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कबीरपंथ का छत्तीसगढ़ के जनजीवन में व्यापक प्रभाव - मुख्यमंत्री साय

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छत्तीसगढ विकसित प्रदेश बनने तेजी से अग्रसर

संत समागम समारोह की राशि 50 लाख से बढाकर 75 लाख करने की घोषणा

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ तेजी से विकसित प्रदेश बनने की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को बहुत आगे ले जाना है और विकसित प्रदेश के रूप में खड़ा करना है। उन्होंने संत समागम समारोह दामाखेड़ा की राशि 50 लाख रूपये से बढाकर 75 लाख  रूपये करने की घोषणा की।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय कल रविवार को कबीर धर्मनगर दामाखेड़ा में माघ पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित सतगुरु कबीर संत समागम समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने पंथ श्री उदित मुनि नाम साहेब,पंथ श्री प्रकाश मुनि नाम साहब को चादर श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद लिया और प्रदेश की खुशहाली की कामना की।  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय माघ पूर्णिमा की शुभकामनायें देते हुए कहा कि कबीर धर्म नगर दामाखेड़ा का संत समागम समारोह हर साल भव्य होते जा रहा है जो लोगों में बढ़ते आस्था का प्रतीक है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कबीरपंथ का छत्तीसगढ़ के जनजीवन में व्यापक प्रभाव है इसलिए यहां के लोग शांति प्रिय है। उन्होंने कहा कि वे बचपन से ही कबीर पंथ से परिचित है और उनके गांव बगिया में भी 8-10 कबीर पंथी परिवार है। उन्होंने दामाखेड़ा का नाम कबीर धर्मनगर करने के संबंध में बताया कि राजपत्र में प्रकाशन हेतु अंतिम प्रक्रिया जारी है मुख्यमंत्री साय ने कहा कि डबल इंजन की सरकार से लोगों को सीधा फायदा मिल रहा है। अब ​मुख्यमंत्री ने कहा कि छतीसगढ़ के विकास की बाधा की नक्सलवाद अब जल्द ही जड़ से समाप्त होने वाला है। नक्सलवाद का प्रदेश से 31 मार्च 2026 तक समूल नष्ट हो जाएगा। हमने जनता से किया वादा को तेजी से पूरा किया है। 

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि पंथ श्री उदित मुनि नाम साहब का चादर तिलक अद्भुत और अलौकिक रहा। पंथ श्री ने वृक्षारोपण, समाज सेवा, नशामुक्ति एवं युवा उत्थान के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। उन्होंने पंथ श्री का दर्शन कर प्रदेश की सुख समृद्धि का आशीर्वाद लिया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय कबीर आश्रम के विभिन्न विकास कार्यों को लेकर हमेशा चिंतित रहते है और शीघ्र पूरा करने के निर्देश देते हैं। कार्यक्रम को खाद्य मंत्री दयाल दास बघेल, भाटापारा विधायक इंद्र साव ने भी सम्बोधित किया। 

समारोह में पंथश्री प्रकाश मुनि नाम साहब ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का कबीरपंथी समाज की ओर से आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इस वर्ष माघ मेला के प्रथम दिन बसंत पंचमी के अवसर पर कबीर पंथ के नये संवाहक 16 वें वंशाचार्य पंथी श्री उदित मुनि नाम साहेब का चादर तिलक संपन्न हुआ। उन्होंने बताया कि इस वर्ष देश के विभिन्न प्रांतों के साथ ही विदेशों से भी कबीरपंथी संत समागम मेला में आये हैं। समारोह को शासन प्रशासन का भरपूर सहयोग मिला है। 

इस अवसर पर पंथश्री उदित मुनि नाम साहब, गुरूगोसांई भानुप्रताप साहब, विधायक भावना बोहरा, ईश्वर साहु, पूर्व सांसद अभिषेक सिंह, पूर्व विधायक शिवरतन शर्मा सहित सदगुरू कबीर धर्मदास साहेब वंशावली प्रतिनिधि सभा के प्रतिनिधिगण, अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में कबीरपंथ के अनुयायी उपस्थित थे।

सनातन परंपरा और आध्यात्मिक चेतना का सशक्त संगम है शिव पुराण: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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प्रधानमंत्री की माताश्री हीराबेन मोदी की पुण्य स्मृति में आयोजित शिव महापुराण कथा में शामिल हुए मुख्यमंत्री

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि सनातन परंपरा और आध्यात्मिक आयोजनों से समाज में नैतिकता, संस्कार और सामाजिक समरसता को बल मिलता है। वे आज रायगढ़ जिले के बरगढ़ खोला अंचल के ग्राम-खम्हार में आयोजित शिव महापुराण कथा में को सम्बोधित कर रहे थे।  

गौरतलब है कि इस कथा का आयोजन देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की माताश्री हीराबेन मोदी की पुण्य स्मृति में श्रद्धांजलि स्वरूप किया जा रहा है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने विधिवत पूजा-अर्चना कर भगवान शिव से प्रदेश की जनता के लिए सुख, समृद्धि के लिए कामना की। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त बाल कथा व्यास कृष्णा दुबे महाराज से भेंटकर उनका आशीर्वाद लिया।

मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि यह वही भूमि है जहां प्रभु श्रीराम ने अपने वनवास काल का अधिकांश समय व्यतीत किया। माता शबरी के जूठे बेरों की महिमा आज भी जीवंत है। उन्होंने कहा कि अयोध्या में प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा के अवसर पर छत्तीसगढ़ के सुगंधित चावल से बना प्रसाद अर्पित किया गया, जो राज्य के लिए गर्व का विषय है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा संचालित रामलला दर्शन योजना के तहत अब तक दो वर्षों में 40 हजार से अधिक श्रद्धालु अयोध्या दर्शन कर चुके हैं। वहीं मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के अंतर्गत 19 चिन्हित तीर्थ स्थलों की यात्रा कराते हुए अब तक 5 हजार से अधिक वरिष्ठ नागरिकों को लाभान्वित किया गया है। कार्यक्रम को वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने भी संबोधित किया। 

शिव महापुराण कथा का वाचन अकोला (महाराष्ट्र) से पधारे अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त बाल कथा व्यास कृष्णा दुबे महाराज द्वारा संगीतमय शैली में किया जा रहा है, जिसमें भगवान शिव, माता पार्वती सहित संपूर्ण शिव चरित्र का भावपूर्ण वर्णन किया जा रहा है।

कार्यक्रम में लोकसभा सांसद राधेश्याम राठिया और कमलेश जांगड़े राज्यसभा सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष शिखा गबेल, रायगढ़ के महापौर जीवर्धन चौहान, नगर पालिका अध्यक्ष खरसिया कमल गर्ग सहित अनेक जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन उपस्थित थे।

उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने आचार्य हंसरत्न सुरिश्वरजी महाराज के 180 उपवास पारणा समारोह में शिरकत की

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भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज विज्ञान भवन, नई दिल्ली में जैन आचार्य हंसरत्न सुरिश्वरजी महाराज जी के अष्टम 180 उपवास पारणा समारोह में शिरकत की।

सभा को संबोधित करते हुए, उपराष्ट्रपति ने दिव्य तपस्वी आचार्य हंसरत्न सुरिश्वरजी महाराज के पवित्र महापरना में भाग लेने पर अपनी गहरी श्रद्धा व्यक्त की।

जैन धर्म, जो दुनिया के सबसे प्राचीन धर्मों में से एक है, के महत्वपूर्ण योगदान को उजागर करते हुए, राधाकृष्णन ने कहा कि इसके उपदेश — अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह और अनेकांतवाद — ने भारत और विश्व पर स्थायी प्रभाव डाला है। उन्होंने कहा कि अहिंसा, जिसे महात्मा गांधी ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अपनाया, आज भी वैश्विक शांति आंदोलनों को प्रेरित करता है। उपराष्ट्रपति ने यह भी बताया कि जैन धर्म का शाकाहार, प्राणियों के प्रति करुणा और सतत जीवन जीने का तरीका विश्वभर में पर्यावरणीय जिम्मेदारी का आदर्श माना जाता है।

अपने व्यक्तिगत अनुभव को साझा करते हुए, राधाकृष्णन ने कहा कि उन्होंने 25 साल पहले काशी यात्रा के दौरान शाकाहार अपनाया, और यह उन्हें विनम्रता, परिपक्वता और सभी प्राणियों के प्रति प्रेम का भाव विकसित करने में मदद करता है।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार के प्रयासों की सराहना की, जिनके तहत प्राकृत भाषा को ‘क्लासिकल भाषा’ का दर्जा दिया गया और ज्ञान भारत मिशन जैसी पहलों के माध्यम से जैन पांडुलिपियों का संरक्षण किया गया।

उपराष्ट्रपति ने तमिलनाडु में जैन धर्म के ऐतिहासिक प्रसार और तमिल संस्कृति पर इसके व्यापक प्रभाव पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जैन धर्म ने संगम और पोस्ट-संगम काल में तमिल साहित्य में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, जिसमें इलंगो अदिगल का सिलप्पाधिकरम और कोंगु वेलिर का पेरुंगथाई जैसी कृतियाँ शामिल हैं, जो अहिंसा, सत्य और त्याग के दार्शनिक और नैतिक आदर्शों को दर्शाती हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि तिरुक्कुरल और संगम साहित्य पर जैन धर्म का प्रभाव दिखाई देता है।राधाकृष्णन ने तमिलनाडु में कई जैन मठों की उपस्थिति का भी उल्लेख किया, जो ऐतिहासिक रूप से शिक्षा के केंद्र रहे हैं।

राधाकृष्णन ने आचार्य हंसरत्न सुरिश्वरजी महाराज की प्रशंसा की, जिन्होंने दिखाया कि सच्ची शक्ति धन या पद में नहीं, बल्कि संयम, करुणा और अनुशासन में निहित है। उन्होंने आचार्य जी के “संस्कृति बचाओ, परिवार बचाओ, राष्ट्र बनाओ” अभियान की सराहना की, जो समाज को मूल्य बनाए रखने, परिवार मजबूत करने और राष्ट्र को सशक्त बनाने के लिए प्रेरित करता है।

आचार्य हंसरत्न सुरिश्वरजी महाराज एक सम्मानित जैन साधु हैं, जो अपने आध्यात्मिक अनुशासन और दीर्घकालिक तपस्या के लिए जाने जाते हैं। महापरना उनके 180 दिन के उपवास के औपचारिक समापन का प्रतीक है, जिसे उन्होंने आठवीं बार किया है। यह उनके समर्पण, अनुशासन और जैन धर्म तथा नैतिक मूल्यों के प्रचार के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह आयोजन श्रद्धालुओं और व्यापक समुदाय के लिए विश्वास, आत्मसंयम और प्रेरणा का प्रतीक है।



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