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झारखंड में छात्र आंदोलन 23वें दिन भी जारी, 20 अगस्त को CM आवास घेराव की चेतावनी

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रांची- झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को लेकर छात्र-युवा 23वें दिन भी आंदोलनरत हैं। प्रदर्शनकारियों ने अब आंदोलन को और व्यापक बनाने का ऐलान किया है।

20 अगस्त को CM आवास घेराव का ऐलान

छात्र नेताओं ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर 20 अगस्त तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आवास का घेराव करेंगे। प्रदर्शनकारियों ने भर्ती परीक्षाओं से जुड़े विवादों का समाधान, परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और कथित अनियमितताओं की जांच की मांग उठाई है।

छात्रों का कहना है कि लंबे समय से आंदोलन के बावजूद उनकी मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। ऐसे में अब वे आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से और तेज करने की तैयारी कर रहे हैं।

JPSC-JSSC परीक्षाओं को लेकर नाराजगी

आंदोलन मुख्य रूप से झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की भर्ती परीक्षाओं को लेकर है। प्रदर्शनकारी उम्मीदवार परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और पारदर्शिता की कमी का आरोप लगा रहे हैं। कुछ प्रदर्शनकारी JSSC CGL और JPSC की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षाओं को रद्द करने तथा कथित अनियमितताओं की CBI जांच की मांग भी कर रहे हैं।

तिरंगा यात्रा के बाद बढ़ा आंदोलन

15 अगस्त को आंदोलनकारी छात्रों ने रांची में तिरंगा यात्रा निकाली। इसके जरिए छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की। आंदोलन से जुड़े छात्र नेताओं ने कहा कि उनका उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया में निष्पक्षता और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों को सरकार के सामने मजबूती से रखना है।

भूख हड़ताल से भी बढ़ी चिंता

आंदोलन के दौरान कुछ छात्र नेता भूख हड़ताल पर भी हैं। रिपोर्टों के अनुसार छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने 2 अगस्त से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी और बाद में उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। एक अन्य रिपोर्ट में भूख हड़ताल पर बैठे प्रेम नायक ने अपनी बिगड़ती हालत को लेकर चिंता जताई है।

राजनीतिक बयानबाजी भी तेज

छात्र आंदोलन के बीच झारखंड की राजनीति भी गरमा गई है। भाजपा ने 20 अगस्त को प्रस्तावित CM आवास घेराव को नैतिक समर्थन दिया है। वहीं सत्तारूढ़ झामुमो ने छात्रों से किसी भी तरह के भड़कावे में नहीं आने और आंदोलन को गलत दिशा में जाने से बचाने की अपील की है।

विपक्षी नेताओं ने सरकार पर छात्रों की मांगों को गंभीरता से नहीं लेने का आरोप लगाया है, जबकि सरकार और सत्तारूढ़ दल की ओर से आंदोलन को लेकर अलग रुख सामने आया है।

24 जिलों में प्रदर्शन की तैयारी

छात्र नेताओं ने आंदोलन को राज्यव्यापी स्वरूप देने की भी घोषणा की है। रिपोर्टों के मुताबिक प्रदर्शनकारियों ने राज्य के सभी 24 जिलों में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के पुतले जलाने का कार्यक्रम घोषित किया है। इसके बाद 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास के घेराव की चेतावनी दी गई है।

सरकार के सामने बढ़ी चुनौती

लगातार 23 दिनों से जारी आंदोलन अब झारखंड सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। एक ओर छात्र भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच और पारदर्शी चयन प्रक्रिया की मांग पर अड़े हैं, वहीं दूसरी ओर आंदोलन के राजनीतिक रूप लेने से मामला और संवेदनशील हो गया है।

अब सबकी नजर 20 अगस्त पर है। यदि सरकार और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच इससे पहले कोई सहमति नहीं बनती है, तो CM आवास घेराव का कार्यक्रम आंदोलन को नए चरण में पहुंचा सकता है।

झारखंड में छात्र आंदोलन तेज, JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ हजारों युवाओं का प्रदर्शन

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झारखंड में छात्र आंदोलन ने पकड़ा जोर, JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ हजारों अभ्यर्थियों का विधानसभा मार्च

रांची: झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों और अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। JPSC और JSSC से जुड़ी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को लेकर बड़ी संख्या में छात्र सोमवार, 10 अगस्त को रांची में सड़क पर उतरे और झारखंड विधानसभा की ओर मार्च किया।

प्रदर्शनकारी अभ्यर्थी लंबे समय से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। सोमवार को प्रस्तावित विधानसभा घेराव के मद्देनजर प्रशासन ने विधानसभा परिसर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। कई स्थानों पर बैरिकेडिंग और सुरक्षा घेरा बनाया गया था, ताकि प्रदर्शनकारियों को प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने से रोका जा सके।

बैरिकेडिंग के बावजूद विधानसभा की ओर बढ़े छात्र

सोमवार को हजारों छात्र और सरकारी नौकरी के अभ्यर्थी विधानसभा की ओर बढ़े। प्रदर्शनकारियों ने रास्ते में लगाए गए बैरिकेड्स को पार करने की कोशिश की। कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारी पुलिस बैरिकेडिंग को पार कर आगे बढ़ने में सफल रहे, जिसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति पैदा हो गई।

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वॉटर कैनन और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया। कुछ रिपोर्टों में पुलिस द्वारा आंसू गैस के गोले छोड़े जाने की भी जानकारी सामने आई है। कार्रवाई के दौरान प्रदर्शन स्थल पर अफरा-तफरी की स्थिति देखने को मिली।

क्या हैं छात्रों की प्रमुख मांगें?

प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थी भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठा रहे हैं। छात्रों की प्रमुख मांगों में कथित पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच, भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई शामिल है। आंदोलनकारी छात्रों की ओर से कुछ मामलों में CBI जांच की मांग भी उठाई जा रही है।

छात्रों का कहना है कि सरकारी नौकरी की तैयारी में युवा वर्षों तक मेहनत और आर्थिक संसाधन लगाते हैं। ऐसे में परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी तरह की अनियमितता उनके भविष्य पर सीधा असर डालती है। इसी वजह से अभ्यर्थी भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शी और निष्पक्ष व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।

कई दिनों से जारी है आंदोलन

JPSC-JSSC से जुड़े मुद्दों को लेकर छात्रों का आंदोलन कई दिनों से जारी है। सोमवार का विधानसभा मार्च इस आंदोलन का एक बड़ा चरण माना जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, छात्र लगातार कई दिनों से धरना और विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और सरकार के साथ बातचीत के बावजूद कुछ प्रमुख मांगों पर सहमति नहीं बन पाई है।

प्रदर्शन के दौरान कई छात्रों ने हाथों में तिरंगा लेकर मार्च किया और अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की। आंदोलन का मुख्य केंद्र रांची बना हुआ है, जहां बड़ी संख्या में अभ्यर्थी जुटे हैं।

प्रशासन ने बढ़ाई सुरक्षा

विधानसभा मार्च को देखते हुए रांची में प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी थी। विधानसभा के आसपास कई स्तरों पर बैरिकेडिंग की गई और संवेदनशील इलाकों में पुलिस बल की तैनाती बढ़ाई गई। प्रदर्शनकारियों को विधानसभा परिसर से दूर रखने के लिए सुरक्षा बलों ने लगातार निगरानी रखी।

हालांकि, बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों के एकत्र होने और बैरिकेडिंग पार करने की कोशिश के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई। पुलिस कार्रवाई के बाद भी छात्रों का प्रदर्शन जारी रहा और वे अपनी मांगों पर कायम रहे।

युवाओं में बढ़ रहा आक्रोश

सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं का मुद्दा झारखंड के युवाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण बन गया है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि परीक्षा प्रणाली में विश्वास बनाए रखने के लिए पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए।

छात्रों का आंदोलन अब केवल परीक्षा से जुड़े मुद्दों तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि यह भर्ती प्रक्रिया में जवाबदेही, पारदर्शिता और युवाओं के भविष्य से जुड़े व्यापक सवालों को भी सामने ला रहा है।

फिलहाल रांची में छात्र आंदोलन को लेकर स्थिति पर प्रशासन और अभ्यर्थियों की अगली रणनीति पर नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में सरकार की ओर से छात्रों की मांगों पर क्या कदम उठाया जाता है, यह आंदोलन की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होगा।

झारखंड में भर्ती परीक्षा विवाद को लेकर छात्रों का आंदोलन तेज, पारदर्शी जांच और परीक्षा रद्द करने की मांग

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झारखंड में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। राजधानी रांची सहित राज्य के विभिन्न हिस्सों से आए हजारों अभ्यर्थी कई दिनों से शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव रहा है, जिससे योग्य अभ्यर्थियों के भविष्य पर प्रश्नचिह्न खड़ा हो गया है।

प्रदर्शन कर रहे छात्रों की प्रमुख मांग है कि 14वीं JPSC संयुक्त प्रारंभिक परीक्षा को रद्द कर दोबारा आयोजित किया जाए। साथ ही, परीक्षा प्रक्रिया में हुई कथित अनियमितताओं की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से निष्पक्ष जांच कराई जाए। छात्रों का कहना है कि केवल इस परीक्षा ही नहीं, बल्कि राज्य की अन्य भर्ती परीक्षाओं में भी पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए व्यापक सुधार आवश्यक हैं।

इस मुद्दे ने अब राजनीतिक स्वरूप भी ले लिया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसदों और नेताओं ने भी कथित परीक्षा अनियमितताओं के विरोध में प्रदर्शन करते हुए CBI जांच की मांग की है। वहीं, विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की ओर से भी छात्रों के आंदोलन को समर्थन मिलने लगा है।

विश्लेषकों का मानना है कि यह आंदोलन केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्षता की व्यापक मांग का प्रतीक बनता जा रहा है। यदि सरकार और संबंधित आयोग समय रहते प्रभावी कदम उठाते हैं, तो इससे युवाओं का भर्ती प्रणाली पर विश्वास मजबूत हो सकता है। वहीं, लंबा गतिरोध राज्य में प्रशासनिक और राजनीतिक चुनौतियों को भी बढ़ा सकता है।

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