन, रिकवरी, शारीरिक परीक्षण, मोशन एनालिसिस और प्रदर्शन सुधार जैसी आधुनिक प्रणालियां मौजूद हैं।

मंत्री ने खेलो इंडिया कार्यक्रम के तहत चल रही खिलाड़ी विकास योजनाओं की भी समीक्षा की और पूर्वोत्तर के युवा खिलाड़ियों के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अवसर बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।

यह दौरा भारत के उस व्यापक दृष्टिकोण को दर्शाता है, जिसमें वैज्ञानिक, खिलाड़ी-केंद्रित और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सक्षम खेल पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है, विशेष रूप से कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 और उससे आगे की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए।

डोपिंग के खिलाफ भारत का सख्त रुख: वैश्विक सम्मेलन में मांडविया ने दोहराई स्वच्छ खेल की प्रतिबद्धता

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नई दिल्ली- युवा कार्य एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने वर्ल्ड एंटी-डोपिंग एजेंसी (WADA) के ग्लोबल एंटी-डोपिंग इंटेलिजेंस एंड इन्वेस्टिगेशंस नेटवर्क (GAIIN) के अंतिम सम्मेलन के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए स्वच्छ खेल और डोपिंग के खिलाफ वैश्विक सहयोग के प्रति भारत की मजबूत प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।

मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि “वैश्विक एंटी-डोपिंग इंटेलिजेंस और जांच नेटवर्क इन महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।” उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन डोपिंग के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में प्रमुख हितधारकों को एक मंच पर लाता है।

डॉ. मांडविया ने कहा कि भारत ने खेलों की शुचिता बनाए रखने के लिए “सिर्फ अनुपालन के लिए नहीं, बल्कि वास्तविक प्रतिबद्धता के साथ” कई सुधार किए हैं। उन्होंने राष्ट्रीय एंटी-डोपिंग अधिनियम, 2022 को एक मजबूत कानूनी ढांचा बताते हुए कहा कि राष्ट्रीय एंटी-डोपिंग संशोधन अधिनियम, 2025 वैश्विक मानकों के अनुरूप है। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार प्रतिबंधित पदार्थों के प्रशासन और तस्करी में शामिल लोगों के खिलाफ आपराधिक प्रावधान लाने की दिशा में काम कर रही है।

उन्होंने कहा कि पहले डोपिंग को व्यक्तिगत गलती माना जाता था, लेकिन अब यह एक संगठित बहुराष्ट्रीय गतिविधि बन चुकी है, जिससे निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर समन्वित प्रयास जरूरी हैं।

WADA के अध्यक्ष विटोल्ड बांका ने कहा कि “WADA का इंटेलिजेंस और जांच मॉडल राष्ट्रीय एंटी-डोपिंग संगठनों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच सहयोग को मजबूत करता है।” उन्होंने बताया कि यह मॉडल साझेदारी पर आधारित है और इसमें Europol तथा INTERPOL जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों का सहयोग भी शामिल है।

डॉ. मांडविया ने कहा कि WADA कार्यशालाओं और इस तरह के अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की मेजबानी से भारत की जांच क्षमताएं मजबूत हुई हैं और एंटी-डोपिंग पारिस्थितिकी तंत्र सुदृढ़ हुआ है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत को “उभरती हुई वैश्विक खेल शक्ति” बताया।

उन्होंने खेलो इंडिया और फिट इंडिया मूवमेंट जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये कार्यक्रम देश के खेल पारिस्थितिकी तंत्र को बदल रहे हैं और खेलों को राष्ट्रीय पहचान का हिस्सा बना रहे हैं।

मंत्री ने खेलों में नैतिक मूल्यों पर जोर देते हुए कहा कि “खिलाड़ियों के मूल्य खेल उत्कृष्टता के केंद्र में होने चाहिए।” उन्होंने निष्पक्षता, ईमानदारी और सम्मान को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया।

रोकथाम के उपायों पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि “रोकथाम सबसे प्रभावी रणनीति है,” और खिलाड़ियों को सही समय पर सही जानकारी देना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय एंटी-डोपिंग एजेंसी (NADA) इंडिया जागरूकता के लिए कार्यशालाएं, सेमिनार, डिजिटल अभियान और विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम चला रही है। दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए विशेष शैक्षणिक मॉड्यूल भी विकसित किए गए हैं।

खेल सचिव हरि रंजन राव ने कहा कि खेल मंत्रालय ने NADA की संस्थागत और जांच क्षमता को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जिसमें प्रवर्तन एजेंसियों के साथ बेहतर समन्वय और सूचना साझाकरण शामिल है। उन्होंने फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) और सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) के साथ साझेदारी को भी महत्वपूर्ण बताया।

डॉ. मांडविया ने “Know Your Medicine” मोबाइल ऐप का भी उल्लेख किया, जो खिलाड़ियों को प्रतिबंधित पदार्थों की जांच में मदद करता है। उन्होंने बताया कि देश में डोपिंग जांच की संख्या 2019 में लगभग 4,000 से बढ़कर पिछले वर्ष करीब 8,000 हो गई है, जबकि प्रतिकूल मामलों की दर 5.6% से घटकर 2% से कम हो गई है।

NADA इंडिया के महानिदेशक अनंत कुमार ने कहा कि परीक्षण कार्यक्रम का विस्तार हुआ है, लेकिन अब केवल परीक्षण पर्याप्त नहीं है—इसके लिए खुफिया जानकारी, समन्वय और शिक्षा भी आवश्यक है।

मंत्री ने बताया कि भारत नई WADA-अनुपालन प्रयोगशालाएं स्थापित करने की दिशा में भी कार्य कर रहा है।

अंत में, डॉ. मांडविया ने कहा कि “डोपिंग की चुनौती का सामना कोई एक संस्था अकेले नहीं कर सकती,” और सरकार, नियामक संस्थाओं तथा खेल संगठनों के बीच मजबूत साझेदारी की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत न केवल खेल उत्कृष्टता बल्कि उच्चतम नैतिक मानकों को बनाए रखने के लिए भी प्रतिबद्ध है।

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के बाद सामुदायिक पावर हाउस के रूप में जाने जाएंगे सिद्दी पहलवान

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सिद्दी समुदाय के पहलवानों ने जीते तीन स्वर्ण और एक रजत पदक

रायपुर- 'प्रतिभा को किसी परिचय की जरूरत नहीं होती'- यह कहावत 'खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स- 2026' में सच साबित हुई, जहां कर्नाटक के 'सिद्दी समुदाय' के पहलवानों ने मैट पर अपनी जबरदस्त छाप छोड़ी है। उनकी यह सफलता अब सिर्फ़ पदकों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे समुदाय के कुश्ती के क्षेत्र में एक ताकत के तौर पर उभरने का प्रतीक है। अफ़्रीकी मूल के भारत में लगभग 50,000 सिद्दी लोग रहते हैं, जिनमें से एक-तिहाई कर्नाटक में निवास करते हैं।

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 में कर्नाटक के 9 पहलवानों ने हिस्सा लिया, जिनमें से 4 सिद्दी समुदाय से थे। इन चार पहलवानों में से तीन ने स्वर्ण पदक अपने नाम किया जबकि एक को रजत पदक मिला। स्वर्ण पदक जीतने वाले पहलवानों में मनीषा जुआवा सिद्दी (76 किग्रा), रोहन एम डोड़ामणि (ग्रीको रोमन 60 किग्रा) और प्रिंसिता पेदरू फर्नांडिस सिद्दी   (68 किग्रा) शामिल हैं जबकि शालिना सेयर सिद्दी (57 किग्रा) को रजत पदक से संतोष करना पड़ा।

इन पहलवानों की सफलता न सिर्फ उनके संघर्ष और मेहनत की कहानी कहती है, बल्कि कुश्ती जैसे खेलो में सिद्दी समुदाय के बढ़ते वर्चस्व को भी दिखाता है। कर्नाटक के इन चारों पहलवानों का दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में ट्रायल हुआ था और वहां भी ये पहले नंबर पर रहे थे। 

सिद्दी समुदाय के प्रदर्शन से कर्नाटक कुश्ती टीम की कोच ममता बेहद गौरवान्वित महसूस कर रही हैं।

ममता ने कहा, ''जैसे हमारे देश में कुश्ती में हरियाणा का दबदबा है तो ठीक वैसे ही हमारे राज्य में अहलियाल क्षेत्र का कुश्ती में वर्चस्व रहता है। राज्य में डिपार्टमेंट ऑफ यूथ एंड डेवलपमेंट एंड सेंटर मुख्य रूप से इन्हीं सिद्दी समुदाय के लिए है। इनके बच्चे यहीं पर ट्रेनिंग करते  हैं। पिछले कुछ समय से इस समुदाय के लोगों के अंदर कुश्ती का क्रेज बढ़ा है और वे अब अपने बच्चों को कुश्ती में भेजने लगे हैं।

उत्तरी कर्नाटक के धारवाड़ जिले से आने वाले पुरुष पहलवान रोहन एम. डोड़ामणि भी इसी समुदाय से आते हैं। डोड़ामणि की मां सरकारी स्कूल में खाना पकाती हैं जबकि पिता का छह साल पहले ही देहांत हो चुका है।

रोहन ने कहा, “सिद्दी समुदाय के अंदर समय-समय पर छोटे दंगल होते रहते हैं और जो इनमें जीतता है, उन्हें ज्यादा से ज्यादा पुरस्कार राशि देकर सम्मानित किया जाता है। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 में स्वर्ण जीतने से पहले मैं सीनियर नेशनल चैंपियनशिप, नेशनल गेम्स और ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में भी भाग ले चुका हूं।''

देश में खिलाड़ियों के अंदर छिपी प्रतिभा की पहचान करने और उन्हें एक बेहतर मंच देने के लिए भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) और खेल मंत्रालय ने मिलकर 2018 में खेलो इंडिया यूथ गेम्स की शुरुआत की थी। उसके बाद खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स और अब खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की शुरुआत हुई है। 

साई के टैलेंट डेवलपमेंट कमेटी के सदस्य महा सिंह राव कहते हैं, '' साई और खेल मंत्रालय की तरफ से हम कम उम्र के प्रतिभाशाली बच्चों की पहचान करते हैं ताकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जो सपना है कि 2036 ओलंपिक खेल भारत में हो, उस सपने को साकार करने के लिए ये सरकार की रणनीति का एक हिस्सा है। प्रधानमंत्री के अलावा खेल मंत्री, साई और हम इस सपने को साकार करने में लगे हुए हैं कि आगे आने वाले ओलंपिक खेलों में हम ज्यादा से ज्यादा मेडल जीते।''

उत्तर कन्नड़ कारवार जिले से आने वाली शालिना सेयर सिद्दी ने इस प्रतियोगिता में रजत पदक जीतने के बाद कहा, ''हमारे समुदाय में कुश्ती को लेकर अब लोग दिलचस्पी लेने लगे हैं। मैंने अपने अंकल के कहने पर कुश्ती शुरू की थी और शुरू से ही वह मुझे ट्रेनिंग देते आ रहे हैं। मैंने इस प्रतियोगिता के लिए मेहनत तो पूरी की थी, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था और मैं स्वर्ण जीतने से चूक गई।'' 

कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ कारवार जिले से ही आने वाली प्रिंसिता सिद्दी ने कहा, ''शुरुआत में मुझे कुश्ती में दिलचस्पी नहीं थी और मैं बहुत रोई थी। लेकिन फिर धीरे-धीरे जब हमारे समुदाय के बच्चे इसमें भाग लेने लगे तो उन्हें देखकर मैं भी प्रैक्टिस करने लगी। यहां तक पहुंचने के लिए मैं शाम-सुबह दो-दो घंटे प्रैक्टिस करती हूं। मुझे इंटरनेशनल लेवल पर मेडल लाना है और इसके लिए मैं कड़ी मेहनत कर रही हूं।''

इन पहलवानों की सफलता इस बात को सिद्ध करती है कि जब सही मंच, ट्रेनिंग और सपोर्ट मिलता है, तो दूरदराज के समुदायों से भी प्रतिभाएं शिखर तक पहुंच सकती हैं और भारत के खेल भविष्य को आकार दे सकती हैं।

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 का जगदलपुर में शंखनाद

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महाराष्ट्र और अरुणाचल के धावकों ने बिखेरी स्वर्णिम चमक

रायपुर- खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के तहत एथलेटिक्स की स्पर्धाओं में विशेष रूप से 5000 मीटर की दौड़ आकर्षण का केंद्र रही, जहाँ धावकों के बीच सेकंड के सौवें हिस्से तक की कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। इस दौरान 110 मीटर बाधा दौड़ पुरूष एवं महिला वर्ग का पहला राउंड और 400 मीटर दौड़ महिला एवं पुरूष के पहले राउंड की प्रतियोगिता आयोजित की गई। बस्तर संभाग के मुख्यालय जगदलपुर स्थित धरमपुरा क्रीड़ा परिसर में सोमवार को चार दिवसीय खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 का भव्य शुभारंभ हुआ। आयोजन के पहले ही दिन देश के विभिन्न राज्यों से आए जनजातीय एथलीटों ने अपनी खेल कुशलता का परिचय दिया।

पुरुष वर्ग में पुरुषों की 5000 मीटर दौड़ में महाराष्ट्र के धावकों ने ट्रैक पर अपना एकतरफा दबदबा कायम किया। महाराष्ट्र के गोविंद प्रकाश पाड़ेकर ने 15:11.35 का शानदार समय निकालते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उनके ठीक पीछे छाया की तरह चल रहे उन्हीं के राज्य के सूरज जयराम माशी ने 15:11.64 के समय के साथ रजत पदक हासिल कर महाराष्ट्र की झोली में दोहरी सफलता डाल दी। इसी स्पर्धा में मध्य प्रदेश के रंगलाल दोदियार ने 15:22.48 के समय के साथ तीसरा स्थान प्राप्त कर कांस्य पदक पर कब्जा जमाया।

वहीं महिला वर्ग में महिलाओं की 5000 मीटर स्पर्धा में पूर्वोत्तर भारत की प्रतिभा का लोहा देखने को मिला l अरुणाचल प्रदेश की नेदी नगी ने 18.24.66 की रफ्तार के साथ दौड़ पूरी कर स्वर्ण पदक जीतते हुए अपनी राज्य का मान बढ़ाया। इस मुकाबले में मध्य प्रदेश की आरती डावर ने 18:19.28 के समय के साथ कड़ा संघर्ष करते हुए रजत पदक अपने नाम किया, जबकि नागालैंड की टी सूचोई टी ने 18:35.68 के साथ कांस्य पदक जीता।

पहले दिन की खेल समाप्ति के बाद पदक तालिका में महाराष्ट्र एक स्वर्ण और एक रजत के साथ शीर्ष स्थान पर काबिज है, जबकि अरुणाचल प्रदेश एक स्वर्ण पदक जीतकर दूसरे स्थान पर बना हुआ है। मध्यप्रदेश ने एक रजत और एक कांस्य के साथ अपनी स्थिति मजबूत की है, वहीं नागालैंड एक कांस्य पदक के साथ तालिका में चौथे स्थान पर है। बस्तर की धरती पर शुरू हुआ यह खेल महाकुंभ आने वाले तीन दिनों में और भी रोमांचक मुकाबलों का गवाह बनेगा, जहाँ जनजातीय युवा अपनी खेल प्रतिभा से राष्ट्रीय मंच पर नई इबारत लिखेंगे।



चार साल की बेटी को घर पर छोड़, असम की भारोत्तोलक पल्लवी ने जीता खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में पदक

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पल्लवी की बेटी महज छह महीने की थी जब उन्होंने दोबारा वेटलिफ्टिंग पर ध्यान देने का फैसला किया

बीएसएफ में कार्यरत पति के सहयोग के बगैर आसान नहीं था यह वापसी का सफर

रायपुर- जब पल्लवी पायेंग की बेटी सिर्फ छह महीने की थी, तब असम की इस वेटलिफ्टर के सामने एक कठिन फैसला था। या तो वह अपने पसंदीदा खेल को छोड़ दें या फिर अपनी बेटी से दूर रहकर दोबारा ट्रेनिंग शुरू करें। ऐसे समय में उनके पति सुखावन थौमंग ने उन्हें अपने सपनों को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया, जबकि उनकी मां ने बच्चे की देखभाल की जिम्मेदारी संभाली। पल्लवी ने इस त्याग को सार्थक करते हुए यहां आयोजित पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में महिलाओं के 69 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीता।

असम की मिसिंग जनजाति से ताल्लुक रखने वाली पल्लवी ने 2018 में वेटलिफ्टिंग की शुरुआत की थी और राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतकर अपनी पहचान बनाई। लेकिन कोविड-19 लॉकडाउन ने उनके खेल जीवन की रफ्तार को रोक दिया। इसी दौरान वह मां बनीं, लेकिन वेटलिफ्टिंग मंच पर वापसी की इच्छा उनके भीतर हमेशा बनी रही। हालांकि, मां बनने के बाद खेल में लौटने का विचार जितना उत्साहजनक था, उतना ही चुनौतीपूर्ण भी।

पल्लवी ने साई मीडिया से कहा, “यह आसान नहीं है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई महिलाओं ने मां बनने के बाद शानदार प्रदर्शन किया है, लेकिन एक महिला ही समझ सकती है कि पूरी फिटनेस में लौटने के लिए उसे किन परिस्थितियों से गुजरना पड़ता है।” उन्होंने कहा, “मैंने अपनी बेटी को तब छोड़ा जब वह सिर्फ छह महीने की थी, ताकि मैं दोबारा ट्रेनिंग शुरू कर सकूं। यह भावनात्मक फैसला था, लेकिन मुझे लगा कि यही सही समय है।” अब चार साल की उनकी बेटी, पल्लवी के सरूपथार स्थित किराए के घर और गोलाघाट जिले के बोरपाथार स्थित नानी के घर के बीच समय बिताती है, जो करीब 20 किलोमीटर दूर है।



यह फैसला आसान नहीं था।

बेटी से दूर लंबे समय तक रहना और कई बार अपने निर्णय पर सवाल उठाना, पल्लवी के सफर का हिस्सा रहा। लेकिन परिवार के सहयोग ने उन्हें कभी अकेला महसूस नहीं होने दिया। उन्होंने कहा, “मेरे पति ने हमेशा मेरा साथ दिया है, जबकि मेरी मां यह सुनिश्चित करती हैं कि जब मैं प्रतियोगिताओं के लिए बाहर जाती हूं, तो मेरी बेटी का पूरा ख्याल रखा जाए।” पल्लवी के पति, जो राष्ट्रीय स्तर के पूर्व मुक्केबाजी पदक विजेता रह चुके हैं, वर्तमान में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में ड्राइवर के रूप में कार्यरत हैं और जम्मू में तैनात हैं।

इसके बावजूद वापसी का रास्ता बिल्कुल आसान नहीं था। मां बनने के बाद 2023 में गोलाघाट में हुए राज्य चैंपियनशिप में पल्लवी छठे स्थान पर रहीं। अगले साल डिब्रूगढ़ में उन्हें निराशा हाथ लगी, जब प्रतियोगिता देर रात तक चली और वह अपनी लय नहीं बना सकीं। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। 2025 में उनकी मेहनत रंग लाने लगी। तेजपुर में हुए राज्य चैंपियनशिप में उन्होंने रजत पदक जीता और उसी साल अस्मिता लीग में स्वर्ण पदक हासिल किया। इस वर्ष भी अस्मिता लीग में एक और स्वर्ण जीतकर उन्होंने अपनी वापसी को और मजबूत किया।

रायपुर में खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स का यह रजत पदक उनके लिए खास रहा। उन्होंने कहा, “खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स का यह रजत पदक मेरे करियर के लिए एक अहम उपलब्धि है। इससे मुझे आत्मविश्वास मिला है कि मैं इस स्तर की खिलाड़ी हूं।”

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026-महिला हॉकी में मिजोरम और ओडिशा पहुँचे फाइनल में

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रायपुर- 'खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026' के अंतर्गत सरदार वल्लभभाई पटेल इंटरनेशनल हॉकी स्टेडियम में महिला हॉकी प्रतियोगिता के सेमीफाइनल मुकाबले आज उत्साह और रोमांच के बीच खेले गए।

पहले सेमीफाइनल मैच में मिजोरम की टीम ने झारखंड को कड़े मुकाबले में 3-2 से पराजित कर फाइनल में स्थान बनाया। दोनों टीमों के बीच मैच बेहद प्रतिस्पर्धात्मक रहा, जिसमें मिजोरम ने अंत तक बढ़त बनाए रखी।

दूसरे सेमीफाइनल मैच में उड़ीसा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए मध्यप्रदेश को 8-0 से हराया। उड़ीसा की टीम ने पूरे मैच में आक्रामक खेल दिखाते हुए एकतरफा जीत दर्ज की।

इन परिणामों के साथ मिजोरम और उड़ीसा की टीमें अब फाइनल में आमने-सामने होंगी, जहाँ खेल प्रेमियों खिताब के लिए रोमांचक मुकाबला देखने को मिलेगा।


खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 :- वेटलिफ्टिंग स्पर्धा में अरुणाचल पुरुष और असम महिला वर्ग में ओवरऑल चैम्पियन

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छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों ने भी लहराया परचम, रिशिका कश्यप ने रजत और लकी बाबू मरकाम ने जीता कांस्य

रायपुर- इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के अंतर्गत वेटलिफ्टिंग प्रतियोगिता समापन के साथ ही चैम्पियनशिप टीम के परिणाम भी घोषित किए गए, जिसमें पुरुष वर्ग में अरुणाचल प्रदेश ने ओवरऑल चैम्पियन बनने का गौरव हासिल किया। वहीं मिजोरम फर्स्ट रनरअप और असम सेकंड रनरअप रहा। महिला वर्ग में असम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए ओवरऑल चैम्पियन का खिताब अपने नाम किया, जबकि ओडिशा फर्स्ट रनरअप और छत्तीसगढ़ सेकंड रनरअप रहा।

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में आयोजित खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के अंतर्गत वेटलिफ्टिंग प्रतियोगिताओं का आज शानदार समापन हो गया। पूरे आयोजन के दौरान देशभर से आए खिलाड़ियों ने ताकत, तकनीक और आत्मविश्वास का बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए दर्शकों को रोमांचित किया। समापन समारोह के अवसर पर छत्तीसगढ़ के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप और रायपुर महापौर मीनल चौबे विशेष रूप से उपस्थित रहीं। उन्होंने खिलाड़ियों से मुलाकात कर उनका उत्साहवर्धन किया तथा विजेताओं को मेडल पहनाकर सम्मानित किया। इस दौरान उन्होंने खिलाड़ियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना भी की।

प्रतियोगिता के प्रमुख मुकाबलों की बात करें तो पुरुष 110 किलोग्राम भार वर्ग में अरुणाचल प्रदेश के साम्बो लापुंग ने 299 किलोग्राम वजन उठाकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। मिजोरम के डेविड लालजाव्मडिका ने 270 किलोग्राम के साथ रजत और छत्तीसगढ़ के लकी बाबू मरकाम ने 261 किलोग्राम वजन उठाकर कांस्य पदक जीता। लकी बाबू का यह प्रदर्शन घरेलू दर्शकों के लिए गर्व का क्षण रहा।

वहीं पुरुष 110+ किलोग्राम वर्ग में मिजोरम के डेविड जोह्मिंगमाविया ने 290 किलोग्राम के साथ स्वर्ण पदक जीता। आंध्र प्रदेश के गुगुलोथु राजा शेखर (255 किग्रा) को रजत और असम के मनाश प्रतिम सोनवाल (223 किग्रा) वजन उठाकर कांस्य पदक जीता। इस वर्ग में खिलाड़ियों के बीच जबरदस्त प्रतिस्पर्धा देखने को मिली।

महिला वर्ग में भी मुकाबले बेहद रोमांचक रहे। 86 किलोग्राम वर्ग में महाराष्ट्र की साक्षी बंडु बुरकुले ने 150 किलोग्राम वजन उठाकर स्वर्ण पदक हासिल किया। छत्तीसगढ़ की रिशिका कश्यप ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 121 किलोग्राम वजन उठाकर रजत पदक जीता और अपने मेडल का श्रेय अपने कोच को दिया। वहीं असम की बिटुपुना देओरी ने कांस्य पदक अपने नाम किया। एक अन्य महिला वर्ग के 86 किग्रा से अधिक के वर्ग में मिजोरम की जोसांगजुआली ने 140 किलोग्राम के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि असम की पिंकी बोरो और मध्यप्रदेश की गुंजन उइके ने क्रमशः रजत और कांस्य पदक हासिल किया।

छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों ने भी इस प्रतियोगिता में दमदार उपस्थिति दर्ज कराई। लकी बाबू मरकाम ने अपने प्रदर्शन के बाद कहा कि ट्राइबल गेम्स 2026 का आयोजन छत्तीसगढ़ में होना प्रदेश के ग्रामीण और आदिवासी युवाओं के लिए बड़ा अवसर है। इससे उन्हें बड़े मंच को देखने और आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी।

पूरे आयोजन के दौरान तकनीकी व्यवस्थाएं सुव्यवस्थित रहीं और प्रतियोगिताएं पारदर्शी तरीके से संपन्न हुईं। दर्शकों का उत्साह भी खिलाड़ियों के प्रदर्शन में ऊर्जा भरता रहा। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 की वेटलिफ्टिंग स्पर्धाओं ने यह साबित कर दिया कि देश के जनजातीय अंचलों में अपार खेल प्रतिभाएं मौजूद हैं, जिन्हें सही मंच और अवसर मिलने पर वे राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाने में सक्षम हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज जशपुर में क्रिकेट एकेडमी का किया शुभारंभ

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खेल अधोसंरचना का विस्तार युवाओं को नई ऊर्जा और अवसर देता है — मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज जशपुर में क्रिकेट एकेडमी का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश में खेल सुविधाओं का विस्तार कर युवाओं को अपनी प्रतिभा निखारने के बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे वे भविष्य में राज्य और देश का नाम रोशन कर सकें। जशपुर में क्रिकेट खेल को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नगर पालिका और ग्रीन क्रिकेट जशपुर के बीच एमओयू भी किया गया है, जिससे स्थानीय खिलाड़ियों को संगठित प्रशिक्षण और बेहतर संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे।

मुख्यमंत्री साय ने इस दौरान सरगुजा ओलंपिक की विजेता बास्केटबॉल टीम से मुलाकात की और खिलाड़ियों को उनकी उपलब्धि पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन और उपलब्धियां प्रदेश के युवाओं में खेल के प्रति उत्साह और आत्मविश्वास बढ़ाती हैं।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष राम प्रताप सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, नगर पालिका अध्यक्ष अरविन्द भगत, नगर पालिका उपाध्यक्ष यश प्रताप सिंह जुदेव, जिला पंचायत उपाध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जुदेव, जनपद पंचायत अध्यक्ष गंगाराम भगत, कृष्णा राय, विजय आदित्य सिंह जुदेव, सरगुजा कमिश्नर नरेन्द्र कुमार दुग्गा, आईजी दीपक कुमार झा, कलेक्टर रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक लाल उमेद सिंह, डीएफओ शशि कुमार सहित जनप्रतिनिधिगण उपस्थित थे।

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026: तैराकी में कर्नाटक का दबदबा, महिला वर्ग में ओडिशा बनी चौंपियन

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छत्तीसगढ़ की अनुष्का भगत का शानदार प्रदर्शन, राज्य को दिलाया लगातार चौथा रजत 

कुल 8 पदकों के साथ छत्तीसगढ़ 6वें स्थान पर

रायपुर- छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आयोजित खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 के अंतर्गत तैराकी प्रतियोगिताओं का आज समापन हो गया। प्रतियोगिता में देशभर के खिलाड़ियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया, जिसमें पुरुष वर्ग में कर्नाटक ने 123 अंकों के साथ ओवरऑल टीम चौंपियनशिप का खिताब अपने नाम किया। वहीं असम 69 अंकों के साथ प्रथम रनरअप और ओडिशा 31 अंकों के साथ द्वितीय रनरअप रहा। महिला वर्ग में ओडिशा ने 102 अंकों के साथ शानदार प्रदर्शन करते हुए चौंपियन बनने का गौरव हासिल किया, जबकि कर्नाटक 50 अंकों के साथ प्रथम रनरअप और मेजबान छत्तीसगढ़ 38 अंकों के साथ द्वितीय रनरअप रहा।

प्रतियोगिता के दौरान छत्तीसगढ़ की तैराक अनुष्का भगत ने लगातार चौथा रजत पदक जीतकर प्रदेश का मान बढ़ाया। उन्होंने महिला 50 मीटर ब्रेस्ट स्ट्रोक स्पर्धा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए यह उपलब्धि हासिल की। उनके इस प्रदर्शन से छत्तीसगढ़ की पदक स्थिति मजबूत हुई है और राज्य के खिलाड़ियों में उत्साह का संचार हुआ है।

आज आयोजित विभिन्न स्पर्धाओं में भी खिलाड़ियों ने दमदार प्रदर्शन किया। पुरुष 100 मीटर फ्रीस्टाइल में कर्नाटक के धोनिश ने स्वर्ण पदक जीता, जबकि असम के फर्मिनो एमोन लालुंग ने रजत और कर्नाटक के कीर्थन शरथ ने कांस्य पदक प्राप्त किया। महिला 100 मीटर फ्रीस्टाइल में ओडिशा की रितिका मिन्ज ने स्वर्ण पदक जीता, वहीं उनकी ही राज्य की कृष्णा प्रिया नायक ने रजत और असम की वायोलिना क्रो ने कांस्य पदक हासिल किया। पुरुष 50 मीटर बैकस्ट्रोक में असम के निबिर निलिम क्रो ने स्वर्ण, कर्नाटक के धोनिश ने रजत और ओडिशा के राजेश सोरेन ने कांस्य पदक जीता। महिला 50 मीटर बैकस्ट्रोक में ओडिशा की अंजलि मुंडा ने स्वर्ण पदक हासिल किया, जबकि छत्तीसगढ़ की अनुष्का भगत ने रजत और कर्नाटक की मेघांजली ने कांस्य पदक अपने नाम किया। रिले स्पर्धाओं में पुरुष 4Û100 मीटर मेडले में कर्नाटक ने स्वर्ण, असम ने रजत और त्रिपुरा ने कांस्य पदक जीता, वहीं महिला 4Û100 मीटर मेडले में ओडिशा ने स्वर्ण, त्रिपुरा ने रजत और गुजरात ने कांस्य पदक हासिल किया।

खेलो इंडिया खेलो ट्राइबल प्रतियोगिता 2026 में अब तक छत्तीसगढ़ ने कुल 8 पदक 1 स्वर्ण, 4 रजत और 3 कांस्य अपने नाम किए हैं और इसी के साथ राज्य पदक तालिका में छठे स्थान पर बना हुआ है। प्रतियोगिता में कर्नाटक और ओडिशा का दबदबा देखने को मिला, जबकि छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों ने भी शानदार प्रदर्शन कर भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत दिए हैं।


खेल सुविधाओं का विस्तार युवाओं को नई दिशा और अवसर देता है- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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मुख्यमंत्री ने जशपुर में मल्टीपरपज इंडोर बास्केटबॉल स्टेडियम का किया शुभारंभ : खिलाड़ी बास्केटबॉल शतरंज कैरम और टेबल टेनिस खेल का करेंगे अभ्यास

3 करोड़ 52 लाख की लागत से तैयार किया गया स्टेडियम

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज जशपुर में 3 करोड़ 52 लाख रुपए की लागत से निर्मित मल्टीपरपज इंडोर बास्केटबॉल स्टेडियम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि खेल अधोसंरचना का सुदृढ़ीकरण युवाओं को अपनी प्रतिभा निखारने के बेहतर अवसर प्रदान करता है और उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है।

मुख्यमंत्री साय ने स्टेडियम का अवलोकन किया और वहां उपस्थित खिलाड़ियों के साथ खेल का आनंद भी लिया।उन्होंने खिलाड़ियों से संवाद कर उनका उत्साहवर्धन किया और कहा कि सरकार प्रदेश में खेल सुविधाओं के विस्तार के लिए निरंतर कार्य कर रही है, ताकि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को भी उचित मंच मिल सके।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि खेल केवल प्रतिस्पर्धा का माध्यम नहीं, बल्कि अनुशासन, टीमवर्क और आत्मविश्वास विकसित करने का सशक्त साधन है। राज्य सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के युवाओं को बेहतर खेल सुविधाएं उपलब्ध कराकर उन्हें नई ऊंचाइयों तक पहुंचने का अवसर दिया जाए।

मल्टीपरपज इंडोर बास्केटबॉल स्टेडियम में खिलाड़ियों को बास्केटबॉल के साथ-साथ शतरंज, कैरम और टेबल टेनिस जैसे खेलों का अभ्यास करने की आधुनिक सुविधा उपलब्ध होगी। यह स्टेडियम न केवल खेल गतिविधियों को बढ़ावा देगा, बल्कि जशपुर क्षेत्र में खेल प्रतिभाओं को विकसित करने का एक महत्वपूर्ण केंद्र भी बनेगा।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष रामप्रताप सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, नगर पालिका अध्यक्ष अरविन्द भगत, कृष्णा राय, नगर पालिका उपाध्यक्ष यश प्रताप सिंह जुदेव, जिला पंचायत अध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जुदेव, जनपद पंचायत अध्यक्ष गंगाराम भगत, विजय आदित्य सिंह जुदेव, सरगुजा कमिश्नर नरेन्द्र दुग्गा, आईजी दीपक कुमार झा, कलेक्टर रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक लाल उमेद सिंह, डीएफओ शशि कुमार, जिला पंचायत सीईओ अभिषेक कुमार, खिलाड़ी और कोच उपस्थित थे।

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026:-58 किग्रा महिला वेटलिफ्टिंग में अरुणाचल की अनाई वांग्सू ने जीता स्वर्ण

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रायपुर- रायपुर में आयोजित खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के अंतर्गत पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के खेल परिसर में आज सीनियर महिला वेटलिफ्टिंग (58 किलोग्राम भार वर्ग) प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। इस प्रतिस्पर्धा में देशभर की प्रतिभाशाली महिला खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन कर दर्शकों का मन मोह लिया।

प्रतियोगिता में अरुणाचल प्रदेश की अनाई वांग्सू (Anai Wangsu) ने बेहतरीन ताकत और तकनीक का प्रदर्शन करते हुए 169 किलोग्राम कुल वजन उठाकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उन्होंने स्नैच में 74 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 95 किलोग्राम उठाकर शीर्ष स्थान हासिल किया।

ओडिशा की मिना सांता (Mina Santa) ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए 165 किलोग्राम के कुल वजन के साथ रजत पदक जीता। वहीं ओडिशा की ही मीना सिंह (Mina Singh) ने 161 किलोग्राम वजन उठाकर कांस्य पदक पर कब्जा जमाया।

प्रतियोगिता में असम की मार्टिना मिली, तारा सोनवाल तथा आंध्र प्रदेश की जी. लेनिन एस प्रिया सहित अन्य खिलाड़ियों ने भी उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। सभी प्रतिभागियों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली, जहां हर सफल लिफ्ट पर दर्शकों की तालियां गूंज उठीं।

यह प्रतियोगिता न केवल महिला खिलाड़ियों की शक्ति और आत्मविश्वास का प्रतीक बनी, बल्कि आदिवासी क्षेत्रों की उभरती खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच भी प्रदान कर रही है। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के माध्यम से देश की बेटियां खेल के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छूने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रही हैं।

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के लिए खिलाड़ियों का छत्तीसगढ़ पहुंचना शुरू

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अरुणाचल के वेटलिफ्टरों का विमानतल पर रंगारंग स्वागत 

रायपुर- खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में भागीदारी के लिए खिलाड़ियों का छत्तीसगढ़ पहुंचना शुरू हो गया है। आज सवेरे अरुणाचल प्रदेश के वेटलिफ्टरों का 14 सदस्यीय दल रायपुर पहुंचा। इनमें 13 खिलाड़ी और एक सपोर्टिंग स्टॉफ शामिल है।

खिलाड़ियों के छत्तीसगढ़ आगमन पर रायपुर के स्वामी विवेकानंद विमानतल पर राऊत नाचा दल की रंगारंग प्रस्तुतियों के बीच खेल एवं युवा कल्याण विभाग तथा साई (SAI) के अधिकारियों ने गुलाब भेंटकर सभी खिलाड़ियों का हार्दिक स्वागत किया। 23 मार्च को कई राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के खिलाड़ी बड़ी संख्या में रायपुर पहुंचेंगे।

देश में पहली बार खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स का आयोजन छत्तीसगढ़ के तीन शहरों - रायपुर, अंबिकापुर और जगदलपुर में किया गया है। इसमें देशभर के करीब तीन हजार जनजातीय खिलाड़ी अपनी प्रतिभा दिखाएंगे। 25 मार्च से 3 अप्रैल तक छत्तीसगढ़वासियों को सात खेलों में रोमांचक मुकाबले देखने को मिलेंगे। इस दौरान पुरूष और महिला वर्गों में हॉकी, फुटबॉल, कुश्ती, एथलेटिक्स, तैराकी, तीरंदाजी और वेटलिफ्टिंग की प्रतियोगिताएं होंगी।


बस्तर ओलंपिक बना छत्तीसगढ़ की नई पहचान, प्रधानमंत्री मोदी ने सदन में किया उल्लेख

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नई दिल्ली/रायपुर- छत्तीसगढ़ का 'बस्तर ओलंपिक' अब राज्य की नई पहचान बन चुका है, जिसका उल्लेख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज संसद में किया। उन्होंने इसे नक्सलवाद के खिलाफ ऐतिहासिक कदम बताते हुए बस्तर के युवाओं की प्रतिभा को राष्ट्रीय मंच पर उभरने का प्रतीक कहा। 

 पीएम मोदी का सदन में उल्लेख 

राज्यसभा में अपने संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने कहा- "बस्तर ओलंपिक ने नक्सल प्रभावित क्षेत्र को खेलों की धरती बना दिया है। यह लाखों आदिवासी युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ रहा है।" उन्होंने बस्तर को "भय से भविष्य की ओर" बदलते क्षेत्र के रूप में चित्रित किया, जहां 3.91 लाख खिलाड़ियों ने भाग लिया। 




देखिए VIDEO : PM मोदी ने क्या कुछ कहा सदन में



बस्तर ओलंपिक की सफलता 

2025-26 सत्र में आयोजित इस मेगा इवेंट में एथलेटिक्स, कबड्डी, खो-खो समेत 11 खेल हुए।  गृह मंत्री अमित शाह ने पूर्व समापन में इसे "नक्सलवाद के अंतिम कील" कहा था, जो 2026 तक नक्सल मुक्त बस्तर का संकेत देता है।  अब सरगुजा ओलंपिक भी शुरू हो चुका है। राज्य सरकार की पहल 

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इसे युवा सशक्तिकरण का मॉडल बताया। बस्तर ओलंपिक ने 'खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स' की राष्ट्रीय मान्यता भी पाई।  यह आयोजन विकास, शांति और खेल को जोड़ते हुए छत्तीसगढ़ को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है।

डॉ. मनसुख मंडाविया ने छह प्रमुख खेल अवसंरचना परियोजनाओं की आधारशिला रखी और दो एथलीट सपोर्ट सुविधाओं का उद्घाटन किया

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माननीय खेल एवं युवा मामले मंत्री, डॉ. मनसुख मंडाविया ने आज वर्चुअल माध्यम से छह प्रमुख खेल अवसंरचना परियोजनाओं की आधारशिला रखी और दो एथलीट सपोर्ट सुविधाओं का उद्घाटन किया, जिनमें कुल निवेश ₹120 करोड़ शामिल है।

यह पहल भारत के खेल पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने और देशभर में विश्व-स्तरीय, एथलीट-केंद्रित अवसंरचना विकसित करने के लिए केंद्रीय सरकार की प्रतिबद्धता को पुनः प्रदर्शित करती है।

छह आधारशिला परियोजनाओं की कुल लागत ₹82 करोड़ है, जो खेलो इंडिया योजना के तहत और स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) के अतिरिक्त सहयोग से लागू की जा रही हैं।

ये परियोजनाएँ देशभर में भौगोलिक रूप से वितरित हैं, जिनमें उत्तर-पूर्व और पूर्वी क्षेत्र भी शामिल हैं, ताकि खेल अवसंरचना का संतुलित और समावेशी विकास सुनिश्चित किया जा सके।

इन परियोजनाओं में शामिल हैं:

  • बैंगलोर में सिंथेटिक हॉकी टर्फ का उन्नयन

  • पटियाला में बहुउद्देशीय हॉल का निर्माण

  • भोपाल, गुवाहाटी और जलपाईगुड़ी में सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक का निर्माण

  • भोपाल में बहुउद्देशीय जूडो हॉल का निर्माण

आधारशिला समारोह के साथ-साथ माननीय मंत्री ने NS NIS, पटियाला में दो पूर्ण हो चुकी एथलीट सपोर्ट सुविधाओं का उद्घाटन भी किया, जिनमें कुल निवेश ₹38 करोड़ है।

इसमें शामिल हैं:

  • सेंट्रलाइज्ड किचन और फूड कोर्ट-कम-डाइनिंग हॉल, जो एथलीट पोषण सेवाओं को मजबूत करेगा

  • अत्याधुनिक इंटीग्रेटेड स्पोर्ट्स साइंस सेंटर और कंडीशनिंग हॉल, जो एलीट एथलीटों के लिए वैज्ञानिक प्रशिक्षण, प्रदर्शन विश्लेषण, पुनर्वास और रिकवरी को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाएगा

माननीय मंत्री ने सभी संबंधित हितधारकों के प्रयासों की सराहना करते हुए और SAI की संपत्ति प्रबंधन जिम्मेदारी को रेखांकित करते हुए कहा:

“देशभर में कई खेल अवसंरचना परियोजनाएँ विकसित की जा रही हैं, लेकिन SAI के अधीन आने वाली सुविधाएँ हमारी सीधे जिम्मेदारी हैं। इन संपत्तियों का उचित रखरखाव, अधिकतम उपयोग और जहाँ संभव हो, व्यावसायिक रूप से लाभ उठाना आवश्यक है, ताकि सार्वजनिक निवेश दीर्घकालिक मूल्य पैदा करता रहे।”

डॉ. मंडाविया ने जवाबदेही और समयबद्धता पर बल देते हुए कहा कि इन अवसंरचना परियोजनाओं की लगातार निगरानी की जाएगी। उन्होंने बताया कि मासिक समीक्षा SAI स्तर पर और त्रैमासिक समीक्षा स्वयं उनके द्वारा की जाएगी, ताकि परियोजनाओं को तेज़ी से पूरा किया जा सके और बनाए गए ढांचे का एथलीटों के लाभ के लिए अधिकतम उपयोग सुनिश्चित हो।

खेल क्षेत्र की व्यापक नीतिगत रूपरेखा का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि केंद्रीय वित्त मंत्री द्वारा खेलो इंडिया मिशन की घोषणा की गई है, जिसमें भारत के खेल पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने और अवसंरचना विकास को बढ़ावा देने के प्रमुख पहलुओं को रेखांकित किया गया है।

डॉ. मंडाविया ने कहा:

“हमें माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए सामूहिक रूप से कार्य करना चाहिए, जिसमें 2036 तक भारत को शीर्ष 10 खेल राष्ट्रों में और स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने तक शीर्ष 5 में स्थान दिलाना शामिल है।”

उन्होंने यह भी बताया कि खेल सामग्री निर्माण के लिए ₹500 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जो न केवल घरेलू निर्माण क्षमता को मजबूत करेगा, बल्कि आत्मनिर्भर और वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी खेल पारिस्थितिकी तंत्र के विकास में भी मदद करेगा।

डॉ. मंडाविया ने खेल के बदलते स्वरूप पर जोर देते हुए कहा:

“आज खेल एक पेशा बन चुका है। इसलिए प्रतिभा की पहचान और पोषण प्रणाली को मजबूत करना आवश्यक है। सरकार को एक कदम आगे रहकर ऐसे अवसर और प्रणाली बनानी होगी, जो युवा प्रतिभाओं को ग्रासरूट स्तर से एलीट स्तर तक विकसित होने का अवसर दें।”

उन्होंने आगे कहा कि खेल अवसंरचना विकास से पूरे देश के एथलीटों को प्रेरणा मिलेगी, भारत के हाई-परफॉर्मेंस स्पोर्ट्स ईकोसिस्टम को मजबूत करने में मदद मिलेगी और राष्ट्र के दीर्घकालिक खेल लक्ष्यों में महत्वपूर्ण योगदान होगा।



उपराष्ट्रपति ने आगरा में तृतीय संसद खेल महोत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में सहभागिता की

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भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक शहर आगरा में आयोजित तृतीय संसद खेल महोत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में सहभागिता की। इस आयोजन में युवा खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली, जो जमीनी स्तर पर खेल संस्कृति के बढ़ते विस्तार को दर्शाती है।

सभा को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने संसद खेल महोत्सव का हिस्सा बनकर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने खेलों से अपने व्यक्तिगत जुड़ाव का उल्लेख करते हुए बताया कि वे स्कूल और कॉलेज के दिनों में सक्रिय खिलाड़ी रहे हैं। वे टेबल टेनिस में कॉलेज चैंपियन रहे, लंबी दूरी की दौड़ में भाग लिया तथा क्रिकेट और वॉलीबॉल जैसे खेलों का भी आनंद लिया। उन्होंने कहा कि खेलों से प्राप्त शारीरिक फिटनेस और मानसिक दृढ़ता ने उन्हें कठिन पदयात्राओं और लगभग 19,000 किलोमीटर की रथयात्रा जैसे अभियानों को सफलतापूर्वक पूरा करने में मदद की।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत की प्राचीन परंपरा में मन और शरीर के संतुलन पर हमेशा जोर दिया गया है। उन्होंने खेलों को केवल प्रतिस्पर्धा तक सीमित न मानते हुए, उन्हें चरित्र निर्माण का सशक्त माध्यम बताया, जो अनुशासन, धैर्य, टीम भावना और नियमों के सम्मान जैसे गुणों को विकसित करता है—जो व्यक्तिगत विकास और राष्ट्र निर्माण के लिए आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि संसद खेल महोत्सव जैसे आयोजन जमीनी स्तर पर इन मूल्यों के पोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

आयोजकों की सराहना करते हुए राधाकृष्णन ने कहा कि महानगरों से बाहर खेलों को बढ़ावा देना अत्यंत सराहनीय पहल है। उन्होंने पिछले ग्यारह वर्षों में भारत के खेल पारिस्थितिकी तंत्र में आए संरचनात्मक परिवर्तन का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में खेलो इंडिया, फिट इंडिया मूवमेंट और स्वदेशी खेलों को प्रोत्साहन जैसी पहलें राष्ट्रीय विकास के समग्र दृष्टिकोण को दर्शाती हैं।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि हाल के वर्षों में भारत की खेल उपलब्धियों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उन्होंने महिलाओं की खेलों में भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे विशेष प्रयासों का भी उल्लेख किया, जिनमें ASMITA महिला लीग जैसी पहलें शामिल हैं।

युवाओं में नशे की समस्या पर चिंता व्यक्त करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि खेल, नशा मुक्त भारत के निर्माण के सबसे प्रभावी साधनों में से एक हैं। उन्होंने युवाओं से “नशे को ना और खेल को हां” कहने का आह्वान करते हुए कहा कि स्वस्थ और सक्रिय युवा ही सशक्त राष्ट्र की नींव हैं।

माता-पिता और शिक्षकों से अपील करते हुए उन्होंने बच्चों और युवाओं को खेलों के लिए प्रोत्साहित करने को चरित्र निर्माण और मानसिक स्वास्थ्य में निवेश बताया तथा ऐसी संतुलित शिक्षा प्रणाली की वकालत की जिसमें शिक्षा और खेल—दोनों को समान महत्व दिया जाए।

उल्लेखनीय है कि संसद खेल महोत्सव का आयोजन आगरा में 21 से 25 दिसंबर तक किया जा रहा है, जिसमें पांच दिनों के दौरान 33 से अधिक टीम और व्यक्तिगत खेल प्रतियोगिताओं में हजारों नागरिक भाग ले रहे हैं।

इस अवसर पर केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज राज्य मंत्री एवं आगरा से सांसद प्रो. एस. पी. सिंह बघेल, उत्तर प्रदेश सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।


जशपुर में बनेगा अत्याधुनिक तीरंदाजी अकादमी

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की बड़ी सौगात 20.53 करोड़ की मिली स्वीकृति

रायपुर- अत्याधुनिक तीरंदाजी अकादमी का मतलब ऐसी अकादमी से है जहाँ खिलाड़ियों को विश्व स्तरीय प्रशिक्षण, आधुनिक उपकरण और बेहतरीन सुविधाएं (जैसे हॉस्टल, इनडोर/आउटडोर रेंज) मिलती हैं, ताकि वे राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अच्छा प्रदर्शन कर सकें। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में खेल सुविधाओं के विस्तार की दिशा में जशपुर जिले को एक और बड़ी सौगात मिली है। जिले के बगीचा विकासखंड के पंडरा पाठ में अत्याधुनिक तीरंदाजी अकादमी (आर्चरी सेंटर) के निर्माण के लिए स्वीकृति मिल गई है।इस महत्वाकांक्षी परियोजना के निर्माण हेतु एनटीपीसी लिमिटेड द्वारा सीएसआर फंड से 20.53 करोड़ रुपए की स्वीकृति प्रदान की गई है।

युवा तीरंदाजों के लिए एक उत्कृष्ट प्रशिक्षण केंद्र बनेगा

नई तीरंदाजी अकादमी बनने से जिले के ग्रामीण और आदिवासी युवाओं को अंतर्राष्ट्रीय स्तर की खेल सुविधाएँ मिलेंगी। यह पहल आने वाले समय में जशपुर को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय तीरंदाजी प्रतिभाओं का हब बनाने में निर्णायक साबित होगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की खेल प्रतिभाओं को निखारने और उन्हें विश्व पटल तक पहुँचाने की प्रतिबद्धता का यह एक और बड़ा उदाहरण है। अकादमी के बनने से जशपुर न केवल खेल के क्षेत्र में एक नई पहचान बनाएगा, बल्कि यह देश के युवा तीरंदाजों के लिए एक उत्कृष्ट प्रशिक्षण केंद्र के रूप में उभरेगा। यह पहल खेलों के विकास और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तैयार करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा हैं। 

वित्तीय सहयोग एनटीपीसी के सामाजिक उत्तरदायित्व विभाग से 

तीरंदाजी अकादमी के निर्माण में एनटीपीसी लिमिटेड अपनी कॉर्पाेरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) योजना के अंतर्गत वित्तीय सहयोग प्रदान करेगा। यहां आउटडोर और वातानुकूलित इनडोर तीरंदाजी रेंज, हाई परफॉर्मेंस ट्रेनिंग सेंटर, छात्रावास जैसे निर्माण कार्य प्रस्तावित हैं।जशपुर के युवाओं में इस घोषणा को लेकर उत्साह का माहौल है और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का हृदय से आभार व्यक्त किया है।

राउरकेला में 4th राष्ट्रीय EMRS स्पोर्ट्स मीट 2025 का भव्य समापन, तेलंगाना ने जीता ओवरऑल चैम्पियनशिप

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राउरकेला- बिरसा मुंडा एथलेटिक्स स्टेडियम में आज 4th राष्ट्रीय EMRS खेल प्रतियोगिता 2025 का भव्य समापन हुआ। यह आयोजन पूरे देश में मनाए जा रहे भगवान बिरसा मुंडा जनजातीय गौरव दिवस के साथ खास तौर पर मेल खाता रहा। कार्यक्रम में भगवान बिरसा मुंडा के अदम्य साहस और बलिदान को नमन करते हुए भारत के जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम की गौरवशाली विरासत का उत्सव मनाया गया।

यह खेल महोत्सव ओडिशा मॉडल ट्राइबल एजुकेशन सोसाइटी (OMTES) द्वारा, ST & SC विकास, अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग, ओडिशा सरकार के अंतर्गत आयोजित किया गया। आयोजन का संचालन नेशनल एजुकेशन सोसाइटी फॉर ट्राइबल स्टूडेंट्स (NESTS), जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा किया गया।

कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख अतिथि

  • मोहन् चरण माझी, माननीय मुख्यमंत्री, ओडिशा (मुख्य अतिथि)

  • जुअल ओराम, माननीय केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री (विशिष्ट अतिथि)

  • अजीत कुमार श्रीवास्तव, IRAS, आयुक्त, NESTS

  •  बी. परमेश्वरन, IAS, सचिव, ST & SC विकास विभाग, ओडिशा

  • डॉ. शुभंकर मोहापात्र, IAS, कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट, सुंदरगढ़

  • दूती चंद, अंतरराष्ट्रीय धाविका

  • सुंदरगढ़ क्षेत्र के माननीय विधायक एवं अन्य जनप्रतिनिधि

आयुक्त श्रीवास्तव ने सभी अतिथियों का स्वागत कर खेल प्रतियोगिता की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की और EMRS छात्रों के उत्कृष्ट प्रदर्शन व जनजातीय समुदायों में बढ़ती खेल संस्कृति की सराहना की।

परिणाम सारांश

ओवरऑल स्पोर्ट्स चैम्पियन

    • रैंक
    • राज्य
    •  स्वर्ण 
    • रजत
    •  कांस्य
    •  कुल
    •  अंक
    • 1
    • तेलंगाना        
    •  88
    •  66
    •    76
    • 230
    •  714
    • 2
    • छत्तीसगढ़
    •  55
    •  43
    •    64
    • 162
    •  468
    • 3
    • मध्य प्रदेश
    •  40
    •  49
    •    62
    • 151
    •  409

शीर्ष 3 – व्यक्तिगत स्पर्धाएँ

  • रैंक
  • राज्य
  • स्वर्ण
  • रजत
  • कांस्य
  • कुल
  • अंक
  • 1
  • तेलंगाना
  • 82
  • 65
  • 74
  • 221
  • 679
  • 2
  • छत्तीसगढ़
  • 54
  • 43
  • 62
  • 159
  • 461
  • 3
  • मध्य प्रदेश
  • 40
  • 47
  • 61
  • 148
  • 402

शीर्ष 3 – टीम इवेंट्स

  • रैंक
  • राज्य
  • स्वर्ण
  • रजत
  • कांस्य
  • कुल
  • अंक
  • 1
  • तेलंगाना
  • 6
  • 1
  • 2
  • 9
  • 35
  • 2
  • ओडिशा
  • 2
  • 5
  • 1
  • 8
  • 26
  • 3
  • आंध्र प्रदेश
  • 1
  • 2
  • 2
  • 5
  • 13

तेलंगाना ने 230 पदकों और 714 अंकों के साथ ओवरऑल चैम्पियनशिप जीती।

पीएम मोदी के खेल एवं जनजातीय सशक्तिकरण के विज़न की दिशा में बड़ा कदम

यह EMRS खेल महोत्सव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विज़न को आगे बढ़ाता है:

  • खेलो इंडिया – "खेलो, बढ़ो, प्रगति करो"

  • ग्रामीण एवं जनजातीय क्षेत्रों में खेल प्रतिभा की खोज

  • EMRS छात्रों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुँचाना

  • फिटनेस, नेतृत्व, टीमवर्क सुदृढ़ करना

  • विकसित भारत के निर्माण में खेलों की भूमिका को मजबूत करना

NESTS और EMRS संस्थान जनजातीय खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय उत्कृष्टता तक ले जाने के मार्ग तैयार कर रहे हैं।

सांस्कृतिक एवं औपचारिक कार्यक्रम की झलकियाँ

समापन समारोह में शामिल थे:

  • छात्रों द्वारा अतिथियों का पारंपरिक स्वागत

  • दीप प्रज्वलन, वंदे मातरम और वेव मार्च

  • ओडिशी एवं धीमसा जैसे सांस्कृतिक नृत्य

  • पदक एवं ट्रॉफी वितरण

  • अद्भुत आतिशबाज़ी

  • मुख्य अतिथि एवं दूती चंद द्वारा मशाल का विसर्जन और EMRS ध्वज अवतरण

कार्यक्रम का समापन कलेक्टर डॉ. शुभंकर मोहापात्र द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।


“संसद खेल महोत्सव 2025 – पूर्वी दिल्ली” का हुआ भव्य शुभारंभ: केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने युवाओं में खेल भावना और फिटनेस के महत्व पर दिया जोर

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पूर्वी विनोद नगर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में आज “संसद खेल महोत्सव 2025 – पूर्वी दिल्ली” का शुभारंभ हुआ। यह महोत्सव स्थानीय खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देने और फिटनेस को बढ़ावा देने के लिए एक प्रमुख पहल है। कार्यक्रम में कॉर्पोरेट कार्य, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उनके साथ पटपड़गंज के विधायक रविंदर सिंह नेगी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए।

अपने संबोधन में हर्ष मल्होत्रा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के ‘विकसित भारत’ के दृष्टिकोण को दोहराते हुए कहा कि जमीनी स्तर पर एक मजबूत खेल संस्कृति का निर्माण आवश्यक है। उन्होंने कहा कि युवाओं की जोशपूर्ण भागीदारी देश में खेलों के प्रति बढ़ती रुचि और उनकी असीम ऊर्जा को दर्शाती है।

मंत्री महोदय ने कहा कि “संसद खेल महोत्सव” का उद्देश्य केवल खेल और फिटनेस को बढ़ावा देना नहीं है, बल्कि वास्तविक प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें आगे बढ़ाने का भी है। उन्होंने खेलों के पाँच ‘S’ — Speed (गति), Stamina (सहनशक्ति), Skill (कौशल), Strength (बल) और Spirit (आत्मा) का उल्लेख करते हुए कहा कि इनमें Spirit सबसे महत्वपूर्ण है।

हर्ष मल्होत्रा ने “खेलो भारत नीति 2025” का उल्लेख करते हुए बताया कि यह नीति देश के खेल परिदृश्य को नया रूप देने और नागरिकों को खेलों के माध्यम से सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि खेलों को शिक्षा और संस्कृति के समान महत्व दिया जाना चाहिए, क्योंकि यही भारत के भविष्य के खेल चैंपियनों को तैयार करेंगे।

इस संसद खेल महोत्सव में एथलेटिक्स, कबड्डी, खो-खो, वॉलीबॉल, कुश्ती, फुटबॉल सहित 11 प्रतियोगिताएँ आयोजित की जाएंगी, जिनमें विभिन्न आयु वर्ग के लड़के और लड़कियाँ भाग लेंगे।

हर्ष मल्होत्रा ने बताया कि उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भागीदारी के अवसर प्रदान किए जाएंगे।

कार्यक्रम के अंत में मंत्री महोदय ने स्कूलों, कॉलेजों, खेल क्लबों और स्थानीय खिलाड़ियों से अधिकतम भागीदारी की अपील की ताकि यह महोत्सव एक भव्य सफलता बन सके।

भारतीय सेना ने नई दिल्ली में ‘आर्मी स्पोर्ट्स कॉन्क्लेव 2025’ का आयोजन किया, ओलंपिक मिशन 2036 के विज़न को साकार करने की दिशा में बड़ा कदम

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भारतीय सेना ने आज नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में ‘आर्मी स्पोर्ट्स कॉन्क्लेव 2025’ का आयोजन किया। यह आयोजन भारत की खेल यात्रा के एक निर्णायक क्षण पर आयोजित हुआ, जिसने ‘ओलंपिक मिशन 2036’ के प्रति सेना की प्रतिबद्धता और राष्ट्र के खेल विज़न में उसके योगदान को पुनः स्थापित किया।

कार्यक्रम की शुरुआत लेफ्टिनेंट जनरल अजय रामदेव, महानिदेशक (इंटीग्रेटेड ट्रेनिंग) के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने कहा कि “आर्मी स्पोर्ट्स कॉन्क्लेव 2025 एक ऐसा मंच है जहां उद्देश्य और जुनून मिलते हैं,” जो भारत की खेल महत्वाकांक्षाओं को नई दिशा देने का कार्य कर रहा है। उन्होंने मिशन ओलंपिक विंग और पैरा-एथलीट्स के प्रयासों की सराहना की और वैज्ञानिक, डेटा-आधारित तथा मानसिक रूप से सशक्त प्रशिक्षण प्रणाली पर बल दिया।

कार्यक्रम में हरि रंजन राव, सचिव (खेल) ने मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना ने विश्व स्तरीय खिलाड़ियों को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और पैरा व एडवेंचर स्पोर्ट्स को राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक बनाया है। उन्होंने ‘टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम’, ‘खेलो इंडिया सेंटर’ और खेल विज्ञान एकीकरण जैसी सरकारी पहलों का उल्लेख करते हुए सभी हितधारकों के बीच तालमेल की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि भारत 2036 ओलंपिक मिशन के लक्ष्य को वैज्ञानिक दृष्टिकोण और दीर्घकालिक योजना के माध्यम से प्राप्त कर सके।

लेफ्टिनेंट जनरल राकेश कपूर, डिप्टी चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (इंफॉर्मेशन सिस्टम्स एंड ट्रेनिंग) ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय सेना और खेलों के बीच संबंध अनुशासन, फिटनेस और टीमवर्क पर आधारित हैं। उन्होंने सेना की खेल पहलों और वैज्ञानिक प्रशिक्षण पर केंद्रित दृष्टिकोण की चर्चा की और सेना, स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI), निजी क्षेत्र और अकादमिक संस्थानों के बीच समन्वय की आवश्यकता बताई।

कॉन्क्लेव दो मुख्य विषयों पर केंद्रित था — ‘इंस्टिट्यूशनल सिनर्जी’ और ‘एथलीट 360’, जिसमें राष्ट्रीय खेल नीतियों, संस्थागत ढांचे और तकनीकी नवाचारों के माध्यम से सतत ओलंपिक सफलता सुनिश्चित करने पर विचार-विमर्श हुआ।

एक विशेष ‘फायर साइड चैट’ सत्र में वरिष्ठ अधिकारियों, खिलाड़ियों और खेल प्रशासकों ने भारत के ओलंपिक लक्ष्यों की दिशा में रणनीतिक संवाद किया। इसमें सशस्त्र बलों, खेल प्राधिकरणों और निजी क्षेत्र की संयुक्त भूमिका पर बल दिया गया।

कॉन्क्लेव के दौरान तीन महान खिलाड़ियों को जनरल उपेन्द्र द्विवेदी, थल सेनाध्यक्ष द्वारा ‘आर्मी स्पोर्ट्स लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया —

  • कर्नल बलबीर सिंह कुल्लर (सेवानिवृत्त) – ओलंपिक कांस्य पदक विजेता, हॉकी (1968)
  • मुरलीकांत पेटकर – पैरालंपिक स्वर्ण पदक विजेता (1972)
  • हॉनरी कैप्टन विजय कुमार शर्मा – ओलंपिक रजत पदक विजेता, शूटिंग (2012)

यह सम्मान समारोह साउथ ब्लॉक में आयोजित किया गया, जहां इन खिलाड़ियों की वीरता, समर्पण और उत्कृष्टता का उत्सव मनाया गया — जो भारतीय सेना के आदर्श वाक्य “सेवा परमो धर्मः” (Service Before Self) की सच्ची भावना को दर्शाते हैं।

कॉन्क्लेव ने ‘आर्मी रोडमैप 2032’, ‘नेशनल स्पोर्ट्स डेवलपमेंट बिल’ और ‘खेल नीति 2025’ के अनुरूप सेना की दिशा को भी रेखांकित किया।

कार्यक्रम का समापन भारत को 2036 तक एक वैश्विक खेल महाशक्ति के रूप में स्थापित करने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।

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