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प्रधानमंत्री ने असम को दी बड़ी सौगात: काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर का भूमि पूजन, विकास और संरक्षण का अद्भुत संगम

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज असम के कालियाबोर में लगभग ₹6,950 करोड़ की लागत से बनने वाले काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना (एनएच-715 के कालियाबोर–नुमालीगढ़ खंड के 4-लेनिंग कार्य) का भूमि पूजन किया। इस अवसर पर विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने लोगों के स्नेह और आशीर्वाद के लिए आभार व्यक्त किया तथा कहा कि काजीरंगा की यात्रा हमेशा उन्हें विशेष आनंद और आत्मीयता से भर देती है।

प्रधानमंत्री ने काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में अपने पूर्व प्रवास को याद करते हुए कहा कि यहां बिताया गया समय उनके जीवन के सबसे यादगार क्षणों में से एक रहा है। हाथी सफारी के दौरान उन्होंने काजीरंगा की प्राकृतिक सुंदरता को बहुत निकट से अनुभव किया था। उन्होंने असम को वीरों की धरती बताते हुए कहा कि यहां के लोग हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने हाल ही में गुवाहाटी में आयोजित बागुरुंबा द्वौ उत्सव का उल्लेख करते हुए कहा कि 10,000 से अधिक कलाकारों की ऊर्जा, खाम की लय और सिफुंग की मधुर ध्वनि ने पूरे देश को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने बोडो समाज की बेटियों सहित सभी कलाकारों को इस ऐतिहासिक प्रस्तुति के लिए बधाई दी और सोशल मीडिया व मीडिया के योगदान की भी सराहना की।

विकास भी, विरासत भी का सशक्त उदाहरण

प्रधानमंत्री ने कहा कि असम में लगातार हो रहे विकास कार्य सरकार के “विकास भी, विरासत भी” के संकल्प को सशक्त करते हैं। उन्होंने हाल ही में गुवाहाटी एयरपोर्ट के नए टर्मिनल और नामरूप में अमोनिया-यूरिया संयंत्र की आधारशिला का भी उल्लेख किया।

कालियाबोर के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह वही भूमि है जहां से वीर योद्धा लाचित बोरफुकन ने मुगलों के विरुद्ध रणनीति बनाई थी। आज वही कालियाबोर आधुनिक कनेक्टिविटी और विकास का केंद्र बन रहा है।

काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर: पर्यावरण और प्रगति का संतुलन

प्रधानमंत्री ने बताया कि 86 किलोमीटर लंबी इस परियोजना में 35 किलोमीटर का एलिवेटेड वाइल्डलाइफ कॉरिडोर शामिल है, जिससे वाहन ऊपर से गुजरेंगे और नीचे वन्यजीवों की निर्बाध आवाजाही बनी रहेगी। यह परियोजना गैंडों, हाथियों और बाघों के पारंपरिक मार्गों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष कम होगा, सड़क सुरक्षा बढ़ेगी और यात्रा समय घटेगा।

यह परियोजना नागांव, कार्बी आंगलोंग और गोलाघाट जिलों से होकर गुजरेगी तथा अपर असम, विशेषकर डिब्रूगढ़ और तिनसुकिया की कनेक्टिविटी को मजबूती देगी। जाखलबंधा और बोकाखाट में बाइपास निर्माण से शहरी यातायात सुगम होगा और लोगों के जीवन की गुणवत्ता बेहतर होगी।

रेल कनेक्टिविटी को नई गति

कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने दो नई अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को हरी झंडी दिखाई—गुवाहाटी (कामाख्या)–रोहतक और डिब्रूगढ़–लखनऊ (गोमती नगर)। इसके साथ ही गुवाहाटी–कोलकाता वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की घोषणा भी की गई। इन सेवाओं से उत्तर पूर्व और उत्तर भारत के बीच संपर्क मजबूत होगा, व्यापार, शिक्षा और रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।

प्रधानमंत्री ने बताया कि पिछले वर्षों में असम के लिए रेल बजट में पांच गुना वृद्धि की गई है, जिससे नई रेल लाइनें, दोहरीकरण और विद्युतीकरण संभव हुआ है।

प्रकृति संरक्षण और पर्यटन को बढ़ावा

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार के प्रयासों से 2025 में एक भी गैंडे के अवैध शिकार की घटना नहीं हुई, जो असम की बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने “वन दुर्गा” जैसी पहलों और आधुनिक निगरानी व्यवस्था की सराहना की। साथ ही कहा कि प्रकृति के संरक्षण से पर्यटन बढ़ा है और स्थानीय युवाओं को होमस्टे, गाइड सेवा और हस्तशिल्प के माध्यम से रोजगार मिल रहा है।

निष्कर्ष

प्रधानमंत्री ने कहा कि असम और पूरा उत्तर पूर्व अब विकास की मुख्यधारा में मजबूती से जुड़ चुका है। काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर जैसी परियोजनाएं यह प्रमाण हैं कि भारत आज दुनिया को दिखा रहा है कि अर्थव्यवस्था और पारिस्थितिकी साथ-साथ आगे बढ़ सकती हैं। अंत में उन्होंने असमवासियों को इन ऐतिहासिक परियोजनाओं के लिए बधाई दी।

इस अवसर पर असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य, मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा, केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल, पबित्र मार्गेरिटा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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