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कर्नाटक में सरकारी भर्ती पर बड़ा सवाल: KPSC में पेपर लीक और कथित अनियमितताओं की जांच

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बेंगलुरु-कर्नाटक में सरकारी नौकरियों की भर्ती से जुड़ा विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। राज्य की Karnataka Public Service Commission (KPSC) की भर्ती प्रक्रियाओं में कथित पेपर लीक, उम्मीदवारों के साथ अनुचित व्यवहार, पैसों के लेन-देन और चयन प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोपों की जांच चल रही है।

The Karnataka Public Service Commission office in Bengaluru.

मामला इसलिए गंभीर माना जा रहा है क्योंकि KPSC राज्य में महत्वपूर्ण सरकारी पदों पर भर्ती की प्रक्रिया से जुड़ी संवैधानिक संस्था है। हालिया मामलों में 400 पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती, KPSC अध्यक्ष के परिवार से जुड़ी नियुक्ति और KAS भर्ती प्रक्रिया से संबंधित शिकायतें जांच के दायरे में हैं।

400 Veterinary Officer पदों के पेपर लीक का मामला

सबसे गंभीर आरोप 400 Veterinary Officer पदों की भर्ती परीक्षा से जुड़े हैं।

जांच एजेंसियों के अनुसार, कथित तौर पर कुछ उम्मीदवारों को परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया गया। Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक, 29 उम्मीदवारों पर सवाल उठे हैं और जांच में यह आरोप सामने आया है कि कुछ उम्मीदवारों ने बिचौलियों के माध्यम से प्रश्नपत्र हासिल किया था।

CID की जांच में यह भी आरोप सामने आया कि कुछ उम्मीदवारों से ₹40 लाख से ₹80 लाख तक रकम ली गई और कुछ उम्मीदवारों को परीक्षा से पहले होटल या रिसॉर्ट में ठहराया गया, जहां उन्हें कथित रूप से प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया गया। इन आरोपों की जांच जारी है।

पैसों के लेन-देन की भी जांच

मामले में सिर्फ पेपर लीक ही नहीं, बल्कि कथित रिश्वत और पैसों के लेन-देन की भी जांच की जा रही है।

CID ने अदालत में बताया कि कुछ उम्मीदवारों से कथित रूप से पैसे एक बिचौलिए के जरिए लिए गए। जांच में एक कथित money trail भी सामने आया है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, जांचकर्ताओं ने आरोप लगाया कि उम्मीदवारों से प्राप्त रकम का कुछ हिस्सा सोने और हीरे की करीब ₹52 लाख की ज्वेलरी खरीदने में इस्तेमाल हुआ। यह मामला एक वरिष्ठ अधिकारी से जुड़े व्यक्ति तक पैसों के कथित प्रवाह की जांच से जुड़ा है।

KPSC अध्यक्ष की बेटी की नियुक्ति पर भी सवाल

विवाद का दूसरा बड़ा हिस्सा KPSC के तत्कालीन अध्यक्ष शिवशंकरप्पा एस. साहूकर की बेटी की सरकारी नौकरी से जुड़ा है।

FIR के अनुसार, उनकी बेटी को राज्य के Industries and Commerce Department में Industrial Extension Officer के पद पर OBC कोटे के तहत चयनित किया गया था।

जांच एजेंसियों ने आरोप लगाया कि आवेदन के दौरान परिवार की आय से संबंधित प्रमाणपत्र में कथित रूप से गलत जानकारी दी गई। इस मामले में FIR दर्ज की गई और अदालत में मामला विचाराधीन है।

साहूकर को 25 अगस्त 2026 को निलंबित किया गया था। उनके खिलाफ चल रही जांच में पेपर लीक और नियुक्ति से जुड़े आरोप भी शामिल हैं।

पहले भी उठ चुके थे सवाल?

Indian Express की जांच के अनुसार, KPSC में कथित अनियमितताओं को लेकर 2019 से कई बार अधिकारियों द्वारा चिंता जताई गई थी।

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कुछ अधिकारियों ने भर्ती प्रक्रिया और संस्था के कामकाज को लेकर सवाल उठाए थे। इसके बावजूद विवादित मामलों की जांच और सुधारों को लेकर सवाल बने रहे।

हालांकि, इन दावों की अलग-अलग स्तर पर जांच और कानूनी प्रक्रिया चल रही है, इसलिए इन्हें अंतिम निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

KAS भर्ती भी जांच के दायरे में

जांच का दायरा केवल Veterinary Officer भर्ती तक सीमित नहीं है।

CID की जांच 384 Karnataka Administrative Service (KAS) Gazetted Probationers की भर्ती तक भी पहुंची है। इस परीक्षा की प्रारंभिक परीक्षा में दो लाख से अधिक उम्मीदवारों के शामिल होने की जानकारी दी गई है।

जांचकर्ताओं ने कथित तौर पर गिरफ्तार बिचौलियों से जुड़े दस्तावेजों में कुछ उम्मीदवारों की जानकारी मिलने के बाद इस भर्ती प्रक्रिया की भी जांच शुरू की है।

इसके अलावा KAS के एक उम्मीदवार को इंटरव्यू में कथित तौर पर फायदा पहुंचाने के आरोप की अलग जांच भी चल रही है।

हाईकोर्ट में भी मामला

इन मामलों पर कर्नाटक हाईकोर्ट में भी सुनवाई हुई है।

Veterinary Officer भर्ती से जुड़े मामले में अदालत के सामने शिकायत रखी गई कि यदि आरोप जांच में सही साबित होते हैं, तो इससे सरकारी नौकरियों में मेरिट आधारित चयन और भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर असर पड़ सकता है।

KPSC अध्यक्ष से जुड़े मामलों में भी अदालत ने अलग-अलग याचिकाओं और जमानत अर्जियों पर सुनवाई की है।

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज

मामले ने राजनीतिक विवाद का रूप भी ले लिया है।

विपक्षी नेताओं ने भर्ती प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार और राजनीतिक संरक्षण के आरोप लगाए हैं, जबकि राज्य सरकार की ओर से कहा गया है कि भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए जांच जारी है।

यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि राजनीतिक दलों द्वारा लगाए गए आरोप और जांच एजेंसियों के निष्कर्ष अलग-अलग चीजें हैं। किसी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी अदालत के अंतिम निर्णय से ही तय होगी।

मामला इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

सरकारी नौकरी की परीक्षा लाखों युवाओं के लिए रोजगार का महत्वपूर्ण रास्ता होती है।

अगर किसी भर्ती परीक्षा में पेपर लीक या पैसे के बदले चयन जैसे आरोप सही साबित होते हैं, तो इसका असर केवल कुछ उम्मीदवारों तक सीमित नहीं रहता। इससे:

  • उम्मीदवारों का भरोसा प्रभावित हो सकता है।

  • पूरी भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठ सकते हैं।

  • चयनित उम्मीदवारों की नियुक्तियों की दोबारा जांच की जरूरत पड़ सकती है।

  • परीक्षा प्रणाली में सुरक्षा और पारदर्शिता बढ़ाने की मांग हो सकती है।

अभी तक की स्थिति

KPSC से जुड़े मामलों में CID की जांच जारी है।

  • Veterinary Officer भर्ती में पेपर लीक के आरोपों की जांच

  •  कथित पैसों के लेन-देन और money trail की जांच

  •  KPSC अध्यक्ष की बेटी की नियुक्ति से जुड़ा मामला

  •  KAS भर्ती प्रक्रिया की भी जांच

  •  कई मामले कर्नाटक हाईकोर्ट के सामने

  •  KPSC के अधिकारियों और अन्य संबंधित लोगों से पूछताछ जारी

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ये आरोप और जांच के निष्कर्ष हैं; अंतिम कानूनी दोषसिद्धि अभी अलग विषय है।


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