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भारत–ऑस्ट्रेलिया के बीच CSIR-TKDL समझौता, पारंपरिक ज्ञान की वैश्विक सुरक्षा को मिलेगी मजबूती

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वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) और आईपी ऑस्ट्रेलिया (IP Australia) ने 9 जुलाई 2026 को मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया में आयोजित तीसरे भारत–ऑस्ट्रेलिया वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान CSIR की ट्रेडिशनल नॉलेज डिजिटल लाइब्रेरी (CSIR-TKDL) तक पहुंच प्रदान करने संबंधी एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ की उपस्थिति में संपन्न हुआ।

यह समझौता शिखर सम्मेलन के दौरान हुए द्विपक्षीय विचार-विमर्श के 18 प्रमुख परिणामों में से एक है। दोनों देशों के बीच रक्षा एवं सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा, शिक्षा, कौशल विकास, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, फिल्म निर्माण, पारंपरिक ज्ञान तथा सांस्कृतिक धरोहरों की वापसी जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई।

क्या है TKDL?

ट्रेडिशनल नॉलेज डिजिटल लाइब्रेरी (TKDL) भारत द्वारा विकसित विश्व का पहला ऐसा डिजिटल डेटाबेस है, जिसका उद्देश्य भारतीय पारंपरिक ज्ञान के आधार पर गलत तरीके से पेटेंट दिए जाने को रोकना है।

इस समझौते के तहत IP Australia को TKDL डेटाबेस तक पहुंच मिलेगी, जिससे वह ऑस्ट्रेलिया में दायर पेटेंट आवेदनों की जांच के दौरान संबंधित पूर्व कला (Prior Art) का अध्ययन कर सकेगा। इससे पेटेंट जांच प्रक्रिया अधिक सटीक और प्रभावी होगी तथा भारत की पारंपरिक विरासत पर अनुचित पेटेंट दिए जाने से रोकने में मदद मिलेगी।

भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों ही समृद्ध स्वदेशी ज्ञान, पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों और सांस्कृतिक विरासत के धनी देश हैं। यह समझौता दोनों देशों की पारंपरिक ज्ञान की सुरक्षा और बौद्धिक संपदा प्रणाली को मजबूत करने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

समझौते के क्रियान्वयन की निगरानी IP Australia के पेटेंट आयुक्त एंड्रयू विल्किंसन, CSIR की महानिदेशक एवं DSIR की सचिव डॉ. एन. कलैसेल्वी तथा CSIR-TKDL इकाई की प्रमुख डॉ. विश्वजननी जे. सत्तीगेरी करेंगी।

TKDL के बारे में

वर्ष 2001 में भारत सरकार द्वारा CSIR और आयुष मंत्रालय के संयुक्त प्रयास से स्थापित ट्रेडिशनल नॉलेज डिजिटल लाइब्रेरी (TKDL) दुनिया का पहला ऐसा डेटाबेस है, जिसे पारंपरिक ज्ञान की रक्षात्मक सुरक्षा (Defensive Protection) के लिए विकसित किया गया।

इस डेटाबेस में वर्तमान में आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध, सोवा-रिग्पा और योग से संबंधित 5.2 लाख से अधिक औषधीय सूत्रों और पारंपरिक प्रथाओं का विवरण उपलब्ध है। इसे अंग्रेजी, जर्मन, फ्रेंच, जापानी और स्पेनिश सहित पांच अंतरराष्ट्रीय भाषाओं में अनुवादित किया गया है ताकि विश्वभर के पेटेंट परीक्षक इसका उपयोग कर सकें।

ऑस्ट्रेलिया के साथ इस समझौते के बाद अब 18 देशों के पेटेंट कार्यालयों को गोपनीयता समझौते (NDA) के तहत TKDL तक पहुंच प्राप्त हो चुकी है।

TKDL ने अब तक दुनिया भर में 375 से अधिक पेटेंट आवेदनों को रद्द, अस्वीकृत, संशोधित, वापस लेने या निरस्त कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह भारत की पारंपरिक ज्ञान संपदा की वैश्विक स्तर पर सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

भारत–ब्राज़ील के बीच TKDL एक्सेस समझौता, पारंपरिक ज्ञान संरक्षण में नया कदम

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ब्राज़ील के राष्ट्रीय औद्योगिक संपदा संस्थान (INPI) और भारत की वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) ने पारंपरिक ज्ञान डिजिटल लाइब्रेरी (TKDL) तक पहुँच के लिए एक सहयोग व्यवस्था पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता 21 फरवरी 2026 को ब्राज़ील के राष्ट्रपति महामहिम लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गरिमामयी उपस्थिति में आदान-प्रदान किया गया।

राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा 18–22 फरवरी 2026 तक इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 और द्विपक्षीय बैठकों के लिए भारत की राजकीय यात्रा पर हैं। दोनों नेताओं ने INPI, ब्राज़ील और CSIR, भारत के बीच TKDL एक्सेस समझौते के आदान-प्रदान का स्वागत किया, जो पारंपरिक ज्ञान (TK) और बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करेगा।

यह समझौता ब्राज़ील के विकास, उद्योग, व्यापार एवं सेवा मंत्रालय के उप मंत्री महामहिम मार्सियो फर्नांडो एलियास रोसा और भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के सचिव (पूर्व) पेरियासामी कुमारन द्वारा आदान-प्रदान किया गया। इस सहयोग के तहत ब्राज़ील का पेटेंट कार्यालय पेटेंट जांच और अनुदान प्रक्रियाओं के दौरान TKDL डेटाबेस तक पहुँच प्राप्त करेगा। TKDL भारतीय पारंपरिक ज्ञान के गलत पेटेंट और दुरुपयोग को रोकने के लिए एक प्रमुख तंत्र के रूप में कार्य करता है।

INPI, ब्राज़ील के साथ TKDL एक्सेस समझौते पर हस्ताक्षर भारत के वैश्विक प्रयासों को मजबूत करने की दिशा में एक नई साझेदारी की शुरुआत है, जिसका उद्देश्य जैव-डकैती (बायोपायरेसी) और पारंपरिक ज्ञान के दुरुपयोग को रोकना है। साथ ही, यह ब्राज़ील को नवीनता और पूर्व कला (प्रायर आर्ट) के बेहतर मूल्यांकन के माध्यम से पेटेंट जांच प्रक्रिया की गुणवत्ता और दक्षता बढ़ाने में सहायता करेगा।

यह समझौता INPI ब्राज़ील के अध्यक्ष जूलियो सीज़र मोरेरा, CSIR की महानिदेशक एवं DSIR की सचिव डॉ. एन. कलैसेल्वी और CSIR-TKDL इकाई की प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. विस्वजानानी जे. सत्तिगेरी के मार्गदर्शन में लागू किया जाएगा।

TKDL के बारे में

पारंपरिक ज्ञान डिजिटल लाइब्रेरी (TKDL) एक वैश्विक रूप से अद्वितीय पहल है, जिसकी स्थापना 2001 में भारत सरकार द्वारा CSIR और आयुष मंत्रालय के सहयोग से की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय पारंपरिक ज्ञान पर गलत पेटेंट दिए जाने से रोकना और देश की ज्ञान विरासत को दुरुपयोग से सुरक्षित रखना है।

TKDL में वर्तमान में आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध, सोवा रिग्पा और योग जैसी भारतीय चिकित्सा प्रणालियों से संबंधित 5.2 लाख से अधिक सूत्रीकरण और प्रथाओं की जानकारी शामिल है, जो प्रामाणिक पारंपरिक ग्रंथों से ली गई है। विभिन्न भाषाओं और विषयों के ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक और तकनीकी शब्दावली से जोड़कर संरचित किया गया है।

यह डेटाबेस पाँच अंतरराष्ट्रीय भाषाओं—अंग्रेज़ी, जर्मन, फ्रेंच, जापानी और स्पेनिश—में उपलब्ध है, जिससे भाषा और प्रारूप की बाधाएँ दूर होती हैं और दुनिया भर के पेटेंट परीक्षकों द्वारा प्रभावी उपयोग संभव होता है। पेटेंट कार्यालयों को गैर-प्रकटीकरण समझौते (NDA) के तहत पहुँच प्रदान की जाती है।

ब्राज़ील के INPI के शामिल होने से TKDL तक पहुँच रखने वाले विश्वभर के पेटेंट कार्यालयों की संख्या 18 हो गई है।

TKDL को पारंपरिक ज्ञान की रक्षात्मक सुरक्षा के लिए वैश्विक मानक माना जाता है। इसका प्रभाव उल्लेखनीय रहा है, क्योंकि TKDL से प्राप्त पूर्व कला प्रमाण के आधार पर विश्वभर में 375 से अधिक पेटेंट आवेदन रद्द, अस्वीकृत, संशोधित, वापस लिए गए या त्याग दिए गए हैं।

DPIIT का प्रस्तावित हाइब्रिड मॉडल: AI डेवलपर्स और कंटेंट क्रिएटर्स के हितों में संतुलन

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उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) ने जनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और कॉपीराइट कानून के इंटरसेक्शन पर अपने कार्यपत्र का भाग 1 प्रकाशित किया है। यह पेपर 28 अप्रैल 2025 को गठित आठ सदस्यीय समिति (“समिति”) की सिफारिशों को प्रस्तुत करता है, जिसका उद्देश्य यह आकलन करना था कि मौजूदा कानून जनरेटिव AI से उत्पन्न होने वाले मुद्दों को संबोधित करने के लिए पर्याप्त है या नहीं, और यदि आवश्यक हो तो कानून में संशोधन के लिए सुझाव देना।

कार्यपत्र में मौजूदा दृष्टिकोणों का मूल्यांकन किया गया है, जिनमें ब्लैंकेट छूट, टेक्स्ट और डेटा-माइनिंग अपवाद (ऑप्ट-आउट अधिकार के साथ या बिना), स्वैच्छिक लाइसेंसिंग, या विस्तारित सामूहिक लाइसेंसिंग शामिल हैं। सभी मॉडलों के उपयुक्तता संबंधी मुद्दों को स्पष्ट करते हुए, कार्यपत्र एक नई नीति ढांचा प्रस्तुत करता है, जिसका उद्देश्य सामग्री निर्माताओं के अधिकार और AI नवाचारकों के हितों के बीच संतुलन स्थापित करना है।

जीरो प्राइस लाइसेंस मॉडल को समिति ने अस्वीकार किया, यह तर्क देते हुए कि यह मानव रचनात्मकता के प्रोत्साहन को कमजोर कर सकता है और दीर्घकाल में मानव-निर्मित सामग्री का उत्पादन कम कर सकता है।

वैकल्पिक रूप में, समिति ने एक हाइब्रिड मॉडल प्रस्तावित किया है, जिसके तहत:

  • AI डेवलपर्स को सभी कानूनी रूप से एक्सेस किए गए कंटेंट को प्रशिक्षण के उद्देश्यों के लिए ब्लैंकेट लाइसेंस प्रदान किया जाएगा, जिसमें व्यक्तिगत बातचीत की आवश्यकता नहीं होगी;

  • रॉयल्टी केवल AI टूल्स के वाणिज्यीकरण के समय देय होगी, और दरें सरकार द्वारा नियुक्त समिति द्वारा निर्धारित की जाएंगी। ये दरें न्यायिक समीक्षा के अधीन होंगी;

  • केंद्रीकृत तंत्र रॉयल्टी संग्रह और वितरण संभालेगा, जिससे लेनदेन लागत कम होगी, कानूनी निश्चितता बढ़ेगी और बड़े एवं छोटे AI डेवलपर्स दोनों के लिए समान अवसर सुनिश्चित होंगे।

कार्यपत्र तैयार करने में डॉ. राघवेंद्र राव का महत्वपूर्ण योगदान रहा। समिति के सदस्यों को सुश्री डी. श्रीप्रिया, श्री कुशाल वाधवाण और सुश्री प्रियांका अरोड़ा ने भी सहायता प्रदान की।

DPIIT ने इस कार्यपत्र की ड्राफ्ट प्रति जनता और हितधारकों की 30 दिनों की परामर्श अवधि के लिए जारी की है, और जनता से इस प्रस्तावित मॉडल पर प्रतिक्रिया आमंत्रित की है। कार्यपत्र यहाँ देखा जा सकता है:


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