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आधुनिक युद्धपोत ‘तारागिरी’ की डिलीवरी: स्वदेशी डिज़ाइन व निर्माण की नई मिसाल

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तारागिरी (यार्ड 12653)—निलगिरी श्रेणी (प्रोजेक्ट 17A) का चौथा और मझगाँव डॉक शिपबिल्डिंग लिमिटेड (MDL) द्वारा निर्मित तीसरा युद्धपोत—28 नवंबर 2025 को मुंबई स्थित MDL में भारतीय नौसेना को सौंप दिया गया। यह उपलब्धि युद्धपोत डिज़ाइन और निर्माण में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। प्रोजेक्ट 17A फ्रिगेट्स बहुउद्देश्यीय और आधुनिक युद्ध आवश्यकताओं के अनुरूप डिजाइन किए गए हैं, जो वर्तमान और भावी समुद्री चुनौतियों से निपटने में सक्षम हैं।

तारागिरी पूर्व INS Taragiri का पुनर्जन्म है, जो एक लींडर श्रेणी का फ्रिगेट था और 16 मई 1980 से 27 जून 2013 तक भारतीय नौसेना का हिस्सा रहा, तथा राष्ट्र की सेवा में 33 वर्ष का गौरवशाली योगदान दिया। यह अत्याधुनिक फ्रिगेट नौसैनिक डिज़ाइन, स्टील्थ, अग्निशक्ति, स्वचालन और जीवटता में एक बड़ी छलांग का प्रतीक है और युद्धपोत निर्माण में आत्मनिर्भर भारत की पहचान दर्शाता है।

वॉरशिप डिज़ाइन ब्यूरो (WDB) और वॉरशिप ओवरसीइंग टीम (मुंबई) की देखरेख में विकसित प्रोजेक्ट 17A फ्रिगेट्स स्वदेशी डिज़ाइन, स्टील्थ तकनीक, जीवटता और युद्ध क्षमता में एक पीढ़ीगत उन्नयन हैं। इंटीग्रेटेड कंस्ट्रक्शन की अवधारणा पर आधारित इन जहाज़ों का निर्माण निर्धारित समयसीमा में पूरा किया गया।

P17A जहाज़ आधुनिक हथियार और सेंसर प्रणालियों से लैस हैं, जो P17 (शिवालिक) श्रेणी की तुलना में अधिक उन्नत हैं। इनमें CODOG (कम्बाइंड डीज़ल ऑर गैस) प्रणोदन प्रणाली लगी है, जिसमें डीज़ल इंजन और गैस टर्बाइन दोनों शामिल हैं, जो प्रत्येक शाफ्ट पर कंट्रोलरेबल पिच प्रोपेलर (CPP) को चलाते हैं। साथ ही, अत्याधुनिक इंटीग्रेटेड प्लेटफॉर्म मैनेजमेंट सिस्टम (IPMS) भी स्थापित है।

इनकी शक्तिशाली हथियार और सेंसर शृंखला में ब्रहमोस सुपरसोनिक मिसाइल, MF-STAR और MRSAM प्रणाली, 76 मिमी SRGM, 30 मिमी और 12.7 मिमी क्लोज़-इन वेपन सिस्टम, तथा पनडुब्बी रोधी युद्ध के लिए रॉकेट और टॉरपीडो शामिल हैं।

तारागिरी पिछले 11 महीनों में भारतीय नौसेना को सौंपा गया चौथा P17A युद्धपोत है। पहले दो जहाज़ों के निर्माण अनुभव ने निर्माण समय को कम करने में मदद की, जिसके परिणामस्वरूप तारागिरी मात्र 81 महीनों में तैयार हुआ, जबकि प्रथम श्रेणी के जहाज़ (निलगिरी) को 93 महीने लगे थे। शेष तीन P17A जहाज़ (एक MDL में और दो GRSE में) अगस्त 2026 तक क्रमवार रूप से नौसेना को सौंप दिए जाएंगे।

तारागिरी की डिलीवरी देश की डिज़ाइन, शिप निर्माण और इंजीनियरिंग क्षमताओं को प्रदर्शित करती है और युद्धपोत डिज़ाइन व निर्माण में भारतीय नौसेना के आत्मनिर्भरता पर निरंतर ध्यान को दर्शाती है। 75% स्वदेशीकरण के साथ, इस परियोजना में 200 से अधिक MSMEs शामिल हुए और लगभग 4,000 प्रत्यक्ष तथा 10,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित हुए।


भारतीय नौसेना कमीशन करेगी महे-क्लास एंटी-सबमरीन शैलो वाटर क्राफ्ट "महे"

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 भारतीय नौसेना 24 नवंबर 2025 को मुंबई स्थित नेवल डॉकयार्ड में महे, महे-क्लास एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट (ASW-SWC) की पहली पोत, को कमीशन करेगी।

इस समारोह की मेज़बानी वाइस एडमिरल कृष्ण स्वामिनाथन, फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, वेस्टर्न नेवल कमांड करेंगे और इसका अध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी, चीफ ऑफ द आर्मी स्टाफ रहेंगे।

महाक्लास की महे पोत का कमीशनिंग भारत में नई पीढ़ी के स्वदेशी शैलो-वाटर युद्धपोतों के आगमन का प्रतीक है—स्लीक, तेज और पूर्ण रूप से भारतीय। इसमें 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है, जो भारत की युद्धपोत डिज़ाइन, निर्माण और इंटीग्रेशन में बढ़ती महारत को दर्शाता है।

यह पोत पश्चिमी समुद्री सीमाओं पर ‘साइलेंट हंटर’ के रूप में कार्य करेगी—आत्मनिर्भरता से संचालित और भारत के समुद्री सीमा सुरक्षा के लिए समर्पित।

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