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भारत ने नई दिल्ली में 13वीं आसियान-भारत वस्तु व्यापार समझौता (AITIGA) संयुक्त समिति की बैठक की मेजबानी की

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भारत ने 6 से 10 जुलाई, 2026 तक नई दिल्ली स्थित वाणिज्य भवन में आसियान-भारत वस्तु व्यापार समझौता (ASEAN-India Trade in Goods Agreement - AITIGA) की समीक्षा के तहत वार्ताओं की प्रगति का आकलन करने के लिए 13वीं AITIGA संयुक्त समिति (Joint Committee - JC) तथा संबंधित बैठकों की मेजबानी की। ये बैठकें हाइब्रिड प्रारूप में आयोजित की जा रही हैं।

13वीं संयुक्त समिति की बैठक के साथ-साथ AITIGA संयुक्त समिति के अंतर्गत गठित आठ उप-समितियों में से तीन की बैठकें भी आयोजित की जा रही हैं। इनमें सीमा शुल्क प्रक्रियाएं एवं व्यापार सुगमता उप-समिति (SC-CPTF), राष्ट्रीय उपचार एवं बाजार पहुंच उप-समिति (SC-NTMA) तथा उद्गम नियम उप-समिति (SC-ROO) शामिल हैं। ये बैठकें भारत और आसियान के बीच सहयोग को और सुदृढ़ करने, आपसी समझ बढ़ाने तथा रचनात्मक संवाद को आगे बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित हो रही हैं।

संयुक्त समिति ने उप-समितियों को उनके-अपने कार्यक्षेत्रों में रणनीतिक मार्गदर्शन प्रदान किया और AITIGA समीक्षा के अंतर्गत लंबित अध्यायों को शीघ्र अंतिम रूप देने का आग्रह किया। वार्ताओं की गति बनाए रखने के लिए उप-समितियों को समयबद्ध लक्ष्य सौंपे गए तथा निर्धारित समय-सीमा के भीतर ठोस परिणाम हासिल करने के लिए आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

13वीं AITIGA संयुक्त समिति की बैठक 7 जुलाई, 2026 को आयोजित हुई, जिसकी सह-अध्यक्षता वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त सचिव नितिन कुमार यादव तथा मलेशिया के निवेश, व्यापार एवं उद्योग मंत्रालय की उप महासचिव (व्यापार) मस्तुरा अहमद मुस्तफा ने की। बैठक में आसियान के सभी सदस्य देशों—ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओ पीडीआर, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम—के प्रतिनिधिमंडलों ने भाग लिया।

आसियान भारत का एक प्रमुख व्यापारिक साझेदार है, जो भारत के कुल वैश्विक व्यापार का लगभग 11 प्रतिशत हिस्सा रखता है। वित्त वर्ष 2025–26 के दौरान भारत और आसियान के बीच द्विपक्षीय व्यापार 128 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया, जो दोनों पक्षों के बीच मजबूत आर्थिक साझेदारी को दर्शाता है और व्यापार एवं निवेश सहयोग के विस्तार की नई संभावनाएं प्रदान करता है।

भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर बातचीत में बड़ी प्रगति, जल्द हो सकता है समझौता

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भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Deal) को अंतिम रूप देने के लिए दोनों देशों के अधिकारियों के बीच महत्वपूर्ण वार्ताएं जारी हैं। हालिया बातचीत में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है, जिससे निकट भविष्य में समझौते के संपन्न होने की संभावना मजबूत हुई है।

इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को और सुदृढ़ बनाना, बाजार तक पहुंच को आसान बनाना तथा विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार में आने वाली बाधाओं को कम करना है। भारत और अमेरिका लंबे समय से शुल्क, कृषि उत्पादों, विनिर्माण वस्तुओं तथा डिजिटल व्यापार जैसे मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह अंतरिम व्यापार समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है, तो इससे द्विपक्षीय व्यापार को नई गति मिलेगी, निवेश के अवसर बढ़ेंगे और दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को लाभ होगा। साथ ही भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में अधिक अवसर प्राप्त हो सकते हैं।

दोनों पक्षों ने बातचीत में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए शेष मुद्दों के समाधान के लिए वार्ता जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई है। यह समझौता भारत-अमेरिका आर्थिक साझेदारी को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


भारत-फिलीपींस संयुक्त कार्य समूह (JWGTI) की 14वीं बैठक मनीला में आयोजित

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फिलीपींस- भारत और फिलीपींस के बीच व्यापार एवं निवेश सहयोग को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से भारत-फिलीपींस संयुक्त कार्य समूह (JWGTI) की 14वीं बैठक 5 जून 2026 को मनीला में आयोजित की गई।

बैठक की सह-अध्यक्षता भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के वाणिज्य विभाग के संयुक्त सचिव अमित वर्मा तथा फिलीपींस के व्यापार एवं उद्योग विभाग (इंटरनेशनल ट्रेड ग्रुप) के अवर सचिव एलन बी. गेप्ती ने की। दोनों देशों के विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में भाग लिया।

बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने भारत और फिलीपींस के बीच द्विपक्षीय व्यापार में हुई उल्लेखनीय वृद्धि का स्वागत किया। वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच व्यापार 3.9 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया, जो मजबूत आर्थिक संबंधों को दर्शाता है।

चर्चा में द्विपक्षीय व्यापार और निवेश के रुझानों, प्राथमिकता वाले उत्पादों एवं सेवाओं की पहचान तथा विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देने पर विचार-विमर्श किया गया। दोनों देशों ने फिल्म, ऊर्जा, निर्माण एवं बुनियादी ढांचा, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT), आईटी-बीपीएम, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तथा औषधि क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा की।

व्यापार को सुगम बनाने के लिए कारोबारी माहौल में सुधार भी बैठक का प्रमुख विषय रहा। इस दौरान सीमा शुल्क सहयोग, कृषि क्षेत्र में सहयोग, विशेष उत्पादों के लिए बाजार पहुंच तथा राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापारिक लेन-देन जैसे मुद्दों पर विचार किया गया।

बैठक में आसियान-भारत वस्तु व्यापार समझौते (AITIGA) की समीक्षा को शीघ्र पूरा करने और उसके बाद भारत-फिलीपींस प्राथमिकता व्यापार समझौते (PTA) पर आगे बढ़ने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।

बैठक ने दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को और मजबूत बनाने की रणनीतिक आवश्यकता को रेखांकित किया तथा एक गतिशील और पारस्परिक रूप से लाभकारी साझेदारी के प्रति दोनों देशों की प्रतिबद्धता को दोहराया।

इसके अलावा, 4 जून 2026 को 14वीं JWGTI बैठक के अवसर पर फिलीपींस में कार्यरत भारतीय व्यवसायों के प्रतिनिधियों के साथ एक विशेष संवाद कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में व्यापार, निवेश, बाजार अवसरों और भारत-फिलीपींस वाणिज्यिक संबंधों को और गहरा करने के उपायों पर चर्चा की गई।

JWGTI की अगली बैठक नई दिल्ली, भारत में आयोजित की जाएगी। यह मंच दोनों देशों को वैश्विक, क्षेत्रीय और द्विपक्षीय मुद्दों पर विचार-विमर्श करने तथा वस्तुओं एवं सेवाओं के व्यापार और निवेश संबंधों को और सुदृढ़ बनाने का अवसर प्रदान करता है।


WTO MC14 में भारत की मजबूत पैरवी, समानता और सर्वसम्मति आधारित व्यापार प्रणाली पर जोर

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याउंडे (कैमरून)- विश्व व्यापार संगठन (WTO) के 14वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (MC14) के दूसरे दिन WTO सुधार से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर सदस्य देशों के व्यापार मंत्रियों ने चर्चा की। भारत की ओर से केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं।

बैठक में गोयल ने कहा कि सर्वसम्मति (consensus) आधारित निर्णय प्रक्रिया WTO की विश्वसनीयता की आधारशिला है और किसी भी सदस्य देश को उसकी सहमति के बिना नियमों में बाध्य नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने पारदर्शी, समावेशी और सदस्य-आधारित चर्चा पर जोर देते हुए कहा कि WTO को वर्तमान चुनौतियों का गंभीरता से आकलन करना चाहिए।

भारत के प्रमुख मुद्दे

  • खाद्य सुरक्षा (Food Security)

  • पब्लिक स्टॉकहोल्डिंग (PSH)

  • विशेष सुरक्षा तंत्र (SSM)

  • कॉटन से जुड़े मुद्दे

भारत ने कहा कि इन लंबित मुद्दों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और वैश्विक व्यापार प्रणाली में मौजूद असमानताओं (asymmetries) को दूर करना आवश्यक है।

अन्य महत्वपूर्ण बिंदु

  • डिस्प्यूट सेटलमेंट सिस्टम की कमजोरी पर चिंता

  • छोटे देशों के हितों की रक्षा की आवश्यकता

  • पारदर्शिता का दुरुपयोग कर व्यापारिक दबाव बनाने के खिलाफ चेतावनी

  • सभी देशों को समान अवसर देने पर जोर

भारत का रुख

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने WTO सुधार प्रक्रिया को समयबद्ध और ठोस आधार पर आगे बढ़ाने का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि सुधार प्रक्रिया:

  • पारदर्शी

  • समावेशी

  • सदस्य-प्रेरित (member-driven) होनी चाहिए

द्विपक्षीय बैठकें

सम्मेलन के दौरान पीयूष गोयल ने:

  • अमेरिका, चीन, कोरिया, स्विट्जरलैंड, न्यूजीलैंड, कनाडा, मोरक्को और ओमान के प्रतिनिधियों से मुलाकात की

  • व्यापार संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा की

WTO MC14 में भारत ने वैश्विक व्यापार में संतुलन, समान अवसर और विकासशील देशों के हितों की रक्षा पर जोर दिया।


डब्ल्यूटीओ के 14वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (MC14) का याउंडे, कैमरून में शुभारंभ

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विश्व व्यापार संगठन (WTO) का 14वाँ मंत्रिस्तरीय सम्मेलन 26 मार्च 2026 को कैमरून की राजधानी याउंडे में एक औपचारिक सत्र के साथ शुरू हुआ। इस सत्र की अध्यक्षता कैमरून के व्यापार मंत्री ने की। इस अवसर पर WTO की महानिदेशक डॉ. न्गोजी ओकोंजो-इवेला तथा सदस्य देशों के व्यापार मंत्री और वरिष्ठ प्रतिनिधि उपस्थित रहे। भारत की ओर से वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने उद्घाटन सत्र में भाग लिया। उद्घाटन सत्र के बाद 15 सितंबर 2025 को मत्स्य सब्सिडी समझौते के लागू होने के उपलक्ष्य में एक संक्षिप्त समारोह आयोजित किया गया।

उद्घाटन समारोह के बाद मंत्रियों ने WTO के मूलभूत मुद्दों और उसके सिद्धांतों पर चर्चा की। इस दौरान भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि WTO में आवश्यक सुधार पारदर्शी, समावेशी और सदस्य-प्रधान प्रक्रिया के माध्यम से किए जाने चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विकास को केंद्र में रखते हुए संगठन के मूल सिद्धांतों—जैसे भेदभाव-रहित व्यवस्था, सर्वसम्मति आधारित निर्णय और समानता—को बनाए रखा जाना चाहिए।

सम्मेलन के पहले दिन के दौरान पीयूष गोयल ने कैमरून के प्रधानमंत्री महामहिम डायोन नगुटे जोसेफ से मुलाकात की और भारत–कैमरून सहयोग को मजबूत करने सहित द्विपक्षीय और बहुपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने WTO की महानिदेशक से भी मुलाकात कर MC14 के एजेंडे पर बातचीत की। इसके अलावा उन्होंने नीदरलैंड, फ्रांस और इथियोपिया के अपने समकक्षों के साथ भी द्विपक्षीय बैठकों में व्यापार संबंधों को और मजबूत करने पर विचार-विमर्श किया।

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने भी MC14 के दौरान चिली, पैराग्वे, अमेरिका, नेपाल, फिलीपींस, सऊदी अरब, यूरोपीय संसद के प्रतिनिधिमंडल, मैक्सिको, पेरू, रूस, न्यूज़ीलैंड और यूरोपीय संघ के प्रतिनिधियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं। इन बैठकों में MC14 के एजेंडे के साथ-साथ व्यापार संबंधों को बढ़ाने के विकल्पों पर चर्चा हुई। चिली और पेरू के साथ भारत-चिली तथा भारत-पेरू मुक्त व्यापार समझौता (FTA) वार्ताओं की प्रगति पर बातचीत हुई। वहीं यूरोपीय संघ और न्यूज़ीलैंड के साथ हाल ही में संपन्न FTA वार्ताओं की प्रगति की समीक्षा की गई।

दिन का समापन कैमरून द्वारा आयोजित एक औपचारिक स्वागत समारोह और रात्रिभोज के साथ हुआ।

टाइम्स बी-स्कूल रैंकिंग 2026 में IIFT को प्रथम स्थान प्राप्त

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नई दिल्ली- इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ फॉरेन ट्रेड (IIFT) को टाइम्स बी-स्कूल रैंकिंग 2026 में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है, जिसने इसे प्रबंधन शिक्षा में एक प्रमुख संस्थान के रूप में पुनः स्थापित किया है। IIFT का विशेष फोकस अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वैश्विक व्यवसाय पर है। यह संस्थान वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन स्वायत्त संस्था है, जिसके दिल्ली, कोलकाता, काकिनाडा और GIFT सिटी में कैंपस हैं।

IIFT को शीर्ष स्थान हासिल करने पर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री,पीयूष गोयल ने बधाई देते हुए इसे संस्थान के छात्रों को कौशल, दृष्टि और महत्वपूर्ण क्षमताओं से सशक्त बनाने के निरंतर प्रयासों का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि IIFT भविष्य के नेतृत्वकर्ताओं को तैयार करने और भारत की वैश्विक व्यापार छवि को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

इस उपलब्धि पर संतोष व्यक्त करते हुए वाणिज्य सचिव और IIFT के कुलाधिपति, राजेश अग्रवाल ने कहा कि संस्थान की प्रगति इसके मजबूत शैक्षणिक आधार, वैश्विक दृष्टिकोण और उत्कृष्टता के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने यह भी बताया कि IIFT भारत के वैश्विक व्यापार में प्रमुख भूमिका निभाने के लक्ष्य का समर्थन करता है और विकसित भारत के विज़न में योगदान देता है, जिसमें यह राष्ट्रीय व्यापार, आर्थिक और रणनीतिक प्राथमिकताओं के अनुरूप वैश्विक रूप से सक्षम प्रबंधन पेशेवरों का पोषण करता है।

कुलपति, IIFT, प्रो. राकेश मोहन जोशी ने पीयूष गोयल और राजेश अग्रवाल का उनके दृष्टिकोण और स्थायी समर्थन के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि IIFT अंतरराष्ट्रीय व्यापार में प्रबंधन शिक्षा में उत्कृष्टता हासिल करने के लिए अपनी शैक्षणिक सख़्ती, नीति प्रासंगिकता, उद्योग सहभागिता और अंतरराष्ट्रीय पहुँच को और बढ़ाएगा। उन्होंने कहा कि संस्थान आधुनिक यथार्थों को अपनी शिक्षा, अनुसंधान और संचालन में एकीकृत करके इसे विश्वस्तरीय संस्थान बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

1963 में स्थापित, इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ फॉरेन ट्रेड वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन डिम्ड-टू-बी यूनिवर्सिटी है। यह संस्थान अंतरराष्ट्रीय व्यापार और व्यवसाय में प्रमुख शैक्षणिक कार्यक्रम प्रदान करता है, जिसमें MBA, कार्यकारी शिक्षा और डॉक्टोरल शोध शामिल हैं, जो भारत की वैश्विक वाणिज्य और व्यापार नीति में योगदान करते हैं। IIFT के कैंपस दिल्ली, कोलकाता, काकिनाडा और GIFT सिटी में स्थित हैं और संस्थान दुबई में अपना पहला ऑफशोर कैंपस शुरू करने की प्रक्रिया में है।


समुद्री खाद्य निर्यात को बढ़ावा देने के लिए 21 जनवरी को नई दिल्ली में राजदूतों एवं उच्चायुक्तों के साथ राउंड टेबल सम्मेलन

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नई दिल्ली- मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के अंतर्गत मत्स्य विभाग 21 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में “समुद्री खाद्य निर्यात संवर्धन पर राजदूतों एवं उच्चायुक्तों के साथ राउंड टेबल सम्मेलन” का आयोजन कर रहा है। इस सम्मेलन का उद्देश्य द्विपक्षीय व्यापार को सुदृढ़ करना तथा अंतरराष्ट्रीय बाजार संपर्कों को मजबूत करना है।

सम्मेलन की अध्यक्षता केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय तथा पंचायती राज मंत्रालय करेंगे। यह कार्यक्रम मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय तथा अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन और मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय तथा पंचायती राज मंत्रालय के राज्य मंत्री प्रो. एस. पी. सिंह बघेल की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित होगा।

भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा एक्वाकल्चर उत्पादक देश है और मछली तथा जलीय खाद्य उत्पादों के प्रमुख वैश्विक उत्पादकों में शामिल है। बीते वर्षों में यह क्षेत्र आजीविका आधारित गतिविधि से आगे बढ़कर एक मजबूत, निर्यातोन्मुख पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में विकसित हुआ है, जिसमें पालन, चारा, प्रसंस्करण, कोल्ड चेन, लॉजिस्टिक्स और मूल्य संवर्धन शामिल हैं। साथ ही यह क्षेत्र लाखों छोटे, सीमांत और पारंपरिक मछुआरों एवं किसानों की आजीविका का भी आधार बना हुआ है। लक्षित योजनाओं और नीतिगत समर्थन के बल पर भारत आज मछली एवं मत्स्य उत्पादों का छठा सबसे बड़ा निर्यातक देश है। वर्ष 2024–25 में भारत का समुद्री खाद्य निर्यात 16.98 लाख मीट्रिक टन रहा, जिसका मूल्य ₹62,408 करोड़ (7.45 अरब अमेरिकी डॉलर) रहा, जो देश के कुल कृषि निर्यात का लगभग 18 प्रतिशत है।

इस राउंड टेबल सम्मेलन में एशिया, अफ्रीका, यूरोप, उत्तरी अमेरिका, ओशिनिया तथा लैटिन अमेरिका एवं कैरेबियाई क्षेत्र के 83 साझेदार देशों के राजदूत और उच्चायुक्त भाग लेंगे। इसके अलावा विदेश मंत्रालय, मत्स्य विभाग, समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एमपीईडीए), निर्यात निरीक्षण परिषद (ईआईसी), वाणिज्य विभाग, विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी), खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय तथा एफएओ, एएफडी, जीआईजेड, बे ऑफ बंगाल प्रोग्राम (बीओबीपी), एडीबी और आईएफएडी जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के वरिष्ठ अधिकारी भी सम्मेलन में शामिल होंगे। यह सम्मेलन समुद्री खाद्य व्यापार, बाजार पहुंच, नियामक सहयोग और द्विपक्षीय एवं बहुपक्षीय साझेदारियों को सुदृढ़ करने के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक एवं तकनीकी मंच प्रदान करेगा।

सम्मेलन में सतत, ट्रेस करने योग्य और मूल्यवर्धित समुद्री खाद्य व्यापार को बढ़ावा देने, निवेश, संयुक्त उपक्रम, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और क्षमता निर्माण के अवसरों की पहचान पर चर्चा की जाएगी। साथ ही जलवायु और बाजार जोखिमों के प्रति समुद्री खाद्य मूल्य श्रृंखला की मजबूती पर भी विचार-विमर्श होगा। प्रमुख विषयों में वैश्विक समुद्री खाद्य व्यापार के रुझान, मानक एवं प्रमाणन, ट्रेसबिलिटी और डिजिटल रिपोर्टिंग, सतत एवं जिम्मेदार स्रोत, मूल्य संवर्धन एवं उत्पाद नवाचार, कोल्ड चेन अवसंरचना, लॉजिस्टिक्स, वित्तपोषण, निजी क्षेत्र की भागीदारी तथा मत्स्य और एक्वाकल्चर में डिजिटल एवं तकनीकी परिवर्तन शामिल हैं।

विचार-विमर्श के दौरान उच्च गुणवत्ता, प्रमाणित और सतत रूप से प्राप्त समुद्री खाद्य उत्पादों की बढ़ती वैश्विक मांग, उत्तरी अमेरिका, यूरोप और पूर्वी एशिया में एक्वाकल्चर आधारित प्रोटीन की बढ़ती खपत तथा रेडी-टू-कुक, रेडी-टू-ईट और न्यूट्रास्यूटिकल-ग्रेड समुद्री उत्पादों जैसे प्रीमियम वर्गों के विस्तार पर भी प्रकाश डाला जाएगा। ये रुझान भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप अनुपालन, मूल्यवर्धित प्रसंस्करण और प्रजातियों के विविधीकरण के माध्यम से वैश्विक बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के महत्वपूर्ण अवसर प्रस्तुत करते हैं।

सम्मेलन से प्राप्त निष्कर्षों से खाद्य सुरक्षा को सुदृढ़ करने, मत्स्य क्षेत्र से जुड़े लोगों की आजीविका में सुधार लाने तथा सतत, लचीले और समावेशी विकास के साझा लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान मिलने की अपेक्षा है।

भारत–स्लोवेनिया JCTEC का 10वां सत्र नई दिल्ली में सम्पन्न

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भारत–स्लोवेनिया व्यापार एवं आर्थिक सहयोग संयुक्त समिति (JCTEC) के 10वें सत्र का आयोजन नई दिल्ली में हुआ। यह बैठक भारत सरकार के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के संयुक्त सचिव साकेत कुमार और स्लोवेनिया के विदेश और यूरोपीय मामलों के मंत्रालय में आर्थिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक कूटनीति के महानिदेशक पीटर जापेल्ज़ की सह-अध्यक्षता में संपन्न हुई।

यह सत्र भारत और स्लोवेनिया के बीच वर्तमान आर्थिक संबंधों की समीक्षा, प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने और व्यापार एवं निवेश के लिए एक अग्रदृष्टि-आधारित रोडमैप तैयार करने का महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ।

पिछले कई वर्षों में भारत और स्लोवेनिया के बीच द्विपक्षीय व्यापार निरंतर बढ़ोतरी दर्शाता रहा है, जो इस साझेदारी की गहराई और मजबूती को प्रतिबिंबित करता है।

स्लोवेनिया की मध्य यूरोप के चौराहे पर स्थित रणनीतिक स्थिति और यूरोप के साथ भारत की बढ़ती भागीदारी, दोनों देशों के लिए क्षेत्रों को और नज़दीक लाने का एक अनूठा अवसर प्रदान करती है। भौगोलिक और आर्थिक हितों का यह संगम व्यापार, प्रौद्योगिकी, नवाचार और संपर्कता (कनेक्टिविटी) में सहयोग को और मजबूत करने का ठोस आधार है।

बैठक के दौरान वैश्विक और घरेलू आर्थिक परिदृश्य की व्यापक समीक्षा की गई, साथ ही दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश संबंधों का मूल्यांकन भी किया गया। कृषि, रसायन एवं फार्मास्यूटिकल्स, स्वास्थ्य, परिवहन, ऊर्जा, पर्यटन, MSMEs, तथा आयुर्वेद एवं पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों सहित कई क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की गई। दोनों पक्षों ने एक संतुलित और परस्पर लाभकारी भारत–यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के शीघ्र निष्कर्ष पर आशावाद व्यक्त किया।

अपनी यात्रा के दौरान,पीटर जापेल्ज़ ने भारत सरकार के वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल से मुलाकात की और दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा की।

10वें JCTEC सत्र ने भारत और स्लोवेनिया की मजबूत आर्थिक साझेदारी के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को पुनः पुष्टि की, जो आपसी विश्वास, साझा मूल्यों और दीर्घकालिक मित्रता पर आधारित है। यह सत्र यूरोप और भारत के बीच व्यापक सहयोग के लिए एक सुदृढ़ आधार भी स्थापित करता है।


भारत ने पेरू और चिली के साथ व्यापार वार्ता के दो महत्वपूर्ण राउंड सफलतापूर्वक संपन्न किए

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भारत ने लैटिन अमेरिका के देशों के साथ दो महत्वपूर्ण व्यापार वार्ता राउंड सफलतापूर्वक संपन्न किए हैं, जो क्षेत्र के साथ आर्थिक सहयोग बढ़ाने और व्यापारिक संबंधों को गहरा करने के सरकार के संकल्प को दर्शाते हैं।

9वां राउंड – भारत–पेरू व्यापार समझौता वार्ता:

9वां राउंड भारत–पेरू व्यापार समझौता वार्ता 3 से 5 नवंबर 2025 तक लीमा, पेरू में आयोजित किया गया। इस वार्ता में प्रस्तावित समझौते के मुख्य अध्यायों में उल्लेखनीय प्रगति हुई, जिनमें सामान और सेवाओं का व्यापार, मूल नियम (Rules of Origin), तकनीकी बाधाएं, सीमा शुल्क प्रक्रियाएं, विवाद समाधान और महत्वपूर्ण खनिज शामिल हैं।

समापन समारोह में पेरू की विदेश व्यापार एवं पर्यटन मंत्री ह.ए. सुश्री टेरेसा स्टेला मेरा गोमेज़ और विदेश व्यापार के उप मंत्री ह.ए. सेसर अगस्तो ल्लोना सिल्वा सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। भारत की ओर से ह.ए. विश्वास विदु सापकाल, भारत के पेरू राजदूत और भारतीय प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख विमल आनंद, संयुक्त सचिव और मुख्य वार्ता प्रतिनिधि उपस्थित थे।

मंत्री गोमेज़ ने पेरू की ओर से वार्ता को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई और दोनों अर्थव्यवस्थाओं की परस्पर पूरकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने आशा व्यक्त की कि समझौता व्यापार और निवेश प्रवाह को बढ़ावा देगा। राजदूत सापकाल ने भारत की सतत वृद्धि गति को रेखांकित किया और कहा कि यह समझौता महत्वपूर्ण खनिज, दवा, ऑटोमोबाइल, वस्त्र और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में सहयोग के नए अवसर उत्पन्न करेगा।

दोनों पक्षों ने अगली वार्ता राउंड से पहले लंबित मुद्दों को सुलझाने के लिए अंतर-सत्रीय बैठकें आयोजित करने पर सहमति व्यक्त की। अगली वार्ता राउंड जनवरी 2026 में नई दिल्ली में प्रस्तावित है।

तीसरा राउंड – भारत–चिली व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) वार्ता:

पहले, 27 से 30 अक्टूबर 2025 तक सैंटियागो, चिली में भारत–चिली CEPA वार्ता का तीसरा राउंड संपन्न हुआ। इस वार्ता में सामान और सेवाओं का व्यापार, निवेश संवर्धन, मूल नियम, बौद्धिक संपदा अधिकार, TBT/SPS उपाय, आर्थिक सहयोग और महत्वपूर्ण खनिज जैसे विषयों पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने CEPA वार्ता को जल्द और समयबद्ध तरीके से पूरा करने के अपने साझा संकल्प को दोहराया। इस समझौते का उद्देश्य बाजार पहुंच बढ़ाना, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती और आर्थिक एकीकरण को गहरा करना है।

निष्कर्ष:

पेरू और चिली के साथ भारत की बढ़ती व्यापारिक भागीदारी यह दर्शाती है कि भारत लैटिन अमेरिकी क्षेत्र के साथ मजबूत साझेदारी बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, जो पारस्परिक रूप से लाभकारी और व्यापक आर्थिक सहयोग के ढांचे के माध्यम से आगे बढ़ रही है।


भारत और रोमानिया के बीच व्यापार, निवेश एवं आपूर्ति श्रृंखला सहयोग को सुदृढ़ करने पर द्विपक्षीय बैठक

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वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने आज रोमानिया की विदेश मंत्री महामहिम ओआना-सिल्विया त्सोइउ के साथ बुखारेस्ट में द्विपक्षीय बैठक की। बैठक में व्यापार विस्तार, निवेश आकर्षण और भारत–यूरोपीय संघ (EU) के व्यापक आर्थिक ढांचे के अंतर्गत मजबूत एवं लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुदृढ़ करने पर चर्चा की गई।

दोनों पक्षों ने इस वर्ष के भीतर एक न्यायसंगत, संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभदायक भारत–ईयू मुक्त व्यापार समझौता (FTA) को अंतिम रूप देने की दिशा में कार्य करने पर सहमति व्यक्त की, जो चल रही वार्ताओं के लिए निर्धारित राजनीतिक मार्गदर्शन के अनुरूप है।

बैठक के दौरान मंत्रियों ने दोनों देशों के बीच स्थिर व्यापार और निवेश संबंधों की समीक्षा की। भारत का रोमानिया को निर्यात वित्तीय वर्ष 2024–25 में 1.03 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक रहा, जबकि कुल द्विपक्षीय व्यापार FY 2023–24 में लगभग 2.98 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। दोनों पक्षों ने पेट्रोलियम उत्पाद, इंजीनियरिंग वस्तुएं, दवाइयाँ और सिरेमिक जैसे प्राथमिक क्षेत्रों में आपूर्ति श्रृंखला संबंधों को और गहरा करने तथा मानकों, परीक्षण और निवेश साझेदारियों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की ताकि दोनों देशों के बाजारों तक पहुँच को सुदृढ़ किया जा सके। उन्होंने उत्पादन के विविधीकरण और विश्वसनीय साझेदारों के रूप में मजबूत, अधिक लचीली आपूर्ति श्रृंखलाएं विकसित करने के लिए मिलकर कार्य करने का भी निर्णय लिया, जिससे दोनों देशों के व्यवसायों में स्थिरता और विश्वास सुनिश्चित हो सके।

भारत और रोमानिया के नेतृत्व के बीच हालिया उच्च-स्तरीय संवादों पर आधारित होकर, दोनों पक्षों ने इस गति को बनाए रखने और नियमित द्विपक्षीय संपर्क कार्यक्रम जारी रखने पर सहमति जताई। साथ ही, उन्होंने व्यापार को सुगम बनाने, मोबिलिटी टूलकिट विकसित करने और निवेशकों तक पहुंच को मजबूत करने के लिए फॉलो-अप कार्रवाइयों का समन्वय करने का निर्णय लिया ताकि संभावनाओं को ठोस परिणामों में बदला जा सके।

यह यात्रा दोनों देशों की भारत–रोमानिया आर्थिक साझेदारी को और मजबूत बनाने की साझा प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है — जो व्यापार का विस्तार करती है, निवेश प्रवाह को बढ़ाती है, और कौशल-आधारित गतिशीलता के नए मार्ग खोलती है, जिससे दोनों अर्थव्यवस्थाओं को पारस्परिक लाभ प्राप्त होगा।

भारतीय विदेश व्यापार संस्थान ने वाणिज्य विभाग के अधिकारियों के लिए अंतरराष्ट्रीय व्यापार वार्ता कार्यक्रम का किया उद्घाटन

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भारतीय विदेश व्यापार संस्थान (IIFT) ने आज वाणिज्य विभाग (DOC) के अधिकारियों के लिए अंतरराष्ट्रीय व्यापार वार्ता कार्यक्रम का उद्घाटन किया। यह कार्यक्रम IIFT के सेंटर फॉर इंटरनेशनल नेगोशिएशंस (CIN) द्वारा आयोजित किया गया है और इसका उद्देश्य सरकारी अधिकारियों के वार्ता कौशल को मजबूत करना और भारत की वैश्विक व्यापार भागीदारी को सशक्त बनाना है।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में वाणिज्य सचिव, सुनील बार्थवाल उपस्थित थे। अपने उद्घाटन संबोधन में उन्होंने संस्थागत क्षमता निर्माण के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “यह कार्यक्रम सभी प्रासंगिक विषयों को विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में प्रस्तुत करता है। IIFT ने हमेशा अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वार्ता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, और हम सभी प्रतिभागियों को इस अनोखे शैक्षणिक अनुभव के लिए शुभकामनाएँ देते हैं।”

IIFT के कुलपति प्रो. राकेश मोहन जोशी ने संस्थान की उपलब्धियों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “आज IIFT लिंक्डइन और NIRF में शीर्ष रैंकिंग प्राप्त करता है, और संस्थान में प्लेसमेंट ₹1.23 करोड़ तक पहुँच चुके हैं। हाल ही में हमने काकिनाडा और GIFT सिटी में नए कैंपस खोले हैं। हमारे दुबई कैंपस को वाणिज्य, शिक्षा और गृह मंत्रालय, UGC और दुबई सरकार से मंजूरी मिल चुकी है और यह शीघ्र शुरू होगा। हम द्विपक्षीय व्यापार और FTA पर 30 केस स्टडी विकसित कर रहे हैं। भारत–यूके FTA और CETA जैसी दो प्रमुख FTAs यह दर्शाती हैं कि कठिन परिस्थितियों में भी भारत जटिल व्यापार परिदृश्यों में कैसे सफलतापूर्वक बातचीत कर सकता है।”

CIN और MDP के प्रमुख तथा कार्यक्रम निदेशक, रोहित मेहतानी ने कहा कि यह कार्यक्रम वाणिज्य सचिव की दृष्टि को प्रतिबिंबित करता है। उन्होंने कहा, “यह कार्यक्रम सरकारी अधिकारियों की अंतरराष्ट्रीय व्यापार वार्ता के जटिल क्षेत्र में क्षमता निर्माण के लिए IIFT की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है। प्रतिभागी बहुपक्षीय और द्विपक्षीय मंचों पर अधिक प्रभावी ढंग से बातचीत करने के लिए व्यावहारिक अंतर्दृष्टि और उपकरण प्राप्त करेंगे।”

यह पहल भारत के प्रमुख व्यापार-संबंधी प्रशिक्षण, अनुसंधान और नीति समर्थन संस्थान के रूप में IIFT की निरंतर भूमिका को रेखांकित करती है।

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