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भारत-वियतनाम ने विज्ञान और तकनीक सहयोग को दी नई गति, जितेंद्र सिंह और वियतनाम मंत्री के बीच अहम बैठक

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केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने नई दिल्ली में वियतनाम के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री वु हाई क्वान के साथ द्विपक्षीय बैठक की। बैठक में दोनों देशों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा, सेमीकंडक्टर, रोबोटिक्स, बायोटेक्नोलॉजी और स्टार्टअप इकोसिस्टम जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत और वियतनाम के बीच लगभग दो हजार वर्षों पुराने सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंध हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री फाम मिन्ह चिन्ह की वर्ष 2024 में भारत यात्रा के बाद दोनों देशों की व्यापक रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती मिली है।

बैठक में स्टार्टअप सहयोग, रिसर्च पार्टनरशिप, तकनीकी नवाचार और संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। दोनों देशों ने विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में नियमित सहयोग जारी रखने और साझा विकास के लिए ठोस पहल करने पर सहमति व्यक्त की।


भारत-वियतनाम रक्षा नीति वार्ता के 15वें संस्करण का हनोई में आयोजन

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भारत-वियतनाम रक्षा नीति वार्ता (डीपीडी) का 15वां संस्करण आज, 10 नवंबर 2025 को हनोई में आयोजित हुआ। इस वार्ता की सह-अध्यक्षता भारत के रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और वियतनाम के राष्ट्रीय रक्षा उपमंत्री वरिष्ठ लेफ्टिनेंट जनरल होआंग ज़ुआन चिएन ने की। दोनों पक्षों ने हाइड्रोग्राफी सहयोग, क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण, संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना अभियानों, बंदरगाह यात्राओं, जहाज दौरों तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और शिपयार्ड उन्नयन जैसे विशिष्ट क्षेत्रों में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया।

दोनों देशों ने साइबर सुरक्षा, वास्तविक समय सूचना आदान-प्रदान, सैन्य चिकित्सा तथा विशेषज्ञों के आदान-प्रदान जैसे नए उभरते क्षेत्रों में सहयोग को और विस्तार देने का निर्णय लिया। इसके साथ ही, दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति पर विचार-विमर्श भी किया।

वार्ता के दौरान, पनडुब्बी खोज, बचाव सहायता और सहयोग के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoA) पर हस्ताक्षर किए गए, जो इस क्षेत्र में आपसी सहयोग के लिए एक ढांचा प्रदान करेगा।

इसके अतिरिक्त, रक्षा उद्योग सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए एक आशय पत्र (Letter of Intent) पर भी हस्ताक्षर किए गए। इसमें तकनीकी हस्तांतरण, उच्च प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में सहयोग, संयुक्त अनुसंधान, संयुक्त उद्यम, रक्षा उत्पादन के लिए उपकरणों की खरीद, विशेषज्ञों का आदान-प्रदान तथा उपकरणों की डिजाइन और निर्माण को प्राथमिकता देने पर बल दिया गया।

भारत के रक्षा उत्पादन विभाग और वियतनाम के रक्षा उद्योग के महा विभाग के बीच चल रहे रक्षा उद्योग सहयोग के कार्यान्वयन व्यवस्था के अंतर्गत, दोनों पक्षों ने दिसंबर 2025 में अगली बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया।

वार्ता के बाद रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने वियतनाम के राष्ट्रीय रक्षा मंत्री जनरल फान वान जियांग से मुलाकात की और डीपीडी से संबंधित प्रमुख निर्णयों की जानकारी दी। डीपीडी का 16वां संस्करण 2026 में भारत में आयोजित किया जाएगा।

रक्षा नीति वार्ता भारत-वियतनाम रक्षा साझेदारी की समीक्षा और उसे दिशा देने का प्रमुख तंत्र है तथा यह भारत-वियतनाम संयुक्त दृष्टि वक्तव्य 2030 के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

वियतनाम, भारत की एक्ट ईस्ट नीति और इंडो-पैसिफिक दृष्टिकोण का एक महत्वपूर्ण साझेदार है। रक्षा सचिव की वियतनाम यात्रा ने दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग को और सुदृढ़ किया है।

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