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प्रधानमंत्री मोदी ने Viksit Bharat Young Leaders Dialogue 2026 में युवाओं को सशक्त बनाने का दिया संदेश

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नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज Viksit Bharat Young Leaders Dialogue 2026 में अपने संबोधन की झलकियाँ साझा कीं और युवाओं को देश के निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने के लिए प्रेरित किया। अपने संदेशों में उन्होंने युवाओं की रचनात्मकता और देशभक्ति को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने ट्वीट में कहा कि पिछले 11 वर्षों में देश के हर क्षेत्र में संभावनाओं के अनंत द्वार खुले हैं। उन्होंने विशेष रूप से कंटेंट और क्रिएटिविटी के क्षेत्र में युवाओं को अवसरों का संकेत दिया, और यह उदाहरण देते हुए कहा कि हमारे युवा रामायण और महाभारत की प्रेरक कहानियों को गेमिंग वर्ल्ड का हिस्सा बना सकते हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि “यहाँ तक कि हमारे हनुमान जी ही पूरी दुनिया की गेमिंग चला सकते हैं!”

प्रधानमंत्री ने नेक्स्ट जेनरेशन रिफॉर्म्स की चर्चा करते हुए कहा कि यह अब एक रिफॉर्म एक्सप्रेस बन चुका है, और इसके केंद्र में देश की युवा शक्ति ही है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे गुलामी की मानसिकता से बाहर निकलकर अपनी विरासत और विचारों को हमेशा आगे रखें। इसके संदर्भ में उन्होंने स्वामी विवेकानंद के जीवन का उदाहरण दिया, जो हमें यही सिखाता है।

प्रधानमंत्री मोदी के ये संदेश युवाओं के लिए रचनात्मकता, नेतृत्व और देशभक्ति की दिशा में प्रेरणा स्रोत साबित होंगे।



राज्य के 8 युवाओं और एक संगठन को मिला छत्तीसगढ़ युवा रत्न सम्मान

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खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री ने युवाओं को किया सम्मानित

दृढ़ इच्छाशक्ति, परिश्रम और समर्पण से अपने लक्ष्यों की ओर बढ़े युवा –  विष्णु देव साय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले राज्य के आठ युवाओं तथा धमतरी जिले के युवा स्टार सेवा समिति खुरतुली को आज राष्ट्रीय युवा दिवस पर सम्मानित किया। उन्होंने खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा आज रायपुर के नवीन विश्राम भवन में आयोजित युवा रत्न सम्मान समारोह में सामाजिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक, शैक्षणिक, खेल एवं अन्य क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले युवाओं को छत्तीसगढ़ युवा रत्न सम्मान प्रदान किया। 

मुख्यमंत्री साय ने आज स्वामी विवेकानंद की 163वीं जयंती पर रायपुर में उनके बिताए समय का स्मरण करते हुए समारोह में कहा कि स्वामी विवेकानंद ने मात्र 31 वर्ष की आयु में दुनिया में भारत की सांस्कृतिक समृद्धि और सभ्यता का मान और सम्मान बढ़ाया। उन्होंने खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा राज्य की उत्कृष्ट युवा प्रतिभाओं को सम्मानित करने की पहल की सराहना करते हुए कहा कि भारत युवाओं का देश है। हमारी युवा प्रतिभाओं को पोषित, पल्लवित और आगे बढ़ाने का काम हम कर रहे हैं। उन्होंने युवाओं को स्वामी विवेकानंद के बताए मार्ग पर चलने का आह्वान करते हुए उन्हें दृढ़ इच्छाशक्ति, परिश्रम, समर्पण और संकल्प से अपने लक्ष्यों की ओर बढ़ने को कहा। 

उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव ने कार्यक्रम में अपने संबोधन में कहा कि स्वामी विवेकानंद ने भारत की सांस्कृतिक शक्ति का परचम पूरी दुनिया में फहराया था। आज करोड़ों युवा उनसे प्रेरणा लेकर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरह से युवा रत्न सम्मान के लिए आवेदन आए हैं, उससे पता चलता है कि छत्तीसगढ़ में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। सरकार ने इन प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने का बीड़ा उठाया है। खेल एवं युवा कल्याण विभाग ने बड़ी पहल करते हुए आज राज्य में पहली बार व्यक्तिगत क्षमता में सुधार तथा समाज सेवा में किए गए उत्कृष्ट कार्यों को मान्यता देने राज्य की प्रतिभाओं को "युवा रत्न सम्मान" से नवाजा है। राज्य के 15 वर्ष से 29 वर्ष की आयु के प्रतिभाओं के उत्कृष्ट कार्यों एवं उपलब्धियों के लिए पुरस्कृत किया है।


खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव यशवंत कुमार ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि युवा रत्न सम्मान के लिए राज्य के बहुत से सक्षम युवाओं के आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें से अलग-अलग क्षेत्रों से एक-एक नाम का चयन बहुत मुश्किल था। राज्य के युवा कई क्षेत्रों में उत्कृष्ट काम कर रहे हैं। उनके कार्यों को सम्मानित और रेखांकित करने के लिए विभाग ने इस वर्ष से ये सम्मान शुरू किए हैं। राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष विश्व विजय सिंह तोमर, रायपुर जिला पंचायत के अध्यक्ष  नवीन कुमार अग्रवाल और खेल एवं युवा कल्याण विभाग की उप संचालक रश्मि  ठाकुर सहित अनेक विभागीय अधिकारी भी कार्यक्रम में मौजूद थे।

राज्य के इन युवाओं को मिला युवा रत्न सम्मान

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रीय युवा दिवस पर आयोजित समारोह में बेमेतरा के एस्ट्रोफिजिक्स में सबसे कम उम्र के वैज्ञानिक एवं पीएचडी छात्र तथा एनएएसओ (NASO) ओलंपियाड में स्वर्ण पदक से सम्मानित पीयूष जायसवाल को छत्तीसगढ़ युवा रत्न सम्मान प्रदान किया। उन्होंने सामाजिक क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली कांकेर की शिल्पा साहू, साहित्य के क्षेत्र से सरगुजा के अमित यादव, नवाचार के लिए महासमुंद की मृणाल विदानी तथा शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों के लिए दुर्ग की परिधि शर्मा को सम्मानित किया।

मुख्यमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ी बिलासपुर की संजू देवी को खेल, कवर्धा के सचिन कुनहरे को कला एवं संस्कृति और आरू साहू को लोककला में उत्कृष्ट कार्यों के लिए युवा रत्न सम्मान दिया। उन्होंने स्वास्थ्य, पर्यावरण, स्वच्छता, साक्षरता, महिला उत्थान, सामाजिक जागरूकता, नशामुक्ति, मतदाता जागरूकता, जल स्रोतों के संरक्षण जैसे अनेक क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्यों के लिए धमतरी जिले के खुरतुली के युवा स्टार सेवा समिति को भी छत्तीसगढ़ युवा रत्न सम्मान प्रदान किया।

वीर बाल दिवस 2025: साहिबज़ादों के बलिदान को नमन, बाल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय सम्मान

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मुख्य बिंदु

  • वीर बाल दिवस प्रतिवर्ष 26 दिसंबर को गुरु गोबिंद सिंह जी के दो सबसे छोटे पुत्रों साहिबज़ादा ज़ोरावर सिंह जी और साहिबज़ादा फतेह सिंह जी के अद्वितीय बलिदान की स्मृति में मनाया जाता है।

  • यह दिवस देश के युवाओं में साहस, त्याग, सत्य और नैतिक दृढ़ता के मूल्यों को सुदृढ़ करता है।

  • वर्ष 2025 में प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार (PMRBP) 5 से 18 वर्ष आयु के बच्चों को वीरता, खेल, सामाजिक सेवा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पर्यावरण तथा कला एवं संस्कृति के क्षेत्रों में उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए प्रदान किए गए।

परिचय

भारत सरकार द्वारा वीर बाल दिवस का आयोजन 26 दिसंबर को किया जाता है, ताकि गुरु गोबिंद सिंह जी के पुत्रों—साहिबज़ादा ज़ोरावर सिंह जी और साहिबज़ादा फतेह सिंह जी—के अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान को श्रद्धांजलि दी जा सके। इसका उद्देश्य आज के युवाओं में निडरता, आत्मसम्मान और राष्ट्रसेवा की भावना का संचार करना है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

सन् 1704 में सिरहिंद (वर्तमान फतेहगढ़ साहिब, पंजाब) में दोनों साहिबज़ादों को धर्म परिवर्तन के दबाव में भी सत्य से विचलित न होने पर दीवार में चुनवा दिया गया। अल्पायु में दिया गया यह बलिदान भारतीय इतिहास में आस्था, साहस और नैतिक शक्ति का अमर प्रतीक है। देशभर में गुरुद्वारों में अरदास और कीर्तन के माध्यम से उनकी वीरगाथा का स्मरण किया जाता है।

उद्देश्य एवं आयोजन

वीर बाल दिवस के अंतर्गत देशभर, विशेषकर विद्यालयों में निबंध, प्रश्नोत्तरी, वाद-विवाद, कथा-वाचन, कला प्रस्तुतियाँ, युवा मार्च और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं। ये कार्यक्रम ऐतिहासिक बलिदान को समकालीन नागरिक मूल्यों से जोड़ते हुए युवाओं की सहभागिता को बढ़ाते हैं।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी युवाओं को संबोधित कर राष्ट्र-निर्माण में बच्चों की भूमिका को रेखांकित करते हैं।

प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार (PMRBP)

PMRBP देश का प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान है, जिसे भारत के राष्ट्रपति द्वारा 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को असाधारण उपलब्धियों के लिए प्रदान किया जाता है।
श्रेणियाँ: वीरता, सामाजिक सेवा, पर्यावरण, खेल, कला एवं संस्कृति, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी।
उद्देश्य: बाल प्रतिभाओं को प्रोत्साहन, प्रेरणा और राष्ट्रीय मंच प्रदान करना।

पात्रता:

  • भारतीय नागरिक, आयु 5–18 वर्ष (31 जुलाई तक)

  • उपलब्धि/घटना आवेदन की अंतिम तिथि से पिछले दो वर्षों में हुई हो

चयन प्रक्रिया:

  • महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा गठित PMRBP समिति की सिफारिश पर

  • असाधारण योग्यता और सामाजिक प्रभाव के आधार पर

पुरस्कार संख्या:

  • सामान्यतः अधिकतम 25 (विशेष मामलों में शिथिलता संभव)

  • मेडल और प्रमाण-पत्र

वीर बाल दिवस एवं PMRBP कार्यक्रम 2025

  • 26 दिसंबर 2025, प्रातः 10 बजे, विज्ञान भवन, नई दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 18 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के 20 बच्चों को PMRBP प्रदान किए।

  • भारत मंडपम, नई दिल्ली में राष्ट्रीय स्तर का कार्यक्रम आयोजित हुआ, जहाँ प्रधानमंत्री ने बच्चों और युवाओं को संबोधित किया।

  • कार्यक्रम ने साहस, सेवा और लचीलेपन की प्रेरक कहानियों को उजागर करते हुए Viksit Bharat@2047 के संकल्प को सुदृढ़ किया।

निष्कर्ष

वीर बाल दिवस साहिबज़ादों के अमर बलिदान को संस्थागत स्मरण में बदलने का सशक्त राष्ट्रीय प्रयास है। यह दिवस इतिहास से प्रेरणा लेकर मूल्य-आधारित शिक्षा, युवा सहभागिता और नैतिक चेतना को आगे बढ़ाता है। वहीं, प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार देश की बाल प्रतिभाओं को पहचान, सम्मान और प्रेरणा देकर भारत के उज्ज्वल भविष्य की नींव को मजबूत करता है।

19 वर्षीय वेदमूर्ति देवव्रत रेखे ने रचा इतिहास: 50 दिनों में पूरा किया शुक्ल यजुर्वेद का दंडक्रम पारायणम, PM मोदी ने दी बधाई

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 वर्षीय वेदमूर्ति देवव्रत महेश रेखे को शुक्ल यजुर्वेद की माध्यंदिनी शाखा के 2000 मंत्रों वाले दंडक्रम पारायणम को 50 दिनों तक बिना किसी बाधा के पूरा करने पर बधाई दी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि देवव्रत महेश रेखे द्वारा किया गया यह अद्भुत कार्य आने वाली पीढ़ियों द्वारा याद रखा जाएगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने X पर पोस्ट करते हुए लिखा:

"19 वर्षीय वेदमूर्ति देवव्रत महेश रेखे ने जो किया है, उसे आने वाली पीढ़ियाँ याद रखेंगी!
भारतीय संस्कृति से प्रेम करने वाला हर व्यक्ति उनके इस कठोर साधना-कार्य पर गर्व महसूस करता है। उन्होंने शुक्ल यजुर्वेद की माध्यंदिनी शाखा के 2000 मंत्रों के दंडक्रम पारायणम को 50 दिनों में बिना किसी व्यवधान के पूरा किया है। इसमें कई वैदिक ऋचाएँ और पवित्र मंत्र शामिल हैं, जिन्हें उन्होंने त्रुटिहीन उच्चारण के साथ पूरा किया। वे हमारी गुरु-परंपरा के सर्वोत्तम गुणों को साकार करते हैं।

काशी के सांसद के रूप में, मुझे बेहद प्रसन्नता है कि यह अद्भुत साधना इसी पावन नगरी में संपन्न हुई। उनके परिवार, संतों, ऋषियों, विद्वानों और देशभर के उन सभी संगठनों को मेरा प्रणाम, जिन्होंने उन्हें सहयोग दिया।"

प्रधानमंत्री ने कहा कि देवव्रत रेखे की यह उपलब्धि भारतीय वैदिक परंपरा की शक्ति और युवा पीढ़ी में उसकी निरंतरता का प्रेरक उदाहरण है।

सर्बानंद सोनोवाल ने असम के युवाओं को ‘Sons of the Soil Emerging Achievers Award’ से सम्मानित किया

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केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री (MoPSW) सर्बानंद सोनोवाल ने आज यहाँ Care Luit द्वारा आयोजित 5वें बायेनियल सन ऑफ द सॉइल अवॉर्ड्स असम 2025 में असम की पाँच उभरती युवा प्रतिभाओं को ‘Sons of the Soil Emerging Achievers Award’ प्रदान किया। यह समारोह विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों को सम्मानित करने और भारत के विकास पथ पर असम की बढ़ती क्षमता और महत्व को रेखांकित करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया।

उभरते प्रतिभा पुरस्कार के विजेता

निम्नलिखित युवा achievers को उनके-अपने क्षेत्रों में उत्कृष्टता, समर्पण और नवाचार के लिए सम्मानित किया गया:

  • सुकृति बरूआ (मीडिया एवं संचार)

  • संगमित्रा कलिता (उद्यमिता)

  • इशारानी बरूआ (खेल)

  • हिमज्योति तलुकदार (कला एवं संस्कृति)

  • डॉ. देबजानी बोराह (संरक्षण/Conservation)

सर्बानंद सोनोवाल का संबोधन

समारोह में बोलते हुए, केंद्रीय मंत्री सोनोवाल ने कहा कि यह पुरस्कार असम के युवाओं की आकांक्षाओं और प्रगति की अदम्य भावना का प्रतीक है।

उन्होंने कहा—

“उत्कृष्टता और दृढ़ता की भावना हमेशा से असम के लोगों की पहचान रही है। आज जिन युवा प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया है, वे एक आत्मविश्वासी और प्रगतिशील पीढ़ी के प्रतिनिधि हैं, जो राष्ट्र-निर्माण में योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध है। उनका सफलता-सफ़र संकल्प, साहस और अनुशासन की शक्ति को दर्शाता है।”

युवाओं से प्रेरणा लेने का आग्रह करते हुए उन्होंने कहा—

“आज के सभी पुरस्कार विजेताओं ने दिखाया है कि सपनों पर विश्वास और निरंतर परिश्रम से कुछ भी हासिल किया जा सकता है। मैं असम और पूर्वोत्तर के युवाओं से आग्रह करता हूँ कि वे इन achievers से प्रेरणा लें और अनुशासन व दृढ़ता के साथ एक मजबूत, सक्षम और आत्मनिर्भर समाज के निर्माण में योगदान करें।”

सोनोवाल ने आगे कहा कि युवाओं की यह प्रगतिशील भावना प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के विकास दृष्टिकोण से भी गहराई से जुड़ी है।

उन्होंने कहा—

“प्रधानमंत्री मोदी जी का मार्गदर्शक मंत्र — ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ — हमें याद दिलाता है कि विकास तभी सार्थक है जब वह समावेशी हो। सामूहिक प्रयास, विश्वास, एकता और साझा प्रगति के बल पर आज भारत विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है।”

लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड्स

केंद्रीय मंत्री ने लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड्स के प्राप्तकर्ताओं को भी सम्मानित किया:

  • अरुण नाथ (कला एवं संस्कृति)

  • रवि शंकर रवि (न्यूज़-मीडिया)

  • मैनेउद्दीन अहमद (खेल)

  • लखिमी बरूआ (उद्यमिता)

  • सिमंता दास (लोक सेवा)

उन्होंने डॉ. अलका शर्मा और अक्षर फाउंडेशन को सोशल सेक्टर डेवलपमेंट अवॉर्ड के लिए बधाई दी, विशेषकर शिक्षा और सामुदायिक सशक्तिकरण में उनके परिवर्तनकारी काम के लिए।

अवार्ड्स का महत्व

2016 में शुरू हुए Son of the Soil Awards — Care Luit की पहल — असम के गौरव, परंपरा और सामाजिक योगदान को प्रतिबिंबित करने वाले व्यक्तियों व संगठनों को सम्मानित करते हैं।

सोनोवाल ने कहा—

“उत्कृष्टता का सम्मान और अधिक उत्कृष्टता को प्रेरित करता है। ऐसे सम्मान युवाओं में आत्मविश्वास और आकांक्षा की संस्कृति को मजबूत करते हैं।”

समापन

अपने संबोधन के अंत में सोनोवाल ने प्रतिभा विकास और राष्ट्रीय प्रगति में असम की भूमिका को और मजबूत करने के संकल्प को दोहराया।

उन्होंने कहा—

“सामूहिक प्रयास और स्पष्ट दृष्टि के साथ, असम निरंतर प्रगति करता रहेगा। हम मिलकर एक मजबूत भारत का निर्माण करेंगे।”


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