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डीआरडीओ ने लंबी दूरी की भूमि आक्रमण क्रूज़ मिसाइल (LRLACM) का सफल उड़ान परीक्षण किया

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नई दिल्ली- रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने 15 जून 2026 को ओडिशा तट स्थित डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम द्वीप से लॉन्ग रेंज लैंड अटैक क्रूज़ मिसाइल (LRLACM) का सफल उड़ान परीक्षण किया। परीक्षण के सभी निर्धारित उद्देश्यों को पूर्णतः हासिल कर लिया गया। यह पुष्टि चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज (ITR) द्वारा तैनात विभिन्न ट्रैकिंग उपकरणों से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर की गई।

एलआरएलएसीएम एक स्वदेशी रूप से विकसित मिसाइल है, जिसके सभी उप-प्रणालियों का विकास डीआरडीओ की विभिन्न प्रयोगशालाओं तथा भारतीय उद्योग साझेदारों द्वारा किया गया है। इस परियोजना की नोडल प्रयोगशाला एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (ADE), बेंगलुरु है।

मिसाइल के प्रक्षेपण के दौरान डीआरडीओ के वरिष्ठ अधिकारी तथा भारतीय नौसेना और भारतीय वायु सेना के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एलआरएलएसीएम के सफल उड़ान परीक्षण पर डीआरडीओ की टीम और उद्योग साझेदारों को बधाई दी। उन्होंने इसे भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता और स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

रक्षा सचिव, रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग (R&D) के सचिव तथा डीआरडीओ के अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह ने प्रक्षेपण के दौरान सभी गतिविधियों की निगरानी की। उन्होंने सफल परीक्षण में योगदान देने वाले सभी वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और टीम सदस्यों को बधाई दी।

यह सफल परीक्षण भारत की लंबी दूरी की सटीक प्रहार क्षमता को और सशक्त बनाने के साथ-साथ रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

भारतीय नौसेना के लिए 20 उन्नत जीएनएसएस जैमर खरीदने हेतु रक्षा मंत्रालय ने 449 करोड़ रुपये के अनुबंध पर किए हस्ताक्षर

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रक्षा मंत्रालय ने भारतीय नौसेना के लिए 20 उन्नत क्षमता वाले ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (Enhanced Capability Global Navigation Satellite System - ECGNSS) जैमर की खरीद के लिए Accord Software and Systems Private Limited के साथ 449 करोड़ रुपये का अनुबंध किया है। इस प्रणाली में न्यूनतम 75 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया जाएगा।

यह अनुबंध 10 जून 2026 को राजेश कुमार सिंह की उपस्थिति में नई दिल्ली में हस्ताक्षरित किया गया। यह खरीद ‘बाय (इंडियन-इंडिजिनसली डिजाइन्ड, डेवलप्ड एंड मैन्युफैक्चर्ड)’ श्रेणी के अंतर्गत की गई है।

इस अत्याधुनिक प्रणाली की प्रमुख क्षमताओं में दुश्मन के ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (GNSS) रिसीवर की सिग्नल प्राप्ति और ट्रैकिंग क्षमता को बाधित करना, सिग्नल स्पूफिंग तथा भ्रामक जैमिंग (Deceptive Jamming) शामिल है। इसके शामिल होने से भारतीय नौसेना के युद्धपोत बहु-खतरा (Multi-Threat) वातावरण में अधिक सुरक्षित और प्रभावी ढंग से संचालन कर सकेंगे।

यह अनुबंध सरकार की ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ पहल के प्रति प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है तथा देश की समुद्री सुरक्षा संरचना को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। साथ ही, यह उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकी के स्वदेशीकरण और भारत की रक्षा क्षमताओं को सशक्त बनाने के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि भी है।


INS तारागिरी के निर्माण में SAIL का अहम योगदान, भारतीय नौसेना में शामिल

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स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL), जो इस्पात मंत्रालय के अंतर्गत एक महारत्न केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम है, ने नीलगिरी-श्रेणी (प्रोजेक्ट 17A) की स्टील्थ फ्रिगेट के चौथे जहाज INS तारागिरी के कमीशनिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस युद्धपोत को 03 अप्रैल 2026 को भारतीय नौसेना में शामिल किया गया।

यह युद्धपोत मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड द्वारा निर्मित किया गया है, जिसमें SAIL द्वारा आपूर्ति की गई लगभग 4,000 टन विशेष ग्रेड स्टील प्लेट्स का पूर्ण उपयोग किया गया है। यह विशेष स्टील SAIL के बोकारो, भिलाई और राउरकेला स्थित एकीकृत इस्पात संयंत्रों में तैयार किया गया है, जो कंपनी की उन्नत धातुकर्म क्षमताओं और उच्च गुणवत्ता मानकों को दर्शाता है।

SAIL भारत के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण योगदानकर्ता रहा है और ‘आत्मनिर्भर भारत’ तथा ‘मेक इन इंडिया’ जैसे सरकारी अभियानों को निरंतर समर्थन देता रहा है। कंपनी पहले भी कई महत्वपूर्ण नौसैनिक परियोजनाओं के लिए विशेष स्टील की आपूर्ति कर चुकी है, जिनमें स्वदेशी विमानवाहक पोत INS विक्रांत और प्रोजेक्ट 17A के पहले तीन जहाज—INS नीलगिरी, INS हिमगिरी और INS उदयगिरी शामिल हैं।

INS तारागिरी का सफल शामिल होना भारत की रक्षा निर्माण में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है और यह देश की समुद्री क्षमताओं को मजबूत करने में घरेलू इस्पात उद्योग की अहम भूमिका को दर्शाता है।


ऑपरेशन सिंदूर में डीआरडीओ की निर्णायक भूमिका, 68वें स्थापना दिवस पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की सराहना

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि डीआरडीओ द्वारा विकसित हथियार प्रणालियों ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान निर्णायक भूमिका निभाई, जो राष्ट्रीय हितों की रक्षा के प्रति संगठन की व्यावसायिकता और प्रतिबद्धता का प्रमाण है। उन्होंने यह बात 01 जनवरी 2026 को नई दिल्ली स्थित डीआरडीओ मुख्यालय में संगठन के 68वें स्थापना दिवस के अवसर पर कही।

रक्षा मंत्री ने स्वदेशी क्षमताओं को सशक्त बनाने तथा सशस्त्र बलों को अत्याधुनिक तकनीक और उपकरणों से लैस करने के लिए डीआरडीओ की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन के दौरान डीआरडीओ के उपकरणों ने निर्बाध रूप से कार्य किया, जिससे सैनिकों का मनोबल बढ़ा।

राजनाथ सिंह ने विश्वास व्यक्त किया कि डीआरडीओ ‘सुदर्शन चक्र’ के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, जिसकी घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से स्वतंत्रता दिवस 2025 के अपने संबोधन में की थी। उन्होंने कहा, “इस पहल के अंतर्गत अगले एक दशक में हमारे महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को पूर्ण हवाई सुरक्षा प्रदान करने हेतु एयर डिफेंस सिस्टम से लैस करने की जिम्मेदारी डीआरडीओ की है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान आधुनिक युद्ध में वायु रक्षा के महत्व को हमने प्रत्यक्ष रूप से देखा है। मुझे विश्वास है कि डीआरडीओ इस लक्ष्य को शीघ्र प्राप्त करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य करेगा।”

रक्षा मंत्री ने डीआरडीओ की सराहना करते हुए कहा कि वह केवल तकनीक का सृजन करने वाला ही नहीं, बल्कि विश्वास का निर्माण करने वाला संगठन भी बन गया है, जिससे जनता उसे आशा, विश्वास और निश्चितता के साथ देखती है। निजी क्षेत्र के साथ डीआरडीओ के सहयोग को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि उद्योग, शैक्षणिक संस्थानों और स्टार्ट-अप्स के साथ बढ़ते तालमेल से एक सशक्त और समन्वित रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण हुआ है।

उन्होंने कहा, “डीआरडीओ ने अपने सिस्टम, प्रक्रियाओं और कार्यशैली में निरंतर सुधार किया है। खरीद प्रक्रिया से लेकर परियोजना प्रबंधन तक, उद्योग सहभागिता से लेकर स्टार्ट-अप्स और एमएसएमई के साथ सहयोग तक—हर स्तर पर कार्य को सरल, तेज़ और विश्वसनीय बनाने का प्रयास स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।”

रक्षा मंत्री ने डीआरडीओ से आग्रह किया कि वह तेजी से विकसित हो रहे तकनीकी परिवेश के साथ कदमताल करते हुए समय की मांग के अनुरूप उत्पाद विकसित करता रहे। उन्होंने नवाचार पर निरंतर ध्यान केंद्रित करने और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने के नए क्षेत्रों की पहचान करने का भी आह्वान किया। डीप टेक और अगली पीढ़ी की तकनीकों पर डीआरडीओ के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि इस दिशा में प्रगति से न केवल देश की क्षमताएं बढ़ेंगी, बल्कि रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र भी सुदृढ़ होगा।

यह रेखांकित करते हुए कि वर्तमान युग केवल विज्ञान का नहीं, बल्कि निरंतर विकास और सतत सीखने का युग है,राजनाथ सिंह ने कहा कि तकनीक स्कैनिंग, क्षमता आकलन और भविष्य की तैयारी अब केवल शब्द नहीं रह गए हैं। उन्होंने कहा, “दुनिया हर दिन बदल रही है। तकनीक, नवाचार और युद्ध के नए क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, जिससे कल का ज्ञान आज अप्रासंगिक हो सकता है। हमें यह कभी नहीं मानना चाहिए कि सीखने की प्रक्रिया समाप्त हो गई है। हमें लगातार सीखते रहना होगा और स्वयं को चुनौती देते हुए नई पीढ़ी के लिए मार्ग प्रशस्त करना होगा।”

बैठक के दौरान, रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव एवं डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने रक्षा मंत्री को संगठन की वर्तमान आरएंडडी गतिविधियों, 2025 की उपलब्धियों, उद्योग, स्टार्ट-अप्स एवं अकादमिक संस्थानों को बढ़ावा देने की विभिन्न पहलों तथा 2026 के रोडमैप की जानकारी दी। रक्षा मंत्री को वर्ष 2026 के लिए निर्धारित प्रमुख लक्ष्यों और संगठन में सुधार हेतु किए जा रहे विभिन्न सुधारों से भी अवगत कराया गया।

इस अवसर पर रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ भी उपस्थित थे। इसके अलावा, डीआरडीओ के महानिदेशक, कॉरपोरेट निदेशक तथा अन्य वरिष्ठ वैज्ञानिक और अधिकारी भी समारोह में शामिल हुए।

भारतीय तटरक्षक बल के नए फास्ट पेट्रोल वेसल ‘अमूल्य’ का गोवा में कमीशनिंग

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भारतीय तटरक्षक बल (ICG) के नए-पीढ़ी के आदम्य (Adamya) श्रेणी के फास्ट पेट्रोल वेसल की श्रृंखला में शामिल तीसरा पोत आईसीजी जहाज़ ‘अमूल्य’ का 19 दिसंबर 2025 को गोवा में कमीशनिंग किया गया। 51 मीटर लंबा यह पोत गोवा शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा स्वदेशी रूप से डिजाइन व निर्मित है और इसमें 60% से अधिक स्वदेशी घटक उपयोग किए गए हैं। ‘अमूल्य’ नाम इस जहाज़ की विशेषताओं और आत्मनिर्भर भारत व मेक-इन-इंडिया पहल के अनुरूप रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत की प्रगति को दर्शाता है। आधुनिक डिजाइन दर्शन के तहत यह पोत उच्च दक्षता, अधिक सहनशक्ति और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता से सुसज्जित है।

दो 3000 किलोवाट उन्नत डीज़ल इंजनों से संचालित यह जहाज़ 27 नॉट्स की अधिकतम गति और 1,500 नॉटिकल माइल की परिचालन क्षमता प्रदान करता है, जिससे भारत के समुद्री क्षेत्रों में लंबी अवधि के मिशन संभव होंगे। स्वदेशी अत्याधुनिक हथियारों और प्रणालियों से लैस ‘अमूल्य’ बेहतर संचालन क्षमता, लचीलापन और समुद्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन सुनिश्चित करता है। यह निगरानी, अवरोधन, खोज एवं बचाव (SAR), तस्करी-रोधी अभियान तथा प्रदूषण प्रतिक्रिया जैसे महत्वपूर्ण दायित्व निभाएगा, जिससे पूर्वी तट की समुद्री सुरक्षा और सुदृढ़ होगी।

आईसीजीएस अमूल्य का बेस पारादीप, ओडिशा में होगा और यह कमांडर, कोस्ट गार्ड रीजन (नॉर्थ ईस्ट) के प्रशासनिक एवं परिचालन नियंत्रण में कार्य करेगा। जहाज़ की कमान कमांडेंट (JG) अनुपम सिंह के पास है, जिसमें 05 अधिकारी और 34 कार्मिक तैनात हैं।

कमीशनिंग समारोह की अध्यक्षता संयुक्त सचिव (IC), सेरेमोनियल एवं CAO अमिताभ प्रसाद ने की। कार्यक्रम में भारतीय तटरक्षक बल, केंद्र एवं राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी तथा गोवा शिपयार्ड लिमिटेड के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। यह कमीशनिंग ICG के बेड़े के विस्तार की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है, जो तटीय सुरक्षा को मजबूत करने में उल्लेखनीय योगदान देगा।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सिम्बायोसिस यूनिवर्सिटी के छात्रों को प्रेरित किया; ऑपरेशन सिंदूर में भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमता को बताया सफलता की मिसाल

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16 अक्टूबर, 2025 को पुणे में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सिम्बायोसिस स्किल्स और प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के छात्रों को संबोधित किया और उन्हें विश्वास और धैर्य जैसे गुणों के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर भारत की बढ़ती स्वदेशी क्षमता का उज्ज्वल प्रमाण है, जो सरकार के निरंतर प्रयासों का परिणाम है, जिससे देश में आत्मनिर्भर रक्षा निर्माण प्रणाली विकसित हुई है।”

रक्षा मंत्री ने छात्रों को बताया कि जब सरकार ने भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने का काम शुरू किया, तो शुरुआत में यह कठिन लगा। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में घरेलू रक्षा निर्माण को बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास किए गए और इन प्रयासों के परिणाम सकारात्मक दिखाई देने लगे।

राजनाथ सिंह ने कहा, “हमने प्रतिज्ञा की कि हम रक्षा क्षेत्र को बदलेंगे, क्योंकि स्वतंत्रता के बाद हम हथियारों के लिए अन्य देशों पर निर्भर रहे। हमने भारत में हथियार बनाने की राजनीतिक इच्छा और कानून नहीं होने के कारण हथियार खरीदने की आदत डाल ली थी। अब हमारा संकल्प है कि भारत अपने सैनिकों के लिए स्वदेशी हथियार बनाए। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हमारे सैनिकों ने बड़ी मात्रा में मेड-इन-इंडिया उपकरणों का उपयोग करके निर्धारित लक्ष्य हासिल किए।”

युवा पीढ़ी के योगदान को स्वीकार करते हुए उन्होंने बताया कि पिछले 10 वर्षों में वार्षिक रक्षा उत्पादन 46,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 1.5 लाख करोड़ रुपये हो गया, जिसमें लगभग 33,000 करोड़ रुपये निजी क्षेत्र द्वारा योगदान किया गया। उन्होंने 2029 तक 3 लाख करोड़ रुपये का रक्षा उत्पादन और 50,000 करोड़ रुपये का निर्यात लक्ष्य हासिल करने का भरोसा जताया।

रक्षा मंत्री ने छात्रों से आग्रह किया कि वे केवल शैक्षणिक उपलब्धियों तक सीमित न रहें, बल्कि रचनाकार, नवप्रवर्तक और राष्ट्रीय विकास में योगदानकर्ता बनें। उन्होंने कहा कि सच्ची सफलता केवल डिग्री हासिल करने में नहीं, बल्कि ज्ञान को समाज के लाभ के लिए लागू करने में है।

कौशल विकास के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, “अब यह दौर नहीं रहा कि ‘आप क्या जानते हैं?’ बल्कि अब सवाल है, ‘आप क्या कर सकते हैं?’ जो ज्ञान लागू नहीं किया जा सकता, वह अधूरा है। कौशल, सीखने और करने के बीच का पुल है।”

तकनीक, विशेषकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के प्रभाव पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि AI इंसानों की जगह नहीं लेगा, बल्कि जो AI का उपयोग करेंगे, वही उन लोगों की जगह लेंगे जो नहीं करेंगे। तकनीक केवल उपकरण होनी चाहिए, इंसानी संवेदनशीलता, मूल्य और नैतिकता का विकल्प नहीं। साथ ही उन्होंने सोशल मीडिया और बाहरी दबावों से निपटने के लिए युवाओं को अपने सपनों का पालन करने और तुलना में फंसने से बचने की सलाह दी।

रक्षा मंत्री ने कहा कि जैसे भारत अपने अमृत काल में प्रवेश कर रहा है और 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की ओर अग्रसर है, वैसे ही छात्र भी अपने जीवन के सबसे निर्णायक चरण में प्रवेश कर रहे हैं। “अगले 20-25 वर्ष केवल आपके करियर नहीं, बल्कि राष्ट्र के भाग्य को भी आकार देंगे। अपनी महत्वाकांक्षा से देश के परिवर्तन को ऊर्जा दें।”

इस अवसर पर रक्षा और एयरोस्पेस तकनीक के School of Defence and Aerospace Technology का उद्घाटन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने किया। इस अवसर पर राज्य सरकार के अन्य मंत्री और विश्वविद्यालय के कुलपति भी उपस्थित थे।

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