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अब समुद्र से मिलेगा पीने का पानी!

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 नया साइफ़न-आधारित थर्मल डीसैलिनेशन सिस्टम : खारे समुद्र के पानी से सस्ता और तेज़ पीने का पानी

एक नया साइफ़न-आधारित थर्मल डीसैलिनेशन सिस्टम अब खारे समुद्री पानी को पीने योग्य मीठे पानी में बदल सकता है—मौजूदा तरीकों की तुलना में तेज़, सस्ता और अधिक भरोसेमंद।

पारंपरिक सोलर स्टिल्स जो प्रकृति के जलचक्र की नकल करते हैं, लंबे समय से जल शोधन के सरल उपकरण माने जाते रहे हैं। लेकिन इनमें दो प्रमुख चुनौतियाँ आती हैं:

  • नमक जमना – वाष्पीकरण सतह पर परत जम जाती है, जिससे जल प्रवाह रुक जाता है।

  • सीमा बाधाएँ – विकिंग (wicking) सामग्री पानी को केवल 10–15 सेमी तक ही खींच सकती है, जिससे उत्पादन सीमित रहता है।

भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) के शोधकर्ताओं ने इन दोनों चुनौतियों को एक सरल सिद्धांत—साइफ़न प्रक्रिया (siphonage)—से हल किया है।

कैसे काम करता है यह सिस्टम?

सिस्टम के केंद्र में है एक कंपोज़िट साइफ़न:

  • कपड़े की विक सतत रूप से खारे पानी को खींचती है।

  • गुरुत्वाकर्षण पानी को निरंतर प्रवाहित करता है।

  • नमक जमने से पहले ही बहकर निकल जाता है, जिससे सतह साफ़ रहती है।

खारा पानी एक गर्म धातु सतह पर पतली परत में फैलता है, वाष्पित होता है और पास ही ठंडी सतह पर (सिर्फ़ 2 मिमी की दूरी पर) संघनित होकर मीठे पानी में बदल जाता है। यह अत्यंत संकीर्ण एयर-गैप दक्षता को बढ़ाता है और सूर्य की रोशनी में प्रति वर्ग मीटर प्रति घंटे 6 लीटर से अधिक साफ़ पानी उपलब्ध कराता है—जो पारंपरिक सोलर स्टिल्स से कई गुना अधिक है।

प्रमुख विशेषताएँ

  • बहु-स्तरीय डिज़ाइन: गर्मी का पुन: उपयोग करके अधिकतम उत्पादन।

  • कम लागत और टिकाऊ: केवल एल्युमिनियम और कपड़े जैसे साधारण पदार्थों से निर्मित।

  • ऊर्जा लचीला: सौर ऊर्जा या अपशिष्ट ऊष्मा से संचालित।

  • नमक प्रतिरोधी: 20% तक खारे पानी को भी बिना अवरुद्ध हुए शुद्ध कर सकता है।

संभावित उपयोग

  • दूरदराज़ और ऑफ-ग्रिड समुदाय

  • आपदा प्रभावित क्षेत्र

  • शुष्क तटीय इलाके

  • द्वीप देश

यह शोध पत्रिका Desalination में प्रकाशित हुआ है और भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) द्वारा समर्थित है।

शोधकर्ताओं के शब्दों में, यह तकनीक है—“स्केलेबिलिटी, नमक-प्रतिरोध और सरलता”—एक प्यासे विश्व के लिए समाधान।


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