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कर्मयोगी पत्रकार राजेश शर्मा: खुशबू बनकर हवाओं में बिखर गए

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महासमुंद- साप्ताहिक 'राष्ट्रीय अभियोजक' के संस्थापक-संपादक वरिष्ठ पत्रकार श्री राजेश शर्मा का आज शुक्रवार, 6 फरवरी को सुबह 5.13 बजे देहावसान हो गया। उन्होंने एम्स रायपुर में अंतिम सांसें ली। वे बीते कुछ दिनों से अस्वस्थ थे। वे अपने पीछे लौकिक दुनिया में दो पुत्रियों और एक पुत्र को रोते-बिलखते छोड़ कर अलविदा कह गए। 

कल 5 फरवरी को शाम 4.27 बजे प्रेस क्लब महासमुंद व्हाट्सएप ग्रुप में उन्होंने अंतिम चार लाइन लिखी-

 " कौन कहता है कि जाऊँगा, 

         तो गुजर जाऊंगा। 

             मैं तो खुशबू हूँ, 

               हवाओं में बिखर जाऊँगा। "

फिर, 

उनकी अपील थी कि "तबियत बिगड़ती जा रही है। मेरे लिए ईश्वर से प्रार्थना करें।"

तब पता नहीं क्यों मुझे आभास सा हो गया कि एक 'कर्मयोगी कलमकार' हमसे विदाई के पूर्व संकेत दे रहे हैं। आत्मा पंक्षी उन्मुक्त गगन में उड़ने को तैयार है। अपनों का स्नेह उसे जकड़े रखना चाहता है। तभी तो अंतिम क्षणों में भी अपनों से ईश्वरीय प्रार्थना की अपेक्षा की जाती है। 

उनकी चार लाइन ने मन को झकझोर दिया। बहुत से साथियों ने पूर्ण स्वस्थ, शीघ्र स्वस्थ, यह दौर गुजर जाएगा कि दुआ, स्वस्थ और शतायु होने की प्रार्थना,  स्वस्थ होकर घर आने, ईश्वर की कृपा बनी रहने, पूरी तरह ठीक होने की शक्ति, बाबा महाकाल की कृपा जैसी प्रार्थनाएं की। बहन उत्तरा विदानी ने अधिकार जताया। एक बेटी का अधिकार- 

"आपका स्वस्थ होकर लौटना निहायत जरूरी है काका साहब। मेरे पास शब्द नहीं है, बस एक प्रार्थना है भगवान जी से कि आपको जल्द से जल्द स्वास्थ्य लाभ मिले। आप कुछ और नहीं मेरी हिम्मत हैं... एकमात्र ऐसा हौसला... जो बेटियों को सिर्फ पिता से मिलती है।"

साक्षी दृष्टा भाव से किंकर्तव्यविमूढ़ सभी की भावनाओं को पढ़ता रहा।  मन से कुछ आवाज आयी। तब मैंने लिखा- 

"कौन कहता है कि आप थम जाएंगे,

आप तो विश्वास हो, 

हर मन में बस जाओगे।

देह की पीड़ा क्षणिक है, 

आत्मा अमर है,

कर्मपथ के यात्री हो, 

फिर उठ खड़े हो जाओगे।

ईश्वर आपके साथ है हर श्वास में,

हर वेदना में भी उसका आशीर्वाद छुपा है।

जो तप कर निखरता है, 

वही तेजस्वी होता है,

यह शरीर नहीं,

आत्मबल ही सबसे बड़ा सहारा है।

परमात्मा से प्रार्थना है —

आपको आरोग्य, धैर्य और शक्ति प्रदान करें।

आपके अच्छे कर्मों का फल

शीघ्र स्वस्थ होकर

फिर से जीवन में खुशबू बनकर

बिखरने का वरदान दें।

ईश्वर की कृपा से

 यह समय भी बीत जाएगा ,

और आप फिर से

 कर्म और साहस के साथ पत्रकारिता

जीवन की धारा में

और भी मजबूत होकर लौट आएंगे।

" देह तो माध्यम मात्र है, 

आत्मा अजर-अमर-अविनाशी है।"

यह लिखते हुए मन रो रहा था। उनके साथ बिताए पलों को याद कर रहा था। ऐसा लग रहा था कि बस....

अब साथ छूटने ही वाला है। गीता ज्ञान की तरह सहज ही यह निकल पड़ा- 

" एक न एक दिन हम सबको देह त्यागना है। 

देह अभिमान से ऊपर उठकर आत्मबल के साथ आपके जीवन यात्रा से प्रेरणा लेकर, ऐसे ही सभी को 'बिंदास' होकर जीना चाहिए। "

आज जब अलसुबह बहन उत्तरा विदानी का फोन आया। उन्होंने प्रेस क्लब ग्रुप में लिखा- 

" अभी पांच बजकर 13 मिनट पर डॉक्टर का जवाब आ गया है। साथियो, अब राजेश काका साहब भी आ जाएंगे। काका साहब को रायपुर से महासमुंद लाया जा रहा है। नीलम बहन का इरादा है कि 'राष्ट्रीय अभियोजक' कार्यालय में ही उनका पडाव हो अंतिम दर्शन के लिए।  क्योंकि वहीं उन्होंने अधिकांश समय व्यतीत किया है, उसके बाद ही (अनंत की यात्रा) यात्रा पर निकलेंगे। आप सभी सूचना जानें। "

फिर प्रेस क्लब अध्यक्ष रत्नेश सोनी जी की प्रेस क्लब ग्रुप में 'प्रथम श्रद्धांजलि' जो तस्वीर आप देख रहे हैं। 

एक राज की बात मैं आपको बता दूं कि राजेश शर्मा जी की अंतिम इच्छा थी कि उनके निधन की खबर मैं लिखूं। वे कई बार हंसी-ठिठोली में यह कहते थे। मैं नम आंखों से आज उनकी अंतिम इच्छा की पूर्ति कर रहा हूँ।

प्रेस क्लब के साथी भाई ललित मानिकपुरी ने सभी साथियों के लिए लिखा था। 'यदि हम पेड़ होते.. ..' उन्होंने राजेश शर्मा को 'बरगद' से नवाजा। इस तरह से वट वृक्ष का ढह जाना हमारे लिए अपूरणीय क्षति है। 

बस इतना ही कहूंगा कि- "कर्मयोगी कलमकार कभी मरा नहीं करते।"

राजेश कुमार शर्मा की आत्मा की यह आवाज-

" कौन कहता है कि जाऊँगा, 

         तो गुजर जाऊंगा। 

             मैं तो खुशबू हूँ, 

               हवाओं में बिखर जाऊँगा। "

चिर काल तक अविस्मरणीय रहेगा। भावपूर्ण श्रद्धासुमन। 

@ आनंदराम पत्रकारश्री.

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