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पंडित दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा अकादमी (PDUNASS) ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 109वीं जयंती मनाई

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कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के प्रमुख प्रशिक्षण संस्थान पंडित दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा अकादमी (PDUNASS) ने अपने जनकपुरी, नई दिल्ली स्थित परिसर में श्रद्धा और बौद्धिक सहभागिता की भावना के साथ पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 109वीं जयंती मनाई।

कार्यक्रम की शुरुआत कुमार रोहित, निदेशक PDUNASS एवं अतिरिक्त केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त (मुख्यालय) द्वारा पंडित दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर हुई। उन्होंने अधिकारियों, कर्मचारियों, संकाय सदस्यों और नव-भर्ती किए गए सहायक भविष्य निधि आयुक्तों (APFCs) को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए नेतृत्व प्रदान किया।

कुमार रोहित ने अपने उद्घाटन भाषण में पंडित उपाध्याय के जीवन और दर्शन के भारत की सामाजिक-राजनीतिक संरचना पर गहरे प्रभाव को स्वीकार किया और समकालीन कल्याणकारी नीतियों को आकार देने में उनके आदर्शों की प्रासंगिकता पर जोर दिया।

श्रद्धांजलि समारोह के पश्चात अंकित चन्याल, क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त–II, ने एक सहभागी और चिंतनशील चर्चा के दौरान पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों और आदर्शों का विस्तार से वर्णन किया। चन्याल ने एकात्म मानववाद (Integral Humanism), जो उपाध्याय के दर्शन की आधारशिला है, और इसका सार्वजनिक प्रशासन में निरंतर महत्व—विशेष रूप से सामाजिक सुरक्षा, नैतिक शासन और समावेशी विकास के संदर्भ में—पर प्रकाश डाला।

उन्होंने बताया कि एकात्म मानववाद ऐसे शासन मॉडल की कल्पना करता है जिसमें व्यक्ति नीति निर्माण का केंद्र होता है—केवल एक आर्थिक इकाई के रूप में नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक आयामों वाला प्राणी के रूप में। उन्होंने विकेंद्रीकरण, नैतिक नेतृत्व और सामुदायिक विकास के महत्व पर जोर दिया—ये सभी सक्षम और सहानुभूतिपूर्ण शासन प्रदान करने में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

स्मरणीय सत्र में अधिकारियों, कर्मचारियों और प्रशिक्षणरत APFCs ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और पंडित उपाध्याय की दर्शन, अर्थशास्त्र और राष्ट्र निर्माण में योगदान पर अपने विचार साझा किए। चर्चाएँ मुख्य रूप से उनके मानव-केंद्रित विकास दर्शन, सार्वजनिक सेवा में सहानुभूति और नैतिक जिम्मेदारी, तथा स्वावलंबन और विकेंद्रीकरण की भूमिका के इर्द-गिर्द घूमीं।

कार्यक्रम का समापन सभी प्रतिभागियों द्वारा सामूहिक प्रतिज्ञा के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने पंडित दीनदयाल उपाध्याय द्वारा प्रचारित सेवा, ईमानदारी और समावेशिता जैसे कालजयी मूल्यों को बनाए रखने और नागरिक-केंद्रित शासन के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का संकल्प लिया।

इस स्मरणीय आयोजन के माध्यम से PDUNASS ने यह पुनः पुष्टि की कि वह ऐसे सार्वजनिक प्रशासकों का प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है जो केवल पेशेवर रूप से सक्षम ही नहीं बल्कि नैतिक रूप से दृढ़ और सामाजिक रूप से जागरूक भी हों।


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