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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सत्य साई ग्राम के सेवा मॉडल को बताया जनकल्याण का प्रेरक उदाहरण

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शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर हुई सार्थक चर्चा, छत्तीसगढ़ में सेवाओं के विस्तार पर दिया जोर

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज कर्नाटक के सत्य साई ग्राम, मुद्देनहल्ली का दौरा कर शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण एवं मानवीय मूल्यों पर आधारित समग्र सेवा मॉडल का अवलोकन किया। उन्होंने वन वर्ल्ड वन फैमिली मिशन के संस्थापक सद्गुरु मधुसूदन साई से भेंट कर छत्तीसगढ़ में जनकल्याणकारी सेवाओं के विस्तार, विशेष रूप से निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाओं, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण और मूल्य आधारित शिक्षा के क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ का आधार केवल आर्थिक प्रगति नहीं, बल्कि स्वस्थ, शिक्षित और संस्कारित समाज है। राज्य सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण को सुशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में रखते हुए अंतिम व्यक्ति तक गुणवत्तापूर्ण सेवाएं पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि समाजसेवी संस्थाओं के अनुभव, नवाचार और सेवा भावना से जनकल्याण के प्रयासों को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। श्री सत्य साई संजीवनी अस्पताल, रायपुर द्वारा पूर्णतः निःशुल्क बाल हृदय शल्य चिकित्सा (पीडियाट्रिक कार्डियक सर्जरी) के माध्यम से हजारों बच्चों को नया जीवन देने के कार्य की मुख्यमंत्री ने विशेष सराहना की। उन्होंने इसे मानवता और सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए अस्पताल के विस्तार, मदर एंड चाइल्ड हॉस्पिटल की स्थापना तथा भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं के व्यापक विस्तार की संभावनाओं पर चर्चा की।

मुख्यमंत्री साय मूल्य आधारित शिक्षा पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। सम्मेलन में विश्व के लगभग 25 देशों से आए 100 से अधिक शिक्षकों एवं शिक्षाविदों ने भाग लिया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आधुनिक शिक्षा केवल ज्ञान अर्जित करने का माध्यम नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, सेवा, करुणा, नैतिकता और सामाजिक उत्तरदायित्व का भी आधार होनी चाहिए। मूल्य आधारित शिक्षा ही संवेदनशील नागरिकों और सशक्त राष्ट्र का निर्माण करती है।

मुख्यमंत्री ने सत्य साई अन्नपूर्णा ट्रस्ट द्वारा संचालित साईश्योर न्यूट्रास्यूटिकल्स इकाई का भी अवलोकन किया। साईश्योर मल्टी-न्यूट्रिएंट हेल्थ मिक्स के माध्यम से देश के 25 राज्यों एवं 4 केंद्रशासित प्रदेशों में लगभग एक करोड़ बच्चों तक पोषण सहायता पहुंचाई जा रही है। मुख्यमंत्री ने इस पहल की सराहना करते हुए छत्तीसगढ़ के विद्यालयों एवं आंगनबाड़ी केंद्रों में ऐसे नवाचारों के माध्यम से बच्चों के पोषण स्तर को और बेहतर बनाने की संभावनाओं पर चर्चा की। छत्तीसगढ़ के लगभग 300 युवाओं को यहां नर्सिंग शिक्षा एवं प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने के साथ-साथ सेवा भाव से प्रेरित दक्ष स्वास्थ्य मानव संसाधन तैयार करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।

मुख्यमंत्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि छत्तीसगढ़ सरकार और वन वर्ल्ड वन फैमिली मिशन के बीच सहयोग से स्वास्थ्य, शिक्षा और पोषण के क्षेत्रों में नई संभावनाएं विकसित होंगी तथा समाज के गरीब, वंचित और जरूरतमंद वर्गों तक गुणवत्तापूर्ण सेवाओं का दायरा और अधिक व्यापक होगा। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसे सभी प्रयासों का स्वागत करती है, जो सेवा, संवेदना और सुशासन के माध्यम से जनजीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य करते हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की जनकल्याणकारी सोच और वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में सुकमा ने रचा नया कीर्तिमान

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आयुष्मान आरोग्य मंदिर उप स्वास्थ्य केंद्र सुकमा-01 को मिला राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन (एनक्वास) प्रमाणपत्र

जिले के 17 स्वास्थ्य केंद्र अब राष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों पर खरे

रायपुर-  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सशक्त नेतृत्व और वन एवं जलवायु परिवर्तन तथा सुकमा जिले के प्रभारी मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में सुदूर और नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में स्वास्थ्य सेवाओं में लगातार सुधार हो रहा है। शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से विकासखंड सुकमा के आयुष्मान आरोग्य मंदिर उप स्वास्थ्य केंद्र सुकमा-01 को राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (एनक्वास) प्रमाणपत्र प्राप्त हुआ है। इसके साथ ही जिले के 17 स्वास्थ्य केंद्र अब राष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाणपत्र हासिल कर चुके हैं।

93.04 प्रतिशत अंक के साथ हासिल की राष्ट्रीय उपलब्धि

कलेक्टर अमित कुमार के नेतृत्व में स्वास्थ्य केंद्र ने भारत सरकार के राष्ट्रीय मूल्यांकन में 93.04 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। यह उपलब्धि स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी मणीन्द्र कुर्रे, ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक रेणूका सूना तथा माड़वी हिड़मा सहित पूरी स्वास्थ्य टीम की मेहनत, समर्पण और बेहतर कार्यप्रणाली का परिणाम है।

कड़े मानकों पर खरा उतरने के बाद मिला एनक्वास प्रमाणपत्र

एनक्वास (National Quality Assurance Standards) प्रमाणपत्र भारत सरकार द्वारा केवल उन स्वास्थ्य संस्थानों को दिया जाता है, जो गुणवत्ता के सभी निर्धारित मानकों पर खरे उतरते हैं। इसमें मरीजों की संतुष्टि, स्वच्छता, सुरक्षित मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं, मानसिक स्वास्थ्य, संचारी एवं गैर-संचारी रोगों की देखभाल, प्रयोगशाला सेवाएं तथा स्वास्थ्य प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं का मूल्यांकन किया जाता है।

7,417 ग्रामीणों को मिल रही बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं

आयुष्मान आरोग्य मंदिर उप स्वास्थ्य केंद्र सुकमा-01 आधुनिक प्रसव कक्ष, सुसज्जित प्रयोगशाला और प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों से लैस है। यह केंद्र लगभग 7,417 ग्रामीणों को गुणवत्तापूर्ण, सुरक्षित और समयबद्ध स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रहा है।

शासकीय योजनाओं से बदल रही सुकमा की तस्वीर

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मंशा के अनुरूप अंतिम व्यक्ति तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने और प्रभारी मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में जिले में स्वास्थ्य अधोसंरचना को लगातार मजबूत किया जा रहा है। आयुष्मान भारत और अन्य स्वास्थ्य योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को भी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल रहा है।

अन्य जिलों के लिए बना प्रेरणादायक मॉडल

सुकमा की यह उपलब्धि बताती है कि मजबूत प्रशासनिक इच्छाशक्ति, जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और स्वास्थ्य कर्मियों की समर्पित सेवा से दूरस्थ एवं चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं। आज सुकमा का यह मॉडल प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के अन्य आकांक्षी जिलों के लिए भी प्रेरणा बन रहा है।

गुड गवर्नेंस कागजों पर नहीं, बल्कि जनता के जीवन में सकारात्मक बदलाव और अधिकारियों के काम-काज में दिखना चाहिए – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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मुख्यमंत्री साय ने ई-प्रगति पोर्टल का किया शुभारंभ

सुशासन एवं नवाचारों के लिए 5 विभाग एवं 5 जिलों को मिला मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार

रायपुर- गुड गवर्नेंस कागजों पर नहीं, बल्कि जनता के जीवन में सकारात्मक बदलाव और अधिकारियों के काम-काज में दिखना चाहिए। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी नवा रायपुर में आयोजित मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार 2025-26 कार्यक्रम को सम्बोधित करतेभुए यह बात कही।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय  ने सुशासन एवं अभिसरण विभाग द्वारा आयोजित मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार 2025-26 में  सुशासन एवं नवाचारों के लिए 5 विभागों एवं 5 जिलों को मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार से सम्मानित किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने ई-प्रगति पोर्टल का भी शुभारंभ किया, जिसके माध्यम से अब छत्तीसगढ़ के सभी विभागों के 25 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाले निर्माण कार्यों की निगरानी की जाएगी। इस पोर्टल के माध्यम से निर्माण की मंजूरी से लेकर बजट, मजदूरी, भुगतान, एमआईएस, स्ट्रक्चर लेवल सहित सभी पहलुओं की मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा मॉनिटरिंग की जाएगी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि गुड गवर्नेंस का उद्देश्य यह है कि समाज के अंतिम व्यक्ति को बुनियादी सेवाओं के लिए भटकना न पड़े। पंचायतों में शुरू किए गए अटल डिजिटल सेवा केंद्रों के माध्यम से ग्रामीणों को आधार, पेंशन, बैंकिंग और बिल भुगतान जैसी सुविधाएँ एक ही स्थान पर उपलब्ध हो रही हैं। हमारी सरकार ने तकनीकी नवाचारों के माध्यम से नागरिकों तक सुशासन की प्रभावी पहुँच सुनिश्चित करने के लिए अनेक पहल की हैं। इसी क्रम में आज ई-प्रगति पोर्टल का शुभारंभ किया गया है, जिसका उद्देश्य राज्य की वृहद परियोजनाओं एवं योजनाओं के क्रियान्वयन को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और समयबद्ध बनाना है। इस पोर्टल से योजनाओं की प्रगति का डेटा रियल-टाइम में उपलब्ध होगा। सभी विभागों, जिला प्रशासन तथा मुख्यमंत्री कार्यालय के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा। इससे राज्य में ई-गवर्नेंस को और मजबूती मिलेगी तथा नागरिकों को योजनाओं का लाभ समय पर और सहज रूप से प्राप्त हो सकेगा। उन्होंने सभी कलेक्टरों, सचिवों एवं संबंधित अधिकारियों से योजनाओं की प्रगति को नियमित रूप से अपडेट करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के एकात्म मानववाद, श्रद्धेय अटल जी की अंत्योदय की अवधारणा और यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व से हमने सुशासन को गहराई से समझा है। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमने देश का पहला सुशासन एवं अभिसरण विभाग बनाया है, जो सभी योजनाओं के समन्वय और प्रभावी क्रियान्वयन का केंद्र है। पिछले दो वर्षों में हमने 400 से अधिक नीतिगत सुधार किए, पुराने अनुपयोगी नियम-कानून समाप्त किए और कई में संशोधन किए। इन सुधारों से प्रदेशवासियों का जीवन सरल हुआ और प्रशासन अधिक कुशल बना। आज मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार के माध्यम से 5 जिलों और 5 विभागों के नवाचारी प्रयासों को सम्मानित किया गया है। इससे अच्छा कार्य करने वाले अधिकारी प्रोत्साहित होंगे। आगामी वर्ष से 8 अलग-अलग क्षेत्रों में यह पुरस्कार प्रदान किया जाएगा, जिनमें ई-गवर्नेंस, सेवा वितरण, ग्रामीण और शहरी विकास जैसे क्षेत्र शामिल होंगे। इससे स्पष्ट है कि छत्तीसगढ़ में नवाचार और सुशासन की एक सशक्त संस्कृति विकसित हो रही है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शासन में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए “पहल” और “प्रेरणा” योजनाएँ प्रारंभ की जा रही हैं। “पहल” से नए विचारों को सहयोग मिलेगा और “प्रेरणा” से सफल योजनाओं का विस्तार होगा। शीघ्र ही मुख्यमंत्री हेल्पलाइन भी प्रारंभ की जाएगी, जिससे शिकायत निवारण और जनभागीदारी मजबूत होगी। सेवाओं की उपलब्धता बेहतर बनाने के लिए प्रक्रियाओं का सरलीकरण किया जा रहा है और लोक सेवा गारंटी अधिनियम को LSG-2.0 के रूप में विकसित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बदलते दौर में तकनीक जीवनशैली का हिस्सा बन चुकी है। इसलिए हमने डिजिटल संसाधनों की शक्ति को पहचानते हुए तकनीक को सुशासन का प्रमुख हथियार बनाया है। सभी नागरिक सेवाओं को ऑनलाइन उपलब्ध कराना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। ई-ऑफिस ने सरकारी कामकाज में गति और पारदर्शिता दोनों सुनिश्चित की हैं। अब फाइलें हफ्तों-महीनों नहीं, बल्कि एक क्लिक पर आगे बढ़ती हैं। इससे कर्मचारियों और अधिकारियों की जवाबदेही भी तय हो रही है और भ्रष्टाचार की गुंजाइश कम हुई है। ई-ऑफिस मंत्रालय से प्रारंभ हुआ था और अब विभागाध्यक्ष कार्यालयों में भी लागू हो चुका है। आगामी कुछ महीनों में इसे सभी संभागों और जिलों में भी लागू किया जाएगा।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि मुख्य सचिव विकास शील द्वारा ई-ऑफिस में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को सम्मानित किया जाना एक सराहनीय पहल है, जिससे कार्यसंस्कृति में सकारात्मक बदलाव आ रहा है। बायोमेट्रिक उपस्थिति को भी चरणबद्ध तरीके से सभी कार्यालयों में लागू किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हुआ है, जिसके पीछे सुशासन सबसे बड़ा कारक है। डिजिटल भुगतान में भारत का विश्व में अग्रणी स्थान भी गुड गवर्नेंस का ही परिणाम है।

उन्होंने कहा कि खनिज परिवहन की परमिट व्यवस्था को ऑनलाइन किया गया है, जिससे भ्रष्टाचार पर रोक लगी है और विकास कार्यों के लिए संसाधनों की सुरक्षा हुई है। इसी तरह शासकीय खरीदी को जेम पोर्टल से जोड़ा गया है, जिससे पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा बढ़ी है। उन्होंने अधिकारियों को खरीदी प्रक्रियाओं में समयबद्धता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि रजिस्ट्री विभाग में की गई 10 क्रांतिकारी पहल से अब नागरिक घर बैठे ही रजिस्ट्री कर पा रहे हैं। नई औद्योगिक नीति के तहत पिछले वर्ष 7.83 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। सिंगल विंडो सिस्टम 2.0 के माध्यम से निवेशकों को तेजी से स्वीकृति और क्लियरेंस दिए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सुशासन तिहार के माध्यम से गांव-गांव जाकर 41 लाख आवेदनों का निराकरण किया गया। यह जनभागीदारी का सशक्त उदाहरण है।उन्होंने कहा कि सांसदों और विधायकों के पत्रों और आवेदनों का समय पर निराकरण होना चाहिए। अच्छे प्रशासन के लिए संवाद, समन्वय और फीडबैक आवश्यक हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कानून-व्यवस्था सुदृढ़ करने के साथ-साथ नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन आवश्यक है। सरकार के निर्णयों और उपलब्धियों का सही संचार भी उतना ही जरूरी है। 

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ अंजोर विजन के अंतर्गत 2030 तक के लक्ष्यों की समीक्षा कर प्रदेश को समृद्ध और विकसित राज्य बनाने का स्पष्ट रोडमैप तैयार किया गया है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य सचिव  विकास शील ने पुरस्कार प्रक्रिया में भाग लेने वाली सभी टीमों को बधाई दी। 

जिला श्रेणी के विजेता नवाचार

दंतेवाड़ा जिले की “ब्लॉकचेन आधारित भूमि अभिलेख डिजिटलीकरण” पहल एक प्रमुख उदाहरण के रूप में सामने आई। इस नवाचार के माध्यम से मैनुअल और कागजी प्रक्रियाओं को समाप्त कर ब्लॉकचेन आधारित छेड़छाड़-रोधी प्रणाली लागू की गई, जिससे भूमि अभिलेख प्राप्त करने का समय हफ्तों से घटाकर कुछ ही मिनटों में संभव हो सका। इस पहल से दस्तावेज़ी धोखाधड़ी पूरी तरह समाप्त हुई और सेवा प्रदाय में अभूतपूर्व तेजी आई, जिसने आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों में राजस्व प्रशासन के लिए एक नया मानक स्थापित किया।

जशपुर जिले की “निर्माण जशपुर” पहल ने यह दर्शाया कि एकीकृत डिजिटल मॉनिटरिंग किस प्रकार बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के क्रियान्वयन को प्रभावी बना सकती है। 16 विभागों की 7,300 से अधिक परियोजनाओं और 444 ग्राम पंचायतों को कवर करने वाली इस प्रणाली ने रियल-टाइम निगरानी, जियो-टैग्ड सत्यापन और GIS आधारित योजना को संभव बनाया, जिससे कार्यों की गुणवत्ता में सुधार हुआ और विलंब में उल्लेखनीय कमी आई।

मोहला–मानपुर–अंबागढ़ चौकी में लागू संवर्धित टेक-होम राशन (A-THR) नवाचार ने गंभीर कुपोषण जैसी चुनौती का प्रभावी समाधान प्रस्तुत किया। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के सहयोग से विकसित इस पोषण-घन आहार के माध्यम से गंभीर कुपोषित बच्चों में 77.5 प्रतिशत सुधार दर दर्ज की गई। यह पहल इस बात का उदाहरण है कि साक्ष्य-आधारित पोषण हस्तक्षेप बड़े पैमाने पर जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं।

गरियाबंद जिले की “हाथी ट्रैकिंग एवं अलर्ट ऐप” ने मानव–वन्यजीव संघर्ष को कम करने में तकनीक की भूमिका को सशक्त रूप से सामने रखा। AI आधारित ट्रैकिंग और रियल-टाइम अलर्ट व्यवस्था के माध्यम से मानव हताहतों की संख्या लगभग शून्य तक लाई गई, साथ ही फसल क्षति और मुआवजा बोझ में भी उल्लेखनीय कमी आई। राज्य के बाहर भी अपनाई जा चुकी यह पहल संघर्ष-संवेदनशील शासन का एक प्रभावी मॉडल बन चुकी है।

नारायणपुर जिले का “इंटिफाई इंटेलिजेंस टूल” आंतरिक सुरक्षा के क्षेत्र में डेटा एकीकरण की उपयोगिता को दर्शाता है। रियल-टाइम, जियो-स्पेशियल और पूर्वानुमान आधारित इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से 100 से अधिक नियोजित अभियानों का संचालन संभव हुआ, विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय बेहतर हुआ और वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में परिस्थितिजन्य जागरूकता को मजबूती मिली।

विभागीय श्रेणी के विजेता नवाचार

इसी तरह विभागीय श्रेणी में शिक्षा विभाग का “विद्या समीक्षा केंद्र (VSK)” डेटा-आधारित शिक्षा शासन का एक मजबूत स्तंभ बनकर उभरा। यह AI सक्षम प्लेटफॉर्म 56,000 से अधिक विद्यालयों, 2.83 लाख शिक्षकों और 57.5 लाख विद्यार्थियों की निगरानी करता है, जिससे ड्रॉपआउट की प्रारंभिक पहचान, संसाधनों का बेहतर उपयोग और साक्ष्य-आधारित निर्णय लेना संभव हो सका है।

वाणिज्य एवं उद्योग विभाग की “वन क्लिक सिंगल विंडो सिस्टम” ने व्यवसाय सुगमता सुधार के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है। 16 विभागों की 136 सेवाओं को एकीकृत करते हुए इस प्रणाली ने अनुमोदन, प्रोत्साहन, शिकायत निवारण और निरीक्षण प्रक्रियाओं को सरल बनाया, जिससे विलंब कम हुआ और पारदर्शिता के साथ निवेशकों का विश्वास बढ़ा।

वाणिज्य कर (आबकारी) विभाग की समग्र ई-गवर्नेंस सुधार पहल ने राजस्व संग्रह और अनुपालन व्यवस्था को सुदृढ़ किया।एंड-टू-एंड डिजिटलीकरण, ट्रैक एंड ट्रेस प्रणाली और रियल-टाइम डैशबोर्ड के माध्यम से विभाग ने ₹5,425 करोड़ का राजस्व अर्जित किया और पारदर्शिता तथा नियामक निगरानी के नए मानक स्थापित किए।

वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की “FDS 2.0 – ई-कुबेर डिजिटल भुगतान प्रणाली” ने मैनुअल चेक आधारित प्रक्रियाओं को समाप्त कर पूर्णतः कैशलेस, RBI एकीकृत भुगतान व्यवस्था लागू की। इसके माध्यम से ₹1,776 करोड़ से अधिक के 18 लाख लेन-देन पूर्ण हुए, जिससे दूरस्थ और नक्सल प्रभावित वन क्षेत्रों में भी समय पर मजदूरी भुगतान, आजीविका सुरक्षा और पारदर्शी फंड प्रवाह सुनिश्चित हुआ।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा मनरेगा अंतर्गत लागू QR कोड आधारित सूचना स्वप्रकटीकरण व्यवस्था ने नागरिक-केंद्रित शासन को नई मजबूती दी। QR कोड के माध्यम से ग्रामीणों को वास्तविक समय की योजना जानकारी उपलब्ध कराकर इस पहल ने मध्यस्थों पर निर्भरता कम की और 11,000 से अधिक ग्राम पंचायतों में पारदर्शिता को सुदृढ़ किया।

कार्यक्रम में स्वागत उद्बोधन सुशासन एवं अभिसरण विभाग के सचिव राहुल भगत ने दिया तथा धन्यवाद ज्ञापन संयुक्त सचिव मयंक अग्रवाल ने किया। इस अवसर पर डीजीपी अरुण देव गौतम, अपर मुख्य सचिव ऋचा शर्मा, एससीएस गृह मनोज पिंगुआ, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, प्रमुख सचिव निहारिका बारिक, सुशासन एवं अभिसरण विभाग के संचालक रजत बंसल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

इन सभी नवाचारों के माध्यम से यह स्पष्ट है कि छत्तीसगढ़ में शासन केवल योजनाओं के क्रियान्वयन तक सीमित नहीं है, बल्कि परिणामों, प्रभाव और नागरिक विश्वास पर केंद्रित एक नई प्रशासनिक संस्कृति विकसित हो रही है। मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार 2025–26 के अंतर्गत सम्मानित ये जिले और विभाग सुशासन, पारदर्शिता, तकनीकी नवाचार और जनकल्याण के नए मानक स्थापित कर रहे हैं। यह उपलब्धियाँ न केवल राज्य के प्रशासनिक तंत्र की क्षमता को दर्शाती हैं, बल्कि विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता और भविष्य के लिए स्पष्ट दृष्टि को भी सुदृढ़ करती हैं।

संतों की कृपा और जनता के विश्वास से ही संभव हुआ सुशासन का दीपोत्सव: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय लैलूंगा के भुईयांपानी में दीप महोत्सव कार्यक्रम में हुए शामिल

गुरुधाम में एक करोड़ रुपए की लागत से सर्वसुविधायुक्त भवन और महतारी सदन के लिए 29 लाख रुपए सहित कई घोषणाएं

रायपुर- दीपावली के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज रायगढ़ जिले के लैलूंगा तहसील के ग्राम भुईयांपानी पहुँचे। यहाँ उन्होंने गुरुधाम में आयोजित दीप महोत्सव कार्यक्रम में शामिल होकर अपने आराध्य संत गुरुदेव स्वामी धनपति पंडा जी एवं प्रेमशीला पंडा की प्रतिमाओं के समक्ष नमन कर प्रदेशवासियों के सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली की मंगलकामना की।

मुख्यमंत्री साय ने दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि यह दीपोत्सव हर घर में उजियारा और हर जीवन में सुख, समृद्धि, शांति एवं प्रेम का प्रकाश फैलाए। उन्होंने कहा कि गुरु का आशीर्वाद सदैव हम सब पर बना रहे। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने शिवमंदिर में जाकर शिवलिंग पर जलाभिषेक किया तथा हनुमान मंदिर एवं वटवृक्ष की पूजा-अर्चना भी की।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह संतों और प्रदेश की जनता का ही आशीर्वाद है कि एक किसान का बेटा मुख्यमंत्री बना है। उन्होंने बताया कि उनके कार्यकाल के 22 महीनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी योजनाओं को धरातल पर उतारना उनकी सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता रही है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के लोगों के विकास के लिए राज्य सरकार सुशासन, पारदर्शिता और विकास के संकल्प के साथ कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को दो वर्षों का बकाया बोनस प्रदान किया गया है। धान खरीदी की सीमा 21 क्विंटल प्रति एकड़ कर दी गई है। धान का मूल्य 3,100 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। महतारी वंदन योजना के तहत महिलाओं को प्रतिमाह 1,000 रुपए की आर्थिक सहायता दी जा रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 18 लाख आवास स्वीकृत किए गए हैं। ई-गवर्नेंस प्रणाली की शुरुआत हो चुकी है और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। भूमिहीन मजदूर सहायता योजना, तेंदूपत्ता खरीदी 5,500 रुपए प्रति मानक बोरा, रामलला दर्शन योजना एवं मुख्यमंत्री तीर्थ-दर्शन योजना जैसी अनेक जनहितकारी योजनाएँ सफलतापूर्वक संचालित की जा रही हैं।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री साय ने गुरुधाम में एक करोड़ रुपए की लागत से सर्वसुविधायुक्त भवन का निर्माण, महतारी सदन के लिए 29 लाख रुपए के साथ ही गुरुधाम परिसर में हाईमास्ट लाइट की स्थापना, तालाब का सौंदर्यीकरण, बोर खनन एवं अन्य आवश्यकताओं के लिए घोषणा की।

लोकसभा सांसद राधेश्याम राठिया ने उपस्थित सभी लोगों को दीपावली पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि इस संसार में गुरु से बढ़कर कोई नहीं है। गुरु ही वह प्रकाशस्तंभ हैं जो हमें अंधकारमय जीवन से निकालकर ज्ञान, अनुशासन और नैतिकता के पथ पर अग्रसर करते हैं। गुरु की प्रेरणा ही जीवन में सच्चा आनंद, आत्मिक शांति और सर्वाेच्च सुख प्रदान करती है। उनका मार्गदर्शन जीवन को अर्थपूर्ण बनाता है।

कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद देवेन्द्र प्रताप सिंह, महापौर जीवर्धन चौहान, संत सनातन धर्मदेवी संत समाज के अध्यक्ष सहदेव पंडा, जिला पंचायत उपाध्यक्ष दीपक सिदार, सत्यानंद राठिया सहित स्थानीय जनप्रतिनिधिगण तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन उपस्थित थे।


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